NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जेएनयू हमला : एक साल बीत गया, न्याय कहां है?
2020 में आज, 5 जनवरी की शाम को ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने उस दहशत का सामना किया था, जब क़रीब 50 नक़ाबपोश गुंडों ने हॉस्टल में घुस कर छात्रों को डंडों, सरियों से मारा था। किसी का सर फूटा, तो किसी नेत्रहीन को मारा गया, मगर साल भर बाद भी कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है।
सत्यम् तिवारी
05 Jan 2021
JNU

"हम अपने कैम्पस को संघी गुंडों के हवाले नहीं होने देंगे, हम जेएनयू के विचार के लिए लड़ते रहेंगे।" यह कहना है जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोश का। आइशी का चेहरा हम सबको याद होगा- एक छोटे क़द की लड़की, जिसके सर पर पट्टी बंधी थी, और वो तब भी अपने साथी छात्रों को बचाने के लिए हमले का सामना कर रही थी। आइशी ने ये बातें 5 जनवरी 2021 को जेएनयू कैम्पस के साबरमती टी पॉइंट पर कहीं हैं, जहाँ विश्वविद्यालय के तमाम छात्र उस दहशत भरी रात के विरोध में और न्याय मिलने की उम्मीद के साथ इकट्ठा हुए थे। 2020 में आज, 5 जनवरी की शाम को ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने उस दहशत का सामना किया था, जब क़रीब 50 नक़ाबपोश गुंडों ने हॉस्टल में घुस कर छात्रों को डंडों, सरियों से मारा था। किसी का सर फूटा, तो किसी नेत्रहीन को मारा गया, मगर साल भर बाद भी कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है।

मामला था जेएनयू प्रशासन द्वारा बढ़ाई गई फ़ीस का, जिसका विरोध दक्षिणपंथी संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अलावा, सभी छात्र संगठन और शिक्षक कर रहे थे। छात्र और जेएनयू शिक्षक संघ के शिक्षक साबरमती के टी पॉइंट पर मीटिंग कर रहे थे। छात्रों का कहना था कि जब तक प्रशासन बढ़ी फ़ीस के फैसले को वापस नहीं लेगा, तब तक वो परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएँगे। तभी वहाँ क़रीब 50 नक़ाबपोश गुंडे आ गए, जिन्होंने शिक्षकों को मारा, कुर्सियाँ तोड़ीं, और इसके बाद वह हॉस्टलों की तरफ़ बढ़े।


इसके बाद देखते ही देखते गुंडों ने कई हॉस्टलों में घुस कर तोड़ फोड़ की, छात्रों को मारा। कमरे का दरवाज़ा, खिड़कियाँ तोड़ी गईं, छात्रों को कमरों से निकाल कर मारा गया। छात्रों का दावा था कि इन गुंडों ने सिर्फ़ उन्हीं को मारा जो एबीवीपी के नहीं थे। इन गुंडों की जब तस्वीरें सोशल मीडिया पर पहुँचीं, तब इसमें कोमल शर्मा नाम की एक लड़की भी दिखी, जो एबीवीपी की ही सदस्य थी।

दिल्ली पुलिस

तस्वीरों- वीडियो और चश्मदीदों के बयानों से साफ़ हुआ था कि दिल्ली पुलिस उस वक़्त कैम्पस के अंदर और बाहर मौजूद थी, मगर बाहर से अंदर किसी को जाने कि अनुमति नहीं थी, दरवाज़े बंद कर दिये थे। ऐसे में दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे, जो कि जायज़ भी रहे। 

मामले की जांच करते हुए दिल्ली पुलिस ने कुल 88 लोगों से पूछताछ ज़रूर की थी, मगर उसके बाद फरवरी के दिल्ली दंगों की कार्रवाई के बीच सब जैसे भुला ही दिया गया।

दिल्ली पुलिस ने हमले को रोका क्यों नहीं? क्या दिल्ली पुलिस को इसकी जानकारी थी? केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली दिल्ली पुलिस ने क्या हमलावरों की मदद की थी? यह सारे सवाल अब भी बरक़रार हैं क्योंकि तस्वीरें-वीडियो के सबूत मिलने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक भी गिरफ़्तारी नहीं की है। हम यह भी नहीं कह सकते कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में देरी लगती है, क्योंकि हमने कन्हैया कुमार, उमर खालिद या दिल्ली दंगे के मामले में भी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को देखा ही है।

कैम्पस के बाहर की दहशत

मैं 5 जनवरी 2020 को जेएनयू रात 9 बजे पहुंचा था। मेन गेट के बाहर दोनों पक्षों के छात्र जमा थे, और प्रदर्शन कर रहे थे। कैम्पस के बाहर की दहशत भी कुछ कम नहीं थी। वहीं छात्रों पर हुए हमले के विरोध में जमा हुए छात्रों, शिक्षकों, योगेंद्र यादव, एनी राजा जैसे नेताओं पर भी हमले किए गए थे। और दिल्ली पुलिस वहाँ भी खामोश खड़ी थी।

दहशत के बाद

छात्रों के लंबे समय तक चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने रात 12:30 बजे कैम्पस के दरवाज़े को खोला। वामपंथी छात्र संगठनों ने इसे अपनी जीत के रूप में देखा, और सब कैम्पस के अंदर के छात्रों को देखने गए। हम जब हॉस्टल के अंदर पहुंचे तो ऐसा नज़ारा था जो कभी देखा नहीं था। साबरमती हॉस्टल के दरवाज़े टूटे थे, हर जगह काँच बिखरा था। मेस में चावल गिरा हुआ था, एक छात्र ने बताया कि गुंडों ने हमला करने के लिए भगोने से चमचा भी उठा लिया था। हॉस्टल के अंदर कमरों के अंदर पत्थर बिखरे थे। मन में यही सवाल था कि क्या यह छात्रों के रहने की जगह है?

एक साल बीता, न्याय कहां है?

इस हमले के मामले में आज जब छात्र साबरमती के टी पॉइंट पर जमा हुए तब सबके मन में यही था कि कैम्पस की उस गुंडागर्दी को दोबारा न होने दिया जाये। आइशी घोष ने दक्षिणपंथी संगठनों और मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा, "5 जनवरी का हमला आख़िरी हमला नहीं था, यह लोग जामिया, एएमयू की हिंसा की तरह ही हिंसा करने की कोशिश करते रहेंगे। झूठे मामलों में फँसा कर विश्वविद्यालय को बदनाम करने की कोशिश करते रहेंगे। हमारे छात्रों, हमारे शिक्षकों और ख़ास तौर पर हमारे आंदोलन को बदनाम किया जाएगा। आज जब किसान बार्डर पर इतने दिनों से बैठे हुए हैं, उनको हम सलाम करना चाहेंगे। किसानों की लड़ाई या हमारी लड़ाई सिर्फ़ अकेले की लड़ाई नहीं है, यह देश को बचाने की लड़ाई है।"

Violence in JNU
January 5 Attack on JNU
JNU Students Attacked by ABVP
Attacks on Higher Education Institutions
ABVP Attacks JNU
delhi police
JNU Violence Investigation

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार किया, हरियाणा में रोका गया क़ाफ़िला

नफ़रती भाषण: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को ‘बेहतर हलफ़नामा’ दाख़िल करने का दिया निर्देश


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    'राम का नाम बदनाम ना करो'
    17 Apr 2022
    यह आराधना करने का नया तरीका है जो भक्तों ने, राम भक्तों ने नहीं, सरकार जी के भक्तों ने, योगी जी के भक्तों ने, बीजेपी के भक्तों ने ईजाद किया है।
  • फ़ाइल फ़ोटो- PTI
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?
    17 Apr 2022
    हर हफ़्ते की कुछ ज़रूरी ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन..
  • hate
    न्यूज़क्लिक टीम
    नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज
    16 Apr 2022
    देश भर में राम नवमी के मौक़े पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद जगह जगह प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में दिल्ली में जंतर मंतर पर नागरिक समाज के कई लोग इकट्ठा हुए. प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि सरकार हिंसा और…
  • hafte ki baaat
    न्यूज़क्लिक टीम
    अखिलेश भाजपा से क्यों नहीं लड़ सकते और उप-चुनाव के नतीजे
    16 Apr 2022
    भाजपा उत्तर प्रदेश को लेकर क्यों इस कदर आश्वस्त है? क्या अखिलेश यादव भी मायावती जी की तरह अब भाजपा से निकट भविष्य में कभी लड़ नहींं सकते? किस बात से वह भाजपा से खुलकर भिडना नहीं चाहते?
  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा
    16 Apr 2022
    देश में एक लोकसभा और चार विधानसभा चुनावों के नतीजे नए संकेत दे रहे हैं। चार अलग-अलग राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License