NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
झारखंड : भूख और हिंसक भीड़ की वजह से लगातार मर रहे लोग
राजनीति के विशेषज्ञों के एक हिस्से का मानना है कि राज्य में भूख से मौत और मॉब लिंचिंग से हत्या जैसे मुद्दे वर्तमान बीजेपी सरकार के लिए परेशानी का सबब ज़रूर बनेंगे।
अनिल अंशुमन
09 Nov 2019
mob lynching
प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार : गूगल

इन दिनों झारखंड प्रदेश में लोकतंत्र का पर्व चल रहा है। हर बार की तरह इस बार भी मतदाता–जनता के हितों और प्रदेश के विकास की बातें पूरे पाँच चरणों में चीख़–चीख़ कर बताई जाएंगी। हालांकि इसके पहले ही प्रचार में सबसे आगे रहने के लिए प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी ने सरकारी ख़ज़ाने से अपनी विरुदावली को पूरे प्रदेश के हर चौक–चौराहे पर टँगवा दिया है। इसमें लिखा है, "ऐसा हुआ है पहली बार, हर ओर बह रही है विकास की बयार..." इत्यादि–इत्यादि। साथ ही यह भी ख़ूब विज्ञापित करवाया गया है कि वे ही इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिसने 526 बार प्रदेश के सभी ज़िलों का दौरा करके गांवों में रहने वाली जनता से जाकर मुलाक़ात की है।

प्रदेश की गोदी मीडिया और सरकारी भोंपू के सत्तापक्षी प्रचार की पोल उस समय सरेआम खुल गयी जब मीडिया से ही ये ख़बर आई कि 6 नवंबर को प्रदेश के गिरीडीह ज़िला स्थित जमुआ प्रखण्ड के चिलगा पंचायत के चीरूडीह गाँव की 48 वर्षीय दलित महिला सावित्री देवी की भूख से मौत हो गई। सावित्री के पति का कहना है कि घर में अनाज नहीं रहने के कारण दो दिनों से चूल्हा नहीं जला था। सरकार द्वारा मिलने वाले अनाज के लिए राशन कार्ड बनवाने की ऑन लाइन अर्ज़ी पिछले वर्ष के जुलाई में ही दी जा चुकी है। लेकिन आज तक इन्हें सरकारी राशन का अनाज नसीब नहीं हुआ।

कभी-कभी स्थानीय डीलर की मेहरबानी से जो कुछ अनाज किसी तरह मिल जाता था पिछले एक महीने से वह भी नहीं मिला है। मौक़े पर डॉक्टर को साथ लेकर पहुंची प्रशासन के आला अधिकारियों की टीम ने हमेशा की तरह इसे बीमारी से हुई मौत घोषित कर दिया। और आसपास के लोगों को दिये गए अनाज की फ़ोटो खींच कर यह कह दिया कि घर में अनाज नहीं रहने के कारण भूख से मौत की बात झूठ है। ज़िले के डीसी/एसडीओ ने घटनास्थल पर गए बग़ैर मामले की जांच होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। बीडीओ के साथ पहुँचे एमओ ने दावा किया कि सावित्री देवी की मौत भूख से हो ही नहीं सकती और अलौकिक ज्ञान से उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि सावित्री पिछले एक महीने से गंभीर रूप से बीमार थीं।

Giridih, Jharkhand.jpg

इस घटना की ख़बर सुनकर तत्काल स्थानीय ग्रामीणों के साथ वहाँ पहुंचे इसी ज़िले के राजधनवार से भाकपा माले विधायक राजकुमार यादव ने सरकार व प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। 13 जनवरी 2018 को इसी क्षेत्र के तीसरी गाँव निवासी बुधनी सोरेन की भूख से हुई मौत का मामला उठाकर उन्होंने सरकार से संज्ञान लेने को कहा था लेकिन कुछ नहीं हुआ। बुधनी की मौत को भी हेड इंजरी से हुई मौत कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। स्थानीय मीडिया ने रघुबर राज में इस इलाक़े में भूख से अन्य तीन मौतों का भी ज़िक्र करते हुए सवाल उठाए लेकिन इस पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

हिंसक भीड़ ने की एक और हत्या

दूसरी ओर, 5 नवंबर को ही गिरिडीह से सटे बोकारो ज़िले के बोकारो थर्मल इलाक़े में बैटरी चोरी के आरोप में उसी क्षेत्र के नयी बस्ती निवासी मुबारक़ अंसारी और अख़्तर अंसारी की मॉब लिंचिंग कर दी गयी। ख़बरों के अनुसार 5 नवंबर की आधी रात को बोकारो थर्मल अस्पताल के सामने मेन रोड के किनारे गाड़ी सर्विसिंग सेंटर चलने वाले प्रेमचंद महतो की पत्नी आधी रात को जब लघुशंका के लिए बाहर निकली थीं तो उन्होंने दो लोगों को वहाँ रखी गाड़ी से बैटरी चुराकर ले जाते हुए देखकर शोर मचा दिया। जिसे सुनकर पूरे परिवार और आसपास के लोग जमा हो गए।

उन दोनों को पकड़कर वहीं रखे सीमेंट के बिजली पोल से बांधकर घंटों बुरी तरह पीटा गया। सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने दोनों को मरणासन्न हाल में देखकर पुलिस को बुलाया। पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाते समय मुबारक़ अंसारी की रास्ते में ही मौत हो गयी। स्थानीय पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस कांड में शामिल प्रेमचंद महतो व उसके परिवार के पाँच सदस्यों को हत्या के आरोप में गिरफ़्तार कर अन्य 7 लोगों पर भी हत्या का केस दर्ज करने की सूचना दी है। स्थानीय शांति समिति की पहल से फ़िलहाल इलाक़े में शांति–अमन क़ायम है। 

ऐन चुनाव के दौरान घटित इन दोनों घटनाओं ने साबित कर दिया है कि वर्तमान सरकार की तमाम दलीलों के बावजूद यह प्रत्यक्ष सच है कि भूख और मॉब लिंचिंग से हो रही मौतों पर लगाम लगाने में वह और प्रशासन पूरी तरह विफल हैं। पीएम मोदी जी व गृह मंत्री अमित शाह जितना भी प्रदेश की रघुबर सरकार की यशगाथा जनता को सुनाकर इन्हें फिर से सत्तासीन करने की चौतरफ़ा कवायदें करते रहें, भूख और मॉब लिंचिंग से हो रही मौतों की वजह से क़ब्रगाह बन चुके झारखंड की वास्तविकता पर पर्दा नहीं डाल सकते। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण विरोध सड़कों पर तो नहीं उतरा लेकिन तनाव अभी भी क़ायम है। 

राजनीति के विशेषज्ञों के एक हिस्से का मानना है कि राज्य में भूख से मौत और मॉब लिंचिंग से हत्या जैसे मुद्दे वर्तमान बीजेपी सरकार के लिए परेशानी का सबब बनेंगे ही। जबकि दूसरा हिस्सा, विपक्षी दलों की अपनी ही खोल में सिमटी राजनीति के कारण राज्य की व्यापक जनता को इन ज्वलंत सवालों पर सक्रिय बनाने में असफल रह जाने और आपसी बिखराव को, सत्ताधारी दल के लिए वॉकओवर देने जैसा भी मान रहा है। 

हालांकि जन मुद्दों पर सक्रिय रहने वाले आधिकांश जन संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की लगभग एक ही राय है कि प्रदेश में बीजेपी-एनडीए कुशासन से क्षुब्ध राज्य की व्यापक जनता चुनाव में उचित जवाब देगी ही। स्वस्थ लोकतांत्रिक तक़ाज़ों के लिहाज़ से यही उम्मीद भी बनती है कि झारखंड के लोग वर्तमान विधानसभा चुनाव में जब अपने मताधिकार का प्रयोग करने जाएँ, तो अपनी ज़िंदगी के ज़रूरी सवालों को ध्यान से नहीं जाने दें और इनका जवाब अवश्य मांगें।

Jharkhand
Death due to hunger
malnutrition in children
poverty
mob lynching
mob voilence
Jharkhand government
Raghubar Das
BJP

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर

लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है

चुनाव के रंग: कहीं विधायक ने दी धमकी तो कहीं लगाई उठक-बैठक, कई जगह मतदान का बहिष्कार

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया


बाकी खबरें

  • एसकेएम
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसानों का करनाल लघु सचिवालय घेराव दूसरे दिन भी जारी
    08 Sep 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है, "किसान दृढ़ संकल्प के साथ खड़े हैं, और सरकार हत्या करके बच नहीं सकती है। हम विरोध के पीछे मजबूती से खड़े हैं और हरियाणा सरकार के कार्यों की निंदा करते हैं। किसान सीएम…
  • पीपल्स डिस्पैच
    बढ़ते स्वास्थ्य संकट के बीच श्रीलंका ने "फूड इमरजेंसी" की घोषणा की
    08 Sep 2021
    कोरोनो वायरस मामलों के रोजाना बढ़ते नए आंकड़ों ने फिर से श्रीलंका में हेल
  • पीपल्स डिस्पैच
    ह्यूमन राइट्स वॉच ने न्यायेतर हत्याओं की ख़तरनाक स्थिति को लेकर इजिप्ट पर प्रतिबंध लगाने की मांग की
    08 Sep 2021
    ह्यूमन राइट्स वॉच ने मंगलवार
  • afghanistan
    एम.के. भद्रकुमार
    पंजशीर घाटी पर तालिबान की जीत के मायने क्या हैं?
    08 Sep 2021
    सबसे पहले तो तालिबान की पंजशीर पर 'विजय' का महत्व यह है कि अब युद्ध करीब-करीब समाप्त हो गया है। देश के अन्य हिस्सों में विद्रोह भड़कने की संभावना दूर-दूर तक नहीं है। मज़ार-ए-शरीफ़ भी चुपचाप देखता रहा,…
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 37,875 नए मामले, 369 मरीज़ों की मौत
    08 Sep 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.18 फ़ीसदी यानी 3 लाख 91 हज़ार 256 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License