NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखण्ड : आदिवासी पुलिस अधिकारी रूपा तिर्की की मौत पर सरकार की चुप्पी, जनता में बढ़ता आक्रोश
“मामला पुलिस विभाग के अंदर का होने से पुलिस खुद एक पार्टी बन गयी है। इसलिए इसमें पुलिस जांच रिपोर्ट की कोई कानूनी वैधता नहीं बनती। सरकार को अविलंब स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दे कर इंसाफ के प्रयास करने चाहिए।”
अनिल अंशुमन
04 Jun 2021
झारखण्ड : आदिवासी पुलिस अधिकारी रूपा तिर्की की मौत पर सरकार की चुप्पी, जनता में बढ़ता आक्रोश

झारखण्ड प्रदेश में कोरोना माहामारी संक्रमण की रफ़्तार तो घट रही है लेकिन युवा आदिवासी पुलिस अधिकारी रूपा तिर्की की मौत के मामले पर हेमंत सोरेन सरकार की लगातार चुप्पी से बढ़ता जनाक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है।

प्रदेश कि सरकार द्वारा लॉकडाउन बंदी में थोड़ी ढिलाई की घोषणा होते ही ‘जस्टिस फॉर रूपा तिर्की’  का अभियान अब सड़कों पर बढ़ने लगा है। 

3 जून को राजधानी की हृदयस्थली अलबर्ट एक्का चौक पर ऐपवा व कई अन्य महिला संगठनों समेत दर्जनों आदिवासी सामाजिक जन संगठनों की महिलाओं और युवाओं ने ‘रूपा तिर्की को न्याय दो’ लिखे पोस्टरों के साथ रोषपूर्ण मानव श्रृंखला बनाकर प्रतिवाद प्रदर्शित किया।

इसके पहले 2 जून को भी वामपंथी महिला संगठन ऐपवा ने रूपा तिर्की की मौत को संस्थानिक हत्या काण्ड करार देते हुए मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग को लेकर पूरे प्रदेश में प्रतिवाद दिवस मनाया। 

ऐपवा झारखण्ड प्रदेश अध्यक्ष गीता मंडल ने सरकार को प्रेषित ज्ञापन के जरिये इस मामले में हेमंत सोरेन सरकार की लगातार चुप्पी पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि रूपा तिर्की के इंसाफ का मुद्दा पूरे प्रदेश का एक गंभीर मसला बन गया है। सरकार की चुप्पी कांड के दोषियों को संरक्षण देने का काम कर रही है। राज्य महिला आयोग भी चुप बैठा हुआ है। ऐपवा का कहना है कि सरकार ज़ल्द से ज़ल्द इस संवेदनशील मसले पर त्वरित संज्ञान ले और न्यायिक जांच कराकर दोषियों को सज़ा दे ताकि रूपा तिर्की के परिजनों को इंसाफ मिल सके। 

3 जून को मानव श्रंखला में शामिल आदिवासी छात्र संघ समेत दर्जनों आदिवासी सामाजिक जन संगठनों के युवा इस बात से ज्यादा आक्रोशित हैं कि रूपा तिर्की हत्याकांड मामले के एक महीना बीत जाने के बाद भी प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री चुप हैं। हत्या कांड के दिन से ही मामले की सीबीआई जांच कराये जाने की मांग को लेकर रूपा तिर्की के परिजन और उनके इलाके के आदिवासी समेत पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज के लोग इस कोरोना लॉकडाउन बंदी के बीच भी हर दिन सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर इंसाफ की गुहार लगा रहें हैं। 

अपनी होनहार बहादुर बेटी की अकाल मौत से आहत रूपा तिर्की का समूचा परिवार इस प्रकरण में मामले की जांच कर रही पुलिस की भूमिका पर शुरू से ही संदेह और सवाल उठाते हुए केस की लीपापोती कर असली गुनाहगारों को बचाने का आरोप लगा रहें हैं। इंसाफ के लिए सीबीआइ जाँच की मांग को लेकर झारखण्ड हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाते हुए याचिका भी दायर कर रखी है। 

वरिष्ठ आन्दोलनकारी दयामनी बारला ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रूपा तिर्की की मौत से पर्दा हटाने का आग्रह करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। झारखण्ड प्रदेश के आदिवासी समुदाय को न्याय पहलू पर ध्यान दिलाते हुए यह भी कहा है कि झारखण्ड अलग राज्य की लड़ाई लड़ते समय हम लोगों ने सपना देखा था कि राज्य बनेगा तो हमारी बहु-बेटियों को इज्जत व सम्मान से जीने का अवसर मिलेगा। लेकिन आज हमारे सपने तो हाशिये पर धकेल ही दिए गए हैं, बहु बेटियों पर चौतरफा हमला बढ़ गया है। जब रूपा तिर्की के परिजन अपनी बहादुर बेटी की मौत को आत्महत्या नहीं ह्त्या बता रहें हैं और सरकार से लगातार सीबीआई जाँच की मांग कर रहें तो सरकार की चुप्पी काफी दुखद है।

सनद रहे कि पुलिस महकमा और एसआई रूपा तिर्की के कार्यक्षेत्र साहेबगंज पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट में पुरे मामले को प्रेम-प्रसंग से जुड़ी आत्महत्या करार दे रही है। प्रदेश के आईजी ने भी साहेबगंज पुलिस के स्टैंड को ही सही ठहराया है। 

रूपा तिर्की के परिजन समेत कई आदिवासी संगठनों के लोग रूपा तिर्की के शव और मौत वाले कमरे की वायरल तस्वीरों को अहम् साक्ष्य मानकर पुलिस जांच रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर रहें हैं।

ऑल इंडिया पीपल्स फोरम समेत कई नागरिक अधिकार संगठन के प्रतिनिधियों का भी कहना है कि मामला पुलिस विभाग के अन्दर का होने से पुलिस खुद एक पार्टी बन गयी है। इसलिए इसमें पुलिस जांच रिपोर्ट की कोई कानूनी वैधता नहीं बनती। सरकार को अविलंब स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दे कर इंसाफ के प्रयास करने चाहिए। 

यह मामला अब सियासी रंग लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच जारी आरोप प्रत्यारोपों की जुबानी तकरार बन गया है। विपक्षी दल प्रदेश भाजपा इसे सर्वप्रधान मुद्दा बनाकर सरकार को लगातार घेरते हुए कांड के आरोपी सत्ताधारी दल झामुमो के स्थानीय रसूखदार विधायक प्रतिनिधि को बचाने का आरोप लगा रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत अपने सभी आदिवासी नेताओं व कार्यकर्ताओं को इस जंग में उतार दिया है।

सत्ता पक्ष के नेताओं का आरोप है कि कोरोना महामारी में अपनी केंद्र सरकार की विफलताओं और झारखण्ड सरकार के साथ उपेक्षापूर्ण रवैये से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ही यह विरोध प्रपंच किया जा रहा है। रूपा तिर्की को इंसाफ का नारा लगाने वाले यही भाजपा के लोग जब पिछले दिनों ओरमांझी जंगल से एक युवती की नग्न लाश मिली तो झारखण्ड की बेटी को इंसाफ दो का नारा लगाते हुए मुख्यमंत्री के काफिले पर हमला बोला था। लेकिन जैसे ही यह सच सामने आया कि उक्त मृतिका एक मुस्लिम है तो इनका सारा उग्र विरोध तुरंत गायब हो गया। 

3 जून को सत्ताधारी दल झामुमो प्रवक्ता ने बयान दिया है कि रूपा तिर्की मौत मामले पर एसआईटी जांच चल रही है, यदि ज़रूरत हुई तो हम सीबीआई जांच के लिए भी जायेंगे। 

आदिवासी मामलों के कई जानकारों के अनुसार रूपा तिर्की के इंसाफ के सवाल पर पूरे प्रदेश के आदिवासी समुदाय में बढ़ते विरोध का एक बड़ा कारण यह भी है कि हेमंत सोरेन सरकार के काम काज से उनकी उम्मीदें अब टूट रहीं हैं। हेमंत है तो हिम्मत है का नारा उनके विश्वासों पर खरा नहीं उतर पा रहा है क्योंकि सरकार ने अभी तक ऐसा कोई ज़मीनी काम नहीं किया है जो राज्य गठन से लेकर आज तक अपने ही प्रदेश में हाशिये पर धकेल दिए गए आदिवासी समुदाय के लोगों की सम्मानजनक हैसियत को बहाल कर सके। यह भी आरोप है कि पिछली भाजपा सरकार ने जो आदिवासी विरोधी ‘लैंड बैंक’ कानून बनाया था उसे निरस्त करने की बजाय इस सरकार ने आदिवासी विरोधी ‘लैंडपुल’ नीति थोप दी है।    

कहा जाए तो उक्त सन्दर्भों में आज रूपा तिर्की के इंसाफ का सवाल, जो इस कोरोना महामारी की आपद स्थिति में भी दिनों-दिन व्यापक जन विरोध का रूप लेता जा रहा है। अब यह और ज़रुरी हो गया है कि समय रहते हेमंत सोरेन आदिवासियों का भरोसा टूटने न दें। 

Jharkhand
Jharkhand government
Rupa Tirkey
AIPWA
Hemant Soren
Adiwasi Protest

Related Stories

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण


बाकी खबरें

  • election
    सुबोध वर्मा
    यूपी चुनाव के मिथक और उनकी हक़ीक़त
    14 Mar 2022
    क्या ये कल्याणकारी योजनाएं थीं? या हिंदुत्व था? और बीजेपी ने चुनावों पर कितना पैसा ख़र्च किया?
  • Plural Democracy
    सहबा हुसैन
    दबाये जाने की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत का बहुलतावादी लोकतंत्र बचा रहेगा: ज़ोया हसन
    14 Mar 2022
    जानी-मानी राजनीतिक वैज्ञानिक ज़ोया हसन का कहना है कि पिछले कुछ सालों से कई समूहों और सार्वजनिक विरोधों से बड़े पैमाने पर जो प्रतिक्रियायें सामने आयी हैं, वे बहुमत के शासन की कमी और हमारे लोकतंत्र को…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में लगातार कम हो रहा कोरोना, पिछले 24 घंटों में 2,503 नए मामले सामने आए
    14 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.08 फ़ीसदी यानी 36 हज़ार 168 हो गयी है।
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव : 70 सालों से चल रहे चुनावों में कैसे भाग लिया है जनता ने?
    13 Mar 2022
    हाल ही में 5 राज्यों में #Elections ख़त्म हुए हैं। आखिर कैसे देश में हो रहे हैं चुनाव? क्या है जनता की भागीदारी ? इन्ही सवालों का जवाब ढूंढ रहे हैं नीलांजन और सलिल मिश्रा
  • bjp
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या BJP के अलावा कोई विकल्प नहीं ?
    13 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से पांच राज्यों के चुनाव के बाद की स्थिति के बारे में चर्चा की | क्या BJP के सिवा जनता के पास कोई विकल्प नहीं है? क्या Narendra Modi की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License