NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
जेएनयू छात्रों का एमएचआरडी पर प्रदर्शन, आश्वासन की जगह लिखित समाधान की मांग
बढ़ी हुई फीस वापसी की मांग के साथ जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष के नेतृत्व में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को एमएचआरडी के अधिकारियों से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Nov 2019
JNU

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में फीस वृद्धि के खिलाफ छात्रों का 30वें दिन भी आंदोलन जारी है। जेएनयू छात्रसंघ ने आज, शुक्रवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग थी कि विश्वविद्यालय उचित ढंग से चले और इसके लिए बनी हाई पावर कमेटी की सिफारिशें सार्वजनिक की जाएं।

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष के नेतृत्व में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को एमएचआरडी के अधिकारियों से मुलाकात की अपना ज्ञापन एमएचआरडी के सचिव आर सुब्रमण्यम को सौंपा।

ज्ञापन में कई मांगें की गई हैं। मुख्य मांग वही है कि नए हॉस्टल मैन्यूल को वापस लिया जाए। इसके साथ ही मांग की गई है कि आंदोलन के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई है। इसलिए सेमेस्टर एग्ज़ाम की तारीखों को आगे बढ़ाया जाए। और आंदोलनकारी छात्रों पर लादे केस वापस किए जाएं।

1_8.JPG

मंत्रालय के अधिकारियों ने छात्रों से कहा कि वो उनकी मांगों को लेकर चर्चा कर रहे हैं और उनके हक़ में सकारात्मक हैं। इसलिए वे लोग अपनी हड़ताल को वापस लें और अपनी क्लास में वापस जाएं।

लेकिन छात्रसंघ ने साफ कहा कि एकबार फिर हमें सरकार की तरफ़ से आश्वासन दिया गया है, समाधान नहीं और जबतक समाधान नहीं होता तबतक यह हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि एमएचआरडी ने जेएनयू की बढ़ी हुई फीस के बाद से विश्वविद्यालय में  बढ़े तनाव को कम करने तथा विश्वविद्यालय में कामकाज सामान्य करने के लिये तीन सदस्यीय एक समिति गठित की थी। इसने अपनी रिपोर्ट मंगलवार को मंत्रालय को सौंप दी।

लेकिन जेएनयू के छात्रों का फीसवृद्धि के खिलाफ हुआ आंदोलन अभी नहीं थमा है। जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि एमएचआरडी के सूत्रों ने उन्हें कहा है कि फीस वृद्धि पूरी तरह वापस की जाएगी लेकिन हम चाहते हैं कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक कर हमें इसकी कॉपी दे, हम किसी भी तरह के मौखिक आश्वासन पर मनाने वाले नहीं है। इसके साथ ही जितने छात्रों पर आंदोलन के दौरान केस या कोई भी कार्रवाई हुई है उसे तत्काल वापस लिया जाए।

आइशी घोष ने कहा कि पिछले एक माह से ज्यादा का समय हो गया है, छात्र लगतार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन वीसी ने इस मामले में हमारे साथ कोई बातचीत नहीं की है। एमएचआरडी की ओर से बनाई गई हाईपावर कमेटी के सदस्यों ने भी इसको लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जेएनयू छात्र फिर से नई आईएचसी मीटिंग की मांग कर रहे हैं, जिसमें लोकतांत्रिक ढ़ंग से निर्णय लिए जाएं।

2_9.JPG

छात्रों का यह भी कहना है कि कैंपस का माहौल सामान्य नहीं हो पा रहा है। सभी छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं यहां कैंपस में पढ़ाई लिखाई का माहौल पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसको सामान्य करने के लिए वीसी या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर कोई कोशिश नहीं की जा रही है।

जेएनयू के उपाध्यक्ष साकेत मून ने कहा कि मंत्रालय कह रहा है कि जेएनयू के मामले में हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते लेकिन जेएनयू एक्ट में है कि देश के राष्ट्रपति हस्तक्षेप कर सकते हैं, इसलिए हमने सरकार को सोमवार तक समय दिया है कि रिपोर्ट सार्वजनिक हो। देश के राष्ट्रपति जब राष्ट्रपति शासन हटा सकते है तो हमरी रिपोर्ट पर भी हस्ताक्षर क्यों नहीं कर सकते हैं।

यहां आपको बता दें कि जेएनयू के एक्जीक्यूटिव काउंसिल (ईसी) की ओर से 13 नवंबर, 2019 को हॉस्टल के नए मैनुअल और हॉस्टल की बढ़ी हुई फीस को मंजूरी दे दी थी। उसके बाद से ही छात्र लगातर कैंपस और सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है। इसके बाद 27 नवंबर को प्रशासन ने हॉस्टल के कमरे ,सर्विस और यूटिलिटी फीस में भी आंशिक कमी करने का फैसला किया था। यह फैसला जेएनयू प्रशासन द्वारा बढ़ी फीस पर विचार करने के लिए बनाई गई हाई लेवल कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर किया गया था ।यह रिपोर्ट सोमवार को सौंपी गई ।

3_4.JPG

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया था कि छात्रों को सर्विस और यूटिलिटी शुल्क में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी, वहीं बीपीएल श्रेणी के छात्रों को 75 प्रतिशत छूट मिलेगी।

इससे पहले भी प्रशासन ने फीस वृद्धि के बाद छात्रों को आंशिक राहत देने का फैसला किया था। लेकिन छात्रों पर इन आंशिक कटौती का कोई असर नहीं हुआ वो अपनी एक ही मांग पर डटे हैं कि आंशिक नहीं संपूर्ण फीस वृद्धि की वापसी हो।

छात्रों ने कहा कि अब यह लड़ाई सिर्फ जेएनयू का नहीं देश की लड़ाई बन गई है। पूरा देश सस्ती और अच्छी शिक्षा के लिए सड़कों पर लड़ रहा है।

इसे भी पढ़े: सस्ती शिक्षा के लिए छात्रों का देशव्यापी प्रदर्शन, दिल्ली के कनॉट प्लेस में बनाई मानव श्रृंखला

JNU
JNU Fee Hike
JNUSU
JNUTA
SFI
AISA
DSF
AISF
Aishe Ghosh
MHRD
BJP

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • women in politics
    तृप्ता नारंग
    पंजाब की सियासत में महिलाएं आहिस्ता-आहिस्ता अपनी जगह बना रही हैं 
    31 Jan 2022
    जानकारों का मानना है कि अगर राजनीतिक दल महिला उम्मीदवारों को टिकट भी देते हैं, तो वे अपने परिवारों और समुदायों के समर्थन की कमी के कारण पीछे हट जाती हैं।
  • Indian Economy
    प्रभात पटनायक
    बजट की पूर्व-संध्या पर अर्थव्यवस्था की हालत
    31 Jan 2022
    इस समय ज़रूरत है, सरकार के ख़र्चे में बढ़ोतरी की। यह बढ़ोतरी मेहनतकश जनता के हाथों में सरकार की ओर से हस्तांतरण के रूप में होनी चाहिए और सार्वजनिक शिक्षा व सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हस्तांतरणों से…
  • Collective Security
    जॉन पी. रुएहल
    यह वक्त रूसी सैन्य गठबंधन को गंभीरता से लेने का क्यों है?
    31 Jan 2022
    कज़ाकिस्तान में सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO) का हस्तक्षेप क्षेत्रीय और दुनिया भर में बहुराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बदलाव का प्रतीक है।
  • strike
    रौनक छाबड़ा
    समझिए: क्या है नई श्रम संहिता, जिसे लाने का विचार कर रही है सरकार, क्यों हो रहा है विरोध
    31 Jan 2022
    श्रम संहिताओं पर हालिया विमर्श यह साफ़ करता है कि केंद्र सरकार अपनी मूल स्थिति से पलायन कर चुकी है। लेकिन इस पलायन का मज़दूर संघों के लिए क्या मतलब है, आइए जानने की कोशिश करते हैं। हालांकि उन्होंने…
  • mexico
    तान्या वाधवा
    पत्रकारों की हो रही हत्याओंं को लेकर मेक्सिको में आक्रोश
    31 Jan 2022
    तीन पत्रकारों की हत्या के बाद भड़की हिंसा और अपराधियों को सज़ा देने की मांग करते हुए मेक्सिको के 65 शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License