NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड : कुर्सी की राजनीति की नई चाल- भाजपा के हुए बाबूलाल
सिर्फ डेढ़ महीने पहले हेमंत सोरेन सरकार के शपथग्रहण के पहले ही बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा करने वाले झविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने 21 फरवरी को मीडिया बुलाकर हेमंत सरकार को खरी–खोटी सुना दी।
अनिल अंशुमन
22 Feb 2020
Babulaal

क्रिकेट के खेल की तरह झारखंड की सियासी दुनिया भी अनिश्चितताओं की शिकार होती जा रही है। जहां सत्ता यानी कुर्सी की राजनीति में कौन राजनेता कैसी करवट लेगा, इसका कयास नहीं लगाया जा सकता है। अभी करीब डेढ़ महीने पहले हेमंत सोरेन सरकार के शपथ ग्रहण के पहले ही बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा करने वाले झविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने 21 फरवरी को मीडिया बुलाकर हेमंत सरकार को खरी–खोटी सुना दी। उसे ट्विटर पर चलने वाली सरकार बताते हुए ‘पिछली भाजपा सरकार द्वारा राज्य का खजाना खाली कर देने’ के जवाब में यह भी कह दिया कि– नाचे न जाने आंगन टेढ़ा ....।

राजनीति के जानकारों के अनुसार बाबूलाल मरांडी द्वारा ऐसा किया जाना कोई अचंभा नहीं है।  क्योंकि विगत 17 फरवरी को सार्वजनिक तौर से उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विधिवत विलय करते हुए हेमंत सोरेन सरकार का प्रतिपक्ष होने का ओहदा ले लिया। 24 फरवरी को प्रदेश भाजपा द्वारा झारखंड की विधान सभा में उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने की भी चर्चा ज़ोरों पर है।

चालू कुर्सी सियासत में किसी भी राजनेता अथवा पार्टी द्वारा खुद से ही स्थापित की गयी छवि और भूमिका को धता बताकर पाला बदल कर लेना कोई अचंभा जैसा नहीं रह गया है। इसे लेकर मतदाता–जनता क्या सोचेंगे यह सवाल भी कोई मायने नहीं रखता है। क्योंकि सारी कवायद होती है देश अथवा प्रदेश के हितों और विकास के नाम पर।
 
जो 17 फरवरी को झारखंड कि राजधानी स्थित प्रभातारा मैदान में प्रदेश भाजपा आहूत मिलन समारोह में बाबूलाल मराण्डी के पार्टी समेत विधिवत शामिल होने पर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा जनता को बताया भी गया कि – झारखंड की आवाज़ सुनकर ही आए हैं। इसे और भी वजनदार बताते हुए कल तक भाजपा में शामिल होने के सवाल पर– कुतुब मीनार से कूद जाऊंगा , भाजपा में नहीं जाऊंगा .... कहनेवाले बाबूलाल ने भी कह डाला कि– झाड़ू लगाने का भी काम मिलेगा तो करूंगा। 2006 में मैंने अलग पार्टी बनाई और झारखंड की धरती में घूमता रहा, समस्याओं को देखा महसूस किया। आज भाजपा में जाना नहीं हुआ है यह विचारधारा आधारित पार्टी है। जबकि बाकी पार्टियां परिवार की पार्टी हो गयी हैं। इस अवसर पर लगे हाथों यह भी कह डाला कि सीएए / एनआरसी के नाम पर विपक्ष भ्रम फैला रहा है।
 
दूसरी ओर बाबूलाल जी फ्यूज बल्ब हो गए हैं, अब नहीं जलेंगे .... का मंत्रोच्चार करनेवाले लोग अब ऐलान कर रहें हैं कि बाबूलाल जी के आने से भाजपा की ताकत बढ़ेगी।

इस पूरे प्रकरण पर भाकपा माले का यही कहना है कि हम पहले से कहते रहें हैं कि बाबूलाल जी सौम्यता, शालीनता की चादर ओढ़कर भाजपा विरोध की जितनी भी छवि बना लें, राजनीति की धरातल पर वे हमेशा ही भाजपा की ‘बी टीम’ रहें हैं। उनकी पार्टी के अधिकांश विधायक सिर्फ भाजपा में शामिल होकर कैसे उसे मजबूत और सरकार में ही जाते रहें हैं। वहीं, झामुमो नेता व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की टिप्पणी है कि वे जहां भी रहें, खुश रहें।

अधिक नकारात्मक और तीखी प्रतिक्रिया है उन आदिवासी युवाओं और सामाजिक कार्यकर्त्ताओं में जो बाबूलाल के भाजपा विरोधी रुख के कारण उन्हें राज्य में एक विकल्प और आदिवासी हितों का मजबूत सहारा मानते थे। सोशल मीडिया में अब उन्हें ढोंगी बाबूलाल और आदिवासियों के साथ विश्वासघात करनेवाला करार दिया जा रहा है। सबसे अधिक गहरी निराशा राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय के उन लोगों को हुई जो बाबूलाल को अब तक सच्चा सेक्युलर नेता मानते थे। अभी सम्पन्न हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ बाबूलाल को उनके चुनावी क्षेत्र धनवार से भारी मतों से जिताया और अन्य कई सीटों पर झविमो प्रत्याशियों को वोट दिया।

कहा जाता है कि राजनीति जो ना कराये। हेमंत सोरेन सरकार के सत्ताशीन होते ही पश्चिमी सिंहभूम के बुरुगुलिकेरा में हुए नरसंहार कांड के लिए प्रदेश की सरकार को कठघरे में खड़ा करने वालों में बाबूलाल सबसे मुखर हैं। लेकिन शायद वे भूल बैठे हैं कि राज्य के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हीं के शासन काल में जब 1 फरवरी 2001 को खूंटी के तपकरा में विस्थापन के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हजारों आदिवासियों पर अंधाधुंध फायरिंग कर पुलिस द्वारा 8 मासूमों की जान ले ली थी। असंख्य झारखंड वासियों की आकांक्षाओं पर वज्रपात करने वाले उस कांड पर आज तक उन्होंने कभी कोई अफसोस नहीं जताया है...इसे क्या कहा जाएगा?
 
फिलहाल चालू सत्ता सियासत में सब जायज है, ये कहकर वास्तविक लोकतन्त्र के तकाजों और जनता की आकांक्षाओं को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। साथ ही इसका हवाला देकर अवसरवाद और सुविधा की राजनीति के तहत स्याह को सफेद और सफेद को स्याह करने की कवायद भी अपने आप में कोई निरपेक्ष या हवाई बात नहीं है... अंतिम फैसला हमेशा जनता का होता है।

इन्हीं संदर्भों में देखना है कि गोदी मीडिया की चारण वंदना और केंद्र सरकार लिखित पथकथा को प्रदेश की गैर भाजपा सरकार पर नित दिन थोपे जाने से परे, 14 वर्षों तक झारखंड प्रदेश में सदैव खुद को भाजपा विरोध का सबसे बड़ा चैंपियन स्थापित करने वाले और प्रदेश सत्ता का सबसे सही उम्मीदवार जताने वाले, सौम्य–शालीन छवि दिखलाकर जनता के सवालों-सपनों के साथ उतनी क्रूरता बरतते हुए, पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा विरोधी महागठबंधन का प्रमुख घटक बनकर भाजपा के खिलाफ लोगों से घर घर जाकर वोट मांगने वाले, उसी का नेता– कार्यकर्त्ता और झाड़ू लगानेवाला बनकर अपनी अगली पारी और पाला बदलने वाले बाबूलाल की नयी राजनीति क्या रंग लेगी और राज्य की जनता उसपर क्या प्रतिक्रिया देगी?

साथ ही एक और मौका आया है। सदैव राष्ट्रहित–देशहित का हवाला देकर नित प्रतिदिन संविधान और लोकतान्त्रिक मूल्यों की जड़ें कमजोर कर रहे वर्तमान की सत्ता–सियासत व उसके धुरंधर नेताओं के मूल्यों वाली आदर्श राजनीति करने के दावों की एक और ज़मीनी परीक्षण का! 

Jharkhand
Babulal Marandi
BJP
Hemant Soren
Leader of Jharkhand BJP Legislature Party
Central Supervisor
Social Media
Jharkhand Politics

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License