NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
यूएस की समझौते में वापसी के बाद प्रतिबंधों के कारण हुए नुकसान की भरपाई की मांंग करेगा ईरान
रविवार को आईएईए ने घोषणा की कि उसने ईरान के साथ एक समझौता किया है जो इसे तीन महीने तक ईरान की परमाणु गतिविधियों की निगरानी और जांच जारी रखने की अनुमति दे सकता है।
पीपल्स डिस्पैच
22 Feb 2021
यूएस की समझौते में वापसी के बाद प्रतिबंधों के कारण हुए नुकसान की भरपाई की मांंग करेगा ईरान

रविवार 21 फरवरी को प्रेसटीवी से बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि साल 2018 में परमाणु समझौते से एकतरफा तरीके से हटने के बाद से अमेरिका द्वारा लगाए गए 1600 से अधिक प्रतिबंधों के कारण ईरान को 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि जब भी दोनों देशों के बीच चर्चा होती है कि ईरान इस मुद्दे को उठाएगा और मुआवजे की मांग करेगा।

हालांकि जरीफ ने यह स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच वार्ता तभी हो सकती है जब अमेरिका अपनी तरफ से लगाए गए अपने सभी प्रतिबंधों को वापस ले और ज्वाइंट कम्प्रीहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) या ईरान परमाणु समझौते में शामिल हो।

जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि जो बाइडन और ट्रम्प प्रशासन के बीच शायद ही कोई मूलभूत अंतर है। जरीफ ने इस समझौते के तहत अपनी भूमिका निभाने और अमेरिका द्वारा अपनाई गई नीतियों से इसे बचाने के लिए उपाय करने के लिए जेसीपीओए के यूरोपीय हस्ताक्षरकर्ताओं ई-3 अर्थात यूके, फ्रांस और जर्मनी की विफलता की आलोचना की। जरीफ ने कहा कि ऐसा लगता है कि यूरोप, "अमेरिका के इशारे पर चलता है और उसकी दया पर निर्भर है।" उन्होंने कहा कि ईरान इन देशों से उम्मीद करता है कि वह कम से कम अब अमेरिका को जेसीपीओए में शामिल होने के लिए राजी कराए और अपनी गरिमा को बचाए।

इस बीच, ईरान और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने रविवार को एक अस्थायी समझौता किया है जो आईएईए निरीक्षकों को अगले तीन महीनों तक ईरान की परमाणु गतिविधियों के "आवश्यक" जांच पड़ताल करने और निगरानी जारी रखने की अनुमति देगा। ईरान से लौटने के बाद वियना में आईएईए के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि इसने तनावपूर्ण स्थिति को शांत किया।

ईरान ने घोषणा की थी कि जेसीपीओए में यूएस की वापसी न होने पर और अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों को वापस न लेने पर वह 21 फरवरी से 2015 के परमाणु समझौते के एक हिस्से आईएईए के अतिरिक्त प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन को निलंबित कर देगा और अपने परमाणु स्थलों तक आईएईए निरीक्षकों आने की मंजूरी नहीं देगा।

रविवार को घोषित समझौते के अनुसार यदि अमेरिका ने मंगलवार 23 फरवरी तक अपने प्रतिबंधों को समाप्त नहीं किया तो आईएईए निरीक्षकों को ईरानी परमाणु स्थलों का दौरा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, ईरान अगले तीन महीनों तक इन साइटों में गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करेगा जिसे अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों को वापस लेने और समझौते में शामिल होने के बाद आईएईए को सौंपा जा सकता है।

IRAN
US
Iran-US
Joint Comprehensive Plan of Action
JCPOA

Related Stories

ईरानी नागरिक एक बार फिर सड़कों पर, आम ज़रूरत की वस्तुओं के दामों में अचानक 300% की वृद्धि

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

असद ने फिर सीरिया के ईरान से रिश्तों की नई शुरुआत की

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

यमन में ईरान समर्थित हूती विजेता

अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License