NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी
विगत 23 फ़रवरी से झारखंड राज्य एकीकृत पोषण सखी संघ के आह्वान पर प्रदेश की पोषण सखी कार्यकर्ताएं विधान सभा के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हुई हैं।
अनिल अंशुमन
04 Mar 2022
poshan sakhi

पिछले दिसंबर महीने में दो वर्षों का शासनकाल पूरा कर लेने पर भले ही हेमंत सरकार ने जश्न मनाकर राज्य में कई लोकलुभावन योजनाओं का झुनझुना बजा दिया। लेकिन चुनाव में किये गए वायदों को पूरा करने का मामला अब सर चढ़कर बोलने लगा है। यही वजह है कि आये दिन राजधानी की सड़कों से लेकर विधान सभा के समक्ष सरकार से अपने चुनावी वायदों को पूरा करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शनों का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है।

विगत 23 फ़रवरी से झारखंड राज्य एकीकृत पोषण सखी संघ के आह्वान पर प्रदेश की पोषण सखी कार्यकर्ताएं विधान सभा के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हुई हैं। सूचना है कि भूख हड़ताल का नेत्रृत्व कर रहीं संघ की राज्य अध्यक्ष और सचिव की हालत अच्छी नहीं है।  

भूख हड़ताल करने को मजबूर पोषण सखी कार्यकर्त्ताओं का आरोप है कि हेमंत सोरेन सरकार अपनी चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के प्रति गंभीर नहीं हैं। जिस तत्परता से चुनाव के समय अपने चुनाव घोषणा पत्र में उन्होंने घोषणा की थी कि सरकार बनने पर राज्य की सभी आँगनबाड़ी सेविका, सहायिका एवं पोषण सखी कार्यकत्ताओं को पूरा महत्व दिया जाएगा। सभी को सम्मानजनक मानदेय तथा पिछले हड़ताल अवधि के मानदेय का भुगतान करने के साथ साथ उनकी अन्य सभी मांगों को पूरा किया जाएगा।

दो बरस बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई सकारात्मक क़दम उठाना तो दूर, हाल ही में सरकार की नयी घोषणा ने उन सभी पोषण सखी कार्यकर्त्ताओं को हमेशा के लिए काम से हटा देने की चिंता में धकेल दिया है। जो पांच वर्ष पूर्व राज्य में बाल विकास परियोजना के तहत हुई अपनी नियुक्त को लेकर बहुत उत्साहित थीं कि अब उनके घर परिवार का गुजर बसर हो जाएगा।

नियुक्ति काल से लेकर आज तक घर-घर जाकर सरकार की सभी स्वास्थ्य योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू करने में आज भी सभी पोषण सखियाँ पूरी ईमानदारी से कार्य कर रहीं हैं। सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों तक में कुपोषण से मुक्ति, टीकाकरण, बीएलओ कार्य तथा कोविड से बचाव कार्य सम्बन्धी योजनाओं को बखूबी अंजाम दे रहीं है। पिछले कोरोना काल में तो जान जोखिम में भी डाल कर काम कर रहीं कई पोषण सखी महिलायें गंभीर रूप से संक्रमण की चपेट में आ गयीं थीं। जिनमें से गढ़वा में एक की कोरोना से मौत भी हो गयी। लेकिन उनके परिजनों को कोई सरकारी सहायता नहीं मिली।

पोषण सखी कार्यकर्त्ताओं को सरकार की ओर से 2016 से 100 रुपये प्रतिदिन मानदेय मिलता था। लेकिन आज पिछले 11 महीनों से मानदेय के बकाया वेतन भुगतान के लिए विभाग के आला अफसरों से लेकर मंत्री-मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाकर थक चुकीं हैं। बेहद गरीब घरों से आने वाली ये पोषण सखी कार्यकर्ताएँ जिनकी आर्थिक हालत जो पहले से ही काफी दयनीय रही है, इन दिनों वेतन नहीं मिलने से इनके पूरे घर-परिवार के समक्ष भूखों मरने की नौबत आ गयी है। जहां तहां से क़र्ज़ उधारी लेकर काम चलाने की भी स्थिति नहीं रह गयी है। उधर विभागीय अधिकारी भी रटे रटाये अंदाज़ में कह रहें हैं कि उनके वेतन के लिए कोई फंड नहीं आया है।

प्रदेश की 39 हज़ार आँगनबाड़ी केन्द्रों में तैनात 12,000 पोषण सखी कार्यकर्ताएं हेमंत सरकार के वायदे के मुताबिक मानदेय में बढ़ोत्तरी, पोषण सखी सेवा शर्त नियमावली बनाने, नियमित सरकारीकर्मी का दर्ज़ा व मानदेय के स्थान पर सम्मानजनक वेतन दिए जाने इत्यादि मांगों को लगातार सरकार के संज्ञान में लाने की कोशिश कर रही हैं। सड़कों पर भी आवाज़ उठा रहीं हैं लेकिन इनकी सुनने वाला कोई नहीं है। थक हार कर विधान सभा के समक्ष भूख हड़ताल करना मज़बूरी बन गयी।

भूख हड़ताल पर बैठे पोषण सखी संगठनों के प्रतिनिधियों के अनुसार अब तक दो बार सरकार और सम्बंधित विभाग को विशेष मांग पत्र देकर अपनी पांच सूत्री मांगों के सन्दर्भ में पत्र लिखकर याद दिलाया गया है कि किस प्रकार से पोषण सखियाँ कोरोना महामारी से निपटने के दौरान हर रिस्क उठाकर गाँव-गाँव स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में अग्रिम पंक्ति खड़ी रहीं हैं।

28 फ़रवरी को झारखंड विधान सभा के मौजूदा बजट सत्र के दौरान इन्होने विधान सभा के समक्ष विरोध प्रदर्शन भी किया। इनके आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह ने इनकी मांगों का समर्थन करते हुए विधान सभा में उठाने का आश्वासन भी दिया। साथ ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल से हटने की अपील करते हुए कहा कि अभी लड़ाई बहुत लम्बी लड़नी है इसलिए स्वास्थ्य को जोखिम में ना डालें और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कार्यक्रम को धरना में तब्दील कर दें।

बाद में विनोद सिंह के नेतृत्व में आन्दोलनकारी पोषण सखी कार्यकर्त्ताओं का प्रतिनिधि मंडल राज्य महिला एवं बाल विकास मंत्री से मिलकर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए ज्ञापन भी दिया।

गौरतलब है कि प्रदेश में इन दिनों छोटे से छोटे मसले को हंगामेदार बनाकर हेमंत सरकार को घेरने में जुटे प्रदेश के विपक्षी दल भाजपा का कोई भी नेता-कार्यकर्त्ता आज तक विधान सभा के समक्ष अनिश्चितक़ालीन भूख हड़ताल पर बैठी पोषण सखी कार्यकर्ताओं से मिलने की जहमत भी नहीं उठायी है। सोशल मिडिया में टिप्पणी आई है कि इस मुद्दे को ‘हिन्दू मुस्लिम’ मामला नहीं बनाया जा सकता है इसीलिए इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

फिलहाल, झारखंड विधान सभा का बजट सत्र जारी है और हेमंत सरकार से अपने वायदे पूरा करने की मांग को लेकर ‘अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल’ पर डटी पोषण सखी कार्यकत्ताओं का आन्दोलन भी जारी है। ताज़ा सूचना के अनुसार 2 मार्च को विधान सभा प्रशासन के प्रतिनिधि ने आकर कहा कि सरकार ज़ल्द ही आपकी मांगों पर विचार करेगी, इसलिए आप लोग ये भूख हड़ताल कार्यक्रम समाप्त कर दें। जवाब में पोषण सखी कार्यकर्ताओं ने जब उनसे कहा कि लिखित दीजिये तो वे बैरंग वापस चले गए।

ये भी पढ़ें: झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोधरोध

Jharkhand
Hemant Soren
POSHAN Sakhi
POSHAN Sakhi protest
workers protest
hunger strike

Related Stories

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

मध्य प्रदेश : आशा ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने किया यूनियन नेताओं को गिरफ़्तार

अधिकारों की लड़ाई लड़ रही स्कीम वर्कर्स

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार


बाकी खबरें

  • cb
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: ‘बीजेपी-कांग्रेस दोनों को पता है कि विकल्प तो हम दो ही हैं’
    27 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में 2000, 2007 और 2017 में भाजपा सत्ता में आई। जबकि 2002 और 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने सरकार बनाई। भाजपा और कांग्रेस ही बारी-बारी से यहां शासन करते आ रहे…
  •  नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    27 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • सोनिया यादव
    यूपी: महिला वोटरों की ज़िंदगी कितनी बदली और इस बार उनके लिए नया क्या है?
    27 Jan 2022
    प्रदेश में महिलाओं का उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने का औसत भले ही कम रहा हो, लेकिन आधी आबादी चुनाव जिताने का पूरा मददा जरूर रखती है। और शायद यही वजह है कि चुनाव से पहले सभी पार्टियां उन्हें लुभाने…
  • यूपी चुनाव:  उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    27 Jan 2022
    यूपी में महिला उम्मीदवारों के लिए प्रियंका गांधी की तलाश लगातार जारी है, प्रियंका गांधी ने पहले उन्नाव रेप पीड़िता की मां पर दांव लगाया था, और अब वो सोनभद्र नरसंहार में अपने भाई को खो चुकी महिला को…
  • alternative media
    अफ़ज़ल इमाम
    यूपी चुनावः कॉरपोरेट मीडिया के वर्चस्व को तोड़ रहा है न्यू मीडिया!
    27 Jan 2022
    पश्चिमी यूपी में एक अहम बात यह देखने को मिल रही है कि कई जगहों पर वहां के तमाम लोग टीवी न्यूज के बजाए स्थानीय यूट्यूब चैनलों व वेबसाइट्स पर खबरें देखना पसंद कर रहे हैं। यह सिलसिला किसान आंदोलन के समय…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License