NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव बांड के जरिेये चंदा देने वालों का नाम घोषित करने वाली पहली पार्टी बनी झारखंड मुक्ति मोर्चा
‘‘ यह ध्यान देने की बात है कि झामुमो पार्टी ने वर्ष 2019-20 में पार्टी को योगदान संबंधी रिपोर्ट में चंदा देने वाले के नामों की घोषणा की जिन्होंने उसे चुनावी बांड के जरिये एक करोड़ रूपये दिया । हालांकि पार्टी ने वित्त वर्ष 2019-20 की आडिट रिर्पोट में चुनावी बांड के जरिये इस आय की घोषणा नहीं की । ’’
भाषा
19 Apr 2021
चुनाव बांड के जरिेये चंदा देने वालों का नाम घोषित करने वाली पहली पार्टी बनी झारखंड मुक्ति मोर्चा
फोटो साभार: सोशल मिडिया


नयी दिल्ली: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ऐसी पहली पार्टी बन गई है जिसने चुनावी बांड के माध्यम से चंदा देने वालों के नामों की घोषणा की है । एसोसिएशन आफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है ।

इसमें कहा गया है कि वर्ष 2019-20 में पार्टी को योगदान संबंधी रिपोर्ट में एक करोड़ रूपये के चंदे की घोषणा की गई है ।

झारखंड में सत्तारूढ़ पार्टी को मिले योगदान संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, उसे एल्यूमिनियम एवं तांबा विनिर्माता कंपनी हिंडाल्को ने यह चंदा दिया ।

नयी रिपोर्ट में एडीआर ने कहा कि वर्ष 2019-20 में राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को आय का सामान्य एवं लोकप्रिय स्रोत चुनावी बांड के जरिये चंदा रहा । पिछले दो वर्षो में यह दलों को चंदे के लोकप्रिय माध्यम के रूप में उभरा है ।

एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ यह ध्यान देने की बात है कि झामुमो पार्टी ने वर्ष 2019-20 में पार्टी को योगदान संबंधी रिपोर्ट में चंदा देने वाले के नामों की घोषणा की जिन्होंने उसे चुनावी बांड के जरिये एक करोड़ रूपये दिया । हालांकि पार्टी ने वित्त वर्ष 2019-20 की आडिट रिर्पोट में चुनावी बांड के जरिये इस आय की घोषणा नहीं की । ’’

एडीआर ने कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक दलों को दान देने वालों की पहचान की जानकारी है जिन्होंने उसे चुनावी बांड के जरिये योगदान दिया है, जैसा कि इस मामले में देखा जा सकता है ।

गौरतलब है कि चुनाव बांड को राजनीतिक दलों को नकद में चंदा देने के विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है और इसे राजनीतिक वित्त पोषण में पारदर्शिता लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 में 19 राजनीतिक दलों को कुल आय 312.37 करोड़ रूपये का 50 प्रतिशत से अधिक चंदा चुनावी बांड के जरिये प्राप्त हुआ और इसके दानदाताओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई ।

इसमें कहा गया है कि वर्ष 2109-20 में 3,429.56 करोड़ रूपये का चुनावी बांड दलों द्वारा भुनाये गए । इससे स्पष्ट होता है कि दलों द्वारा चुनावी बांड से भुनाये गए शेष 3,117.19 करोड़ रूपये या 91 प्रतिशत राशि का आडिट रिपोर्ट अभी निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध होनी बाकी है।

दो राष्ट्रीय दलों और 17 क्षेत्रीय दलों द्वारा 2019-20 में घोषित आय 619.28 करोड़ रूपये थी।

एडीआर ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस ने सबसे अधिक 143.676 करोड़ रूपये की आय की जानकारी दी जो सभी दलों की विश्लेषित कुल आय का 23.20 प्रतिशत है । तेलगु देशम पार्टी की आय 91.53 करोड़ रूपये या 14.78 प्रतिशत और बीजद की आय 90.35 करोड़ रूपये या 14.59 प्रतिशत रही ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 19 राजनीतिक दलों की विश्लेषण किया गया जिसमें से वर्ष 2018-19 से 2019-20 तक नौ दलों की आय में वृद्धि और 10 दलों की आय में गिरावट देखी गई ।

Electoral Bonds
JMM
ADR
political donations
election commission
Corporate Donations

Related Stories

कैसे चुनावी निरंकुश शासकों के वैश्विक समूह का हिस्सा बन गए हैं मोदी और भाजपा

विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  

ख़बरों के आगे-पीछे: विपक्ष को पोस्टल बैलेट में खेल होने का डर

ख़बरों के आगे-पीछे: चुनाव आयोग की साख पर इतना गंभीर सवाल!

निर्वाचन आयोग ने गौतमबुद्ध नगर में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 10 प्रत्याशियों को नोटिस जारी किए

भाजपा ने 2019-20 में 4,847 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति घोषित की : एडीआर

चुनावों के ‘ऑनलाइन प्रचार अभियान’ में कहीं पीछे न छूट जाएं छोटे दल! 

चुनाव आयोग की विश्वसनीयता ख़त्म होती जा रही है

यूपी: क्या चुनावी रैलियों पर रोक से बीजेपी को हो सकता है बड़ा फ़ायदा?

यूपी: आचार संहिता लगते ही प्रशासन ने हटाने शुरू किए पोस्टर, बैनर, होर्डिंग


बाकी खबरें

  • बी. सिवरामन
    खाद्य मुद्रास्फीति संकट को और बढ़ाएगा रूस-यूक्रेन युद्ध
    04 Apr 2022
    सिर्फ़ भारत में ही नहीं, खाद्य मुद्रास्फीति अब वैश्विक मुद्दा है। यह बीजिंग रिव्यू के ताजा अंक की कवर स्टोरी है। संयोग से वह कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की भी एक प्रमुख कहानी बन गई।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: सांप्रदायिकता का विकास क्या विकास नहीं है!
    04 Apr 2022
    वो नेहरू-गांधियों वाला पुराना इंडिया था, जिसमें सांप्रदायिकता को तरक्की का और खासतौर पर आधुनिक उद्योग-धंधों की तरक्की का, दुश्मन माना जाता था। पर अब और नहीं। नये इंडिया में ऐसे अंधविश्वास नहीं चलते।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों के सामने ही ख़ाक हो गई उनकी मेहनत, उनकी फसलें, प्रशासन से नहीं मिल पाई पर्याप्त मदद
    04 Apr 2022
    "हमारी ज़िंदगी ही खेती है। जब खेती बर्बाद होती है तो हमारी समूची ज़िंदगी तबाह हो जाती है। सिर्फ़ एक ज़िंदगी नहीं, समूचा परिवार तबाह हो जाता है। पक चुकी गेहूं की फसल की मडाई की तैयारी चल रही थी। आग लगी…
  • भाषा
    इमरान खान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
    04 Apr 2022
    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया है। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के…
  • शिरीष खरे
    कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?
    04 Apr 2022
    महाराष्ट्र के पिलखाना जैसे गांवों में टीकाकरण के तहत 'हर-घर दस्तक' के बावजूद गिने-चुने लोगों ने ही कोविड का टीका लगवाया। सवाल है कि कोविड रोधी टीकाकरण अभियान के एक साल बाद भी यह स्थिति क्यों?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License