NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
जेएनयू छात्र प्रदर्शन : 'आने वाली पीढ़ियों पर भी होगा फ़ीस वृद्धि का असर'
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रदर्शनकारी छात्रों का सोमवार को परिसर के बाहर पुलिस के साथ संघर्ष हो गया। जेएनयू में फ़ीस बढ़ोतरी पर छात्र संगठनों ने सरकार-प्रशासन के ख़िलाफ़ पिछले 15 दिनों से मोर्चा खोला हुआ है।
मुकुंद झा
11 Nov 2019
JNU Protest

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रदर्शनकारी छात्रों का सोमवार को परिसर के बाहर पुलिस के साथ संघर्ष हो गया। जेएनयू में फ़ीस बढ़ोतरी पर छात्र संगठनों ने सरकार-प्रशासन के ख़िलाफ़ पिछले 15 दिनों से मोर्चा खोला हुआ है। जेएनयू छात्र संगठन के बैनर तले हो रहे विरोध प्रदर्शन में महंगी फ़ीस समेत कई मुद्दों को लेकर पर छात्र सड़कों पर हैं। छात्रों का कहना है कि 47 फ़ीसदी छात्र आर्थिक तौर पर कमज़ोर घरों से आते हैं। आज सोमवार की सुबह से शाम तक जेएनयू के छात्र डटे हैं और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कभी बल प्रयोग किया तो कभी वाटर कैनन चलाए लेकिन छात्र अभी भी प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि दिन भर के तनाव के शाम को छात्र कैम्पस वापस लौट गए हैं, लेकिन उनका कहना है कि उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों में कई ऐसे छात्र हैं, जो बेहद कमज़ोर आर्थिक परिवेश से आते हैं। सभी छात्रों ने एक स्वर में कहा है कि सरकार और जेएनयू प्रशासन नहीं चाहता कि किसान, मज़दूर और समाज के पिछड़े तबक़े के बच्चे जेएनयू जैसे संस्थानों में पढ़ें, इसलिए लगातार जेएनयू पर हमले किये जा रहे हैं। 

jnu1.PNG

जेएनयू से एमफ़िल कर रहीं छात्रा पूजा सिंह ने बताया, "पहले पुस्तकालय के फ़ंड में 80% की कमी की गई, फिर 90% तक सीट कम की गई, और अब फ़ीस में इतनी भारी वृद्धि की जा रही है। इसका क्या मतलब है? अगर आप फ़ीस बढ़ा रहे हैं तो हमारी फ़ेलोशिप भी बढ़नी चाहिए लेकिन वो नहीं बढ़ रही है।"

Capture_24.PNG

ऐसे ही एक छात्र लोकेन्द्र हैं, जो वर्तमान में जेएनयू से पीएचडी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने गांव के पहले ऐसे छात्र हैं, जो यहाँ तक पहुंच सके हैं। वो भी इसलिए क्योंकि जेएनयू में फ़ीस कम थी, लेकिन उन्हें अब लग रहा है शायद वो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि उनके परिवार के पास कोई खेत-ज़मीन नहीं है और उनका परिवार बड़ी मुश्किल से जीवनयापन कर रहा है। ऐसे में इतनी महंगी फ़ीस देना उनके लिए बेहद मुश्किल है।

jnu.PNG

संस्कृति शर्मा जो मध्य प्रदेश के सोपुरा ज़िले से हैं, वो अभी जेएनयू से एमफ़िल कर रही है। उन्होंने कहा कि वो अपने ज़िले से पहली ऐसी लड़की हैं जो जेएनयू तक आ पाई हैं। उन्होंने कहा कि वो इसलिए ही पढ़ पाईं क्योंकि उन्हें जेएनयू में दाख़िला मिला, अन्यथा वो पढ़ाई नहीं कर पातीं। क्योंकि उनके पिता किसान हैं और वो उनकी पढ़ाई का ख़र्च नहीं उठा सकते हैं, और उन्होंने जेएनयू आने के बाद से अपने पिता से कोई पैसा नहीं लिया लेकिन उन्हें अब यह फ़िक्र है कि इतने पैसों का इंतज़ाम कहाँ से होगा।

हमने जितने भी छात्रों से बात की सबने एक ही बात कही कि फ़ीस वृद्धि का यह फैसला वर्तमान के छात्रों को ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उच्च शिक्षा से बाहर कर देगा।

आज के विरोध का पूरा घटनाक्रम

सोमवार सुबह छात्रों ने एआईसीटीई ऑडिटोरियम पर विरोध प्रदर्शन किया जहां दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने आए मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को एआईसीटीई ऑडिटोरियम से क़रीब छह घंटे तक बाहर नहीं आने दिया गया और मंत्रालय में दो पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को रद्द करना पड़ा।

1_2.JPG

एक अधिकारी ने बताया कि ‘‘छात्रों के प्रदर्शन के कारण रमेश निशंक सुबह से काफ़ी देर तक एआईसीटीई ऑडिटोरियम से बाहर नहीं आ पाए हैं और मंत्रालय में दो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द करने पड़े।’’

जेएनयूएसयू अध्यक्ष ओइशी घोष और उपाध्यक्ष साकेत मून को मानव संसाधन विकास मंत्री के लिए रास्ता दिये जाने के लिए छात्रों से बात करने को कहा गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से द्वार से हटने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

बाद में जेएनयूएसयू के छात्र संघ के पदाधिकारियों ने एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मुलाक़ात की और उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गौर किया जायेगा। मंत्री दोपहर बाद ऑडिटोरियम से बाहर आ गये और शाम को एक अन्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया। निशंक को आज एक ऐप ‘‘स्वयं 2.0’’ जारी करना था लेकिन इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

2_3.JPG

ग़ौरतलब है कि जेएनयू के निकट बड़ी संख्या में छात्र फ़ीस वृद्धि, ड्रेस कोड जैसे दिशानिर्देश के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। छात्र इसे प्रशासन की ‘‘छात्र-विरोधी’’ नीति बताते हुए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की तरफ़ आगे बढ़ने चाहते थे लेकिन गेट पर अवरोधक लगा दिए गए थे। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू इस स्थान पर दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति हालांकि विरोध प्रदर्शन बढ़ने से पहले ही वहां से रवाना हो गए थे।

जेएनयू से लगभग तीन किलोमीटर दूर एआईसीटीई के द्वारों को बंद कर दिया गया और सुबह शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के मद्देनज़र परिसरों के बाहर सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया।

एक अधिकारी ने बताया कि जेएनयू परिसर के उत्तरी और पश्चिमी द्वारों के बाहर और बाबा बालकनाथ मार्ग पर एआईसीटीई ऑडिटोरियम और जेएनयू के बीच स्थित सड़क पर अवरोधक लगाये गये हैं।

3_1.JPG

पुलिस ने बताया कि छात्रों ने इन बैरिकेड को तोड़ दिया और सुबह लगभग साढ़े 11 बजे एआईसीटीई की तरफ़ मार्च करने लगे। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। छात्रों पर पानी की बौछारें भी की गईं।

हाथों में तख्तियां लेकर छात्रों ने ‘‘दिल्ली पुलिस वापस जाओ’’ जैसे नारे लगाये और कुलपति एम जगदीश कुमार के ख़िलाफ़ भी नारेबाज़ी की।

मंत्री छात्रों से मिले। हालांकि छात्रों की कुलपति से मुलाक़ात नहीं हो सकी।

प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे, ‘‘हम कुलपति से मिलना चाहते हैं।’’

छात्रसंघ अध्यक्ष ओइशी घोष ने कहा, ‘‘हमारे लिए यह ऐतिहासिक दिन है कि हमने बैरिकेड तोड़ दिये और कार्यक्रम स्थल पहुंचे और मंत्री से मुलाकात की। हमारा आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। हम एचआरडी मंत्री से अनुरोध करते हैं कि वे कुलपति से छात्रों से बातचीत करने को कहें।’’ 

एचआरडी मंत्री ने वादा किया कि छात्र संघ को बैठक के लिए मंत्रालय बुलाया जायेगा।

छात्रों ने बताया कि सुबह शुरू हुआ यह प्रदर्शन छात्रावास के मैनुअल के विरोध के अलावा पार्थसारथी रॉक्स में प्रवेश पर प्रशासन की पाबंदी तथा छात्र संघ के कार्यालय को बंद करने के प्रयास के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों का ही हिस्सा है।

छात्रों का कहना है, "हम 15 दिन से विरोध कर रहे हैं, लेकिन कुलपति हमसे बात करने को तैयार नहीं हैं। छात्रावास एवं अन्य फ़ीस में इतनी बढ़ी वृद्धि के बाद ग़रीब छात्र यहां कैसे पढ़ सकेगा।"

JNU
JNUSU
Student Protests
Fee Hike
MHRD
education system
AICTE
dress code

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे भर्ती मामला: बिहार से लेकर यूपी तक छात्र युवाओं का गुस्सा फूटा, पुलिस ने दिखाई बर्बरता

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र, अचानक सिलेबस बदले जाने से नाराज़


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: मुझे गर्व करने से अधिक नफ़रत करना आता है
    01 May 2022
    जब गर्व खोखला हो तो नफ़रत ही परिणाम होता है। पर नफ़रत किस से? नफ़रत उन सब से जो हिन्दू नहीं हैं। ….मैं हिंदू से भी नफ़रत करता हूं, अपने से नीची जाति के हिन्दू से। और नफ़रत पाता भी हूं, अपने से ऊंची…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    मई दिवस ज़िंदाबाद : कविताएं मेहनतकशों के नाम
    01 May 2022
    मई दिवस की इंक़लाबी तारीख़ पर इतवार की कविता में पढ़िए मेहनतकशों के नाम लिखी कविताएं।
  • इंद्रजीत सिंह
    मई दिवस: मज़दूर—किसान एकता का संदेश
    01 May 2022
    इस बार इस दिन की दो विशेष बातें उल्लेखनीय हैं। पहली यह कि  इस बार मई दिवस किसान आंदोलन की उस बेमिसाल जीत की पृष्ठभूमि में आया है जो किसान संगठनों की व्यापक एकता और देश के मज़दूर वर्ग की एकजुटता की…
  • भाषा
    अपने कर्तव्य का निर्वहन करते समय हमें लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखना चाहिए: प्रधान न्यायाधीश
    30 Apr 2022
    प्रधान न्यायाधीश ने मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन में कहा न्यायिक निर्देशों के बावजूद सरकारों द्वारा जानबूझकर निष्क्रियता दिखाना लोकतंत्र के स्वास्थ्य के…
  • भाषा
    जनरल मनोज पांडे ने थलसेना प्रमुख के तौर पर पदभार संभाला
    30 Apr 2022
    उप थलसेना प्रमुख के तौर पर सेवाएं दे चुके जनरल पांडे बल की इंजीनियर कोर से सेना प्रमुख बनने वाले पहले अधिकारी बन गए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License