NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
क्या ताजमहल भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है?
कहा जा सकता है कि लोगों की मिली-जुली अभिव्यक्तियों की समग्रता ही भारतीय संस्कृति है; यह समावेशी है और इसमें सामाजिक जीवन के सभी पहलुओं का समन्वय है
राम पुनियानी
12 May 2022
 Taj Mahal

संस्कृति हमारे जीवन का एक आकर्षक पहलू है। इस संस्कृति को समझने के लिए सामाजिक जीवन की छानबीन करनी चाहिए और जीवन के कई पहलुओं के बीच खाने की आदतों, कपड़े, संगीत, भाषा, साहित्य, वास्तुकला और धर्म जैसे पहलुओं पर ग़ौर करना चाहिए। हमारे जैसी मिली-जुली विविधता वाले देश का यह एक ऐसी बनावट है, जो हमें हमारी संस्कृति की जटिलता की समझ देती है।

भारत के अलग-अलग धर्मों के लोगों के योगदान वाली संस्कृतियों के पहलुओं के बीच ज़बरदस्त आपसी रिश्ता है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि भारतीय संस्कृति है क्या  ? कहा जा सकता है कि लोगों की मिली-जुली अभिव्यक्तियों की समग्रता ही भारतीय संस्कृति है। यह समावेशी है और इसमें सामाजिक जीवन के सभी पहलुओं का संयोजन है। भारतीय संस्कृति को लेकर यह नज़रिया भारतीय राष्ट्रवादियों से बना है। और अब तक ज़्यादतर समय मिश्रित संस्कृति में इसी भरोसे ने सत्ता में बैठे लोगों के कार्यों का मार्गदर्शन किया है।

पिछले कुछ दशकों से हिंदू राष्ट्रवादियों के उदय के साथ, ख़ासकर पिछले तीन सालों से कहीं ज़्यादा हमारी संस्कृति की इस समझ को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। ऐसी तमाम चीज़ें, जो ग़ैर-ब्राह्मणवादी हैं, उन्हें दरकिनार किया जा रहा है और कमज़ोर किया जा रहा है। इसकी एक मिसाल उस समय सामने आयी, जब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने आने वाले गणमान्य व्यक्तियों को ताजमहल की प्रतिकृति भेंट करने के चलन की आलोचना की थी (16 जून, 2017)। उनके हिसाब से ताजमहल भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, योगी ने नरेंद्र मोदी के शुरू किये गये पवित्र ग्रंथ गीता को उपहार में देने के इस चलन को बरक़रार रखा।

ताजमहल यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल है, जिसे संरक्षण दिया जाना है। इसे दुनिया के सात अजूबों में से भी एक माना जाता है। दुनिया भर के सैलानियों का आकर्षण होने के अलावा, यह भारत की महान स्थापत्य उपलब्धियों का भी प्रतीक है। इसे बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रियतम पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। इस महान स्मारक को लेकर एक और प्रचलित विवाद रहा है। इस लेकर यह दुष्प्रचार किया जाता रहा है कि यह एक शिव मंदिर है, जिसे मक़बरे में बदल दिया गया है। यह पूरी तरह ग़लत है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड और दस्तावेज़ कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।

शाहजहां की बादशाहनामा पूरी तरह स्पष्ट कर देती है कि इस इमारत को शाहजहां ने बनायी थी। एक यूरोपीय यात्री पीटर मुंडी लिखते हैं कि बादशाह शाहजहां अपनी प्रिय पत्नी की मौत के चलते गहरे शोक में हैं और उनकी याद में एक भव्य मक़बरे का निर्माण करा रहे हैं। उसी समय भारत आने वाले एक फ़्रांसीसी जौहरी टैवर्नियर इस बात की पुष्टि करते हैं। शाहजहां की दैनिक बही-खाते में संगमरमर पर ख़र्च हुए पैसे और श्रमिकों को दी गयी मज़दूरी आदि जैसे ख़र्चों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। शिव मंदिर (तेजो महालय) होने की इस भ्रांति का एकलौता आधार वह उल्लेख है कि इस ज़मीन को राजा जयसिंह से उन्हें मुआवज़ा चुकाकर ख़रीदा गया था। इस पर भी ग़ौर किया जाना चाहिए कि जयसिंह, जिनका ख़्याल रखते हुए इसे शैव मंदिर होने की बात की जाती है, , दरअस्ल एक वैष्णव व्यक्ति थे, और यह संभव नहीं है कि कोई वैष्णव राजा किसी शैव मंदिर का निर्माण करे।

मज़े की बात तो यह है कि पहले तो इसे शिव मंदिर माना जाता है और अब यह दावा किया जा रहा है कि यह भारतीय संस्कृति का हिस्सा ही नहीं है ? इस सवाल के साथ एक सवाल यह भी उठता है कि गीता को इतनी प्रधानता क्यों दी जा रही है ? याद आता है कि पहले कई बार हमारे नेता आने वाले मेहमानों को गांधी की आत्मकथा- 'एक्सपेरिएंस विद ट्रूथ' उपहार में देते थे। गीता को गुरु ग्रंथ साहिब, कबीर वाणी, और बसवन्ना, नारायण गुरु आदि की लिखी पुस्तक आदि जैसे हमारे कई पवित्र ग्रंथों ग्रंथों के बीच प्रतिनिधि ग्रंथ के रूप में पेश किया जा रहा है। इसका जवाब हमें बाबासाहेब अम्बेडकर के अलावा और किसी से नहीं मिल सकता। अम्बेडकर बताते हैं कि गीता संक्षेप में वह मनुस्मृति ही है, जिसके मूल में ब्राह्मणवाद है। अम्बेडकर का केंद्रीय मिशन मनुस्मृति के मूल्यों के ख़िलाफ़ लड़ना था। दूसरा प्रतीक, जिसका हाल ही में प्रचार किया जा रहा है, वह है- पवित्र गाय। ये दोनों ब्राह्मणवाद के प्रतीक हैं, क्योंकि मौजूदा सत्तारूढ़ व्यवस्था हिंदुत्व और हिंदू धर्म की आड़ में ब्राह्मणवाद को बढ़ावा दे रही है।

जहां तक भारतीय संस्कृति को लेकर उस भारतीय राष्ट्रवादी विचारधारा का सवाल है,जिसे स्वतंत्रता आंदोलन से समझा जा सकता है,वह सभी धर्मों, क्षेत्रों और भाषाओं के प्रतीकों को भारतीय मानती है। भारतीय राष्ट्रवादी विचारधारा के मुताबिक़ बौद्ध, जैन, ईसाई, मुस्लिम और सिख जैसे तमाम लोगों का योगदान इस भारतीय विरासत का हिस्सा है। यह हमारे रोज़-रोज़ के जीवन में परिलक्षित होता है। इस तरह, भारत उन जगहों में से एक है, जहां तमाम धर्म बिना किसी भेदभाव के फले-फूले हैं। लोग सदियों से इन धर्मों का पालन करते आ रहे हैं। इनमें से कुछ यहीं पैदा हुए थे और इनमें से कुछ बाहर से आये और संतों, सूफ़ियों, मिशनरियों आदि की शिक्षाओं जैसी विभिन्न विभिन्न क्रियाविधियों से फैलते गये। इस्लाम ख़ास तौर पर सूफ़ी संतों के ज़रिये फैला,वहीं ईसाई धर्म शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुदान के लिए काम करने वाले मिशनरियों के माध्यम से फैल गया। भारतीय संस्कृति के तमाम पहलुओं में विभिन्न धर्मों के लोगों का भरपूर योगदान है।

हमारे भोजन की आदतों में पश्चिम एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों से आने वाले कई चलनों का योगदान है, हमारे कपड़े और हमारी वास्तुकला में विभिन्न धर्मों और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के लोगों के आने और इस संस्कृति के विकसित कररने में योगदान की ज़बरदस्त छाप है। जहां भक्ति और सूफ़ी आंदोलन इस अंत:क्रिया का उच्चतम बिंदु हैं, वहीं आज कोई भी लोगों के बीच प्रचलित विभिन्न अनुष्ठानों और प्रथाओं में इन धर्मावलंबियों के योगदान को समझ सकता है। हर किसी को पता है कि मुसलमानों के बीच भी भक्ति संतों के अनुयायी थे, जबकि कई हिंदू सूफ़ी संतों की दरगाहों पर जाते थे। संत गुरु नानक ने यहां प्रचलित दोनों ही मुख्य धार्मिक परंपराओं से काफ़ी कुछ लिया था।

महात्मा गांधी भारतीय संस्कृति और भारतीय इतिहास के सबसे अच्छे व्याख्याकार थे। उन्होंने विभिन्न धर्मों के बीच किसी तरह का विरोध नहीं पाया था। अपनी पुस्तक हिंद स्वराज में वे लिखते हैं, “हिंदू मुस्लिम शासकों के अधीन और मुसलमान हिंदू शासकों के अधीन फले-फूले। हर पक्ष ने माना कि आपसी लड़ाई आत्मघाती है, और यह कि कोई भी पक्ष हथियारों की ताक़त पर अपने धर्म का परित्याग नहीं करेगा। यही वजह है कि दोनों पक्षों ने शांति से रहने का फ़ैसला किया। अंग्रेज़ों के आने के साथ ही ये झगड़े फिर से शुरू हो गये ... क्या हमें यह याद नहीं रखना चाहिए कि बहुत से हिंदू और मुसलमानों के पूर्वज एक ही हैं और उनकी रगों में एक ही ख़ून बहता है ?"

इस हिसाब से अलग-अलग धर्मों के लोगों के योगदान से बनी इस संस्कृति के विभिन्न पहलू भारतीय हो जाते हैं, इसके विपरीत मौजूदा व्यवस्था के लिए महज़ ब्राह्मणवादी प्रतीक ही इस राष्ट्र की नुमाइंदगी करते हैं, और यही वह बात है,जिस पर योगी ज़ोर देने की कोशिश कर रहे हैं। 

(व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। डॉ पुनियानी एक मानवाधिकार रक्षक और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे (IIT बॉम्बे) में पूर्व प्रोफ़ेसर हैं।)

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Is Taj Mahal not a Part of Indian Culture?

Communalism
History
taj mahal
History of Taj Mahal

Related Stories

सफ़दर: आज है 'हल्ला बोल' को पूरा करने का दिन

सांप्रदायिक घटनाओं में हालिया उछाल के पीछे कौन?

अति राष्ट्रवाद के भेष में सांप्रदायिकता का बहरूपिया

क्या तमिलनाडु में ‘मंदिरों की मुक्ति’ का अभियान भ्रामक है?

ज्ञानवापी मस्जिद : अनजाने इतिहास में छलांग लगा कर तक़रार पैदा करने की एक और कोशिश

कलाविद् कपिला वात्स्यायन का निधन

अयोध्या केस को गलत तरीके से हिंदू-मुस्लिम विवाद के तौर पर पेश किया गया: हिलाल अहमद

अविनाश पाटिल के साथ धर्म, अंधविश्वास और सनातन संस्था पर बातचीत

बंगाली संस्कृति से नहीं जुड़ा है ‘जय श्री राम’ का नारा : अमर्त्य सेन

चाँदनी चौक : अमनपसंद अवाम ने सांप्रदायिक तत्वों के मंसूबे नाकाम किए


बाकी खबरें

  • muzaffarnagar mahapanchayat
    तारिक़ अनवर
    मुज़फ्फ़रनगर की किसान महापंचायत उत्तर प्रदेश चुनाव में बन सकती है भाजपा के लिए मुसीबत
    08 Sep 2021
    जाट-मुस्लिम एकता एवं आक्रामक तेवर अपनाए विपक्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की संभावनाओं को धूमिल कर सकते हैं।
  • आज का कार्टून
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: माफ़ कीजिए आप अफ़ग़ानिस्तान में हैं!
    08 Sep 2021
    अफ़ग़ानिस्तान का घटनाक्रम निश्चित ही महत्वपूर्ण है, लेकिन जिस तरह से हमारे न्यूज़ चैनल दिन-दिन भर उसकी ख़बरें दिखा रहे हैं, डिबेट कर रहे हैं, उसे देखकर भ्रम होता है कि हम भारत में हैं या…
  • report
    दित्सा भट्टाचार्य
    ग्रामीण इलाकों में सिर्फ़ 8 फ़ीसदी बच्चे ही नियमित ढंग से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं: अध्ययन
    08 Sep 2021
    अध्ययन से पता चलता है कि दूसरे सामाजिक वर्गों की तुलना में, यहां तक कि वंचित तबकों में भी दलित और आदिवासी परिवारों की स्थिति ज़्यादा खराब है।
  • तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में नई सरकार के गठन की घोषणा की, मुल्ला अखुंद प्रधानमंत्री नियुक्त
    पीपल्स डिस्पैच
    तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में नई सरकार के गठन की घोषणा की, मुल्ला अखुंद प्रधानमंत्री नियुक्त
    08 Sep 2021
    तालिबान ने मंगलवार 7 सितंबर को नई सरकार के गठन की घोषणा की। इस सरकार में प्रधानमंत्री के रूप में मुल्ला हसन अखुंद और उपप्रधानमंत्री के रुप में मुल्ला गनी बरादर और मावलवी हन्नाफी की नियुक्ति की गई।
  • एसकेएम
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसानों का करनाल लघु सचिवालय घेराव दूसरे दिन भी जारी
    08 Sep 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है, "किसान दृढ़ संकल्प के साथ खड़े हैं, और सरकार हत्या करके बच नहीं सकती है। हम विरोध के पीछे मजबूती से खड़े हैं और हरियाणा सरकार के कार्यों की निंदा करते हैं। किसान सीएम…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License