NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड: स्वास्थ्य विभाग का नया ‘संकल्प पत्र, सरकारी ब्लड बैंकों से नहीं मिलेगा निःशुल्क ख़ून, स्वास्थ्य जन संगठनों ने किया विरोध
राजधानी रांची स्थित रिम्स और सदर अस्पताल में लोगों को पैसों से ब्लड मिल रहा है। बीपीएल व आयुष्मान कार्ड धारकों को छोड़ किसी भी गरीब-लाचार अथवा धनवान व्यक्ति को समान रूप से प्रदेश के किसी भी सरकारी ब्लड बैंक से खून लेने के लिए प्रति यूनिट 1050 रुपये देने होंगे।
अनिल अंशुमन
06 Dec 2021
jharkhand

झारखंड राज्य में पिछले कई वर्षों से आम लोगों को सरकारी ब्लड बैंकों में यह सुविधा सहज हासिल थी कि कोई भी रक्तदान करके ज़रूरत लायक खून निःशुल्क प्राप्त कर लेता था। चंद दिनों पूर्व झारखण्ड सरकार के स्वास्थ्य विभाग के सनक भरे फैसले ने अब इस पर रोक लगा दिया है। बीपीएल व आयुष्मान कार्ड धारकों को छोड़ किसी भी गरीब-लाचार अथवा धनवान व्यक्ति को समान रूप से प्रदेश के किसी भी सरकारी ब्लड बैंक से खून लेने के लिए प्रति यूनिट 1050 रुपये देने होंगे।

ताज़ा जानकारी के मुताबिक राजधानी स्थित रिम्स और सदर अस्पताल में उक्त राशि चुकाने के बाद ही लोगों को ब्लड मिल रहा है। अचानक जारी हुए इस सरकारी फरमान से इन अस्पतालों में जिन ज़रूरतमंद लोगों के पास बीपीएल अथवा आयुष्मान कार्ड नहीं है या जो रांची के बाहर से यहाँ इलाज कराने आये हुए हैं उन्हें भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।

झारखंड सरकार इन दिनों प्रदेश में ‘आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार’ योजना चला रही है। गत 15 नवम्बर से झारखंड राज्य गठन के 20 वर्ष और हेमंत सोरेन सरकार के दो साल पूरे होने पर शुरू किये गए इस अभियान का मक़सद है प्रदेश के सभी लोगों तक सरकार की सभी योजनाओं को पहुंचाया जाए। वहीँ सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नए ‘संकल्प पत्र’ फरमान के कारण निःशुल्क मिलने वाले ब्लड के लिए 1050 रु. चार्ज तय चुकाने वाले नहीं समझ पा रहें हैं कि यह कैसी ‘आपकी सरकार’ है?

झारखण्ड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति द्वारा ‘संकल्प पत्र’ जारी करने के बाद से रक्तदान शिविर का आयोजन कर लोगों से रक्तदान कराने वाले सामाजिक जन संगठनों, रक्तदाता और नागरिक समाज के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया है।

गत 1 दिसंबर से ही राजभवन के समक्ष प्रतिवाद धरना और अलबर्ट एक्का चौक पर उक्त सामाजिक संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शनों से इस फैसले को अविलम्ब वापस लिए जाने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि 2018 से ही पिछली सरकार के जन कल्याणकारी योजना के तहत पूरे राज्य में सभी सरकारी ब्लड बैंकों में यह सुविधा उपलब्ध थी कि कोई भी रक्तदान करके निःशुल्क ब्लड ले सकता था। इसे बंद करके प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर 1050 रु. लिया जाना अमानवीय कृत्य जैसा है।

जन स्वास्थ्य के मुद्दों पर निरंतर सक्रिय रहने वाले सामाजिक संगठन ‘लहू बोलेगा’ के संयोजक नदीम खान का कहना है कि एक तो रक्तदान मुहीम चलाना चुनौती भरा है। जी तोड़ मेहनत करके हम लोगों को अधिक से अधिक रक्तदान करने के लिए तैयार करते है। जगह जगह ब्लड डोनेशन कैम्प लगाकर लोगों से ब्लड इकठ्ठा करते हैं। रक्तदान एक मानवीय कर्तव्य है, यह लोगों को समझाते हैं। लेकिन जब लोगों को पता चलेगा कि उनसे फ्री में लिए गए खून पर सरकार ही पैसे वसूल रही है तो ऐसे में कौन रक्तदान करेगा। यही बातें रक्तदान करने वालों और ब्लड डोनेशन कैम्प आयोजित करनेवाले सभी सामाजिक संगठनों का भी कहना है। 

सरकारी ब्लड बैंकों से प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर 1050 रु. लिए जाने का विरोध करने वालों ने स्वास्थ्य विभाग पर निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के कारोबारियों को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके नए फैसले से निराश लोग अब निजी ब्लड बैंकों की शरण में जाने को विवश हो जायेंगे। ऐसे में खून की कालाबाजारी पूरी तरह बेलगाम हो जायेगी। क्योंकि सरकार पहले से ही निजी ब्लड बैंकों की मनमानी पर कोई अंकुश लगाने में विफल हो चुकी है।

दूसरी ओर, झारखंड स्वास्थ्य विभाग मिडिया से जारी बयानों में लगातार कह रहा है कि कुछ इस संकल्प का हवाला देकर सोशल मिडिया और अन्य संचार माध्यमों से लोगों को गुमराह कर रहें है। सरकार की छवि ख़राब करने की कोशिश कर रहें हैं। विभाग ने लोगों से यह भी अपील किया है कि वे इस तरह की अफवाहों पर ध्यान ना दें।

स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी का कहना है कि ब्लड को लेकर चल रही काला बाजारी पर अंकुश लगाने की कार्रवाई के तहत यह संकल्प पात्र जारी किया गया है। जो निजी ब्लड बैंक कारोबार के लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। जानकारों के अनुसार झारखण्ड प्रदेश में कुल 55 ब्लड बैंक हैं जिनमें से मात्र 19 ही सरकारी ब्लड बैंक बचे हुए हैं। जिनमें आम दिनों में भी खून की कमी हमेशा बनी रहती है। प्रोसेसिंग चार्ज वसूले जाने के कारण यहाँ एक कृत्रिम संकट पैदा हो जाएगा। अब रिम्स और सदर अस्पताल इत्यादि स्वास्थ्य केन्द्रों में इलाज करा रहे ऐसे गरीब मरीज़ जिनके पास कोई सरकारी कार्ड नहीं है या लावारिश व एक्सीडेंट के शिकार हाल में पहुंचे तथा बाहर से आये मरीजों के परिजन निजी ब्लड बैंकों की मनमानी झेलने को विवश हो जायेंगे।

सरकारी बैंकों से प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर शुल्क लिए जाने के फैसले पर स्वास्थ्य विभाग पुनर्विचार करने के मूड में नहीं दिख रहा है। खबर है कि प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों को ‘संकल्प पत्र’ भेजकर सरकारी ब्लड बैंकों से खून लेने वालों से 1050 रु. वसूलने का निर्देश जारी किया जा चुका है। राजधानी स्थित रिम्स और सदर अस्पताल में लोग शुल्क चुकाकर ही खून मिल रहा है।

तो दूसरी ओर, प्रोसेसिंग शुल्क वापस लेने की मांग को लेकर विरोध का भी दायरा बढ़ता जा रहा है। 2 दिसंबर को अलबर्ट एक्का चौक पर प्रतिवाद कर रहे आइसा-इनौस के सदस्यों के अलावे कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर से कहा है कि एक तो कोरोना महामारी काल ने सभी सरकारों की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह उजागर कर दिया है जिसे तत्काल दुरुस्त करने की ज़रूरत है। झारखंड सरकार स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी बल्ड बैंकों में लोगों से निःशुल्क एकत्रित खून पर भी शुल्क लिए जाने काफैसला जन स्वस्थ्य सुविधा से हाथ पीछे खींचने वाला और निजी स्वास्थ्य क्षेत्रों की लूट को बढ़ावा देने वाला है।

जन स्वास्थय को लेकर निरंतर कई वर्षों से सक्रिय सामाजिक स्वास्थ्य संगठन ‘लहू बोलेगा’ समेत कई अन्य जन संगठनों ने सरकार के स्वास्थय विभाग द्वारा सरकारी ब्लड बैंकों से खून लेने के सन्दर्भ में जारी किये गए नए फरमानों (संकल पत्र) का कड़ा विरोध किया है।

ये भी पढ़ें: झारखण्ड : शहीद स्मारक धरोहर स्थल पर स्कूल निर्माण के ख़िलाफ़ आदिवासी संगठनों का विरोध

Jharkhand
health department
Blood bank
Government blood banks
Health Sector
Hemant Soren

Related Stories

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

कोरोना महामारी अनुभव: प्राइवेट अस्पताल की मुनाफ़ाखोरी पर अंकुश कब?

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

बिहारः मुज़फ़्फ़रपुर में अब डायरिया से 300 से अधिक बच्चे बीमार, शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता


बाकी खबरें

  • Taliban
    सुबोध वर्मा
    अफ़ग़ानिस्तान: गढ़े गये फ़सानों के पीछे की हक़ीक़त
    22 Aug 2021
    विदेशी ताकतों की दखल के चलते तालिबान की वापसी हुई है। अब जनता को इन तालिबान से निपटना होगा।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : "मुझमें गीता का सार भी है, इक उर्दू का अख़बार भी है..."
    22 Aug 2021
    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद जो सवाल भारत के प्रधानमंत्री से पूछे जाने चाहिए, वह भारत के मुसलमानों से पूछे जा रहे हैं। विविधता से भरे हमारे देश में समय समय पर देशभक्ति, वफ़ादारी को लेकर म
  •  modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सरकार जी की सरकार में बहस
    22 Aug 2021
    सरकार जी जानते हैं और समझते हैं कि ये बहस, ये विचार विमर्श, ये चर्चायें, ये सब जी का जंजाल हैं। ये हरगिज़ नहीं होनी चाहियें।
  • बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!
    सोनिया यादव
    बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!
    22 Aug 2021
    कैंपस में आए दिन छात्राओं के साथ हो रहे अभद्र व्यवहार और छेड़खानी के खिलाफ छात्रों ने सेंट्रल ऑफिस पर प्रदर्शन कर प्रशासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस दौरान छात्राओं ने प्रशासन को…
  • स्मार्ट सिटी में दफन हो रही बनारस की मस्ती और मौलिकता
    विजय विनीत
    स्मार्ट सिटी में दफन हो रही बनारस की मस्ती और मौलिकता
    22 Aug 2021
    बनारस का मज़ा और मस्ती लुप्त होती जा रही है। जनता पर अनियोजित विकास जबरिया थोपा जा रहा है। स्मार्ट बनाने के फेर में इस शहर का दम घुट रहा है... तिल-तिलकर मर रहा है। बनारस वह शहर है जो मरना नहीं, जीना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License