NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
8 जनवरी बंदः 'राष्ट्रव्यापी क्रोध दिखाई देगा'
देशव्यापी बंद से दो दिन पहले ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने दिल्ली में आयोजित बैठक में कहा कि सरकार संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को सुधारने में नाकाम रही है।
सुमेधा पाल
07 Jan 2020
Translated by महेश कुमार
united nation

8 जनवरी को देशभर के श्रमिक राष्ट्रव्यापी बंद में शामिल होंगे। इसमें राज्य और केंद्र की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के श्रमिक भी शामिल होंगे। इस बंद का आह्वान दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने किया है जिसमें भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी}, ट्रेड यूनियन कोओरडीनेशन कमिटी (टीयूसीसी), सेल्फ एम्प्ल्याएड वूमेंस एसोसिएशन (एसईडब्ल्यूए), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (एआईसीसीटीयू), लेफ्ट प्रोग्रेसिव फ्रंट (एलपीएफ), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) शामिल है। इसके साथ विभिन्न क्षेत्रीय स्वतंत्र महासंघों ने भी इस बंद में शामिल होने का फैसला किया है। इस हड़ताल के साथ 175 से अधिक किसान संगठन, छात्रों के 60 संगठनों ने एकजुटता दिखाई है और ग्रामीण भारत बंद की घोषणा की है।

इस हड़ताल से दो दिन पहले यूनियनों के सभी प्रतिनिधि दिल्ली में यह बताने के लिए इकट्ठा हुए कि सरकार संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था से निपटने में विफल रही है और वह उल्टे सार्वजनिक उपक्रमों, प्राकृतिक संसाधनों और अन्य राष्ट्रीय संपत्तियों का या तो निजीकरण कर रही है या फिर उन्हें बेचने पर आमादा है जो कि राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय विकास के लिए हानिकारक है।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) की तरफ से अमरजीत कौर ने कहा कि “25 करोड़ लोग इस बंद में भाग लेंगे और 10 से 15 शहरों में पूरी तरह बंद रहेगा। अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर हड़ताल की जाएगी। हम सितंबर के महीने से जब पहली बार इस हड़ताल का आह्वान किया गया था तब से प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हमारा और मज़दूरों का अब इस सरकार में कोई विश्वास नहीं रह गया है, वह अब आम लोगों और छात्रों को निशाना बना रही हैं और केम्पसों में हिंसा का सहारा ले रही है ताकि लोग अपने ज्वलंत मुद्दों के बारे में न सोच सके, इसके खिलाफ लोगों में गुस्सा है और " देश का गुस्सा 8 जनवरी को जगज़ाहिर हो जाएगा।"

यूनियन के नेताओं ने 12 हवाई अड्डों के निजीकरण करने की कड़ी आलोचना की है। साथ ही उन्होंने बताया कि एयर इंडिया की 100 प्रतिशत बिक्री की तैयारी पहले ही हो चुकी है, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को बेचने का निर्णय भी लिया गया है, बीएसएनएल-एमटीएनएल के विलय की भी घोषणा की गई है और 93,600 दूरसंचार कर्मचारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के तहत अपनी नौकरी गंवा दी है।

ट्रेड यूनियनों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, '' रेलवे के निजीकरण के लिए तैयारी की जा रही है, प्लेटफार्मों की नीलामी जारी है, रेलवे की उत्पादन इकाइयों के निजीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं, लगभग 150 निजी रेल गाड़ियों को चलाने की योजना है। 49 डिफेंस प्रोडक्शन यूनिटों के निजीकरण के निर्णय को अभी कर्मचारियों की यूनियन के विरोध के कारण टाल दिया है, बैंकों का जबरन विलय किया जा रहा है, कोयले के साथ रक्षा, रेलवे, फार्मास्यूटिकल्स, पशुपालन, सुरक्षा सेवाओं, खुदरा व्यापार आदि के मामले में 100 प्रतिशत एफडीआई लाने के फैसले किए जा रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, सीटू के महासचिव तपन सेन ने कहा, “वर्तमान सरकार के कारनामों से देश की हालत ख़राब होने वाली है। पिछले 70 वर्षों में हमने जो कुछ बनाया है वह अब नष्ट हो रहा है और इसे गैर-औद्योगीकरण की ओर धकेला जा रहा है। खुद सरकार के सलाहकारों ने कहा है कि अर्थव्यवस्था बदतर स्थित में है। जबकि आर्थिक मंदी सरकार के एजेंडे में नहीं है, वे मीडिया और श्रमिकों पर नियंत्रण रखना चाहते हैं। किसान, युवा, छात्र, सभी सड़कों पर हैं।

उन्होंने कहा, "इसके अलावा, श्रम मंत्रालय 2 जनवरी 2020 को बैठक के दौरान श्रमिकों को उनकी मांगों पर आश्वासन देने में विफल रहा है। सरकार का रवैया मज़दूरों के प्रति उपेक्षा वाला है क्योंकि हम इसकी नीतियों और कार्यों से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते हैं। जुलाई 2015 में हुए भारतीय श्रम सम्मेलन के बाद से चार साल से ज़्यादा समय बीत गया लेकिन अब तक ये सम्मेलन नहीं हुआ है।”

ट्रेड यूनियनों ने 12-सूत्रीय मांग पत्र के जरिए मांग की है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सार्वजनिकरण किया जाए जिससे मूल्य-वृद्धि में कमी लाई जा सके और कमोडिटी बाजार में सट्टा व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के लिए तत्काल उपाय की भी मांग की हैं। रोज़गार पैदा करने के लिए ठोस उपाय की जाए और सभी बुनियादी श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामले में कड़े दंडात्मक उपाय करने की भी मांग की गई है, श्रमिकों के लिए सार्वजनिक सामाजिक सुरक्षा कवर, न्यूनतम मज़दूरी 21,000/- रुपये प्रति माह, केंद्र एवं राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश और उनकी बिक्री को बंद करना शामिल है। इसमें स्थायी काम में ठेकेदारी प्रथा को बंद करना और उसी काम के लिए मज़दूरों को अन्य लाभ के साथ समान वेतन देना आदि शामिल है।

निजी व सार्वजनिक क्षेत्र के मज़दूर वर्ग ने मोदी सरकार की अन्य नीतियों के साथ विनिवेश नीतियों के ख़िलाफ़ मज़़बूत लड़ाई लड़ी है। पिछले छह वर्षों में ऐतिहासिक तीन अखिल भारतीय हड़ताल की गई हैं, संसद के सामने महापड़ाव का आयोजन किया गया, कई उद्योग क्षेत्रों में कई हड़ताल और संघर्ष हुए हैं और किसान संघर्षों के साथ एकजुटता भी प्रकट की गई है। सभी ट्रेड यूनियनों (भाजपा/आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर) ने इन संघर्षों में एकता दिखाई है। इस बड़े पैमाने पर और एकजुट प्रतिरोध ने सरकार को कुछ मुद्दों पर सोचने के लिए मजबूर किया और यहां तक कि फिर से विचार करने को मजबूर किया है। लेकिन अन्य मुद्दों पर, सरकार अपनी मज़दूर विरोधी नीतियों के साथ आगे बढ़ी है।

मज़दूर विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ 8 जनवरी 2020 की हड़ताल मज़दूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष की तरफ बढ़ता हुआ कदम होगा। किसान भी ग्रामीण भारत बंद करेंगे और छात्र विश्वविद्यालय बंद करेंगे।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

January 8 Strike
National Strike
Workers Strike
general strike
minimum wage
Grameen Bandh
farmers protest
Modi government
Labour Laws
Anti Worker Policies
BJP RSS
disinvestment
Privatisation
Selling off PSUs

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • RSS
    न्यूज़क्लिक टीम
    "गाँधी के हत्यारे को RSS से दूर करने का प्रयास होगा फेल"
    21 Feb 2022
    1930 से लेकर 1940 तक देश में हुए उतार चढ़ाव ने ही गाँधी के मृत्यु की रचना रची और उस घटना की आज के भारत से सीधी प्रासंगिकता है। "गाँधी के हत्यारे की छवि को सुधारने की जो प्रक्रिया जारी है, वह कभी भी…
  • Scheme Workers
    न्यूज़क्लिक टीम
    अधिकारों की लड़ाई लड़ रही स्कीम वर्कर्स
    21 Feb 2022
    देश भर में तमाम स्कीम वर्कर्स यानी आंगनवाड़ी, आशा, मिड डे मील आदि केंद्र सरकार की स्कीमों में काम करने वाली महिलाएँ लम्बे समय से अपने अधिकारों के लिए सरकार से संघर्ष करती आ रही हैंI फ़िलहाल हरियाणा…
  • mamta
    भाषा
    छात्र नेता अनीश खान की मौत के मामले की जांच करेगी एसआईटी: ममता बनर्जी
    21 Feb 2022
    गृह विभाग का भी प्रभार संभाल रहीं ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईटी 15 दिनों के भीतर उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
  • DBC workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली : स्थाई पद की मांग को लेकर डीबीसी कर्मचारियों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
    21 Feb 2022
    हड़ताली कर्मचारियों ने साफ़ किया कि आम आदमी पार्टी हो या बीजेपी जो भी नगर निगम चुनाव से पहले उनके लिए काम करेगा उनका वोट उसी को जाएगा।
  • Colombia
    लौरातो रिवारा
    कोलंबिया में चुनाव : बदलाव की संभावना और चुनावी गारंटी की कमी
    21 Feb 2022
    कोलंबिया में आने वाले वक़्त में विधान परिषद और राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में यह देखा जाना बाक़ी है कि क्या लैटिन अमेरिका में सबसे पुराना लोकतंत्र हाल में हासिल की गई बेहद जटिल शांति को आगे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License