NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड: चार बार विधायक रहे कॉमरेड महेंद्र सिंह के शहादत दिवस पर आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में मानव–श्रंखला अभियान!
सन 2005 में इसी दिन तत्कालीन भाजपा– एनडीए शासन में सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र के तहत प्रदेश के चर्चित जनप्रिय नेता व कम्युनिस्ट आंदोलनकारी कॉमरेड महेंद्र सिंह की हत्या कर दी गयी थी।
अनिल अंशुमन
16 Jan 2021
झारखंड

बावजूद इसके कि पिछले कई सप्ताहों से देश भर के किसान मोदी सरकार के किसान विरोधी काले कृषि क़ानूनों की वापसी की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली की सीमा पर हजारों की तादाद में डटे हुए हैं। सरकारपरस्त गोदी मीडिया अनवरत दुष्प्रचार चला कर इसे फकत चंद सिख किसानों और विपक्ष के उकसावे का आंदोलन बताये जा रही है।  

16 जनवरी को झारखंड के चर्चित जननायक महेंद्र सिंह के शहादत दिवस पर बगोदर–कोडरमा संसदीय क्षेत्र समेत गिरिडीह ज़िले के सभी प्रखंडों में विशाल ‘मानव श्रंखला’ बनाकर आंदोलनकारी किसानों के प्रति चट्टानी एकजुटता प्रदर्शित की गयी। झारखंड के कई अन्य इलाकों में भी इस दिवस पर प्रतिवाद मार्च, धरना व जन सभा के भी कार्यक्रम हुए। ‘यह भगत–भीम की धरती है, संघी फासिस्टों से नहीं डरती है... काले कृषि क़ानूनों को वापस लो, जैसे जोशपूर्ण नारों के साथ आयोजित इस अभियान से मोदी सरकार व गोदी मीडिया के भी दुष्प्रचारों का करारा जवाब दिया गया। इस अभियान के माध्यम से यह भी ऐलान किया गया कि आंदोलनकारी किसानों की मांगें नहीं माने जाने तक झारखंड में भी पूरी ताकत के साथ किसानों के समर्थन में आंदोलन जारी रखा जाएगा।

भाकपा माले झारखंड इकाई ने अपने केंद्रीय कमेटी नेता और बगोदर क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक रहे कॉमरेड महेंद्र सिंह के शहादत दिवस को आंदोलनकारी किसानों से एकजुटता के रूप में मनाने का आहवान किया है। जिसके तहत राजधानी रांची से लेकर प्रदेश के कई जिला–प्रखंडों व कोलियरी इलाकों में कार्यक्रमों का आयोजन कर किसान विरोधी काले कृषि कानून की प्रतियाँ जलायीं गईं। इस अभियान की महत्वपूर्ण विशिष्टता यह भी रही कि कॉमरेड महेंद्र सिंह की क्रांतिकारी संघर्ष परंपरा को तथा आंदोलनकारी किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़े होने के आह्वान को विस्तार देने के लिए भाकपा माले बिहार के सभी 12 विधायक भी झारखंड पहुंचे।  

बगोदर व गिरिडीह जिला के विभिन्न स्थानों पर आयोजित ‘मानव श्रंखला’ अभियान का नेतृत्व किया। महेंद्र सिंह के स्मारक पर माल्यार्पण कर अपने संबोधनों के जरिये मोदी व भाजपा सरकार के कॉर्पोरेटपरस्त और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक एकजुटता का आह्वान किया। केंद्रीय आयोजन स्थल बगोदर में पार्टी के वरिष्ठ नेता और पॉलिट ब्यूरो सदस्य स्वदेश भट्टाचार्य और मनोज भक्त, पार्टी झारखंड सचिव जनार्दन प्रसाद के अलावे बिहार तरारी के विधायक सुदामा प्रसाद, कारकाट विधायक अरुण सिंह, अगियांव के युवा विधायक मनोज मंज़िल, फुलवारी शरीफ विधायक गोपाल रविदास तथा झारखंड विधायक विनोद सिंह इत्यादि ने महेंद्र सिंह स्मारक पर माल्यार्पण कर संकल्प वक्तव्य दिये। इन्हीं के नेतृत्व में बगोदर से गुजरनेवाले राष्ट्रीय राजमार्ग जीटी रोड पर कई किलोमीटर लंबी मानव–श्रंखला बनाकर किसान आंदोलन के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की गयी। जिसमें आसपास के सैकड़ों गावों से ढोल–ताशा के साथ सपरिवार पहुंचे किसानों के अलावे भारी संख्या में छात्र–युवाओं ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। सैकड़ों छात्राओं ने जीटी रोड पर जोशपूर्ण प्रतिवाद मार्च निकालकर किसानों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए। गिरिडीह के सदर में बिहार के घोषी विधायक रामबली सिंह, जमुआ में अरवल विधायक महानन्द प्रसाद ने अभियान का नेतृत्व किया।             

सनद हो कि महेंद्र सिंह झारखंड प्रदेश के सर्वाधिक चर्चित कम्युनिस्ट जन नेता और जुझारू विधायक रहें हैं। जिनका झारखंड से बाहर दिल्ली समेत कई राज्यों के आंदोलनकारी दायरे में एक विशेष में सम्मानजनक स्थान रहा है। प्रत्येक 16 जनवरी को उनका शहादत दिवस वर्तमान के आंदोलन के संकल्प के साथ मनाया जाता है। इस बार इस दिवस को काले कृषि क़ानूनों के खिलाफ राजधानी दिल्ली की सीमा पर डटे तथा देश भर में जारी किसानों के लगातार जारी आंदोलन के समर्थन में मनाय गया।  

सनद यह भी हो कि झारखंड की व्यापक लोकतंत्रपसंद और आंदोलनकारी ताक़तें 16 जनवरी को एक काला दिन के रूप में याद करतीं हैं। सन 2005 में इसी दिन तत्कालीन भाजपा– एनडीए शासन में सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र के तहत प्रदेश के चर्चित जनप्रिय नेता व कम्युनिस्ट आंदोलनकारी कॉमरेड महेंद्र सिंह की हत्या कर दी गयी थी। जब वे चुनावी जन संपर्क अभियान के तहत अपने विधान सभा क्षेत्र बागोदर के दुरगी धवैया में गरीबों के टोले में जाकर मीटिंग कर रहे थे। झारखंड विधान सभा में विपक्ष की सबसे बुलंद आवाज़ कहे जानेवाले महेंद्र सिंह सदन में भाकपा माले के विधायक रहे लेकिन अपने समय के वे एकलौते ऐसे राजनेता रहे जिन्हें व्यापक वंचितों, आदिवासी समुदाय तथा जन मुद्दों पर संघर्ष करनेवाली शक्तियों–संगठनों का सबसे अधिक भरोसा हासिल था। यूं तो झारखंड प्रदेश में जल जंगल ज़मीनों की कोरपोरेट–निजी कंपनियों की लूट के खिलाफ यहाँ के किसानों–आदिवासियों का निरंतर संघर्ष जारी रहा है। लेकिन आज जब केंद्र सरकार द्वारा देश की खेती–किसानी और पूरे कृषि क्षेत्र भी उन्हीं कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले किए जाने की साज़िशों के खिलाफ व्यापक किसान सड़कों पर आंदोलनरत हैं, झारखंड से अपेक्षित मजबूत एकजुटता का प्रदर्शन नहीं हो सका। इसीलिए झारखंड के सभी वाम दल-किसान संगठन तथा कई आदिवासी सामाजिक संगठनों द्वारा धारावाहिक अभियान चलाकर देश के किसानों के जारी आंदोलन के साथ झारखंड के किसानों को भी गोलबंद करने की मुहिम चलायी जा रही है। 

उक्त संदर्भों में ही पिछले 18 दिसंबर से नए वर्ष के 16 जनवरी तक प्रदेश के सभी जिलों के गांवों में ‘जन अभियान’ चलाकर किसानों तथा व्यापक लोगों को मोदी सरकार के किसान विरोधी काले क़ानूनों के साथ साथ सबकुछ निजी–कॉर्पोरेट कंपनियों के हवाले किए जाने की साज़िशों के खिलाफ जागरूक बनाया गया। जिसका एक चरण सम्पन्न हुआ ‘महेंद्र सिंह शहादत दिवस’ पर किसान आंदोलन का मानव-श्रंखला आयोजन के रूप में। 

Jharkhand
Comrade Mahendra Singh
Martyrdom day of Comrade Mahendra Singh
BJP
NDA
farmers protest
CPI-ML

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • सुप्रीम कोर्ट
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खोरी गांव विस्थापन: सुप्रीम कोर्ट ने तोड़-फोड़ पर नहीं लगाई रोक; पुनर्वास योजना में दी राहत
    24 Jul 2021
    खोरी गांव के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। खोरी निवासियों को विस्थापन पर स्टे तो नहीं मिला किंतु मजदूर आवास संघर्ष समिति की ओर से दायर याचिका पर मिली पुनर्वास योजना में राहत दी…
  • महामारी के बीच नयी उम्मीदों के साथ टोक्यो ओलंपिक की रंगारंग शुरुआत
    भाषा
    महामारी के बीच नयी उम्मीदों के साथ टोक्यो ओलंपिक की रंगारंग शुरुआत
    24 Jul 2021
    दर्शकों के बिना आयोजित किये जा रहे ओलंपिक खेलों के उदघाटन समारोह में भी भावनाओं का ज्वार उमड़ता दिखा। लेकिन जब उदघाटन समारोह चल रहा था उस समय भी स्टेडियम के बाहर प्रदर्शनकारी ओलंपिक आयोजन के खिलाफ…
  • बधाई: मीराबाई चानू ने ओलंपिक में रजत पदक जीता
    भाषा
    बधाई: मीराबाई चानू ने ओलंपिक में रजत पदक जीता
    24 Jul 2021
    चानू ने भारत के भारोत्तोलन पदक के 21 साल के इंतजार को खत्म करते हुए महिलाओं के 49 किलोवर्ग में 202 किग्रा (87 किग्रा + 115 किग्रा) वजन उठाकर दूसरा स्थान पाया। इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी के 2000 सिडनी…
  • आर्थिक सुधारः स्कैम, मंदी और राष्ट्रवाद के सहारे
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    आर्थिक सुधारः स्कैम, मंदी और राष्ट्रवाद के सहारे
    24 Jul 2021
    कुल मिलाकर आर्थिक सुधार न सिर्फ सैद्धांतिक तौर पर विफल रहा है बल्कि व्यावहारिक तौर पर भी उसकी भयानक त्रासदी प्रकट हुई है।
  • कैसा रहा 1991 के मशहूर आर्थिक सुधार के बाद अब तक का सफ़र
    अजय कुमार
    कैसा रहा 1991 के मशहूर आर्थिक सुधार के बाद अब तक का सफ़र
    24 Jul 2021
    आकार के लिहाज से साल 1990 में दुनिया में भारत की अर्थव्यवस्था का स्थान 12वां था। साल 2020 में यह बढ़कर छठवें स्थान पर पहुंच गया। लेकिन जब प्रति व्यक्ति आय के आधार पर देखा जाए तो भारत की अर्थव्यवस्था…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License