NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
झारखंड: एनआरसी-सीएए-एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव लाने में हेमंत सरकार कर रही है देरी
एनपीआर–सीएए–एनआरसी खारिज के खिलाफ केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे गैर भाजपा सरकारों द्वारा अपने प्रदेश में इसे लागू नहीं करने के लिए गए प्रस्ताव की भांति झारखंड में भी इस प्रस्ताव को पारित करने की मांग हेमंत सोरेन सरकार से की जा रही है । राजधानी समेत कई जिलों में इस सवाल पर धरना – प्रदर्शन इत्यादि कार्यक्रमों का तांता लगा हुआ है।
अनिल अंशुमन
10 Mar 2020
hemant soren

एनपीआर-सीएए-एनआरसी के खिलाफ संघर्ष कर रहे संगठनों और आंदोलनकारियों को राज्य की गैर भाजपा सरकार के रुख से काफी निराश होना पड़ रहा है। वहीं 1 अप्रैल से एनपीआर लागू करने के केंद्र सरकार के आदेश पर झारखंड में हो रही प्रशासनिक तैयारी प्रक्रिया ने भी लोगों की चिंताएं बढ़ा दी है। क्योंकि सबको उम्मीद यही थी कि भाजपा के खिलाफ मिले जनादेश का सम्मान करते हुए हेमंत सोरेन सरकार अन्य गैर भाजपा राज्य सरकारों की भांति झारखंड में भी  क़ानूनों को लागू नहीं करने संबंधी प्रस्ताव तुरंत लाएगी।लेकिन पिछले 28 मार्च से शुरू हुए विधान सभा के चालू सत्र में 6 मार्च को होली के अवकाश के कारण स्थगित होने के दिन तक सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है।  
         
5 मार्च को जाने माने अर्थशास्त्री व एक्टिविष्ट ज्यां द्रेज़ , पूर्व आईएएस गोपीनाथ कन्नन और भाकपा माले विधायक विनोद सिंह के नेतृत्व में एक शिष्ट मण्डल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर इस संदर्भ में विशेष ज्ञापन देकर बात भी की । जिसके जवाब में सीएम द्वारा कहा जाना कि - अभी वे संविधान व कानून विशेषज्ञों से राय मशविरा कर रहें हैं जल्द ही इस पर निर्णय लेंगे। आपलोग धैर्य रखें। उनकी यह बात बहुत अधिक भरोसा नहीं दिला पा रही है।

झारखंड विधान सभा के चालू सत्र में माले विधायक विनोद सिंह द्वारा इस सवाल पर लाये गए कार्यस्थगन प्रस्ताव को स्पीकर द्वारा खारिज कर देने की घटना ने भी हेमंत सोरेन सरकार और उसके घटक दलों के ढुलमुल रुख को लेकर संशय बढ़ा रखा है। सदन में विनोद सिंह के कार्यस्थगन प्रस्ताव को सत्ताधारी दल के स्पीकर ने बिना कुछ सुने ही खारिज कर दिया। सीएए–एनपीआर विरोधी होने का दावा करनेवाली कॉंग्रेस–झामुमो के किसी भी विधायक ने उस समय सदन में न तो विनोद सिंह के कार्यस्थगन प्रस्ताव का समर्थन किया और न ही कोई आवाज़ उठाई और सभी मौन बैठे रहे।

ncr 3.jpg

एनपीआर–सीएए–एनआरसी खारिज के खिलाफ केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे गैर भाजपा सरकारों द्वारा अपने प्रदेश में इसे लागू नहीं करने के लिए गए प्रस्ताव की भांति झारखंड में भी इस प्रस्ताव को पारित करने की मांग हेमंत सोरेन सरकार से की जा रही है । राजधानी समेत कई जिलों में इस सवाल पर धरना – प्रदर्शन इत्यादि कार्यक्रमों का तांता लगा हुआ है।

 5 मार्च को राजभवन के समक्ष कई सामाजिक संगठनों द्वारा प्रतिवाद धरना दिया गया । जिसमें पूर्व कन्नन गोपीनाथ , ज्यां द्रेज़ और विधायक विनोद सिंह विशेष रूप से शामिल हुए।वहीं रांची के कडरू,शाहीनबाग के अलावे धनबाद, कोडरमा और कुमारधुबी जैसे  कई स्थानों पर मुस्लिम महिलाओं का अनिश्चितकालीन धरना निरंतर जारी है। जमशेदपुर में प्रशासन द्वारा धारा 144 लगाए जाने के कारण कई स्थानों पर लोगों ने अपनी चप्पलें इकट्ठी कर ‘ चप्पल सत्याग्रह ’ प्रदर्शन कर “ खामोशी की गूंज ” प्रतीक प्रतिवाद किया। प्रगतिशील महिला एसोशिएशन के बैनर तले महिलाओं ने 6 से 8 मार्च तक बागोदर और धनवार में अनवरत प्रतिवाद अनशन कार्यक्रम किया।

दिलचस्प मामला है कि एनआरसी के मुद्दे को लेकर पिछले 25 फरवरी को जब बिहार विधान सभा के चालू सत्र के दौरान माले विधायकों ने राज्य में एनआरसी नहीं लागू करने संबंधी कार्यस्थगन लाया तो सत्ताधारी दल ( एनडीए गठबंधन ) से जुड़े स्पीकर ने स्वीकार कर लिया। साथ ही उसके समर्थन में तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के कई गैर भाजपा विधायक भी खुलकर खड़े हो गए। इसी कार्यस्थगन प्रस्ताव पर हुई व्यापक चर्चा उपरांत सर्व सम्मत फैसला हुआ कि बिहार में एनआरसी नहीं लागू होगा।लेकिन झारखंड विधान सभा में सत्ताधारी दल (गैर भाजपा गठबंधन) के स्पीकर द्वारा कोई चर्चा भी नहीं होने देना, वाकई संशय का मामला बन जाता है।

nrc 5.jpg

झारखंड प्रदेश के मुस्लिम व आदिवासी संगठनों समेत कई सामाजिक संगठनों द्वारा हेमंत सोरेन सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि वह झारखंड में एनपीआर–सीएए–एनआरसी नहीं लागू करने का प्रस्ताव जल्द से जल्द पारित करे। लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री और सरकार के रवैये से कोई सकारात्मक संकेत सामने नहीं आया है।

1 अप्रैल से जमीनी स्तर पर शुरू होनेवाली एनपीआर प्रक्रिया को लेकर लोगों में संशय गहराता जा रहा है। हालांकि इस पर रोक लगाने को लेकर कई सामाजिक संगठनों द्वारा गाँव गाँव में ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित कर सभी स्थानीय विधायकों और मुख्यमंत्री को पत्र भेजने की अपील की जा रही है। लेकिन इसका विरोध करने और झारखंड में इसे लागू नहीं होने देने का दावा करनेवाले सरकार के प्रमुख घटक दल झामुमो और कॉंग्रेस में इस सवाल पर कहीं कोई जमीनी सुगबुगाहट का नहीं दीखना लोगों को काफी निराश कर रहा है।

nrc 6.jpg

आदिवासी सवालों पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्त्ताओं और आदिवासी बुद्धिजीवियों द्वारा सोशल मीडिया में इस बात को लेकर काफी चिंताएँ जताई जा रही है कि वैसे अनगिनत आदिवासी परिवारों का क्या होगा जिनके पास ज़रूरी कागजात नहीं है । हेमंत सोरेन सरकार आदिवासी हितों का झण्डा बुलंद करने की हरचंद कवायद कर रही है लेकिन ज़मीन पर एनपीआर की समस्याओं से निजात अथवा कोई राहत दिलाने के लिए कोई सक्रियता नहीं दिखला रही है।

एनपीआर – सीएए – एनआरसी विरोध का संयुक्त अभियान संगठित कर रहे एआईपीएफ एक्टिविष्ट नदीम खान का कहना है कि जब राज्य कि बहुसंख्यक जनता ने सम्पन्न हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा की नीतियों के खिलाफ अपना जनादेश दिया है और उक्त काले क़ानूनों का मुखर विरोध भी कर रही है, तो सत्ताशीन होनेवाली इस गैर भाजपा सरकार का यह मुख्य दायित्व बन जाता है कि समय रहते वह इस प्रदेश में भी एनपीआर–सीएए–एनआरसी नहीं लागू करने का फैसला ले  वरना देर ना हो जाए कहीं ..... ! 

Jharkhand
Jharkhand government
CAA
NRC
NPR
JMM
BJP
Hemant Soren
Narendra modi
modi sarkar
Hemant Sarkar

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • election
    लाल बहादुर सिंह
    पक्ष-प्रतिपक्ष: चुनाव नतीजे निराशाजनक ज़रूर हैं, पर निराशावाद का कोई कारण नहीं है
    16 Mar 2022
    UP के चुनाव का ज़ोरदार झटका शायद उन सभी विपक्षी राजनीतिक ताकतों को जो अपना अस्तित्व बचाना और भाजपा को हराना चाहती हैं, उन्हें 24 की लड़ाई को अधिक गम्भीरता से जीवन-मरण का संग्राम बनाकर लड़ने के लिए…
  • bhagwant mann
    भाषा
    भगवंत मान ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की
    16 Mar 2022
    पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने राज्य के शहीद भगत सिंह (एसबीएस) नगर जिले में महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मान को पद एवं गोपनीयता की…
  • रौनक छाबड़ा
    दिल्ली: संसद सत्र के बीच स्कीम वर्कर्स का प्रदर्शन, नियमितीकरण और बजट आवंटन में वृद्धि की मांग
    16 Mar 2022
    इस प्रदर्शन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका, मध्याह्न भोजन (मिड डे मिल) कार्यकर्ता और आशाकर्मी  शामिल थीं। इन सभी ने कहा कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट में इन सभी योजनाओ के लिए "बजट आवंटन में…
  • protest
    मंजीत सिंह पटेल
    क्या हैं पुरानी पेंशन बहाली के रास्ते में अड़चनें?
    16 Mar 2022
    समस्या यह है कि नई पेंशन योजना सेवा के वर्षों से कोई इत्तेफाक नहीं रखती है बल्कि यह कार्पस बेस्ड है यानी जितना फंड NPS अकाउंट में होगा उसी हिसाब से पेंशन।
  • ज़ोमैटो डिलीवरी एजेंटों ने तिरुवनंतपुरम में शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
    अभिवाद
    ज़ोमैटो डिलीवरी एजेंटों ने तिरुवनंतपुरम में शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
    16 Mar 2022
    डिलीवरी एजेंटों ने ज़ोमैटो फ़ूड एग्रीगेटर के प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि बिना किसी अतिरिक्त लाभ के उन्हें फ़ुल टाइम काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License