NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या भारत में कोयले की वाकई किल्लत है या कोई और बात है?
भारत के अधिकतर थर्मल पावर प्लांट में इस्तेमाल होने वाला कोयला महज 4 दिन के लिए बचा है। इस ख़बर के पीछे की असली मंशा क्या है?
अजय कुमार
08 Oct 2021
coal
Image courtesy : NDTV

भारत की तकरीबन 60 से 70 फ़ीसदी बिजली की आपूर्ति कोयले से होती है। अगर कोयले की कमी हुई तो बिजली की कमी शुरू हो जाएगी। बिजली की कमी हुई तो घर की बत्ती गुल हो जाएगी। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह का कहना है कि देश के आधे से ज्यादा थर्मल पावर प्लांट में महज 3 दिन का कोयले का स्टॉक बचा है। कोयले की यह किल्लत सामान्य दिनों जैसी नहीं है।

सरकारी मानकों के मुताबिक हर थर्मल पावर प्लांट में कोयले का तकरीबन 15 दिन का स्टॉक होना चाहिए। इस लिहाज से देखा जाए तो स्थिति बहुत गंभीर दिख रही है।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिरकार कोयले की कमी कैसे हो गई? तो अधिकतर मीडिया के जरिए बताए जा रहे कारण कुछ इस तरह के हैं - कोरोना की भयावहता कम हो रही है। अर्थव्यवस्था खुल रही है। रोजाना के कामकाज को गति मिलनी शुरू हुई है। इसलिए पहले के मुकाबले ऊर्जा खपत ज्यादा हो रही है। इसी वजह से कोयले के स्टॉक में कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कीमत में बढ़ोतरी हुई है इसलिए भारत कोयले की कमी से जूझ रहा है। अप्रैल से लेकर जून के महीने में थर्मल पावर प्लांट में कोयले का कम स्टॉक रखा गया। बारिश की वजह से कोयले का खनन नहीं हो पा रहा था। इसलिए उस समय की कमी अब साफ साफ दिख रही है।

यह सब कारण जायज लगते हैं। लेकिन इसके अलावा कुछ और तस्वीर भी है जिसे साफ-साफ नहीं रखा जा रहा है। उन तस्वीरों को मंत्री जी के बयान के साथ रखने पर कोयले की कमी को लेकर बड़े ही घालमेल वाली स्थिति पैदा हो जाती है।

सबसे पहली बात यह कोई पहला वाकया नहीं है कि थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कमी की खबर आ रही है। इससे पहले भी कोयले की कमी को लेकर खबरें आ चुके हैं। साल 2014 में जब मोदी सरकार चुनकर आई थी तभी जुलाई के महीने में यह खबर आई थी कि देश के 100 में से 44 प्लांटों में महज 7 दिन का कोयला बचा है। 27 प्लांटों में महज 3 दिन का कोयला बचा है। उस समय एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी ने छानबीन कर पता लगाया था कि ऐसा नहीं है। थर्मल पावर प्लांट में कोयले का जितना स्टॉक होना चाहिए, उससे ज्यादा स्टॉक है। उन्हीं के प्रोग्राम में न्यूज़क्लिक के वरिष्ठ संपादक प्रबीर पुरकायस्था ने बताया था कि सरकार कोयले का जितना आकलन बता रही है उससे ज्यादा कोयला मौजूद है। इस तरह से हकीकत के आंकड़े सरकार के आंकड़ों से बिल्कुल अलग हालत बयान कर रहे थे।

इसी साल 4 अक्टूबर की बात है कि 16 थर्मल पावर प्लांट में एक भी दिन का कोयले का स्टॉक नहीं बचा। 45 थर्मल पावर प्लांट में मुश्किल से 2 दिन के कोयले का स्टॉक बचा। इन सभी तथ्यों को जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के बयान के साथ जोड़कर पढ़ा जाता है तो केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह का बयान बहुत अधिक चौंकाने वाला नहीं लगता। कोयले की कमी से जुड़े अखबार में छपे हेडिंग उतने डरावने नहीं लगते जितने डरावने दर्शाने के लिए उन्हें लिखा गया है।

इसे भी पढ़े : क्यों 'कोयला बेचने' का मतलब देश बेचने की तरह है?

कोयले के क्षेत्र में बड़े लंबे समय से काम करते आ रहे जाने-माने कार्यकर्ता सुदीप श्रीवास्तव ने ट्विटर पर बड़े विस्तृत तरीके से कोयले की कमी से जुड़ी इस ख़बर पर अपनी राय रखी है। सुदीप श्रीवास्तव लिखते हैं कि मेरे प्यारे ऊर्जा और पर्यावरण पत्रकारों सरकार द्वारा फेंके गए इस जाल में मत फंसिए कि थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कमी हो गई है। सरकार नैरेटिव सेट करना चाहती है कि कोयले की कमी हो गई है। इस नैरेटिव के सहारे सरकार अगले सत्र में कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन और विकास) अधिनियम, 1957 ( Coal Bearing Areas( Aquisition and Development) एक्ट में संशोधन कर सकती है और प्राइवेट कोल माइनर्स के लिए रास्ता बना सकती है।

सुदीप श्रीवास्तव आगे बताते हैं कि भारत में बिजली की मांग 2 लाख मेगावाट ( 200 गीगा वाट) से अधिक की नहीं होती। यह मांग भी साल भर नहीं होती। बल्कि साल भर में कुछ दिनों में ही भारत में बिजली की खपत 2 लाख मेगा वाट के करीब पहुंचती है। रात में बिजली की खपत सबसे अधिक होती है। रात को जोड़ते हुए साल भर के समय के भीतर देखा जाए तो प्रतिदिन बिजली की मांग 1.50 लाख मेगा वाट के आसपास रहती है।

तकरीबन 90 हजार मेगा वाट बिजली का उत्पादन सोलर और हाइड्रो पावर प्लांट से होता है। थोड़ा बहुत न्यूक्लियर पावर प्लांट से भी उत्पादन होता है। इन सभी को बाहर निकाल कर केवल थर्मल पावर प्लांट से बिजली उत्पादन का हिसाब किताब लगाया जाए तो तकरीबन 1 लाख मेगा वाट के आसपास बैठता है।

इसे भी पढ़े :कोयला नीलामी: सभी 42 कंपनियां की तरफ़ से मानदंडों का उल्लंघन, उचित परीक्षण की ज़रूरत

इतने बिजली के उत्पादन के लिए साल भर में 500 मिलियन टन कोयले की उत्पादन की जरूरत होती है। कोल इंडिया लिमिटेड साल भर में 600 मिलियन कोयले का उत्खनन करता है। इसके अलावा कई थर्मल पावर प्लांट ने अपने प्लांट में कोयले का इस्तेमाल करने के लिए कोयले का ब्लॉक खरीद रखा है। इसको भी जोड़ दिया जाए तो भारत में साल 2020-21 में 718 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ। अगर कोयले के उत्पादन और बिजली के उत्पादन के बीच इस तरह का तालमेल है तो कैसे कहा जाए कि भारत में वाकई कोयले की किल्लत है?

भारत के पास 46 गीगा वाट हाइडल पावर कैपेसिटी है। यह उस देश में है जहां पर इस साल मानसून में अधिक बारिश हुई है। 44 गीगा वाट सोलर पावर और 39 गीगा वाट विंड पावर की कैपेसिटी है। इन तीनों को मिला दिया जाए तो यह 129 गीगावॉट हो जाता है। 200 गीगा वाट बिजली के मांग वाले देश में 129 गीगा वाट बिजली बिना कोयले के पैदा की जा सकती है फिर भी कोयले पर निर्भरता है। कोयले की कमी से बिजली की कमी की आशंका से डराया जा रहा है। आखिरकार यह किसके मुनाफे के लिए किया जा रहा है?

सरकार के अपने आंकड़े कहते हैं कि अप्रैल से सितंबर 2021 के बीच 315 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ। इसी अवधि में साल 2020 में 282 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ था। यानी कोयले के उत्पादन में 12 फ़ीसदी की बढ़ोतरी है। अगर यह बढ़ोतरी हुई है तो थर्मल पावर प्लांट को कोयले की कमी कैसे हो सकती है? इसके दो ही कारण हो सकते हैं या तो कोयला थर्मल पावर प्लांट तक पहुंच नहीं पा रहा है या कोयले के उत्पादन का बकाया नहीं दिया जा रहा है?

इस तरह से देखा जाए तो कोयले की कमी को लेकर जो बातें अखबारों में छप रही हैं और जो बात सुदीप श्रीवास्तव जैसे कार्यकर्ता बता रहे हैं उनमें बहुत बड़ा अंतर है। सुदीप श्रीवास्तव की बातों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

क्योंकि यह तो जगजाहिर है कि सरकार की असली लगाम कॉरपोरेट के हाथ में है। कॉरपोरेट ही मीडिया है। कॉरपोरेट अपना नैरेटिव बनाने के लिए सरकार और मीडिया दोनों का इस्तेमाल बखूबी करता है।

कोल प्रोडक्शन
Coal
Shortage of coal
Thermal power plant
electricity
Production of electricity
Wind power plant
Solar power plant
Hydel power plant
Production of electricity with thermal power plant
Coal in thermal power plant
Production of coal in India
Shortage of coal in India
Union Energy Minister RK Sharma
Narendra modi

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License