NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
झारखंड: प्रवासी मज़दूरों को राज्य में रोज़गार मुहैया कराने की चुनौती!
झारखंड सरकार की ओर से मीडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दसियों लाख मज़दूर, छात्र व अन्य लोग दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। ऐसे में उनकी सही सलामत घरवापसी के बाद दोबारा पलायन से रोकना राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
अनिल अंशुमन
02 May 2020
jharkhand

ऐतिहासिक मई दिवस के दिन झारखंड की राजधानी रांची स्थित हटिया रेलवे स्टेशन जो लॉकडाउन के कारण पिछले एक माह से लगातार सन्नाटे में था, प्रदेश सरकार व रेल प्रशासन की तैयारियों से सरगर्म हो गया। लगभग रात ग्यारह बजे तेलंगाना से 1200 प्रवासी झारखंडी मजदूरों को लेकर आ रही विशेष ट्रेन के पहुँचते ही सारा अमला पूर्व नियोजित ढंग से सक्रिय हो उठा। निर्धारित दूरी का पालन करते हुए ट्रेन से उतर रहे सभी मजदूरों की प्राथमिक विशेष जांच उपरांत उन्हें स्टेशन परिसर में ही राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गयी बसों से उनके गंतव्य तक भेज दिया गया।

इस पूरी प्रक्रिया की देख रेख व आनेवाले मजदूरों की अगवानी के लिए राज्य के मुख्यमंत्री का खुद मौजूद होना, काफी चर्चा का विषय रहा। खबर यह भी है कि कोटा में फंसे राज्य के छात्रों को लाने का कार्य भी त्वरित गति से शुरू हो चुका है।
   
लॉकडाउन में फंसे झारखंड समेत उन सभी राज्यों के लाखों लाख प्रवासी मजदूरों की घर वापसी की अनुमति दिया जाना राहत की बात है। अब बाहर से आए सभी मजदूरों की महामारी संक्रमण के मद्देनज़र पूरी स्वास्थ्य जांच प्रक्रिया अपनाते हुए उनके गंतव्य तक सही सलामत पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती है घर वापस पहुंचने वाले इन सभी मजदूरों व उनके परिवार की रोज़ी रोटी के महासंकट का सम्मानजनक समुचित समाधान। जिसके लिए केंद्र की सरकार ने कोई विशेष गाइड लाईन नहीं जारी कर आपदा की इस घड़ी में भी सारा मामला राज्य सरकारों के मत्थे मढ़ कर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया है।
 
झारखंड सरकार की ओर से मीडिया द्वारा जारी आंकड़ों–अनुमानों के अनुसार दसियों लाख प्रवासी झारखंडी मजदूर, छात्र व अन्य लोग फंसे हुए हैं। जिनमें प्राप्त ताज़ा सूचनाओं में सबसे अधिक 1,00,500 गुजरात, 90 हज़ार महाराष्ट्र और 45 हज़ार तमिलनाडु, 17 हज़ार आंध्र प्रदेश, 35 हज़ार कर्नाटक, 26 हज़ार तेलंगाना, 16 हज़ार हरियाणा, 12 हज़ार दिल्ली के अलावे केरल, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम व बिहार इत्यादि राज्यों में फंसे प्रवासी झारखंडी मजदूर व छात्रों का डाटा जारी हुआ है। मुख्यमंत्री ने पहले चरण के तहत इनमें से तीन लाख लोगों को लाने की घोषणा करते हुए कहा है ज़रूरत पड़ी तो हवाई जहाज से भी लाएँगे।
 
झारखंड भाकपा माले विधायक विनोद सिंह ने प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के फैसले को मोदी सरकार का देर से उठाया गया कदम बताते हुए कहा है कि इसके बाद भी केंद्र सरकार समुचित परिवहन व्यवस्था का बोझ उठाने से भाग रही है जबकि देश के विभिन्न स्थानों पर लगातार यातनामय और अमानवीय स्थितियों को झेल रहें लोगों के लिए एक एक पल भारी हो गया है। झारखंड जैसे कम संसाधनों वाले राज्यों के लिए मजदूरों की वापसी प्रक्रिया पूरी करने में में काफी विलंब होगा और यातना झेल रहे मजदूरों–छात्रों की वापसी एक माखौल बनकर रह जाएगा।

korona mazdur 4.jpg

उन्होने आगे कहा कि इस आपदा काल में झारखंड को केंद्र सरकार द्वारा विशेष अपेक्षित आर्थिक सहयोग ना देना महामारी से लड़ाई को कमजोर ही करेगा। वर्तमान हालात को आपातकाल जैसी स्थिति बताते हुए उन्होंने लॉकडाऊन में फंसे लोगों की जल्द से जल्द वापसी तथा वापस आए सभी मजदूरों–परिवारों को तात्कालिक तौर से समुचित स्वास्थ्य और भोजन व्यवस्था के साथ साथ गांव में ही रोज़ी–रोजगार देने का ठोस वर्क प्लान बनाने की भी मांग की। इसके लिए राज्य सरकार को दिये अपने विशेष सुझाव में युद्ध स्तर पर राज्य- ज़िला स्तर पर अविलंब 24x7 कंट्रोल रूम बानने तथा सक्षम- जवाबदेह नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित कार्य करने पर भी ज़ोर दिया है।
 
चर्चा है कि प्रवासी मजदूरों की वापसी की घोषणा को लेकर प्रदेश भाजपा नेता–कार्यकर्त्ता अपनी पार्टी की केंद्र सरकार को श्रेय देने का राग अलापने लगे हैं। लेकिन सभी मजदूरों–छात्रों की वापसी व्यवस्था–खर्चा का जिम्मा राज्यों पर छोड़ने के सवाल पर सभी चुप्पी साध ले रहें हैं।
 
दूसरी ओर सोशल मीडिया में जारी चर्चाओं में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा रहा है कि मोदी सरकार की यह स्थायी फितरत बन गयी है कि जब–जब उसे जनता से कुछ लेना अथवा थोपना होता है तो एक देश, एक नियम की दुहाई दी जाती है। लेकिन बात जब जनता को कुछ भी देने की आती है तो फौरन उसका सारा ठीकरा राज्य सरकारों के मत्थे मढ़ दिया जाता है।
 
सोशल मीडिया की चर्चाओं में बाहर से वापस आने वाले सभी मजदूरों की समुचित स्वस्थ्य जांच और उनके व परिवार के भोजन तथा तत्काल रोजी–रोजगार व्यवस्था के मुद्दों को भी खूब उठाया जा रहा है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि सरकार प्रदेश में ऐसा औद्योगिक–आर्थिक वातावरण तैयार करे कि यहाँ के लोगों को रोजी रोटी के करे लिए बाहर पलायन करने की ज़रूरत ही ना पड़े।
 
उक्त संदर्भ में झारखंडी सामाजिक विशेषज्ञों का काफी पहले से ही स्पष्ट कहना रहा है कि वर्तमान से लेकर पूर्व की केंद्र सरकारों की झारखंड विरोधी नीति–कार्यक्रमों तथा उसी का अनुपालन करनेवाली राज्य की सरकारों के नकारात्मक रवैये के कारण ही अकूत प्रकृतिक – खनिज संपदाओं से भरे पूरे इस क्षेत्र के वासी आज प्रवासी बनाने को विवश हो गए हैं।

पलायन इस प्रदेश के लिए कैंसर बन चुका है। राज्य गठन के इन 19 वर्षों में भाजपा ही अकेली वो राजनीतिक पार्टी है जो सबसे अधिक समय तक इस प्रदेश की सत्ता में काबिज रही है। इस पार्टी की केंद्र सरकार, आलाकमान से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री–मंत्री–सांसद–विधायक रहे नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि उनके शासन ने झारखंड का कैसा विकास किया है कि आज भी यहाँ के लाखों निवासियों को दूसरे राज्यों में जाकर दिहाड़ी मजदूरी से दो जून कि रोटी जुटानी पड़ रही है?
 
वर्तमान के जारी लॉकडाउन से लोगों की चाहे जितनी फजीहत हो, लेकिन इसने केंद्र से लेकर सभी राज्यों की सरकारों के राज–काज की पूरी कलई भी खोल दी है। ऐसे में देखने की बात है कि मई दिवस से शुरू हुई प्रवासी झारखंडी मजदूरों के अपने गाँव– घर परिवार के बीच पहुँचने के बाद के हालात कैसे बनते हैं। खास तौर से वर्तमान की चुनौतीपूर्ण संकटों की स्थिति में जब वासी से प्रवासी मजदूर बने लोगों के पुनः वासी बनने की प्रक्रिया में केंद्र के साथ साथ राज्यों की सरकार–प्रशासन व खुद उनकी भूमिका कैसी रहती है .... ! 

Coronavirus
Lockdown
Migrant workers
migrants
Jharkhand
Jharkhand government
Hemant Soren
Central Government
Special Train
Special Bus
BJP
CPI

Related Stories

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

हैदराबाद: कबाड़ गोदाम में आग लगने से बिहार के 11 प्रवासी मज़दूरों की दर्दनाक मौत


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    राजेंद्र शर्मा
    ओये किसान, तू तो बड़ा चीटिंगबाज़ निकला!
    27 Nov 2021
    कटाक्ष: बेचारे मोदी जी को साल भर, जी हां पूरे साल भर, इसके सब्ज़बाग़ दिखाए कि बस, तीन कानूनों की वापसी की ही बात है। तीन कानून बस। इधर कानून वापस हुए और उधर बार्डर खाली, लेकिन...
  •  Prayagraj murder and rape case
    सोनिया यादव
    यूपी: प्रयागराज हत्या और बलात्कार कांड ने प्रदेश में दलितों-महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठाए सवाल!
    27 Nov 2021
    इस घटना के बाद एक बार विपक्ष खस्ता कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमलावर है, तो वहीं सरकार इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। हालांकि राज्य में एक के बाद एक घटित हो रही ऐसी घटनाएं सरकार के '…
  • ncrt
    गौरी आनंद
    ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए NCERT वेबसाइट पर डाली गई शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली को हटाया गया, LGBTQ+ समूहों ने किया विरोध
    27 Nov 2021
    700 से ज़्यादा लोगों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजा गया।
  • farming
    डॉ. ज्ञान सिंह
    किसानों की बदहाली दूर करने के लिए ढेर सारे जायज कदम उठाने होंगे! 
    27 Nov 2021
    केवल 3 कृषि कानूनों को वापस ले लेने से ही छोटे किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण कारीगरों की दुर्दशा में सुधार नहीं होने जा रहा है। भारी कर्ज और बेहद गरीबी में जी रहे किसानों की भलाई के लिए ढेर सारे…
  • poverty
    भरत डोगरा
    डेटा: ग़रीबी कम करने में नाकाम उच्च विकास दर
    27 Nov 2021
    सरकार को असमानता को कम करना चाहिए और जीडीपी विकास दर को बढ़ा-चढ़ा कर पेश नहीं करना चाहिए। ग़रीबों को कोने में धकेलते हुए उनकी क़ीमत पर, आय और पूंजी को चंद मुट्ठियों में जमा किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License