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झारखण्ड – बिहार : बेतहाशा महंगाई के ख़िलाफ़ वाम दलों का विरोध पखवाड़ा, मोदी सरकार के पुतले जले 
वाम दलों ने सरकार से मांग की है कि आयकर के दायरे से बाहर परिवारों को 6 माह तक प्रति परिवार 7500 रु की आर्थिक सहायता देने तथा इन परिवारों के प्रति सदस्य 10 किलो अनाज के साथ साथ दाल, खाद्य तेल, चीनी व अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुएं मुहैया कराने की मांग उठायी है।
अनिल अंशुमन
21 Jun 2021
झारखण्ड – बिहार : बेतहाशा महंगाई के ख़िलाफ़ वाम दलों का विरोध पखवाड़ा, मोदी सरकार के पुतले जले 

कोविड महामारी आपदा से कराह रही जनता पर लगातार कमरतोड़ महंगाई थोपे जाने के खिलाफ देश के वामपंथी दलों द्वारा 16 जून से शुरू किये गए राष्ट्रव्यापी ‘महंगाई विरोधी पखवारा’ के तहत झारखण्ड और बिहार के विभिन्न जिला मुख्यालयों और इलाकों में भी आक्रोश प्रदर्शित किया गया।

राज्य के वाम दलों द्वारा जारी संयुक्त प्रेस बयान में कहा गया है कि एक ओर चावल, दाल, खाद्य तेल व सब्जी समेत सभी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में पांच गुना से भी अधिक वृद्धि किये जाने से मध्यम वर्ग तक का घरेलु बजट चरमरा गया है। गांवों से लेकर शहरों के गरीबों में भयावह भूखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है।  तो दूसरी ओर सरकार के संरक्षण में तमाम कालाबाजारी करने वाले इस मौके का खुलकर फायदा उठाकर जनता को धड़ल्ले से लूट रहें हैं। उत्पादकों को उनके उत्पाद का न्यूनतम मूल्य भी नहीं मिल रहा है। वहीं महामारी में सभी आवश्यक दवाओं की कालाबाजारी करने वालों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई करने की बजाय उन्हें बेलगाम छोड़ दिया गया है।

वाम दलों ने सरकार से यह भी मांग की है कि आयकर के दायरे से बाहर परिवारों को फिलहाल 6 माह तक प्रति परिवार 7500 रु की आर्थिक सहायता देने तथा इन परिवारों के प्रति सदस्य 10 किलो अनाज के साथ साथ दाल, खाद्य तेल, चीनी व अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुएं मुहैया कराने की मांग उठायी है। 16 जून से शुरू किये गए इस महंगाई विरोधी अभियान को गांव-गांव तक ले जाते हुए 30 जून को सभी जगहों पर मोदी सरकार का पुतला जलाकर स्थानीय जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को स्मार पत्र भेजा जाएगा।    

‘कोरोना संग महंगाई की मार,  चारों ओर हाहाकार, गद्दी छोड़ो मोदी सरकार’ नारे के साथ  16 जून को अभियान की शुरुआत करते हुए झारखण्ड की राजधानी रांची में भाकपा माले, सीपीएम, सीपीआई और मासस समेत कई अन्य जन संगठनों के नेताओं व कार्यकर्त्ताओं ने अलबर्ट एक्का चौका पर संयुक्त प्रतिवाद कार्यक्रम किया।  हजारीबाग में भाकपा प्रदेश सचिव एवं पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता के नेतृत्व में विरोध अभियान की शुरुआत की गयी। 

बगोदर में माले विधायक विनोद सिंह के नेतृत्व में बगोदर बस स्टैंड तक युवाओं का प्रतिवाद मार्च निकालकर मोदी सरकार का पुतला दहन किया गया। इसके अलावे गिरिडीह , कोडरमा, बोकारो, धनबाद, रामगढ़ से लेकर पलामू के पांकी व कई इलाकों के गांवों में जगह जगह महंगाई विरोधी मार्च निकाल कर मोदी सरकार का पुतला दहन किया गया। ‘पेट्रोल-डीजल समेत सभी आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की बढ़ी हुई कीमतें वापस लो’, ‘जनता झेले महंगाई की मार, मोदी सरकार है जिम्मेदार’ व ‘मोदी राज का देखो खेल 200 रु सरसों तेल’ इत्यादि नारे लिखे पोस्टरों के साथ कई स्थानों पर पोस्टर प्रतिवाद किये गए। इस दौरान ‘दाम बांधो काम दो, वरना गद्दी छोड़ दो‘ का नारा एक बार फिर से गुंजायमान होने लगा है। 

कोयलांचल धनबाद व बोकारो के कई कोलियरी इलाकों में कोयला मजदूर संगठनों ने  महंगाई विरोधी अभियान में व्यापक मजदूरों से शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा है कि मोदी सरकार ने कोयला क्षेत्र के व्यापक मजदूरों को झांसा दे कर वोट झटक लिया। अब कोयला क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपकर मजदूरों की रोजी-रोटी छीनने के साथ-साथ आसमाँ छूती महंगाई लाकर जीना भी दुर्भर करने पर आमादा है।

बिहार प्रदेश में सीपीआई , सीपीएम व भाकपा माले के अलावे फारवर्ड ब्लॉक और आरएसपी के कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार द्वारा थोपी गयी बेतहाशा महंगाई के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया। राजधानी पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, भोजपुर, बेगुसराय, गया व जहानाबाद इत्यादि कई जिलों व शहरों में महंगाई विरोधी मार्च निकाल कर मोदी सरकार का पुतला जलाया गया।

उक्त प्रतिवाद कार्यक्रमों में वामपंथी वक्ताओं ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि कोरोना माहामारी आपदा में लाखों अपनों की जानें गंवाकर असहाय हुए लोगों और भीषण आर्थिक क्षति से त्रस्त जनता को तत्काल कोई सहायता देने की बजाय जानलेवा महंगाई की दुहरी मार थोप रही है। पेट्रोल-डीजल समेत सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि कर आम जनता की रोजी रोटी पर भी भयंकर हमले कर रही है। ये मोदी सरकार की नीतियों की ही देन है कि कोरोना काल में भी अदानी व अंबानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों ने लोगों की मजबूरियों का फायदा उठाकर गाढ़ी कमाई लूटकर धनकुबेर बन रहें हैं। कल तक सस्ते में मिलनेवाला कश्मीरी सेव भी अब काफी महंगा मिलने लगा है क्योंकि लॉकडाउन बंदी के चलते तमाम सेव उत्पादक अपनी फसल बाहर नहीं भजे सके। उनकी इस मज़बूरी का फायदा उठाकर निजी कम्पनियां खरीद भाव गिराकर सेव उत्पादकों के सड़े सेव कौड़ी के मोल खरीद कर खुले बाज़ारों में लोगों से मनमाना दाम वसूल रहीं हैं। 

वाम दल आहूत महंगाई विरोधी अभियान में महामारी व महंगाई से त्रस्त आम जन कहाँ तक शामिल हो पाते हैं , देखने की बात होगी। लेकिन फिलहाल तो पेट्रोल डीजल मूल्य वृद्धि से आए दिन यात्रा और सामान ढोनेवाले वाहनों के किराए में हो रही बेतहाशा वृद्धि ने आम लोगों और तमाम छोटे दुकानदार-व्यवसायियों की कमर ही तोड़ दी है, जिसका नज़ारा ग्रामीण क्षेत्रों में लगनेवाले साप्ताहिक हाटों में साफ़ देखा जा सकता है। झारखण्ड के सुदूरवर्ती आदिवासी और पिछड़े इलाकों में स्थानीय लोगों और दुकानदारों के लिए साप्ताहिक हाट ही उनकी आय का मुख्या आधार है। अभी की मूल्य वृद्धि का सामना कैसे हो, ये किसी की समझ में ही नहीं आ रहा हैं। हाटों में ग्रामीणों को अपने सामानों का तो न्यूनतम रेट भी नहीं मिल रहा है, लेकिन उन्हें अपनी ज़रूरत की चीजों के कई गुना अधिक दाम देने पड़ रहें हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र खरसाँवाँ के कुचाई में लगने वाले साप्ताहिक हाट में सुगन मुंडा खुदरा रेडीमेड कपड़ों की दुकान लगाते हैं।  लॉकडाउन बंदी से पहले जैसे-तैसे उधारी कर के वे बड़ा बाज़ार से सामान ला कर कुछ आय कर लेते थे, लेकिन अभी की बंदी से खस्ताहाल लोगों के पास उतने पैसे ही नहीं रह गए हैं कि कोई उनसे कपड़ा खरीद सके। फलतः रोज़-रोज़ उधारी का तकाज़ा झेलने के साथ-साथ खुद के पारिवारिक खर्चे के भी लाले पड़ गए हैं।

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