NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
विज्ञान
भारत
जामिया में छात्रों पर हमले से तनाव, विरोध में एकजुट हुए छात्र संगठन, माफ़ी और कार्रवाई की मांग
गंभीर घायल छात्र के एक दोस्त और जामिया के एक अन्य छात्र ने न्यूज़क्लिक को बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला विश्वविद्यालय के इतिहास में अभूतपूर्व था और प्रशासन पूरे प्रकरण पर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Oct 2019
jamia

दिल्ली : जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों के ऊपर हिंसा और बर्बरता से माहौल तनावपूर्ण हो गया है। छात्रों का कहना है कि मंगलवार को कैंपस में अज्ञात लोगों द्वारा उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिसमें कई छात्रों को चोट भी आई है, जिन्हें जामिया नगर के अंसारी स्वास्थ्य केंद्र में भेजा गया। एक छात्र की गंभीर हालत को देखते हुए होली  फैमिली अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है। जहां डॉक्टरों ने उन्हें लगातार अपनी निगरानी में रखा है।
गंभीर घायल छात्र का नाम शाह आलम है जो बीए (ऑनर्स ) राजनीति विज्ञान में पढ़ते हैं।  

PHOTO-2019-10-22-20-24-28.jpg
दरअसल छात्र यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में इज़रायल को पार्टनर बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं। छात्रों ने बताया कि  कैंपस में 5-6 अक्टूबर को  आयोजित ग्लोबल हेल्थ ज़ेनिथ कान्फ्लूअन्स, 2019 (Global Health Zenith Confluence 2019) नाम से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इज़रायल की भागीदारी के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ।  इसमे भाग लेने के कारण प्रशासन ने पांच छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। छात्र इसी के विरोध में 14 अक्टूबर से प्रदर्शन कर रहे थे।
आपको बता दें कि नयनतारा सहगल, निवेदिता मेनन और उमा चक्रवर्ती सहित कई प्रमुख हस्तियों ने इस कार्यक्रम का विरोध किया था।
गंभीर घायल शाह आलम के एक दोस्त और जामिया के एक अन्य छात्र ने न्यूज़क्लिक को बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला विश्वविद्यालय के इतिहास में अभूतपूर्व था और प्रशासन पूरे प्रकरण पर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
उन्होंने कहा, "प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को एक सप्ताह से अधिक समय के बाद भी पूरी न होने के कारण  दोपहर में कुलपति कार्यालय के घेराव का आह्वान किया। जिसके थोड़ी देर बाद ही छात्र कुलपति के  कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए, जहां उनके साथ कुछ अन्य लोगों ने दुर्व्यवहार किया।  ये लोग प्रशासन द्वारा भेजे गए थे। इससे नाराज होकर, प्रदर्शनकारियों ने उनका विरोध किया,जिसके बाद वे लोग पीछे हट गए। लेकिन जल्द ही बीस से तीस लोग बेल्ट और हाथों में लोहे के पंच जैसे हथियार से  लैस होकर हमारे पास आए और अंधाधुंध पिटाई शुरू कर दी। यहां तक कि महिला छात्र को भी नहीं बख्शा। प्रशासन को इसका जवाब देना चाहिए कि ये गुंडे कैंपस में कैसे घुसे जब पुलिस और सुरक्षा गार्ड भारी संख्या में मौजूद थे।

PHOTO-2019-10-22-20-24-24.jpg

सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल  हो रहे है ,जहां कुछ लोगों को छात्रों की पिटाई करते और छात्राओं को चिल्लाते हुए देखा जा सकता है।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) जामिया यूनिट के सचिव चंदन कुमार, जिन्हे इस हिंसा के दौरन चोट आई है। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि छात्र कारण बताओ नोटिस को लेकर कुलपति से मिलना चाहते थे। उन्होंने कहा, "एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में इजरायल की भागीदारी पर आपत्ति जताते हुए विरोध प्रदर्शन हुआ था। जिसमें प्रॉक्टर के कर्मचारियों द्वारा हिंसा में भाग लेने का आरोप लगते हुए  पांच छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया । यहां तक कि उनके माता-पिता को भी बुलाया गया है और संभावित कार्रवाई के बारे में धमकी दी गई । हम इन तथ्यों को कुलपति के पास लाना चाहते थे। यहां तक कि मौजूद सुरक्षा गार्ड पूरे प्रकरण के मूकदर्शक बने रहे और छात्रों की सुरक्षा नहीं की।

उन्होंने कहा, "छात्र समुदाय ने कक्षाओं का बहिष्कार करने का फैसला किया है । हमने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह का भी बहिष्कार करने का फैसला किया है।"

एसएफआई दिल्ली राज्य कमेटी ने जामिया  प्रशासन की निंदा की और कहा  यह परिसर में भय और दमन का माहौल पैदा करने का प्रयास  है। एसएफआई ने मांग की  है कि   प्रशासन छात्रों के साथ तुरंत बातचीत की प्रक्रिया शुरू करे, और छात्रों पर हमले के लिए माफी मांगे।  

छात्र संगठनों की संयुक्त कार्रवाई समिति के एक बयान में कहा गया है कि पूरा परिसर पुलिस छावनी में बदल गया है और परिसर और छात्रावासों में किसी को प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।  

इसमें आगे कहा गया है,  "यह जामिया, केवल एक विश्वविद्यालय का नाम नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता के दिनों से एक आंदोलन का नाम है। जब से यह  सरकार आई  है। तब से उन्होंने देश भर के विश्वविद्यालयों पर हमला करना शुरू कर दिया। 2016 में जामिया में हमने  हॉस्टल में दिल्ली पुलिस और आईबी द्वारा छापे देखे। हमने ब्लास्ट के आरोपी इंद्रेश कुमार को 2017 में इफ्तार के लिए विश्वविद्यालय में आते देखा। 2018 में, हमने  कला के छात्रों के विरोध में प्रशासन का रवैया देखा। इस साल,  2019 में,फासीवाद ने हमें अपना असली चेहरा दिखाया। छात्रों से हाथापाई  यहां तक कि महिला छात्रों पर क्रूरताओं को देखा और सहन किया। " 

 

Jamia Millia University
Indresh Kumar
All India Students Association
Global Health Zenith Confluence 2019
Holy Family Hospital

Related Stories


बाकी खबरें

  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,259 नए मामले, 35 मरीज़ों की मौत
    29 Mar 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 98.75 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 85 हज़ार 534 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • ब्रेंडा हास
    ऑस्कर थप्पड़ विवाद: विल स्मिथ को ज़बरदस्त ऑनलाइन प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा
    29 Mar 2022
    ऑस्कर विजेता विल स्मिथ के ऑस्कर अवॉर्ड्स में क्रिस रॉक को थप्पड़ जड़ने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गयी है। हालांकि, इस पर क़रीब-क़रीब सभी सहमत हैं कि किसी घटिया मज़ाक का जवाब हिंसा नहीं है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन
    29 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • तान्या वाधवा
    क्या चिली की प्रगतिशील सरकार बोलीविया की समुद्री पहुंच के रास्ते खोलेगी?
    29 Mar 2022
    बोलीविया के राष्ट्रपति लुइस एर्स ने कैलामा की लड़ाई के स्मरणोत्सव के मौके पर, चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक से चिली के पूर्व राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंदे के शब्दों की याद दिलाते हुए पूछा कि क्या…
  • रवि शंकर दुबे
    पंजाब के पूर्व विधायकों की पेंशन में कटौती, जानें हर राज्य के विधायकों की पेंशन
    29 Mar 2022
    आपके आसपास सरकार भले ही काम न करे, लेकिन चुने हुए विधायकों के आराम की पूरी व्यवस्था की जाती है, उनके रिटायर होने पर भी उनका पूरा ख़याल रखा जाता है। हालांकि पंजाब सरकार ने इसमें कटौती का फ़ैसला लिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License