NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
दिल्ली से उत्तराखंड तक : पढ़ने की जगह आंदोलन क्यों कर रहे छात्र?
फीस बढ़ोतरी के खिलाफ राज्य के निजी आयुष कॉलेज के बच्चों के आंदोलन को 33 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने क्रमिक से लेकर आमरण अनशन तक किया। पुलिस की लाठियां भी खाईं। निजी आयुष कॉलेजों की फीस 80 हज़ार रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी गई है।
वर्षा सिंह
13 Nov 2019
Students Protest

दिल्ली में जेएनयू के छात्र फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर पुलिस की लाठियां खा रहे हैं। उत्तराखंड में भी फीस में अनियमित तरीके से की जा रही बढ़ोतरी को लेकर स्टुडेंट्स लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।  अनशन कर रहे हैं। पुलिस अंधेरा होने पर छात्रों का आंदोलन तोड़ने पहुंचती है लेकिन अपने भविष्य को लेकर चिंतित बच्चे लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि पैसों के चलते उनकी पढ़ाई न छूटे।
 
आयुष विद्यार्थियों का आमरण अनशन जारी

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ राज्य के निजी आयुष कॉलेज के बच्चों के आंदोलन को 33 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने क्रमिक से लेकर आमरण अनशन तक किया। पुलिस की लाठियां भी खाईं। कॉलेज प्रशासन की गालियां खाईं और उनकी जान तक पर खतरे का अंदेशा है। निजी आयुष कॉलेजों की फीस 80 हज़ार रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी गई है।
 
न्यूज़ क्लिक पहले भी आयुष बच्चों के प्रदर्शन की खबर दे चुका है। जब देहरादून के परेड ग्राउंड में आमरण अनशन पर बैठे छात्र को उठाने के लिए पुलिस अंधेरे में पहुंची। छात्राओं तक से मारपीट हुई। आयुष के विद्यार्थी परेड ग्राउंड में लगातार डटे हुए हैं। रविवार अनशन पर बैठे सौरभ सरकार नाम के छात्र की तबीयत बिगड़ी तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उनकी जगह दूसरे छात्रों ने अनशन शुरू कर दिया। आयुष छात्रों के अनशन का आज, 13 नवंबर को 33वां दिन है।

इसे पढ़ें : उत्तराखंड : छात्रों पर पुलिस बर्बरता के ख़िलाफ़ लोगों में गुस्सा

गढ़वाल विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेजों में परीक्षा फीस बढ़ाने पर प्रदर्शन

उधर, पिछले दो दिनों से गढ़वाल विश्वविद्यालय से सम्बद्ध अर्ध-सरकारी महाविद्यालयों के बच्चे भी सड़क पर उतर आए। भीख मांगी। मशाल जुलूस निकाला। अब वे एचएनबी केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर कूच करने की तैयारी कर रहे हैं।
 
देहरादून में एनएसयूआई के स्टेट प्रेसिडेंट मोहन भंडारी का कहना है कि गढ़वाल विश्वविद्यालय उनसे 850 रुपये परीक्षा फीस लेता था। इस साल से उसमें 1200 रुपये और बढ़ा दिए गए हैं। इसके पीछे की वजह ये है कि गढ़वाल विश्वविद्यालय सम्बद्ध अर्ध-सरकारी कॉलेजों की एफिलेशन फीस पहले राज्य सरकार देती थी, अब वो फीस स्टुडेंट्स से ली जा रही है। गढ़वाल विश्वविद्यालय से सम्बद्ध पांच अर्ध-सरकारी महाविद्यालयों में करीब 23 हज़ार स्टुडेंट्स पढ़ते हैं।
 
अचानक फीस में कई गई बढ़ोतरी से छात्र संगठन नाराज़ हैं। उनके मुताबिक गरीब और मध्यम तबके के बच्चों के लिए इतनी फीस भरना आसान नहीं। इसे लेकर संयुक्त छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले देहरादून में पिछले दो हफ्तों से चल रहा विरोध प्रदर्शन अब उग्र हो गया है। फीस जमा करने के लिए छात्रों ने सोमवार को सांकेतिक तौर पर भीख मांगी और राज्य के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को जमा किए पैसे भिजवाए। छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस भी तत्पर नज़र आई। देहरादून के साथ मसूरी में भी एमपीजी कॉलेज के बच्चों ने उच्च शिक्षा राज्यमंत्री का पुतला फूंका।

WhatsApp Image 2019-11-12 at 12.21.40 PM.jpeg

“उच्च शिक्षा बुरे दौर से गुजर रही है”

मंगलवार शाम देहरादून में एनएसयूआई ने आयुष कॉलेज और एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में शुल्क वृद्धि के विरोध में सरकार के खिलाफ मशाल जूलूस निकाला। यह जूलूस कांग्रेस भवन से शुरू होकर घंटाघर तक निकाला गया। एमएचआरडी मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, राज्य सरकार और कुलपति के विरोध में छात्रों ने जमकर नारेबाजी की। एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा कि सरकार ने छात्र-छात्राओं को कॉलेजों में पढ़ने की जगह सड़कों पर आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है। उच्च शिक्षा बुरे दौर से गुजर रही है।
 
डीएवी कॉलेज के छात्र सौरभ ममगाईं ने कहा कि अगर जल्द ही दोनों विश्वविद्यालयों में बढ़ाई गई फीस वापस नहीं की जाती तो सरकार के सभी मंत्रियों का सार्वजनिक कार्यक्रमों में विरोध किया जाएगा।

प्रॉसपेक्ट्स पर कम फीस, छात्रों से ली जा रही अधिक

गढ़वाल विश्वविद्यालय छात्र संघ में आइसा के प्रतिनिधि अंकित उछोली बताते हैं कि विश्वविद्यालय अपने प्रॉसपेक्टस पर कुछ और परीक्षा फीस लिखता है, जबकि छात्रों से अधिक परीक्षा फीस ली जा रही है। वे बताते हैं कि पिछले तीन साल से प्रॉसपेक्ट्स में परीक्षा फीस 850 रुपये लिखी जा रही है जबकि स्टुडेंट से 1500 रुपये लिए जा रहे हैं। इस पर सवाल करने पर विश्वविद्यालय प्रशासन तकनीकी चूक की बात करता है। वह कहते हैं कि एडमिशन कमेटी फीस पर फैसला लेती है। वर्ष 2017 से छात्र-छात्राओं से बढ़ी हुई फीस (1500 रुपये) ली जा रही है तो प्रॉसपेक्टस में ये क्यों नहीं छप रहा। तीन साल तक लगातार एक गलती कैसे की जा सकती है।
 
“पूरे साल हमारी पढ़ाई का नुकसान हुआ”

आयुष छात्रा प्रगति जोशी कहती हैं कि पूरे साल हमारी पढ़ाई का नुकसान हो गया है। फिर भी हम अपना प्रदर्शन नहीं खत्म करने वाले। हमारा आमरण अनशन जारी रहेगा। वह कहती हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आयुष कॉलेज ढाई लाख रुपये फीस पर अड़े हुए हैं। वह कहती हैं कि कॉलेज प्रशासन गुंडागर्दी तक पर उतर आए हैं। छात्रों को धमकाया जा रहा है। एक वायरल वीडियो में आयुष कॉलेज के अधिकारी खुद अपने कमरे के कांच तोड़ते नज़र आ रहे हैं और इसका आरोप छात्रों के ऊपर मढ़ दिया गया। एक अन्य वीडियो में मोबाइल से रिकॉर्डिंग करने पर कॉलेज के लोग भड़क गए और छात्रों को मोबाइल बंद करने को कहा।

WhatsApp Image 2019-11-12 at 8.06.54 PM.jpeg
 
राज्य में संवैधानिक संकट!

इससे पहले पिछले वर्ष राज्य में मेडिकल कॉलेजों की फीस में बेतहाशा वृद्धि कर दी गई थी। मेडिकल और आयुष स्टुडेंट का समर्थन कर रहे भाजपा नेता रविंद्र जुगरान कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने फीस बढ़ाने के लिए एक पूरी व्यवस्था दे रखी है। इसके बावजूद निजी कॉलेज मनमानी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि हाई कोर्ट का आदेश छात्र-छात्राओं के पक्ष में होने के बावजूद उन्हें आंदोलन को मजबूर होना पड़ रहा है।
जुगरान कहते हैं कि इस तरह तो राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है। नैनीताल हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों के आलोक में दिया गया है। हमारे विद्यार्थी कह रहे हैं कि हाईकोर्ट के आदेश को लागू कराना है। यानी राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश को नहीं मान रही है, यानी राज्य में कानून का राज ही नहीं है। तो फिर ये संवैधानिक संकट हुआ।
 
एचआरडी मंत्री और आयुष मंत्री के भी हैं आयुष कॉलेज

आयुष विद्यार्थियों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश लागू क्यों नहीं हो पा रहे हैं, इस मामले में गौर करने वाली बात ये भी है कि एचआरडी मंत्री डॉ निशंक का खुद का निजी आयुष कॉलेज है...हिमालयन आयुर्वेदिक कॉलेज। राज्य के आयुष मंत्री हरक सिंह रावत का भी देहरादून के शंकरपुर में अपना निजी आयुष कॉलेज है। हरिद्वार में बाबा रामदेव का भी पतंजलि आयुर्वेदिक कॉलेज है। रविंद्र जुगरान कहते हैं कि यानी एक केंद्रीय मंत्री, एक राज्य के मंत्री और योग गुरू रामदेव के कॉलेज ही हाईकोर्ट के आदेश नहीं मान रहे।
 
वह इस पूरे मामले में राज्यपाल की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हैं। जो सभी विश्वविद्यालय की कुलाधिपति हैं और संविधान की रक्षक हैं। क्या राज्यपाल को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
 
ऐसे में सवाल ये है कि राज्य में हाईकोर्ट के आदेश को कौन लागू करवाएगा। इस मामले में निजी आयुष कॉलेज एसोसिशन ने हाईकोर्ट में याचिका डाली है। छात्र-छात्राओं ने भी पीआईएल दाखिल की है।

WhatsApp Image 2019-11-12 at 12.21.41 PM (1).jpeg
इससे पहले गढ़वाल विश्वविद्यालय की कुलपति अन्नपूर्णा नौटियाल कह चुकी हैं कि हमारे पास बहुत फंड क्राइसेस है। अलग-अलग तरह की फीस से ही विश्वविद्यालय के बहुत से खर्च चलते हैं। राज्य के 52 कॉलेज गढ़वाल विश्वविद्यालय से असम्बद्ध हो गए। जिससे उनकी आमदनी घट गई। फीस बढ़ोतरी पर छात्र हंगामा करते हैं। इसलिए उनके पास आंतरिक आमदनी बढ़ाने का कोई ज़रिया नहीं रह गया है।
 
सिर्फ अमीरों के बच्चों को ही मिलेगी उच्च शिक्षा !

एक तरफ सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए नई शिक्षा नीति ला रही है। वहीं, दिनों दिन महंगी होती शिक्षा सिर्फ गरीब वर्ग ही नहीं मध्यम वर्ग को भी शिक्षा से वंचित कर देगी। डॉक्टर, इंजीनियर बनना योग्यता पर नहीं पैसे पर निर्भर करेगा। इसीलिए आज छात्र-छात्रा अपनी कक्षाओं में नहीं बल्कि सड़कों पर नज़र आ रहे हैं। ऐसी स्थिति रही तो उच्च शिक्षा सिर्फ अमीरों के बच्चों तक ही सीमित हो जाएगी और योग्यता दरकिनार हो जाएगी।

इसे पढ़ें : जेएनयू के छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

JNU
JNUSU
central university
MHRD
Student Protests
UTTARAKHAND
Higher education
Fee Hike
AYUSH

Related Stories

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

उत्तराखंड चुनाव: राज्य में बढ़ते दमन-शोषण के बीच मज़दूरों ने भाजपा को हराने के लिए संघर्ष तेज़ किया

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा


बाकी खबरें

  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव दूसरा चरण:  वोट अपील के बहाने सियासी बयानबाज़ी के बीच मतदान
    14 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कितने अहम हैं, ये दिग्गज राजनेताओं की सक्रियता से ही भांपा जा सकता है, मतदान के पहले तक राजनीतिक दलों और राजनेताओं की ओर से वोट के लिए अपील की जा रही है, वो भी बेहद तीखे…
  • unemployment
    तारिक़ अनवर
    उत्तर प्रदेश: क्या बेरोज़गारी ने बीजेपी का युवा वोट छीन लिया है?
    14 Feb 2022
    21 साल की एक अंग्रेज़ी ग्रेजुएट शिकायत करते हुए कहती हैं कि उनकी शिक्षा के बावजूद, उन्हें राज्य में बेरोज़गारी के चलते उपले बनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
  • delhi high court
    भाषा
    अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
    14 Feb 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम और पिछले वर्ष सीटों की संख्या, प्राप्त आवेदनों और दाखिलों की संख्या को लेकर एक संक्षिप्त और स्पष्ट जवाब दाखिल करें।’’ अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।
  • ashok gehlot
    भाषा
    रीट पर गतिरोध कायम, सरकार ने कहा ‘एसओजी पर विश्वास रखे विपक्ष’
    14 Feb 2022
    इस मुद्दे पर विधानसभा में हुई विशेष चर्चा पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी दल के विधायकों ने सदन में नारेबाजी व प्रदर्शन जारी रखा। ये विधायक तीन कार्यदिवसों से इसको लेकर सदन में प्रदर्शन कर…
  • ISRO
    भाषा
    इसरो का 2022 का पहला प्रक्षेपण: धरती पर नज़र रखने वाला उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित
    14 Feb 2022
    पीएसएलवी-सी 52 के जरिए धरती पर नजर रखने वाले उपग्रह ईओएस-04 और दो छोटे उपग्रहों को सोमवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। इसरो ने इसे ‘‘अद्भुत उपलब्धि’’ बताया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License