NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
विमर्श: कुहासे के आर और पार
दरअसल हर राज सत्ता को आतंकवाद शब्द से बहुत प्रेम होता है। और सदैव वह अपने दायरे में इसे गढ़ती है। लेकिन आज तक कोई भी इसकी व्याख्या नहीं कर सका।
शंभूनाथ शुक्ल
03 Apr 2021
लातेहार
तस्वीर, केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए। साभार: गूगल

पिछले दिनों अपनी झारखंड यात्रा के दौरान मैंने पाँच दिन लातेहार ज़िले में बिताए। लातेहार में नक्सली गतिविधियाँ रही हैं और आज भी वहाँ के जंगल में ऐसे लोग सक्रिय हैं। बेतला से महुआडाँड़ जाते समय जिस तरह की सशस्त्र पुलिस मुझे दिखी, उससे यह तो प्रतीत हुआ कि यहाँ सब कुछ सामान्य नहीं है। कोयल नदी के चौड़े पाट और साफ़ पानी के बीच बने टापुओं में नहाते आदिवासियों ने मुझे देख कर आश्चर्य प्रकट किया, कि हम अनजाने लोग यहाँ क्यों आए? ज़मीन ख़रीदने के वास्ते या जंगल में रह रहे लोगों की टोह लेने के लिए।

उन्होंने कहा, मैं थाने जाकर बात करूँ। थाने ख़ुद ही अर्धसैनिक बलों से घिरे हैं। थानों के चारों तरफ़ बीस फुट ऊँची कँटीली जाली लगी है। इसके बावजूद ज़िंदगी में चहल-पहल है। गाँव हैं, बस्तियाँ हैं और लोग-बाग रात-बिरात निकलते भी हैं। नक्सल को यहाँ और इसके आगे के छत्तीसगढ़ में आतंकवादी कहा जाता है। पाँच दशक से अधिक हो गए पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से उपजे नक्सल आंदोलन को। वह ख़त्म भी हो चुका। लेकिन सरकारें उसकी छाया से मुक्त नहीं हो सकीं।

दरअसल हर राज सत्ता को आतंकवाद शब्द से बहुत प्रेम होता है। और सदैव वह अपने दायरे में इसे गढ़ती है। लेकिन आज तक कोई भी इसकी व्याख्या नहीं कर सका। यहाँ तक कि संयुक्त राष्ट्र ने भी इसकी कोई सार्वभौमिक परिभाषा नहीं लिखी। 1973 में संयुक्त राष्ट्र में बस इतना लिखा गया है, ‘‘आतंकवाद एक आपराधिक कार्य है जो राज्य के खिलाफ किया जाता है और इसका उद्देश्य भ्रम पैदा करना है। यह स्थिति कुछ व्यक्तियों, समूहों या जन सामान्य की भी हो सकती है।’’ अर्थात् राज सत्ता के विरुद्ध आंदोलन आतंकवाद है। जबकि इसे स्वीकार करने को कोई भी तैयार नहीं है।

मज़े की बात कि यह अपराध विज्ञान का एक ज्वलंत विषय है। एक ऐसा विषय जिसको समझा कोई नहीं पाता। यह चर्चा में खूब रहता है। दुनिया भर की मीडिया रोज़ाना बार-बार इस शब्द का प्रयोग करती है। किंतु क्या है आतंकवाद या क्यों है आतंकवाद अथवा कौन है आतंकवादी? इसकी कोई ग्लोबल परिभाषा नहीं है। एक का आतंकवाद दूसरे के लिए राष्ट्रभक्ति है। फिर यह विषय अपराध विज्ञान में क्यों रखा जाता है? यह तो सीधे-सीधे राजनीति विज्ञान का विषय हुआ। प्रति वर्ष लाखों करोड़ों रुपए आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए खर्च होते हैं, वैश्विक संधियाँ होती हैं। भारी मात्रा में आर्म्स-डील होती हैं। लेकिन आतंकवाद जस का तस बना रहता है। इसका मतलब तो यही हुआ, कि आतंकवाद व्यवस्था का प्रिय विषय है और राज सत्ताएँ स्वयं इसे गढ़ती हैं।

इस शब्द के बहुत ही सूक्ष्म रूप को देखें। चार महीने पहले जब केंद्रीय कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली के आसपास पंजाब और हरियाणा के किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाला तो मीडिया ने प्रचार किया कि ये ख़ालिस्तानी उग्रवादी हैं। कुछ ने कहा कि ये सिख आतंकी हैं। चूँकि सिखों की पहचान स्पष्ट है, इसलिए अपने विचार के विरोधी सिख को आतंकवादी या उग्रवादी बना देना आसान है। यह स्थिति हर उस धर्म और समाज की है, जो विश्व के किसी भी देश में अल्प संख्या में है। ये सिख भी हो सकते हैं, मुस्लिम भी, ईसाई भी और हिंदू भी। अल्पसंख्यक होने की सबसे भीषण यातना तो यहूदियों ने झेली है। किंतु इस आधार पर तो आतंकवाद कोई परिभाषा नहीं गढ़ी जा सकती।

हालाँकि ऐसा नहीं है कि सभी अपराध विज्ञानी, समाज विज्ञानी अथवा राजनीति शास्त्र के ज्ञाता इस पर चुप रहे हों। श्वाजनबर्गर के अनुसार, ‘‘एक आतंकी की परिभाषा उसके तत्कालीन उद्देश्य से की जाती है। आतंकवादी शक्ति का प्रयोग डर पैदा करने के लिए करता है और दुबारा वह उस उद्देश्य को प्राप्त कर लेता है जो उसके दिमाग में है।’’ जबकि रिचार्ड शुल्ज लिखता है- ‘‘आतंकवाद राजनीतिक व्यवस्था के अन्दर क्रांतिकारी परिवर्तन लेने के उद्देश्य से अलग-अलग प्रकार के राजनीतिक हिंसा प्रयोग में लाने की तैयारी है।’’ आधुनिक समय में सभी प्रकार की आतंकवादी कार्यवाही में हिंसा तथा हिंसा का भय एक अनिवार्य तत्व के रूप में होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि आतंकवाद कुछ निश्चित राजनीतिक परिवर्तन लाने के लिए हिंसा या हिंसा की धमकी के द्वारा पैदा किया गया भय है। ये दोनों परिभाषाएँ एक-दूसरे की पूरक भी हैं और उनमें परस्पर विरोधाभास भी खूब है। इस शब्द की इतनी अधिक परिभाषाएँ हैं, कि सब गड्ड-मड्ड करती हैं। जिनके अंतर्विरोध के चलते कोई अनुशासन या मापदंड तय नहीं होता।

दूसरी तरफ़ गुटनिरपेक्ष देशों के अनुसार ‘‘आतंकवाद एक ऐसी हिंसक कार्यवाही है जो व्यक्तियों के एक समूह द्वारा की जाती है जिससे मानवीय जीवन खतरे में होता है जो मौलिक स्वतंत्रताओं के लिए घातक होता है तथा जो एक राज्य तक समिति नहीं होता।’’ और इनसाइक्लोपीडिया ऑफ सोशल साइन्सेज बताता है, ‘‘आतंकवाद एक हिंसक व्यवहार है जो समाज या उसके बड़े भाग में राजनीतिक उद्देश्यों से भय पैदा करने के इरादे से किया जाता है। यह एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा एक संगठित समूह या दल अपने प्रकट उद्देश्यों की प्राप्ति मुख्य रूप से हिंसा के योजनाबद्ध उपयोग से करता है।’’ योनाह अलेक्जेण्डर के अनुसार, ‘‘आतंकवाद चुने हुए नागरिक विद्वानों के विरूद्ध हिंसा की कार्यवाही या उसकी धमकी है जिससे कि राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए भय का वातावरण बनाया जा सके।’’ इसके विपरीत अलेक्स स्मिथ लिखता है, कि ‘आतंकवाद हिंसा का या हिंसा की धमकी का उपयोग है, तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए संघर्ष। लड़ाई की एक विधि व रणनीति है एवं अपने शिकार में भय पैदा करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। यह क्रूर है और मानवीय प्रतिमानों का पालन नहीं करता। इसकी रणनीति में प्रचार एक आवश्यक तत्व है।’’ एम शेरिफ बेइयानी के अनुसार, ‘‘आतंकवाद एक गैर कानूनी हिंसा की रणनीति है जो कि उन सामान्य अथवा एक समूह में आतंक फैलाने के लिए अपनाई जाती है। जिसका उद्देश्य किसी निर्णय को लेने के लिए अथवा किसी बात को प्रसारित करने अथवा किसी कमी को उजागर करना हो।’’

ब्रिटेन के आतंकवाद निरोधक अधिनियम 1976 में आतंकवाद से अभिप्राय ‘‘राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयोग में लाई गई हिंसा से है जिसमें कि वह सभी तरह की हिंसा सम्मिलित है जिसका उद्देश्य जनता को या समुदाय विशेष को भयभीत करना है।’ अमेरिका का प्रतिरक्षा विभाग मानता है, ‘‘समाज या सरकार के खिलाफ गैर-कानूनी बल प्रयोग करना या ऐसा न करके केवल धमकी देना ही आतंकवाद है।”

जिन दिनों सिख आतंकवाद से प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश में हत्याएँ हुईं तब उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सरकुलर जारी किया था, उसमें कहा गया था कि किसी व्यक्ति या संगठित गुट द्वारा समाज या सरकार पर जोर-जबरदस्ती करने या धमकाने के उद्देश्य से, गैर-कानूनी तरीके से हिंसा का इस्तेमाल करना आतंकवाद कहलाता है। आतंकवाद एक सामूहिक अपराध है जो एक आतंकवादी समूह द्वारा किसी व्यक्ति विशेष के विरूद्ध न होकर एक व्यवस्था, धर्म, वर्ग या समूह के विरूद्ध होता है। आतंक फैलाने तथा मनोवैज्ञानिक युद्ध की स्थिति निर्मित करने की तकनीक ही आतंकवाद है।

कई बार तो यह लगता है कि आतंकवाद एक ऐसा कुहासा है जिसके आर भी वही है और पार भी वही है। बस अपनी नाकामियों को छिपाने का यह एक अस्त्र है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Jharkhand
Latehar
Terrorism
Naxalite
Urban-Naxalite

Related Stories

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

झारखंड : हेमंत सोरेन शासन में भी पुलिस अत्याचार बदस्तूर जारी, डोमचांच में ढिबरा व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या 

झारखंड रोपवे दुर्घटना: वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने 10 और लोगों को सुरक्षित निकाला


बाकी खबरें

  • prashant kishor
    अनिल सिन्हा
    नज़रिया: प्रशांत किशोर; कांग्रेस और लोकतंत्र के सफ़ाए की रणनीति!
    04 Dec 2021
    ग़ौर से देखेंगे तो किशोर भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ने में लगे हैं। वह देश को कारपोरेट लोकतंत्र में बदलना चाहते हैं और संसदीय लोकतंत्र की जगह टेक्नोक्रेट संचालित लोकतंत्र स्थापित करना चाहते हैं…
  • All five accused arrested in the murder case
    भाषा
    माकपा के स्थानीय नेता की हत्या के मामले में सभी पांच आरोपी गिरफ्तार
    04 Dec 2021
    घटना पर माकपा प्रदेश सचिवालय ने एक बयान जारी कर आरएसएस को हत्या का जिम्मेदार बताया है और मामले की गहराई से जांच करने की मांग की है.पुलिस के अनुसार, घटना बृहस्पतिवार रात साढ़े आठ बजे हुई थी और संदीप…
  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    MSP की कानूनी गारंटी ही यूपी के किसानों के लिए ठोस उपलब्धि हो सकती है
    04 Dec 2021
    पंजाब-हरियाणा के बाहर के, विशेषकर UP के किसानों और उनके नेताओं की स्थिति वस्तुगत रूप से भिन्न है। MSP की कानूनी गारंटी ही उनके लिए इस आंदोलन की एक ठोस उपलब्धि हो सकती है, जो अभी अधर में है। इसलिए वे…
  • covid
    भाषा
    कोरोना अपडेट: देशभर में 8,603 नए मामले सामने आए, उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक लाख से कम हुई
    04 Dec 2021
    देश में कोविड-19 के 8,603 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,46,24,360 हो गई है।  
  • uttarkhand
    सत्यम कुमार
    देहरादून: प्रधानमंत्री के स्वागत में, आमरण अनशन पर बैठे बेरोज़गारों को पुलिस ने जबरन उठाया
    04 Dec 2021
    4 दिसंबर 2021 को उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। लेकिन इससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए आमरण अनशन पर बैठे बेरोजगार युवाओं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License