NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा मुठभेड़ को कवर करने के दौरान फोटो जर्नलिस्ट की पिटाई की
25 वर्षीय कामरान यूसुफ़ का कहना है कि उन्हें पुलिस द्वारा घटना स्थल छोड़ने के लिए कहे जाने के बाद वे जा रहे थे तभी पुलिस ने उन्हें वापस बुलाया और पीटा। कश्मीर प्रेस क्लब ने इस हमले की निंदा की है।
अनीस ज़रगर
15 Sep 2020
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा मुठभेड़ को कवर करने के दौरान फोटो जर्नलिस्ट की पिटाई की

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के पुलिसकर्मियों ने फोटो जर्नलिस्ट कामरान यूसुफ़ को उस समय पीटा जब वे मंगलवार को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा इलाक़े में गोलाबारी को कवर कर रहे थे।

पुलवामा के रहने वाले कामरान ने कहा कि वे मुठभेड़ स्थल के पास पहुंचे जहां सुरक्षा अधिकारियों ने आतंकवादियों को पकड़ने के लिए एक घेरा बना रखा था। वह सुरक्षा परिधि से 200 मीटर की दूरी पर थे।

कामरान ने कहा, "मैंने कुछ तस्वीरें खींची और फिर सीआरपीएफ कर्मियों ने मुझे और कुछ अन्य साथियों को उस स्थान को छोड़ने के लिए कहा तो मैंने छोड़ दिया। लेकिन जब मैं जा रहा था तो मुझे पुलिसकर्मियों ने वापस बुलाया और बिना किसी कारण के उन्होंने मुझे पीटना शुरू कर दिया। कामरान ने कहा, “मैं नहीं जा सकता था और मैं अपने कैमरों को क्षतिग्रस्त होने से बचाना चाहता था।” न्यूज़क्लिक को कामरान नियमित तौर पर सहयोग करते रहे हैं।

25 वर्षीय इस पत्रकार को श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में ले जाया गया जहां उनका इलाज किया गया।

कश्मीर प्रेस क्लब के महासचिव इश्फाक तांत्रे ने इस हमले की निंदा की। कामरान इस क्लब के सदस्य हैं। उन्होंने न्यूज़क्लिक से कहा, “केपीसी ने अधिकारियों के बीच इस उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। यह बेहद निंदनीय है और हम उम्मीद करते हैं कि अधिकारी इस पर संज्ञान लेंगे और दोषियों को सजा दिलाएंगे।”

साल 2017 में कामरान पर अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) के तहत केस दर्ज किया गया था। कामरान इस क़ानून के तहत केस दर्ज किए जाने वालों में इस क्षेत्र के पहले पत्रकार थे। उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत अदालत में उपलब्ध नहीं कराने के बाद तिहाड़ जेल में छह महीने बिताने के बाद उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था।

जम्मू-कश्मीर में पिछले साल 5 अगस्त से अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद और इसको लेकर इस क्षेत्र में बंद के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों पर विशेष रूप से मीडिया के ख़िलाफ़ अत्यधिक बल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। तब से अलग-अलग घटनाओं में एक दर्जन से अधिक पत्रकारों को ग्राउंड पर पीटा गया। इस क्षेत्र के अधिकारियों पर मीडिया समूहों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा मीडिया पर सख्त प्रतिबंध लगाने और बोलने की आज़ादी में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।

इस साल अप्रैल महीने में जम्मू-कश्मीर पुलिस की साइबर सेल ने कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट मसरत ज़हरा पर यूएपीए की धारा 13 के तहत केस दर्ज किया था। उन्हें इस साल फोटो जर्नलिज़्म अवार्ड में अंजा निडरिंगहौस करेज पुरस्कार मिला। उन्हें उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की गई सामग्री को "राष्ट्र-विरोधी" कंटेंट बताते हुए उन पर केस दर्ज किया गया था।

कुछ दिनों के बाद साइबर पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार गौहर गिलानी पर यूएपीए की धारा-13 और भारतीय दंड संहिता की धारा 505 के तहत केस दर्ज किया था। साथ ही उन पर सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों में लिप्त’ होने के आरोप में भी केस दर्ज किया गया।

वर्तमान में 32 वर्षीय कश्मीर पत्रकार आसिफ़ सुल्तान जिन्हें पिछले साल अमेरिकन नेशनल प्रेस क्लब द्वारा प्रेस फ्रीडम अवार्ड से सम्मानित किया गया था वे साल 2018 से इसी तरह के आरोपों को लेकर श्रीनगर की केंद्रीय जेल में बंद हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशिक मूल रिपोर्ट आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं-

J&K Police Thrash Photojournalist Covering Pulwama Gunfight

Kashmir Media
Kashmir Photojournalist
Kamran Yousuf J&K Police
Kashmir Press
J&K Media Attack
Kashmir Press Club

Related Stories

जम्मू-कश्मीर में मीडिया का गला घोंट रही सरकार : प्रेस काउंसिल

खोज ख़बर ; कश्मीर से UP: सियासत की बिछी बिसात, फ़रेब का खेल

एक पत्रकार समूह द्वारा कब्ज़े के बाद, कश्मीर प्रेस क्लब को सरकार ने खुद के सुपुर्द किया

कश्मीर प्रेस क्लब पर जबरन क़ब्ज़े पर पत्रकारों की संस्थाओं ने जताई नाराज़गी और हैरानी

कश्मीरी पत्रकारों को ‘बदनाम’ करने की साज़िश

जम्मू और कश्मीर : सरकार के निशाने पर प्रेस की आज़ादी

कश्मीर प्रेस क्लब ने पत्रकार कामरान यूसुफ के घर छापेमारी की निंदा की

कश्मीर में फोटोजर्नलिज़्म: एक नामुमकिन पेशा


बाकी खबरें

  • SFI PROTEST
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई
    09 Feb 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय को फिर से खोलने के लिए SFI ने प्रदर्शन किया, इस दौरान छात्रों ने ऑनलाइन कक्षाओं का विरोध किया। साथ ही सड़क पर कक्षा लगाकर प्रशासन को चुनौत दी।
  • PTI
    समीना खान
    चुनावी घोषणापत्र: न जनता गंभीरता से लेती है, न राजनीतिक पार्टियां
    09 Feb 2022
    घोषणापत्र सत्ताधारी पार्टी का प्रश्नपत्र होता है और सत्ताकाल उसका परीक्षाकाल। इस दस्तावेज़ के ज़रिए पार्टी अपनी ओर से जनता को दी जाने वाली सुविधाओं का जिक्र करती है और जनता उनके आधार पर चुनाव करती है।…
  • हर्षवर्धन
    जन्मदिन विशेष : क्रांतिकारी शिव वर्मा की कहानी
    09 Feb 2022
    शिव वर्मा के माध्यम से ही आज हम भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु, भगवती चरण वोहरा, जतिन दास और महाबीर सिंह आदि की कमानियों से परिचित हुए हैं। यह लेख उस लेखक की एक छोटी सी कहानी है जिसके बारे…
  • budget
    संतोष वर्मा, अनिशा अनुस्तूपा
    ग्रामीण विकास का बजट क्या उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
    09 Feb 2022
    कोविड-19 महामारी से पैदा हुए ग्रामीण संकट को कम करने के लिए ख़र्च में वृद्धि होनी चाहिए थी, लेकिन महामारी के बाद के बजट में प्रचलित प्रवृत्ति इस अपेक्षा के मामले में खरा नहीं उतरती है
  • Election
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः प्रचार और भाषणों में स्थानीय मुद्दों को नहीं मिल रही जगह, भाजपा वोटर भी नाराज़
    09 Feb 2022
    ऐसे बहुत से स्थानीय मुद्दे हैं जिनको लेकर लोग नाराज हैं इनमें चाहे रोजगार की कमी का मामला हो, उद्योग की अनदेखी करने का या सड़क, बिजली, पानी, महिला सुरक्षा, शिक्षा का मामला हो। इन मुद्दों पर चर्चा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License