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भारत
राजनीति
पक्ष-विपक्ष: क्या हेमंत सोरेन पर लगा बलात्कार का आरोप ‘ऑपरेशन कमल’ का हिस्सा है?
झारखंड हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास और दूसरे नेताओं पर झारखंड में सरकार गिराने की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया है।
सोनिया यादव
21 Dec 2020
हेमंत सोरेन

झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार अपना एक साल का कार्यकाल पूरा कर रही है तो वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब तक के अपने सियासी सफ़र की सबसे बड़ी मुश्किल में फंसते नज़र आ रहे हैं। खुद को बॉलीवुड की स्ट्रगलर अभिनेत्री बताने वाली एक युवती ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि हेमंत सोरेन ने उसके साथ बलात्कार किया था।

इस मामले के सामने आने के बाद बीजेपी ने सीएम सोरेन से इस्तीफ़े की मांग की है। तो वहीं सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने इसे सरकार गिराने की साजिश करार देते हुए कहा है कि बीजेपी 'डर्टी पॉलिटिक्स' कह रही है।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर मुंबई की एक युवती, जिसे मॉडल और स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस बताया जा रहा है, उसका 8 दिसंबर, 2020 को मुंबई पुलिस को लिखा एक पत्र वायरल हो रहा है। इस पत्र में युवती ने बांद्रा पुलिस से हेमंत सोरेन मामले की शिकायत करते हुए इसकी फिर से जांच कराने की मांग की है।

फिर से जांच इसलिए क्योंकि ये मामला सालों पुराना है। जिसे एक बार बंद किया जा चुका है। युवती के अनुसार हेमंत सोरेन ने साल 2013 के 5 सितंबर को मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में उसके साथ बलात्कार किया था। इस दौरान उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी।

इस कथित घटना के 45 दिन बाद युवती ने इसकी शिकायत मुंबई के एक मेट्रोपोलिटन कोर्ट में की थी, लेकिन इसके 9 दिन बाद ही उसने अपनी शिकायत वापस ले ली और यह मामला बंद हो गया। हेमंत सोरेन उस दौरान भी झारखंड के मुख्यमंत्री थे। अब उस युवती ने इस मामले में फिर से जांच कराने की मांग की है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पत्र को आधार बनाकर राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र के डीजीपी से जवाब तलब किया है। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस संबंध में ट्वीट के जरिए जानकारी दी है।

मुंबई पुलिस के डीसी (जोन-9) अभिषेक त्रिमुखे ने शिकायती मेल की पुष्टि करते हुए मीडिया से कहा है कि पुलिस इसकी जांच कर रही है और हम बातों को वेरिफाई कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता युवती गायब!

बीजेपी ने जिस युवती के पत्र के आधार पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग की है, उस युवती ने सार्वजनिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक युवती का फोन नंबर बंद है और वे किसी मैसेज या मेल का जवाब नहीं दे रहीं।

मुंबई पुलिस को भी युवती ने सिर्फ एक मेल किया था, जिसके बाद उसके मेल की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। अभी तक यह बात सामने नहीं आई कि वे शिकायत के बाद मुंबई पुलिस से स्वयं मिली है या नहीं।

मामले पर सियासत जारी

बीजेपी ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा है कि ये देश के राजनीतिक इतिहास की पहली घटना है, जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री पर बलात्कार के आरोप लगे हों।

पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने दुमका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की।

उन्होंने कहा, "मुंबई की एक युवती ने मुख्यमंत्री पर बलात्कार का आरोप लगाया है। उसने यह भी कहा है कि हाल ही में उसका एक्सीडेंट हुआ और उसे शक है कि उसे जान मारने की कोशिश की जा रही है। उसने इसकी शिकायत पुलिस से की है। उसकी चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। ऐसे में नैतिकता का तकाजा यह है कि हेमंत सोरेन तत्काल इस्तीफा दें और जनता को सच बताएं। वे स्वयं इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करें और महाराष्ट्र सरकार इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश करे। ताकि, दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ सके।"

बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा, "यह गंभीर आरोप है। अगर इसकी निष्पक्ष जांच नहीं करायी गई, तो हर रसूखदार आदमी अपनी हैसियत से लोगों को प्रभावित करता रहेगा और फिर प्रलोभन या दबाव देकर से मामलों मे समझौता करा लेगा। ऐसे में तो देश में अपराध रुकेगा ही नहीं।"

पूरा प्रकरण बेसलेस है!

इस पूरे प्रकरण को झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बेसलेस यानी आधारहीन बताया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि बीजेपी डर्टी पालिटिक्स कर रही है। जनता इसका जवाब देगी।

उन्होंने कहा, “क्या शिबू सोरेन का बेटा होना गुनाह है, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर इस तरह के गंदे आरोप लगाए जा रहे हैं। क्या यह नैतिक है कि एक बंद मामले को उखाड़ कर किसी की छवि खराब की जाए।”

सुप्रियो भट्टाचार्य ने मीडिया से कहा कि यह सीधे तौर पर कैरेक्टर एसिसनेशन की कोशिश है और यह सही बात नहीं है। इसके खिलाफ लोअर कोर्ट (रांची सिविल कोर्ट) में पहले से ही मानहानि का मामला चल रहा है।

बीजेपी संवैधानिक संस्थाओं का भी दुरुपयोग कर रही है!

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, “मुख्यमंत्री जी ने बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ इस मामले में अपनी मानहानि का मामला दर्ज कराया था। कोर्ट उसकी सुनवाई कर रहा है। अभी उसपर कोई निर्णय आता, इससे पहले ही बीजेपी के नेताओं ने फिर से वही राग अलापना शुरू कर दिया। ये लोग (बीजेपी) साल भर में इतना घबरा गए हैं कि किसी भी स्तर पर जाकर कुछ भी कर सकते हैं। सात साल पुराना मामला, जिसका कहीं कोई एवीडेंस (प्रमाण) नहीं है। उसमें केवल एक चिट्ठी के आधार पर महिला आयोग का संज्ञान लेना यह साबित करता है कि बीजेपी संवैधानिक संस्थाओं का भी दुरुपयोग कर रही है। इससे उनकी मंशा पता चलती है।”

हाथरस मामले का उल्लेख करते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, “सीबीआई ने चार्जशीट दायर की, उस मामले में यूपी के डीजीपी ने कहा था कि रेप नहीं हुआ है। महिला आयोग ने उस मामले में क्यों नहीं संज्ञान लिया। ऐसी कई घटनाएँ हो रही हैं जिन पर महिला आयोग ने कोई नोटिस नहीं लिया। लेकिन, एक ऐसा मामला जो कई साल पहले बंद हो गया और जिसका कोई आधार नहीं है, उसमें महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान ले लिया। जनता यह सब समझ रही है। इसका जवाब भी देगी।”

सरकार गिराने की साज़िश का आरोप

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सोरेन पर लगे आरोपों की आड़ में बीजेपी के नेताओं पर सरकार गिराने की साजिश रचने के आरोप भी लग रहे हैं। रांची की एक सामाजिक कार्यकर्ता जहांआरा ने झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाने वाली युवती के कॉल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट की जांच सीआईडी से कराने की मांग की है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि बीजेपी झारखंड में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई हेमंत सोरेन सरकार को गिराने की साजिश रच रही है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और राज्य सरकार को प्रतिवादी बनाया है।

आपकों बता दें कि झारखंड भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने दुमका में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान दावा किया था कि राज्य सरकार दो से तीन महीने में गिर जाएगी। ऐसे समय में मुख्यमंत्री सोरेन के पक्ष में खड़े लोग इन आरोपों को बीजेपी के ऑपरेशन कमल का हिस्सा मान रहे हैं। साथ ही बीजेपी के इस्तीफ़े की मांग को भी ‘सलेक्टीव अप्रोच’ बता रहे हैं, क्योंकि इससे पहले बीजेपी के नेता और मंत्रियों पर भी गंभीर आरोप लग चुके हैं लेकिन तब बीजेपी ने इस्तीफ़ा मांगने में इतनी सक्रियता कभी नहीं दिखाई। 

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