NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोटा के जेके लोन अस्पताल में आख़िर क्यों गई मासूमों की जान?
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर्स को लगभग क्लीन चिट दे दी है, लेकिन कमेटी ने ये बात भी कही कि आईसीयू में सिलेंडर के जरिए ऑक्सीजन मुहैया कराई जाती है, जबकि ऑक्सीजन पाइपलाइन के जरिए पहुंचाई जानी चाहिए। साथ ही आईसीयू के 53 बिस्तरों पर 70 से ज्यादा बच्चों का इलाज किया जा रहा है, इससे भी संक्रमण हो सकता है।
सोनिया यादव
31 Dec 2019
JK lon hospital

राजस्थान में एक ओर प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने एक साल पूरे होने पर राज्य में 'निरोगी राजस्थान' कार्यक्रम की शुरुआत की है तो वहीं दूसरी ओर कोटा में 28 दिनों में 91 बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है। इसमें 10 बच्चों की मौत तो केवल 23 और 24 दिसंबर के दिन ही हुई, इसके बाद 25 से 29 सितंबर के बीच कुल 14 बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस घटना पर विपक्ष ने राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए हैं, तो वहीं सरकार ने प्रतिपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रदेश सरकार ने एक जांच कमेटी का गठन किया। इस कमेटी में जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के एडिशनल प्रिंसिपल डॉक्टर अमरजीत मेहता और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ रामबाबू शर्मा शामिल थे। इस कमेटी ने सोमवार 30 दिसंबर को जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। इस रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर्स को इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई है।
क्या है इस रिपोर्ट में?

कमेटी ने अपनी जांच में बच्चों के इलाज में कोई कमी नहीं पाई है। कमेटी का कहना है कि दो दिन में 10 बच्चों की मौत का कारण इलाज में कमी नहीं, बल्कि ठंड है। 10 में से 5 बच्चे एक माह से छोटे थे और भारी सर्दी में उनके पैरेंट्स जीप में रखकर उन्हें दूसरे अस्पतालों से रेफर करवाकर लाए थे। सर्दी के कारण गले में इंफेक्शन हो गया था। सांस रुकने जैसे हालात हो गए थे। इस वजह से उनकी मौत हुई। डॉक्टरों ने इलाज में कोताही नहीं की थी, कोई लापरवाही नहीं बरती।

हालांकि कमेटी ने ये बात भी कही कि आईसीयू में सिलेंडर के जरिए ऑक्सीजन मुहैया कराई जाती है, जबकि ऑक्सीजन पाइपलाइन के जरिए पहुंचाई जानी चाहिए। बाहर से सिलेंडर अंदर लाने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। साथ ही कमेटी ने ये भी कहा कि आईसीयू के 53 बिस्तरों पर 70 से ज्यादा बच्चों का इलाज किया जा रहा है, इससे भी संक्रमण हो सकता है।
क्या है पूरा मामला?

राजस्थान के कोटा में जे.के. लोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय एवं न्यू मेडिकल कॉलेज नाम का एक सरकारी अस्पताल है। अस्पताल बच्चों के इलाज में स्पेशियलिटी रखने का दावा करता है। इस अस्पताल में 23 और 24 दिसंबर के बीच 10 बच्चों की मौत हुई। इनमें से 5 बच्चे नवजात थे। एक से पांच दिन तक के और बाकी बच्चे दो साल से कम उम्र के थे।

मामले ने तब तूल पकड़ा जब 27 दिसंबर को कोटा से सांसद और लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने राजस्थान सरकार को टैग करते हुए ट्वीट किया और बच्चों की मौत पर गंभीरता से कार्रवाई करने की बात कही। ओम बिड़ला ने खुद रविवार 29 दिसंबर को अस्पताल का दौरा किया और हालात का जायज़ा लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में स्वास्थ्य उपकरणों की कमी की जानकारी ली और इस बारे में ज़रूरी हिदायत दी।

संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी के जेकेलोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय एवं न्यू मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।48 घंटे में 10 नवजात शिशुओं की असमय मृत्यु दुखद व पीड़ादायक है। घटना की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए पर्याप्त चिकित्सक इंतजाम करने के निर्देश दिये। pic.twitter.com/04XiYV1zOm

— Om Birla (@ombirlakota) December 29, 2019

27 दिसंबर को ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हेल्थ सेक्रेटरी वैभव गलरिया को स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजा। हेल्थ सेक्रेटरी को शुरुआती जांच में अस्पताल में कई खामियां भी मिलीं। अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में ऑक्सीजन की कमी थी, वार्ड्स में सफाई नहीं थी और जरूरी मेडिकल उपकरण भी अस्पताल में नहीं दिखे। हेल्थ सेक्रेटरी ने दौरे के बाद तीन मेंबर वाले एक जांच पैनल का गठन किया। 48 घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया साथ ही ज़िम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।
हालांकि इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चों के इलाज में किसी तरह की कोताही नहीं बरती गई। डॉक्टर पूरे समय अस्पताल में मौजूद रहे। जेके लोन हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट एचएल मीना ने मीडिया को बताया कि किसी भी बच्चे की मौत में अस्पताल की कोई गलती नहीं है।

बता दें कि अस्पताल में महीने भर से मौतों का सिलसिला जारी है। लेकिन जब एक साथ 10 बच्चों की मौत हुई तब राजस्थान के सीएम हरकत में आए और उन्होंने एक बयान दिया, जिसे विपक्ष के साथ ही सोशल मीडिया पर भी संवेदनहीन करार दिया गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, 'पिछले 6 सालों की तुलना में इस साल सबसे कम मौतें हुई हैं। वैसे एक बच्चे की भी मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन बीते सालों में हर एक साल 1300-1500 मौतें हुई हैं, इस साल ये आंकड़ा 900 है। देश के हर एक अस्पताल में हर रोज कुछ मौतें होती रहती है। इसमें कुछ नया नहीं है।'

मुख्यमंत्री के इस बयान पर राज्य की पूर्व मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘बच्चों की मौत तो होती रहती है, इसमें कोई नई बात नहीं है। प्रदेश के मुखिया का यह बयान सुनकर मन बहुत आहत हुआ। ये कथन उन मांओं के ज़ख्मों पर नमक है जिनकी कोख जेके लोन अस्पताल में सरकारी लापरवाही के कारण सूनी हुई।'
hospital
गौरतलब है कि जेके लोन हॉस्पिटल में आसपास के जिलों से रेफ़र किए गए बच्चों का इलाज किया जाता है। लेकिन अस्पताल का रिकॉर्ड बच्चों के इलाज के मामले में बहुत अच्छा नहीं दिखता। पिछले एक महीने का आंकड़ा देखें तो मरने वाले बच्चों की 91 की संख्या डराने वाली है। एक साल का आंकड़ा देखें तो 900 को पार है। राज्य की विपक्षी पार्टी बीजेपी इसे लेकर कांग्रेस कीे गहलोत सरकार पर लगातार हमला बोल रही है।

राज्य बीजेपी के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने इस मामले में कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, 'इन मौतों के बाद भी सरकार का रवैया संवेदनहीन है, अमानवीय है। हमने दो पूर्व चिकित्सा मंत्रियों राजेंद्र राठौड़ और कालीचरण सर्राफ़ की सदस्यता वाली एक कमेटी गठित कर मामले की तह तक पहुंचा जाएगा।'

हालांकि सच्चाई यह है कि  इस अस्पताल में बच्चों की मौत की ये दर्दनाक तस्वीर सिर्फ़ कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद की नहीं है। ये सिलसिला 2014 से जारी है, हर साल इस अस्पताल में लगभग हज़ार बच्चों की मौत इलाज के दौरान हो जाती है।

हॉस्पिटल में संबधित विभाग के प्रमुख डॉ. अमृत लाल बैरवा ने मीडिया को बताया, "हॉस्पिटल में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। इन सबके बीच हॉस्पिटल स्टाफ़ इलाज के लिए पहुंचते मरीज़ों की ठीक से देखभाल कर रहे हैं। हमारे प्रयासों से ऐसी मौतों में कमी आई है। अस्पतालों पर मुफ़्त जाँच और दवा योजना के बाद काफ़ी दबाव बढ़ा है। क्योंकि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज काफ़ी महंगा है।"

डॉक्टर बैरवा ने इस संबंध में रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीज़ों की संख्या हर साल बढ़ रही है मगर अनुपात में ऐसी मौतों में संख्या में कमी आ रही है। इसके अनुसार, 'वर्ष 2014 में 15 हजार 719 मरीज दाखिल हुए, उसमें से 1198 की मौत हुई। 2015 में 17569 दाखिल हुए, जबकि 1260 की मृत्यु हुई। वर्ष 2016 में 17892 भर्ती हुए और 1193 की मृत्यु हुई। वर्ष 2017 में मरीजों की संख्या 17216 और मृत्यु 1027, वर्ष 2018 में 16436 के मुक़ाबले 1005 की मौत हुई। इस वर्ष ये संख्या 940 है।'

इस संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी एनसीपीसीआर ने राज्य सरकार को एक नोटिस जारी किया है। एनसीपीसीआर ने इस मामले में प्रदेश सरकार से तीन दिन में जवाब देने के लिए कहा है। इसके अलावा आयोग ने कोटा के सीएमओ बीएस तंवर को इस मामले पर जवाब देने के लिए 3 जनवरी को आयोग के कार्यालय में तलब किया है।

राज्य में जनस्वास्थ्य सुविधाओं पर काम करने वाले अजय पाटनी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, 'इस समस्या को समझने के लिए सबसे पहले इसकी जड़ को समझना होगा। यहां प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा कमज़ोर है। दूर-दराज इलाकों में तो लोग अस्पताल ही नहीं जाते, कई मौतें घर पर ही हो जाती हैं। हालांकि बीते कुछ सालों में लोग अस्पताल तक धीरे-धीरे पहुंचने लगे हैं। अगर राज्य में ऐसी मौतें रोकनी है तो सबसे पहले ज़मीनी स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवानी होंगी, क्योंकि अक्सर मरीज़ बड़े अस्पतालों तक देर में पहुंचते हैं। और इन अस्पतालों पर काफ़ी भार भी होता है।'

JK Lon Hospital
kota
Rajasthan
ashok gehlot
Rajasthan sarkar
Vasundhara Raje
health system
health department
NCPCR
Congress
BJP
Infant Died

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    'राम का नाम बदनाम ना करो'
    17 Apr 2022
    यह आराधना करने का नया तरीका है जो भक्तों ने, राम भक्तों ने नहीं, सरकार जी के भक्तों ने, योगी जी के भक्तों ने, बीजेपी के भक्तों ने ईजाद किया है।
  • फ़ाइल फ़ोटो- PTI
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?
    17 Apr 2022
    हर हफ़्ते की कुछ ज़रूरी ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन..
  • hate
    न्यूज़क्लिक टीम
    नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज
    16 Apr 2022
    देश भर में राम नवमी के मौक़े पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद जगह जगह प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में दिल्ली में जंतर मंतर पर नागरिक समाज के कई लोग इकट्ठा हुए. प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि सरकार हिंसा और…
  • hafte ki baaat
    न्यूज़क्लिक टीम
    अखिलेश भाजपा से क्यों नहीं लड़ सकते और उप-चुनाव के नतीजे
    16 Apr 2022
    भाजपा उत्तर प्रदेश को लेकर क्यों इस कदर आश्वस्त है? क्या अखिलेश यादव भी मायावती जी की तरह अब भाजपा से निकट भविष्य में कभी लड़ नहींं सकते? किस बात से वह भाजपा से खुलकर भिडना नहीं चाहते?
  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा
    16 Apr 2022
    देश में एक लोकसभा और चार विधानसभा चुनावों के नतीजे नए संकेत दे रहे हैं। चार अलग-अलग राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License