NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड: सोरेन सरकार के सामने क्या हैं चुनौतियां?
नई सरकार गठन के महज तीन घंटों के अंदर ही प्रदेश के नए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नवगठित कैबिनेट की बैठक बुला ली। इस बैठक में तत्काल फैसला लेते हुए पत्थलगड़ी अभियान में शामिल होने तथा सीएनटी/ एसपीटी एक्ट संशोधन का विरोध करने वालों पर पिछली सरकार द्वारा दर्ज़ सभी मुकदमे वापस लेने, महिला उत्पीड़न व यौन शोषण की सुनवाई के लिए हर ज़िले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की गई।
अनिल अंशुमन
03 Jan 2020
hemant soren
Image Courtesy: NDTV

झारखंड विधान सभा चुनाव 2019 के दौरान मीडिया से प्रचारित ‘वोट करें राज्य गढ़ें’ नारे को राज्य के मतदाताओं ने गंभीरता से लिया। उन्होंने नई सरकार बनाकर सचमुच में राज्य को नए सिरे से गढ़ने की चुनौती दे दी है। आपको बता दें कि 29 दिसंबर को राजधानी स्थित मोरहाबादी मैदान में भारी तादाद में लोगों की उपस्थित में हेमंत सोरेन ने शपथ लिया था।

सबसे अहम रहा कि नई सरकार गठन के महज तीन घंटों के अंदर ही प्रदेश के नए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नवगठित कैबिनेट की बैठक बुला ली। इस बैठक में तत्काल फैसला लेते हुए पत्थलगड़ी अभियान में शामिल होने तथा सीएनटी/ एसपीटी एक्ट संशोधन का विरोध करने वालों पर पिछली सरकार द्वारा दर्ज़ सभी मुकदमे वापस लेने, महिला उत्पीड़न व यौन शोषण की सुनवाई के लिए हर ज़िले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की गई। साथ ही राज्य के सभी पारा शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका व पेन्शनधारियों के बकाए की राशि के भुगतान करने और झारखंड सरकार के प्रतीक चिन्ह को बदलने का भी निर्णय लिया गया।

सरकार के इस त्वरित फैसले पर जहां राज्य के हर कोने से लोगों ने नई सरकार को बधाई दी वहीं पिछली भाजपा सरकार के राज्य दमन के शिकार हुए आंदोलनकारी और विशेषकर ग्रामीण आदिवासियों ने राहत की सांस ली।

हालांकि शपथग्रहण से एक दिन पहले मीडिया को दिये विशेष साक्षात्कार में हेमंत सोरेन ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं के संदर्भ में उक्त फैसलों की ही दिशा में कहा था कि सिर्फ कोई एक प्राथमिकता तय करने की बात नहीं है। ब्रांड–विजन और बड़े विचार के साथ आगे बढ़ना होगा। जिसके लिए मैं खुद को भी मानसिक रूप से तैयार कर रहा हूँ। हरेक काम पर सरकार की निगाह रहेगी और हम लोगों का काम होर्डिंग्स–बैनर और अखबारों में कम, लोगों के चेहरे पर ज़्यादा दिखेगा।

जल–जंगल–ज़मीन, सीएनटी/एसपीटी/ पत्थलगड़ी से जुड़े मामलों पर उनकी सरकार जन भावना के अनुरूप काम करेगी। सड़क पर महिलाएं अब दारू– हँड़िया नहीं बेचेंगी, उन्हें रोजगार से जोड़ा जाएगा। शहीदों के परिजनों से लेकर राज्य के सभी खिलाड़ियों तक को रोजगार से जोड़ा जाएगा। जल्द ही पूरे देश में झारखंड की एक अलग पहचान बनेगी .... इत्यादि।  

संभवतः ये पहला अवसर था जब 2014–2019 के बाद 29 दिसंबर के दिन नई सरकार के शपथग्रहण समारोह के मंच पर सभी प्रमुख विपक्षी दलों के राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का एकसाथ जुटान हुआ हो। जिसमें एक दिन पहले ही पहुंची पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के अलावा राजस्थान व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी विशेष रूप से शामिल हुए। इसके अलावा राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव, सीपीएम के सीताराम येचुरी व सीपीआई के डी राजा समेत कई अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेतागण भी शामिल हुए।

दिलचस्प पहलू ये है कि नई सरकार के सुझाव से इस बार गठित हुई विधान सभा का पहला सत्र इसके पुराने भवन में ही 6 से 8 जनवरी तक आहूत होगा। जिसमें नए विधायकों का शपथग्रहण और राज्यपाल का अभिभाषण कार्यक्रम होगा। इस सत्र के प्रोटेम स्पीकर वरिष्ठ झामुमो नेता व विधायक स्टीफन मरांडी होंगे। इस बार एक और नयी बात हुई कि हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनते ही झारखंड देश का पहला ऐसा प्रदेश बन गया जिसके राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ही आदिवासी (संथाल आदिवासी) हैं।

हेमंत सरकार के गठन की संभावना बनते ही राज्य की सोशल मीडिया में जो मुद्दा सबसे अधिक वायरल हुआ वो था– पत्थलगड़ी मामले में पिछली भाजपा सरकार द्वारा थोपे गए हजारों निर्दोष आदिवासियों पर देशद्रोह के मुकदमे की फौरन वापसी की मांग करते हुए आदिवासियों पर हो रहे भीषण राज्य दमन पर रोक लगाने की अपील की गयी थी। नयी सरकार ने शपथग्रहण के तत्काल बाद ही उस पर फैसला ले लिया।

हेमंत सरकार के वरिष्ठ मंत्री और देश के जनजातीय मामलों के विभाग के पूर्व अध्यक्ष रहे डा. रामेश्वर उरांव ने तो मंत्रीपद की शपथ लेने के दूसरे ही दिन प्रेस वार्ता बुलाकर साफ तौर पर कह दिया कि झारखंड का जिस आदिवासी समाज के लोगों ने देश की आज़ादी में बढ़ चढ़कर भाग लिया और अनगिनत कुर्बानियाँ दीं, वे देशद्रोही हो ही नहीं सकते।

प्रधानमंत्री ने रविवार को हेमंत सोरेन को बधाई देते हुए केंद्र की ओर से राज्य के विकास के लिए बधाई देते हुए हर संभव सहायता दिये जाने का आश्वशन दिया है। केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने भी अपने मंत्रालय की ओर से अपेक्षित सहयोग देने का वादा किया है । जबकि कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पत्र लिखकर हेमंत सरकार को बधाई देते हुए विकास की गतिशीलता को बहाल करने पर ज़ोर दिया है।
     
मीडिया से जारी बयान में हेमंत सोरेन व उनके साथी मंत्रियों ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि झारखंड में एनआरसी व CAA नहीं लागू होने दिया जाएगा। झारखंड राज्य की परिकल्पना के अनुरूप काम करने का समय आ गया है। पत्थलगड़ी मामले पर हेमंत सरकार के फैसले ने गेंद अब राज्य की हाईकोर्ट के पाले में डाल दिया है जो काफी दिलचस्प है। क्योंकि हेमंत सरकार केस वापसी के लिए हाईकोर्ट में तो आवेदन देगी तो कोर्ट उसे मान ही लेगा ये ज़रूरी नहीं है। केस के गुण–दोष के आधार पर ही कोर्ट उस पर निर्णय देगा। इसलिए अब सबकी निगाहें माननीय हाईकोर्ट की ओर ही लगी हुई है।

दूसरी ओर सोमवार को हेमंत सोरेन ने यह भी घोषणा की है कि पूर्व की सरकार उनकी सरकार के लिए क्या सौंप कर गयी है तथा राज्य की वित्तीय स्थिति समेत अन्य सभी मामलों पर उनकी सरकार श्वेत–पत्र जारी करेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कैबिनेट की पहली बैठक के फैसले से पता चल गया होगा हमारा रुख क्या है!

निस्संदेह अबुआ दिशुम अबुआ राज का नारा लंबे समय से आदिवासी समाज का सर्वप्रिय नारा रहा है। माना जाता है कि संथाल–हूल से इसकी उत्पत्ति हुई थी। लेकिन आज के समकालीन संदर्भों में यह किस प्रकार से साकार किया जा सकेगा नयी सरकार के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण कार्यभार है। खासकर तब जब हम सब चाहे अनचाहे एक ग्लोबल आर्थिक चेन में आबद्ध होकर चल रहें हैं तो ऐसे में जनआकांक्षाएँ लोकल हो ही सकती हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें भी एक व्यापक फ़लक पर ले जाना ज़रूरी है। तभी हमारी संवैधानिक मान्यताओं के वास्तविक लोकतान्त्रिक परंपरा की स्थापना हो सकेगी। साथ ही सबसे बढ़कर आज जिस संविधान को बचाने की जंग लड़ी जा रही है, उसकी भी मर्यादाओं की स्थापना हो सकेगी ..... !  

Jharkhand
Jharkhand government
Hemant Soren
Soren Sarkar
Soren Government
Challenges of Soren government
Jharkhand aadiwasi
BJP
Narendra modi
Congress
JMM
AJSU

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Hijab controversy
    भाषा
    हिजाब विवाद: बेंगलुरु के कॉलेज ने सिख लड़की को पगड़ी हटाने को कहा
    24 Feb 2022
    सूत्रों के अनुसार, लड़की के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी पगड़ी नहीं हटायेगी और वे कानूनी राय ले रहे हैं, क्योंकि उच्च न्यायालय और सरकार के आदेश में सिख पगड़ी का उल्लेख नहीं है।
  • up elections
    असद रिज़वी
    लखनऊ में रोज़गार, महंगाई, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन रहे मतदाताओं के लिए बड़े मुद्दे
    24 Feb 2022
    लखनऊ में मतदाओं ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर वोट डाले। सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली बड़ा मुद्दा था। वहीं कोविड-19 प्रबंधन, कोविड-19 मुफ्त टीका,  मुफ्त अनाज वितरण पर लोगों की अलग-अलग…
  • M.G. Devasahayam
    सतीश भारतीय
    लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजाकर करती एम.जी देवसहायम की किताब ‘‘चुनावी लोकतंत्र‘‘
    24 Feb 2022
    ‘‘चुनावी लोकतंत्र?‘‘ किताब बताती है कि कैसे चुनावी प्रक्रियाओं की सत्यता को नष्ट करने के व्यवस्थित प्रयासों में तेजी आयी है और कैसे इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • Salempur
    विजय विनीत
    यूपी इलेक्शनः सलेमपुर में इस बार नहीं है मोदी लहर, मुकाबला मंडल-कमंडल के बीच होगा 
    24 Feb 2022
    देवरिया जिले की सलेमपुर सीट पर शहर और गावों के वोटर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। कोविड के दौर में योगी सरकार के दावे अपनी जगह है, लेकिन लोगों को याद है कि ऑक्सीजन की कमी और इलाज के अभाव में न जाने कितनों…
  • Inequality
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक असमानता: पूंजीवाद बनाम समाजवाद
    24 Feb 2022
    पूंजीवादी उत्पादन पद्धति के चलते पैदा हुई असमानता मानव इतिहास में अब तक पैदा हुई किसी भी असमानता के मुकाबले सबसे अधिक गहरी असमानता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License