NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
झारखंड, बिहार: ज़ोरदार रहा देशव्यापी रेल चक्का जाम
पुलिस के जवानों का आज किसानों के प्रति सामान्य रवैया दर्शाता है कि देश की खेती-किसानी को कंपनी राज के हवाले किए जाने के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों से उन्हें भी हमदर्दी है।
अनिल अंशुमन
19 Feb 2021
देशव्यापी रेल चक्का जाम

“देखिए हम लोग भी किसान के ही बेटे हैं, लेकिन क्या करें, हमें भी तो ड्यूटी निभानी है, आप लोगों को जो भी करना है, शांति से कीजिए”, रेल पुलिस के एक जवान ने रेल चक्का जाम अभियान के लिए ट्रैक पर जमा आंदोलनकारियों से कहा और चुपचाप जाकर थोड़ी दूर खड़े अन्य जवानों के पास चला गया। 

झारखंड के बरकाकाना रेल क्षेत्र के भुरकुंडा में अभियान का नेतृत्व कर रहे अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता देवकी नन्दन ने बताया कि उक्त जवान का ऐसा कथन और व्यवहार इसके पूर्व के आंदोलनों में हम लोगों ने कभी नहीं देखा था। पहले तो किसी आंदोलन के तहत रेल की पटरियों पर खड़े होने से पहले ही पुलिस के जवान लठियाँ भाँजते हुए हमें हटा देते थे अथवा गिरफ्तार कर लिया जाता था। पुलिस के जवानों का आज सामान्य रवैया दर्शाता है कि देश की खेती-किसानी को कंपनी राज के हवाले किए जाने के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों से उन्हें भी हमदर्दी है।

ऐसा ही नज़ारा कमोबेस रांची के नामकोम, डाल्टनगंज (पलामू), हजारीबाग रोड, धनबाद के कुमारधुबी, कोडरमा के होरिडीह और गिरिडीह इत्यादि सभी जगहों पर देशव्यापी रेल चक्का जाम अभियान के दौरान देखने को मिला। जहां आंदोलन स्थल पर तैनात स्थानीय पुलिस से लेकर रेल पुलिस के निचले स्तर के अधिकारियों और जवानों ने रेल चक्का जाम करने आए आंदोलनकारियों के साथ कोई झड़प अथवा बल प्रयोग नहीं किया।

‘खेत हमारा, फसल हमारी, दाम तुम्हारा नहीं चलेगा’ के नारे के साथ उक्त सभी स्थानों पर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर देशव्यापी रेल चक्का जाम अभियान को सभी किसान संगठनों के सदस्यों ने रेल की पटरियों पर उतर कर पूरे जोशो खरोश के साथ सफल बनाया।

झारखंड प्रदेश के सभी वामपंथी दलों- भाकपा माले, सीपीएम, सीपीआई व मासस ने पूर्व में ही किसानों के इस अभियान से एकजुटता प्रदर्शित करते हुए अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। जिसके तहत राजधानी रांची से लेकर प्रदेश के कई स्थानों पर इन सभी दलों के नेता-कार्यकर्ता पूरी सक्रियता के साथ शामिल हुए। कई स्थानों पर आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में प्रतिवाद मार्च निकालकर रेलवे स्टेशनों पर धरना भी दिया गया। कोलियरी क्षेत्र कुमारधुबी में कई कोयला मजदूर व वाम संगठनों के जनवादी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लाइफ लाईन कहे जानेवाले धनबाद मण्डल के हावड़ा–दिल्ली ग्रैंड कॉर्ड में लाईन के स्टेशनों पर धरना देकर किसान आंदोलन से एकजुटता प्रदर्शित की। जिसे संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जब कई देशों की सरकारें कोरोना महामारी संक्रमण से जूझते हुए अपने नागरिकों की जानोमाल की हिफाज़त में जुटी हुई थीं, तब मोदी सरकार इस आपदा की आड़ में भी कोयला क्षेत्र व सभी सरकारी उपक्रमों को निजी मालिकों के हाथों में देने का रास्ता साफ कर देने के बाद अब नए कृषि क़ानूनों के जरिए इस क्षेत्र को भी निजी मालिकों के हाथों सौंपना चाहती है। एनएससी बोस जंक्शन गोमो स्टेशन से सीपीएम से जुड़े किसान संगठन के प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर शाम में छोड़ा गया। 

इसे भी पढ़ें:किसान आंदोलन: देश भर में 'रेल रोको' का दिखा व्यापक असर !

बिहार में मैट्रिक परीक्षा चलने के कारण किसानों के देशव्यापी रेल रोको अभियान को 2 बजे दिन से 4 बजे तक ही चलाया गया । किसानों के राष्ट्रीय संघर्ष समन्वय समिति में शामिल किसान संगठनों की प्रदेश ईकाइयों के अलावे वामपंथी दलों व कई सामाजिक जन संगठनों ने एकजुट होकर रेल रोको अभियान को सफल बनाया।

उन्नत किस्म के धान–चावल के लिए प्रसिद्ध रोहतास क्षेत्र के किसानों ने रोहतास स्टेशन भारी संख्या में रेल पटरियों पर उतरकर रेलें रोकीं।

दानापुर मंडल के दिल्ली–हावड़ा रेल मुख्य मार्ग के आरा स्टेशन पर युवा किसान नेता व माले केंद्रीय कमेटी सदस्य राजू यादव के नेतृत्व में आरा स्टेशन पर रेल पटरी जाम कर सासाराम–पटना इंटरसिटी ट्रेन को रोका गया था। राजधानी पटना स्थित मुख्य स्टेशन तथा सचिवालय हॉल्ट पर अखिल भारतीय किसान महासभा , बिहार राज्य किसान सभा, किसान खेत मजदूर संगठन व बिहार किसान सभा के नेताओं के नेतृत्व में अभियान चलकर स्टेशन परिसर में प्रतिवाद सभा की गयी। उत्तर बिहार के हाजीपुर व समस्तीपुर रेल मंडलों के दरभंगा, सीतामढ़ी, हाजीपुर, नरकटियागंज व समस्तीपुर समेत कई अन्य स्टेशनों पर कार्यक्रम हुए। मुजफ्फरपुर में किसान आंदोलन के समर्थन में पिछले कई दिनों से दिए जा रहे धरने पर RSS व बजरंग दल के गुंडों द्वारा किए गए हमले के खिलाफ दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर खुदिरम बोस स्मारक पार्क से प्रतिवाद मार्च निकालकर स्टेशन परिसर में सभा की गयी। इसके अलावा जहानाबाद , नवादा , बिहटा और बक्सर स्टेशनों पर भी रेल रोको अभियान चलाया गया।

उक्त सभी स्थलों के अभियानों से मोदी सरकार द्वारा किसान आंदोलन में फूट डालने की साज़िशों तथा सत्ता संचालित गोदी मीडिया के निरंतर दुष्प्रचार व किसान आंदोलन के नेताओं-पत्रकारों-सोशल एक्टिविस्टों पर फर्जी मुकदमे कर दमन किए जाने का तीखा विरोध किया गया। 

प्रदेश में सत्तासीन एनडीए सरकार समर्थक किसानों ने अपनी संकीर्ण वैचारिक राजनीतिक समझ के कारण अभी भी नए कृषि क़ानूनों के विरोध के सवाल पर चुप्पी साध रखी है। लेकिन किसान आंदोलन के समर्थन में पूरे प्रदेश में शामिल सभी वामपंथी दलों व किसान संगठनों के जारी अनवरत संघर्ष अभियान को मिल रहे आम लोगों के समर्थन का दायरा बढ़ता जा राहा है। जो विविध आन्दोलनात्मक कार्यक्रमों के दौरान स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

Jharkhand
Bihar
farmers protest
Farm bills 2020
MSP
rail roko andolan
Nationwide Protest
Samyukt Kisan Morcha

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता


बाकी खबरें

  • कोरोना और कॉलेज छात्राओं की घर वापसी
    राज कुमार
    कोरोना और कॉलेज छात्राओं की घर वापसी
    26 Aug 2021
    घर की चारदीवारी ने लड़कियों के व्यक्तित्व के साथ सदियों तक क्या किया है वो किसी से छिपा नहीं है। अब फिर से लड़कियां महामारी की वजह से घरों में बंद हो रही हैं।
  • क्रीमी लेयर को केवल आर्थिक आधार पर तय नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
    अजय कुमार
    क्रीमी लेयर को केवल आर्थिक आधार पर तय नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
    26 Aug 2021
    हरियाणा सरकार ने 17 अगस्त 2016 को क्रीमी लेयर के मानदंड से जुड़ी एक अधिसूचना जारी की थी। हरियाणा सरकार ने नियम बनाया कि जिनकी वार्षिक आय ₹6 लाख से अधिक होगी उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत क्रीमी लेयर…
  • नीरज चोपड़ा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मेरी टिप्पणियों को अपने गंदे एजेंडा को आगे बढ़ाने का माध्यम न बनायें : नीरज चोपड़ा
    26 Aug 2021
    ‘‘खेल हम सबको एकजुट होकर साथ रहना सिखाता है और कुछ भी टिप्पणी करने से पहले खेल के नियम जानना जरूरी होता है। मेरी हालिया टिप्पणी पर लोगों की कुछ प्रतिक्रियायें देखकर बहुत निराश हूं। ’’
  • राजस्थान के एक अफसर ने महिलाओं से स्वेच्छा से भूमि अधिकार छोड़ने को कहा
    द लीफ़लेट
    राजस्थान के एक अफसर ने महिलाओं से स्वेच्छा से भूमि अधिकार छोड़ने को कहा
    26 Aug 2021
    महिला संगठनों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विश्व बैंक के मुताबिक़ भारत में एकल महिला मुखिया वाले परिवार की वृद्धि दर 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है।
  • उच्चतम न्यायालय में नौ नए न्यायाधीश नियुक्त, न्यायमूर्ति नागरत्ना 2027 में बन सकती है पहली महिला प्रधान न्यायाधीश
    भाषा
    उच्चतम न्यायालय में नौ नए न्यायाधीश नियुक्त, न्यायमूर्ति नागरत्ना 2027 में बन सकती है पहली महिला प्रधान न्यायाधीश
    26 Aug 2021
    उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 34 हो सकती है और इस समय शीर्ष अदालत में 10 पद रिक्त हैं। आगामी दिनों में नए न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण करने के बाद शीर्ष अदालत में केवल एक रिक्त पद रह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License