NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
झारखंड: औसतन 700 टेस्ट हर दिन करने वाला राज्य एक महीने में 52 हजार गर्भवती महिलाओं का टेस्ट कैसे करेगा?
झारखंड के स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने बताया कि केवल मई महीने में पूरे राज्य में 52 हजार महिलाओं की डिलीवरी होनी है। नियमों के मुताबिक उससे पहले कोविड-19 जांच ज़रूरी है। जबकि राज्य में पिछले 40 दिन में कुल 17,594 सैंपल की जांच हुई है।
आनंद दत्त
09 May 2020
गर्भवती महिलाओं का टेस्ट
Image Courtesy: The Hindu

रांची (झारखंड) : राजधानी रांची के इमरान की पत्नी गर्भवती थी। डिलीवरी के लिए मोहल्ले से बाहर जाने पर पुलिस ने पाबंदी लगा दी, बच्चा मर गया। पत्रकार प्रवीण कुमार की पत्नी गर्भवती थी, इलाज नहीं मिला, बच्चे की मृत्यु। एक और पत्रकार विनय मुर्मू की पत्नी चार महीने की गर्भवती थी। अस्पताल के लिए घूमते रहे, तब तक गर्भ में पल रहे बच्चे की मृत्यु। शाजिया नाम की महिला पेट में मरा हुआ बच्चा लेकर रात में घूमती रही, लेकिन इलाज नहीं हो सका।

ये कुछ घटनाएं हैं जो लॉकडाउन के दौरान गर्भवती महिलाओं के साथ घटी हैं। स्थानीय अखबारों में खबर छपी। सोशल मीडिया पर लोगों ने गुस्सा जाहिर किया। आनन-फानन में सरकार ने ऐसी महिलाओं की सहायता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया। जहां पहले ही दिन 100 से अधिक फोन आए।

इससे पहले राज्य में दो गर्भवती महिलाएं बच्चे को जन्म देने के बाद पॉजिटिव मिली थीं। एक महिला के पॉजिटिव मिलने के बाद रांची सदर अस्पताल की चार नर्सें और एक स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित पाए गए थे। वहीं राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेकिडल साइंस (रिम्स) से गर्भवती महिला के पॉजिटिव मिलने के बाद 30 से अधिक डॉक्टरों पर संक्रमण का खतरा मंडराने लगा था। हालांकि सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

इसके बाद से राज्य भर के अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के इलाज से पहले उनको कोरोना जांच के लिए कहा जा रहा है। हालांकि इसे जरूरी नहीं बनाया गया है लेकिन डॉक्टर डरे हुए हैं, इसके बिना वह इलाज नहीं कर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक डॉक्टर ने बताया कि ये दोनों के लिए जरूरी है, इसलिए जांच तो होना ही चाहिए।

बुधवार 6 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड के स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने बताया कि केवल मई महीने में पूरे राज्य में 52 हजार महिलाओं का डिलीवरी होना है। नियमों के मुताबिक उससे पहले कोविड-19 जांच जरूरी है। कुलकर्णी ने दावा किया कि समय से पहले इन सभी महिलाओं का कोरोना टेस्ट कर लिया जाएगा।

लेकिन सरकार के दावों पर यकीन करना फिलहाल मुश्किल है। मार्च को पहली बार टेस्ट किया गया। तब से अब तक यानी 40 दिन में कुल 17,594 सैंपल की जांच हुई है। ऐसे में भला भला 51,935 हजार महिलाओं की जांच कैसे करेगी सरकार। वह भी तब जब हर दिन टेस्ट किट की कमी की बात खुद सरकार कह रही हो। साथ ही बाहर के राज्यों से लौट रहे मजदूरों के जांच का बोझ पहले से ही बढ़ रहा हो।  

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता स्वास्थ्य सचिव से अलग बात कहते हैं। उन्होंने कहा, ‘सभी गर्भवती महिलाओं के लिए जांच जरूरी नहीं है। जो कोरोना प्रभावित इलाके की महिलाएं हैं, उनकी जांच होगी और यह सरकार कर लेगी।’

आख़िर परेशानी क्यों हो रही है

पूरे राज्य में 24 जिला अस्पताल हैं, लेकिन कोरोना जांच के लिए मात्र 4 सेंटर, जिसमें दो रांची, एक जमशेदपुर और एक धनबाद में बनाए गए हैं। हाल ही में चार निजी लैब को सरकार ने कोरोना जांच की इजाजत दी है। इसके लिए अस्पताल 4500 रुपये चार्ज कर सकते हैं। ये निजी लैब भी सैंपल कोलकाता, पुणे, दिल्ली जैसे शहरों में भेजते हैं। यानी रिपोर्ट आने में पांच दिन लग जाएंगे।

रांची के गुरुनानक हॉस्पिटल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. पूजा सहाय ने बताया, 'जिन चार लैब को अनुमति मिली है, उनके पास रांची में मशीन नहीं है। वो केवल सैंपल कलेक्ट कर सकते हैं। लेकिन रांची में ही चार प्राइवेट लैब के पास मशीन हैं, लेकिन उनके पास नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिबरेशन लैबोरटरीज (एनएबीएल) सर्टिफिकेशन नहीं है जो कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक जरूरी है। सरकार को चाहिए कि आईसीएमआर से बात कर इन लैब को एनएबीएल सर्टिफिकेशन दिलाने में मदद करे। तो जांच में और तेजी आ सकती है।’

ये चारों लैब जिनको फिलहाल जांच की अनुमति मिली है, रांची में ही हैं। यानी रांची से 150 किलोमीटर दूर सिमडेगा जिले और फिर वहां से सुदूरवर्ती गांवों के महिलाओं की समस्याएं जस की तस रहनेवाली है। यही हाल दुमका, पाकुड़, साहेबगंज, गोड्डा जैसे जिलों का हो सकता है।

आपको बता दें कि सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे 2017 के मुताबिक झारखंड में शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 बच्चों में 29 है। इस लिस्ट में केरल 10 सबसे कम और मध्यप्रदेश 47 के साथ सबसे अधिक है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में शिशु मृत्यु दर 37 है।

इसके अलावा अगर कोई गर्भवती महिला जांच के लिए निकलती है तो पुलिसिया कार्रवाई का डर अलग रहता है। नामकुम इलाके के अमित मिश्रा ने बताया, ‘बीते पांच मई को आठ महीने की गर्भवती पत्नी को इलाज के लिए ले जा रहा था। रास्ते में पुलिसकर्मी ने रोक कर पहले छह हजार रुपए फाईन भरवाया।’ हालांकि इस दौरान हेल्पलाइन नंबर पर आए फोन के बाद पुलिस ने कुछ महिलाओं को अस्पताल तक भी पहुंचाया है।

ग्रामीण महिलाओं की परेशानियों को समझिये

पुंदाग की आशा वर्कर मंजू देवी ने बताया, ’उनकी जानकारी में चार महिलाओं का इस महीने डिलीवरी होना है। उसमें से एक को बताया कि कोरोना टेस्ट कराना होगा तो वह तैयार नहीं हुई। उसका कहना था कि उसे कोरोना हो जाएगा, वह टेस्ट नहीं कराएगी।’  

वहीं, लातेहार जिले की आशा वर्कर संगीता देवी ने बताया, ‘आठ-नौ महीने की गर्भवती महिलाओं का लिस्ट मांगा गया था जिसे उन्होंने जमा करा दिया है।’ हालांकि उनको जानकारी नहीं है कि कोरोना टेस्ट कराना अनिवार्य है।

उन्होंने यह भी बताया, ‘महिला का बच्चा हो गया है। ये जानकारी नहीं है कि कोरोना टेस्ट हुआ या नहीं।’

इस पूरे मामले पर बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव कहते हैं, ‘जिन चार लैब को जांच की अनुमति मिली है, राज्य से बाहर के हैं जबकि राज्य के भीतर कई लैब हैं जो 2200 में टेस्ट करने को तैयार हैं। सरकार को चाहिए कि इनसे बात कर अनुमति दे। कर्नाटक से जांच मशीन आई है, उसकी क्षमता एक दिन में पांच हजार टेस्ट की है, उसे अभी तक लगाया नहीं गया है। सरकार केवल पैसे का रोना रो रही है, समाधान नहीं निकाल रही।’  

Jharkhand
Jharkhand government
Hemant Soren
Nitin Madan Kulkarni
Coronavirus
COVID Test Kits
Pregnant women

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • Dalit Movement
    महेश कुमार
    पड़ताल: पश्चिमी यूपी में दलितों के बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट करने की है संभावना
    17 Jan 2022
    साल भर चले किसान आंदोलन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
  • stray animals
    सोनिया यादव
    यूपी: छुट्टा पशुओं की समस्या क्या बनेगी इस बार चुनावी मुद्दा?
    17 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मवेशी हैं। प्रदेश के क़रीब-क़रीब हर ज़िले में आवारा मवेशी किसानों, ख़ास तौर पर छोटे किसानों के लिए आफत बन गए हैं और जान-माल दोनों का नुकसान हो रहा है।
  • CPI-ML MLA Mahendra Singh
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: एक विधायक की मां जीते जी नहीं दिला पायीं अपने पति के हत्यारों को सज़ा; शहादत वाले दिन ही चल बसीं महेंद्र सिंह की पत्नी
    17 Jan 2022
    16 जनवरी 2005 को झारखंड स्थित बगोदर के तत्कालीन भाकपा माले विधायक महेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। 16 जनवरी को ही सुबह होने से पहले शांति देवी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्हें जीते जी तो…
  • Punjab assembly elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पंजाब विधानसभा चुनाव की नई तारीख़, अब 20 फरवरी को पड़ेंगे वोट
    17 Jan 2022
    पंजाब विधानसभा चुनाव की नई तारीख़ घोषित की गई है। अब 14 फरवरी की जगह सभी 117 विधानसभा सीटों पर 20 फरवरी को मतदान होगा।
  • Several Delhi Villages
    रवि कौशल
    भीषण महामारी की मार झेलते दिल्ली के अनेक गांवों को पिछले 30 वर्षों से अस्पतालों का इंतज़ार
    17 Jan 2022
    दशकों पहले बपरोला और बुढ़ेला गाँवों में अस्पतालों के निर्माण के लिए जिन भूखंडों को दान या जिनका अधिग्रहण किया गया था वे आज तक खाली पड़े हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License