NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने परमाणु मुद्दे पर अमेरिकी फ़रेब को किया ख़ारिज
जो बाइडेन के लिए यह तय कर पाना मुश्किल होता जा रहा है कि ईरान पर लगे प्रतिबंधों में से कुछ प्रतिबंधों के हटाये जाने को लेकर उन्हें दरअसल क्या करना चाहिए। 
एम. के. भद्रकुमार
02 Mar 2021
ईरान की तरफ़ से इन प्रतिबंधों के हटाये जाने तक अमेरिका के साथ बातचीत का प्रस्ताव खारिज।
ईरान की तरफ़ से इन प्रतिबंधों के हटाये जाने तक अमेरिका के साथ बातचीत का प्रस्ताव खारिज।

तेहरान ने यूरोपियन यूनियन के तीन देशों (ब्रिटेन, जर्मनी और फ़्रांस) की तरफ़ से अमेरिका के साथ अनौपचारिक “राजनयिक संवाद” के लंबित प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। लेकिन, इस बारे में ईरान के वक्तव्य में अपेक्षाकृत एक बारीक फ़र्क़ है। रविवार को तेहरान में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता,सईद खतीबजादेह ने कहा,“अमेरिका और तीन यूरोपीय देशों (जिन्होंने जेसीपीओए पर दस्तख़त किये हुए हैं) की तरफ़ से उठाये गये क़दम और उपाय के सिलसिले में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का मानना है कि समझौते पर अनौपचारिक बैठक के लिए यह वक़्त सही नहीं है। बातचीत का यह प्रस्ताव यूरोपियन यूनियन की विदेश नीति के प्रमुख जोसेफ़ बोरेल ने दिया था।” 

खतीबजादेह ने कहा, “आगे का रास्ता बिल्कुल साफ़ है। अमेरिका को ईरान पर लगाये गये अवैध और एकतरफ़ा प्रतिबंधों को ख़त्म किया ही जाना चाहिए और उसे जेसीपीओए की प्रतिबद्धता की तरफ़ लौट आना चाहिए। इस मसले पर न तो किसी बातचीत की और न ही बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) के) किसी प्रस्ताव की आवश्यकता है। ईरान इन कार्रवाइयों का जवाब कार्रवाई के रूप में ही देगा। जैसे ही उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंध हटा लिये जायेंगे, वह जेसीपीओए के प्रति अपनी वचनबद्धता का पालन करेगा। ईरान अपने ख़िलाफ़ सभी शत्रुतापूर्ण उपायों और व्यवहारों का भी उसी रूप में जवाब देगा।”

सरल शब्दों में कहा जाये तो, यह जो बाइडेन प्रशासन की तरफ़ से उठायी जा रही उनकी खाड़ी नीति में एक ऐसी दूसरी गड़बड़ी हो सकती है, जो अमेरिकी-सऊदी अरब गठबंधन के साथ हुई सात दशकीय साझेदारी में हुई एक सबसे बड़ी गड़बड़ी होगी। बाइडेन प्रशासन को समझने की ज़रूरत है कि इस प्रतिबंध के जारी रहते तेहरान कभी भी अमेरिका के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप पिछले तीन साल से ईरान को डराने की कोशिश करते रहे और आख़िरकार नाकाम रहे। 

दिलचस्प बात यह है कि इन प्रतिबंधों से किसी भी तरह की राहत की पेशकश करने की बजाय,जो बाइडेन ने अपने ख़ुद के घोड़े दौड़ा दिये और इस बात पर ज़ोर देने लगे कि अमेरिका को नहीं, बल्कि ईरान को सबसे पहले जेसीपीओए की तरफ लौटना चाहिए। हालांकि ट्रंप ने 2018 में इन तमाम घटनाक्रमों को प्रेरित किया था और उसी का नतीजा है-मौजूदा गतिरोध। इसलिए बाइडेन को कोई हल्की शुरुआत नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस मामले में उनका दांव पर बहुत कुछ लगा हुआ है। 

इस बीच विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने तीनों यूरोपीय देशों को ईरान मामले में अमेरिका के साथ सद्भावपूर्ण सम्बन्धों को लेकर लामबंद किया है और एक ऐसा संयुक्त वक्तव्य जारी करवाया,जिसमें ईरान को मांगों की एक फ़ेहरिस्त दी गयी है। स्पष्ट है कि ब्लिंकेन ने यह मान लिया था कि तेहरान किसी भी तरह अमेरिका के साथ बातचीत के लिए बेक़रार है। 

इस सच्चाई के बावजूद व्हाइट हाउस ने इज़राइल के साथ भी संपर्क करना शुरू कर दिया है कि इजराइल के इस रुख़ का सूत्र बाइडेन को अपने पूर्ववर्ती के अधिकतम दबाव की रणनीति मिल जाना चाहिए था और उसे मज़बूती देनी चाहिए थी। रिपोर्टों के मुताबिक़ अमेरिका और इज़राइल दोनों देश अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के दायरे में बातचीत करेंगे।परस्पर समन्वय करेंगे और ईरान मसले पर एक - दूसरे का मार्गदर्शन करेंगे। 

इसके अलावा बाइडेन ने पिछले बृहस्पतिवार की रात सीरिया पर बेतुके हवाई हमले करने शुरु कर दिये और इस बात की शेखी बघार दी कि यह कार्रवाई ईरान को चेतावनी देने के लिए की गयी है। इसके अलावा जैसा कि बाइडेन ने कहा, “आप सज़ा से बचा लेने के भाव के साथ काम नहीं कर सकते। सावधान रहें।” हालांकि इस नाज़ुक पल में उन्हें बाहें मरोड़ने के काम से बचना चाहिए था। दिलचस्प है कि बाइडेन की अपनी ही पार्टी ने कभी ट्रंप की इसी तरह के हवाई हमले की कार्रवाई की इसलिए निंदा की थी क्योंकि कांग्रेस की इज़ाजत के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता है। 

सबसे बड़ी बात तो यह कि ब्लिंकेन ने ईरान के जेसीपोओए के अतिरिक्त प्रोटोकोल (जो एक स्वैच्छिक प्रावधान का पहला उदाहरण था) को निलंबित रखने के ईरान के फ़ैसले पर सेंसर लगाने के लिए तीनों यूरोपीय देशों को आइएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स को लेकर पहल करने के लिए प्रेरित किया था। 

अमेरिकी राजनयिक ने बृहस्पतिवार को एक ऐसे दस्तावेज़ को जारी किया था, जिसमें वाशिंगटन की शिकायतों को सूचीबद्ध किया गया था और ईरान को यह आदेश दिया गया था कि वह निरीक्षकों के साथ पूरी तरह सहयोग करे। इस प्रस्तावित सेंसर की क़वायद से यह पता चलता है कि अमेरिका अपना दबाव बढ़ा रहा है। तीनों यूरोपीय देशों का यह प्रस्ताव “आइएईए के निष्कर्षों पर गहरी चिंताओं को रेखांकित करता है” और “ईरान के सहयोग के मामले में बोर्ड के प्रति अपना गहरा सरोकार जताता है।”

वास्तव में, यह मुमकिन है कि इज़राइल एक बार फिर पर्दे के पीछे से चीज़ों को मरोड़ रहा हो और व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, जैक सुलिवन को भी ख़ुफिया रिपोर्टों की तोड़ी-मरोड़ी गयी तस्वीर पेश कर रहा है। इसी तरह बाइडेन भी रिपब्लिकनों,सऊदी और इज़राइल के साथ राजनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए जानबूझकर अपने क़दम पीछे खींच सकते हैं।

किसी भी हालात में दिन गुज़रने के साथ-साथ इस मामले में सुस्ती बढ़ती जा रही है। इज़राइल-सऊदी अरब-संयुक्त अरब अमीरात की धुरी पर भरोसा करें तो अब वे अमेरिका तथा ईरान के बीच होने वाली किसी भी बातचीत की कोशिशों में अड़ंगा डालने की क़वायद करेंगे। जमाल ख़शोगी मामले में सीआइए की रिपोर्ट से अपमानित हुआ रियाद ग़ुस्से से आग बबूला हो रहा है। बाइडेन को कांग्रेस के रुख को भी ध्यान में रखने की ज़रूरत है, जहां आने वाले दिनों और हफ़्तों में कई अहम विधायी कार्य होने हैं। इसकी शुरुआत कोविड-19 राहत पैकेज पर अनुमोदन के साथ होना है। 

इन सबसे ऊपर अमेरिका ने उस रूस के साथ भी तनाव बढ़ा लिया है,जिसकी मदद ईरान के रुख़ को नरम करने में अहम साबित हो सकती है। कोई शक नहीं कि किसी को कुछ भी भनक नहीं मिल पा रही है। 

दिनों-दिन उत्तेजना बढ़ रही है। वियना में अंतर्राष्ट्रीय संगठन में रूस के स्थायी प्रतिनिधि ने मिखाइल उल्यानोव ने रविवार को एक ट्वीट में कहा,“आइएईए के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स का सत्र 1 मार्च से शुरू हो रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जीसीपीओए की पूर्ण वापसी को लेकर आगे के घटनाक्रम को तय किया जा सकता है। सभी गवर्नर को इस बात का ख्याल रखना है और इसके प्रति अपनी जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए काम करना है।”

ईरान ने एक ख़त लिख कर आइएईए को चेतावनी दी है कि अगर वियना में इस प्रस्ताव को मंज़ूर किया गया, तो वह संयुक्त राष्ट्र निगरानी दल के साथ किये जा रहे अपने सहयोग को रोक सकता है। देर से ही सही, बाइडेन की टीम को अपनी शेख़ी भरी बयानबाज़ी का अहसास हुआ है और उसने परिस्थिति की गंभीरता को भांप लिया है। 

तेहरान से बातचीत रद्द करने की ख़बर ज्योंहि आई, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने रविवार को रायटर को बताया, “हम सभी ईरान की प्रतिक्रिया से निराश हैं, हम जेसीपीओए की प्रतिबद्धताओं के साथ द्विपक्षीय हित साधने के लिए राजनयिक स्तर पर सार्थक बातचीत के लिए अब भी तैयार हैं।”

यह मेल-मिलाप वाले शब्द तो है, लेकिन यह तय कर पाना मुश्किल है कि अपनी साख को कोई गंभीर नुकसान पहुंचाये बिना अमेरिका और तीनों यूरोपीय देश आइएईए सेंसर लगाने की अपनी धमकियों से किस तरह पीछे लौट पाते हैं। अब तो बाइडेन के लिए भी वह सब कुछ कर पाना और मुश्किल होने जा रहा है, जो कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को हटाने के लिए स्वाभाविक रूप से करना चाहिए था।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करे

Iran Pushes Back at US Overreach on Nuclear Issue

US
IRAN
Council of Nuclear Safety
Iran US Tension
Iran Nuclear Deal

Related Stories

ईरानी नागरिक एक बार फिर सड़कों पर, आम ज़रूरत की वस्तुओं के दामों में अचानक 300% की वृद्धि

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

असद ने फिर सीरिया के ईरान से रिश्तों की नई शुरुआत की

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई

बाइडेन ने फैलाए यूक्रेन की सीमा की ओर अपने पंख


बाकी खबरें

  • लाल बहादुर सिंह
    सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 
    26 Mar 2022
    कारपोरेटपरस्त कृषि-सुधार की जारी सरकारी मुहिम का आईना है उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन इसके सदस्य घनवट ने स्वयं ही रिपोर्ट को…
  • भरत डोगरा
    जब तक भारत समावेशी रास्ता नहीं अपनाएगा तब तक आर्थिक रिकवरी एक मिथक बनी रहेगी
    26 Mar 2022
    यदि सरकार गरीब समर्थक आर्थिक एजेंड़े को लागू करने में विफल रहती है, तो विपक्ष को गरीब समर्थक एजेंडे के प्रस्ताव को तैयार करने में एकजुट हो जाना चाहिए। क्योंकि असमानता भारत की अर्थव्यवस्था की तरक्की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,660 नए मामले, संशोधित आंकड़ों के अनुसार 4,100 मरीज़ों की मौत
    26 Mar 2022
    बीते दिन कोरोना से 4,100 मरीज़ों की मौत के मामले सामने आए हैं | जिनमें से महाराष्ट्र में 4,005 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा गया है, और केरल में 79 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा…
  • अफ़ज़ल इमाम
    सामाजिक न्याय का नारा तैयार करेगा नया विकल्प !
    26 Mar 2022
    सामाजिक न्याय के मुद्दे को नए सिरे से और पूरी शिद्दत के साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए विपक्षी पार्टियों के भीतर चिंतन भी शुरू हो गया है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीर फाइल्स हेट प्रोजेक्ट: लोगों को कट्टरपंथी बनाने वाला शो?
    26 Mar 2022
    फिल्म द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग से पहले और बाद में मुस्लिम विरोधी नफरत पूरे देश में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई है और उनके बहिष्कार, हेट स्पीच, नारे के रूप में सबसे अधिक दिखाई देती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License