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जम्मू-कश्मीर : डोमिसाइल क़ानून पर टिप्पणी को लेकर ट्रेड यूनियन नेता निलंबित
चार दिन पहले कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा था कि नए डोमिसाइल क़ानून को लेकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके लोगों को उकसाने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ वे कार्रवाई शुरू करेंगे।
सागरिका किस्सू
08 Apr 2020
जम्मू-कश्मीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि वे डोमिसाइल क़ानून के मामले में सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को खंगालेंगे और शरारती तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करेंगे। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग के सहायक लाइनमैन ताहिर अहमद शॉल को कथित रूप से"आपत्तिजनक पोस्ट" लिखने के लिए निलंबित कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर लाइनमैन ने लिखा था कि "क्या डोमिसाइल क़ानून अल्ताफ बुखारी और उनके साथियों के लिए अप्रैल फूल का गिफ्ट है?" कथित तौर पर, ये निलंबन आदेश पीएचई राजौरी के एक्जक्यूटिव इंजीनियर द्वारा जारी किया गया है। शॉल ट्रेड यूनियन नेता भी है और राजौरी में पीएचई कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन में अक्सर सबसे आगे देखा जाता है।

चार दिन पहले कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा था कि वे सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके नए डोमिसाइल क़ानून को लेकर लोगों को उकसाने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करेंगे। उन्होंने कहा था कि "गिरफ्तारियां संभव है।" एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूजक्लिक से बातचीत में कहा, "यह विक्षिप्त है। हम बाहर निकल कर विरोध नहीं कर सकते। हम अपनी आवाज़ नहीं उठा सकते। अब, हम सोशल मीडिया पर भी अपने विचार व्यक्त नहीं कर सकते। यह क्या है? क्या वे हमसे डरते हैं? या वे जानते हैं कि वे गलत कर रहे हैं। यह उत्पीड़न है।”

इस बीच, ताहिर शॉल ने ऐसी किसी भी बात को लिखने से इनकार किया है। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि उनका फेसबुक अकाउंट कथित तौर पर हैक कर लिया गया था और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनकी ओर से क्या पोस्ट किया जा रहा है। शॉल ने कहा, "मैंने उन्हें यह भी बताया कि मेरा अकाउंट हैक हो गया है लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी।" आदेश में लिखा है, "शॉल के मामले को लेकर जांच चल रही है इसलिए उनके द्वारा सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार के लिए निलंबन किया गया है।"

जम्मू-कश्मीर सरकारी कर्मचारी (आचरण) नियम, 1971 के नियम 13 के उपनियम (3) के तहत शॉल को निलंबित कर दिया गया है। इस नियम के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी सरकार की नीति या सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की लिखित या अन्य तरीकों से सार्वजनिक तौर पर या संघ की बैठकों या चर्चाओं में आलोचना नहीं करेगा और न ही वह ऐसी चर्चाओं और आलोचनाओं में किसी भी तरीके से हिस्सा लेगा।

शॉल इस निलंबन आदेश को अपने साथ बदला लेने के प्रयास के रूप में देखते है। हाल ही में, उन्होंने राजौरी में 700 पीएचई के दिहाड़ी श्रमिकों के लंबित वेतन की मांग के लिए एक आंदोलन किया था। उन्होंने कहा, “इन कर्मचारियों को भुगतान किए पांच महीने हो चुके हैं। उनमें से अधिकांश 40 वर्ष से ज़्यादा उम्र के हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन पीएचई विभाग को दे दिया है और बदले में उनके पास अपने परिवार को खिलाने पिलाने के लिए भी पैसे नहीं है।"

पीएचई में एक्जक्यूटिव इंजीनियर मुश्ताक ने न्यूज़क्लिक को बताया, “शॉल पहले विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई करते रहे हैं। वह सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के लिए कार्यकर्ताओं को उकसाते रहे है। श्रमिक सड़कों पर हैं और अब, यह फेसबुक पोस्ट लोगों को भड़काने का एक और प्रयास था। इसलिए उच्च अधिकारियों को निर्णय लेना पड़ा।"

फरवरी महीने में राजौरी में विरोध स्थल पर एक पीएचई श्रमिक की मौत ने प्रदर्शनकारियों में गुस्सा पैदा कर दिया था। कोटदारदा गांव का रहने वाले चालीस वर्षीय मोहम्मद शाबिर राजौरी शहर में पीएचई कार्यालय के बाहर धरने के दौरान गिर गया था। उसे पास के अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित कर दिया गया। इसके तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों ने शबीर के शव को बाहर निकाला और प्रशासन के ख़िलाफ़ नारेबाजी करते हुए मुख्य सड़क को अवरुद्ध कर दिया।

शॉल ने कहा, “वे केवल विरोध कर सकते हैं। वे और क्या कर सकते हैं? उनकी बातों को अनसुनी कर दी गई है। वे गरीब लोग हैं। यहां तक कि अगर वे मर जाते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

लंबे समय से पीएचई श्रमिक लंबित वेतन और अपनी नौकरियों को नियमित करने सहित अपनी लंबे समय से मांगों को पूरा नहीं करने के लिए प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे हैं। अपनी मांगों को उठाने के लिए प्रदर्शनकारी श्रमिकों को पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

दिहाड़ी श्रमिकों को उनके मेहनताने के तौर पर रोजाना225 रुपये देने का प्रावधान है। हालांकि, श्रमिकों का कहना है कि उन्हें ये मामूली रकम भी नहीं मिल पाया है। केंद्र सरकार वेतन अधिनियम के तहत 520 रुपये दिहाड़ी देने का प्रावधान है जो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं है। पीएचई श्रमिक ने कहा, “प्रशासनिक ढांचे के बदलाव के बाद हमें वेतन अधिनियम का लाभ मिलने का उम्मीद था लेकिन यह अभी भी लागू नहीं हुआ है। सरकार डोमिसाइल कानूनों और अन्य मुद्दों को लेकर चिंतित है लेकिन जम्मू-कश्मीर के ग़रीब लोगों की परवाह नहीं है।”

प्रदर्शनकारी पीएचई श्रमिक अपनी दुर्दशा को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए बार बार दुख जताया। एक प्रदर्शनकारी ने पहले न्यूज़क्लिक को बताया था, “राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के नेताओं ने सभी मांगों को पूरा करने का वादा किया था। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद, वे उन वादों को भूल गए। बार-बार याद दिलाने के बाद हमारे पास सरकार के खिलाफ विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”

अंग्रेजी में लिखे गए मूल आलेख को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं

J&K PHE Worker and Trade Union Leader Suspended for FB Post on Domicile Law

PHE
domicile law
Jammu and Kashmir
Tahir Shawl
JK Police
J&K PHE Department
freedom of expression
Attack on freedom of expression

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