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साहित्य-संस्कृति
भारत
विशेष: एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाज़ें दो
गणतंत्र दिवस के मौके पर आइए सुनते हैं जावेद अख़्तर की नज़्म...जो हमें बता रही है कि किस तरह मुल्क में दो आवाज़ें हैं—एक जो प्यार सिखाती है, आगे बढ़ना सिखाती है और दूसरी जो नफ़रत बढ़ाती, एक-दूसरे को लड़ाती है। अब ये हम पर है कि हम इनमें से कौन सी आवाज़ सुनते हैं।
न्यूज़क्लिक डेस्क
26 Jan 2022
unity

एक हमारी और एक उनकी

मुल्क में हैं आवाज़ें दो

अब तुम पर है कौन सी तुम

आवाज़ सुनों तुम क्या मानो

 

हम कहते हैं जात धर्म से

इन्सा की पहचान ग़लत

वो कहते है सारे इंसा

एक है यह एलान ग़लत

 

हम कहते है नफ़रत का

जो हुक्म दे वो फ़रमान ग़लत

वो कहते है ये मानो तो

सारा हिन्दुस्तान ग़लत.

 

हम कहते है भूल के नफ़रत,

प्यार की कोई बात करो...

वो कहते है ख़ून ख़राबा

होता है तो होने दो.

 

एक हमारी और एक उनकी

मुल्क में हैं आवाज़ें दो.

अब तुम पर है कौन सी तुम

आवाज़ सुनो तुम क्या मानो.

 

हम कहते हैं इंसानों में

इंसानों से प्यार रहे

वो कहते है हाथों मे

त्रिशूल रहे तलवार रहे.

 

हम कहते हैं बेघर बेदर

लोगों को आबाद करो

वो कहते हैं भूले बिसरे

मंदिर मस्जिद याद करो

 

एक हमारी और एक उनकी

मुल्क में हैं आवाज़ें दो

अब तुम पर है कौन सी तुम

आवाज़ सुनो तुम क्या मानो.

 

 जावेद अख़्तर

republic day
73rd Republic Day
Javed Akhtar
nazm

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License