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शिक्षा के सवाल पर एकजुट हुए छात्र संगठन, बनाया साझा मंच, 8 जनवरी को  देशव्यापी हड़ताल
सभी के लिए सरकारी मुफ़्त शिक्षा की मांग और उच्च शिक्षा पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ देशभर के छात्र संगठनों ने साझा मंच 'ऑल इंडिया  नेशनल फ़ोरम टू सेव पब्लिक एजुकेशन' बनाया। हालांकि एबीवीपी को इससे बाहर रखा गया है।
मुकुंद झा
10 Dec 2019
JNU

दिल्ली के जवाहर लाल विश्विद्यालय जेएनयू के छात्र हॉस्टल की फीस में भारी वृद्धि और नए हॉस्टल मैन्युअल के खिलाफ पिछले एक महीने से ज्यादा से संघर्ष कर रहे है। लेकिन अब यह फीस वृद्धि का सवाल सिर्फ जेएनयू का नहीं बल्कि देश के तमाम विश्विद्यालयों का बन गया है। आज  उच्च शिक्षा की  फीस  या लागत में  लगातर हो रही वृद्धि को लेकर देश भर के तमाम  छात्र संगठनों और छात्रसंघों ने एक साझा मंच बनाया है। इसी को लेकर मंगलवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी को छोड़कर लगभग सभी छात्र संगठन शामिल हुए।

इस प्रेस कॉन्फ्रंस में  स्टूडेंट फेडरशन ऑफ़ इण्डिया (एसफआई), ऑल इण्डिया स्टूडेंट एसोसिएशन (अइसा), नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ़ इण्डिया (एनएसयूआई), ऑल इण्डिया स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया (एआईएसएफ ) के साथ कई अन्य छात्र संगठन के नेता शामिल हुए।  
इसके आलावा जेएनयू छात्रसंघ, एमएयू छात्रसंघ, एयुडी छात्रसंघ के नेताओ ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इसके अलावा एचसीयू छात्रसंघ, पीयू छात्र संघ के साथ अन्य छात्र संघों ने भी इस साझे मंच को समर्थन किया है। सभी ने देश में उच्च शिक्षा पर हो रहे हमलों के खिलाफ एक साझे संघर्ष पर जोर दिया। इसी के साथ सभी के लिए सरकारी मुफ़्त शिक्षा की मांग को लेकर छात्रों ने एक साझा मंच 'ऑल इंडिया  नेशनल फ़ोरम टू सेव पब्लिक एजुकेशन' के गठन का एलान किया ।

छात्र संगठनों ने कहा कि उत्तराखंड के आयुर्वेदिक विज्ञान के छात्र, दिल्ली  IIMC  , AIIMS, IIT, और AUD  के छात्र फीस में वृद्धि का विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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सभी छात्र नेताओ ने कहा कि इन सभी प्रदर्शनों में सरकारों द्वारा  छात्रों की वास्तविक मांगों पर या तो उदासीनता दिखाई जाने  या  पुलिस  के माध्यम से आंदोलन का दबाने का प्रयास की निंदा की है। इसका हालिया उदहारण दिल्ली  पुलिस द्वारा JNU के छात्रों के विरोध और उत्तराखंड पुलिस द्वारा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों के छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज है ,ये सरकारों का दृष्टिकोण साफ दिखाता है।

इसके अलावा,छात्र नेताओ ने कहा की वर्तमान सरकार  छात्रों को छात्र यूनियनों  को खत्म करके छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला कर रहे है।  जेएनयू प्रशासन द्वारा जेएनयूएसयू को मान्यता नहीं देना इसी का परिचायक है। इसके आलावा जामिया, एचपीयू, एसएयू आदि के छात्र लगातार छात्रसंघ की मांग कर रहे हैं लेकिन इसका  कोई फायदा नहीं हुआ है। यह कैंपसों  के लोकतांत्रिक वातावरण को नष्ट करने का प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही कैंपसों में सामाजिक न्याय और प्रगतिशील संस्थानों जैसे कि GSCASH को खत्म किया जा रहा है। इस परिदृश्य में, यह जरूरी है कि छात्रों के आंदोलनों और संगठनों की एक राष्ट्रीय समन्वय समिति देश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा  के लिए संघर्ष करे। सार्वजनिक वित्त पोषित शिक्षा के बचाने के संघर्ष को तेज करने के लिए संगठनों और विश्वविद्यालय छात्र संघों के एक मंच की घोषणा की है।

एसएफआई के महासचिव मयूख विश्वास ने कहा कि इस सरकार ने छात्रों के ख़िलाफ़ जंग की शुरू कर दी है । सोमावर को भी जेएनयू के छात्रों पर लाठीचार्ज किया। ये सरकार गरीब लोगों को शिक्षा से बाहर करने की साज़िश है । ये सिर्फ़ जेएनयू का ही मामला  नहीं है।

आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल बन्द किया जा रहा है। इसके लिए सभी को शिक्षा मिले इसके लिए लड़ाई है।

एयूडी छात्रसंघ के नेता सुभोजित डे ने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय कहने को तो सरकारी है लेकिन शायद वो देश का सबसे  महंगा विश्वविद्यालय है। हर साल दस प्रतिशत  फीस बढ़ाई जा रही है। वो भी बिना किसी कारण बताए किया जाता है ।

आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साईं बालाजी ने कहा कि जिस सरकार के पास मूर्ति बनाने के लिए पैसा है, अमीरों को टैक्स छूट देने के लिए पैसा लेकिन छात्रों के लिए पैसा नहीं है । सरकार को याद दिलाने की जरूरत है  कि वो देश में हिंदुत्व को लागू करने के लिए नहीं बल्कि शिक्षा और रोजगार के लिए काम करने केलिए सरकार में है।

एनएसयूआई के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विकास यादव ने कहा कि  देश में अलग-अलग राज्यों में छात्र इस सरकार के खिलाफ  सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। शिक्षा व्यापार की वस्तु नहीं है।बल्कि शिक्षा सबका मौलिक अधिकार हो,इसकी लड़ाई है।

भगत सिंह अंबेडकर स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन की नेता अपेक्षा प्रियदर्शी ने कहा जेएनयू में पिछले तीन साल से लगातर फंड कट हुआ है। सरकार इसलिए डर रही है क्योंकि उन्हें पता है कि यह लड़ाई सिर्फ़ जेएनयू का नहीं रही है।

जेएनयूएसयू की अध्यक्ष अशीई घोष ने कहा कि सोमावर को छात्रों पर बिना किसी कारण के बर्बतापूर्ण लाठीचार्ज किया है। सरकार को यह डर है फीस वृद्धि का मामला आईआईएमसी आईआईटी जैसा कई अन्य संस्थानों का भी मुद्दा है । इन सभी आंदोलनों को जेएनयू एक जगह ला रहा है ।
डीएसएफ की सारिका चौधरी ने कहा कि यह छात्रों के संघर्ष का ही दबाव था कि सरकार नई शिक्षा नीति को संसद के इस सत्र में नहीं ला सकी है। जब शिक्षा की बात होगी तो सिर्फ फीस की बात नहीं बल्कि सामाजिक न्याय की बात करनी होगी। देश के हाशिए के लोगों को शिक्षा मिले इसकी लड़ाई है।

इन सभी मुद्दों को लेकर अंत में ऑल इंडिया  नेशनल फ़ोरम टू सेव पब्लिक एजुकेशन के बैनर तले 8 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल का आवाह्न किया गया। इसके बाद 26 जनवरी को पूरे देश में संविधान के प्रस्तावना पढ़ी जाएंगी और मानव श्रृंखला बनाई जाएगी। 

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