NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
झारखंड: जेपीएससी में सुधार हेमंत सोरेन सरकार का चुनौतीपूर्ण कार्यभार
झारखंड प्रदेश के मूलवासी प्रतियोगिता अभ्यर्थी छात्र–युवा इस बार उलगुलान दिवस पर झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं में झारखंडी भाषाओं (जनजातीय व क्षेत्रीय) को सम्मानजनक स्थान दिये की मांग को लेकर पदयात्रा निकालेंगे।
अनिल अंशुमन
05 Jun 2020
jharkhand

हर वर्ष 9 जून को झारखंड के अगुआ प्रतीक नायक बिरसा मुंडा के शहादत दिवस को उलगुलान दिवस के रूप में मनाया जाता है। झारखंड प्रदेश के मूलवासी प्रतियोगिता अभ्यर्थी छात्र–युवा इस बार इस दिवस पर झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं में झारखंडी भाषाओं (जनजातीय व क्षेत्रीय) को सम्मानजनक स्थान दिये की मांग को लेकर पदयात्रा निकालेंगे। इस मांग के पक्ष में व्यापक झारखंडी जन समर्थन जुटाने के लिए यह पदयात्रा बिरसा मुंडा के जन्म स्थान उलीहातु (खूंटी ज़िला) से शुरू होकर सिद्धों–कनू के जन्मस्थान भोगनाडीह (दुमका, संतालपरगना) तक निकाली जाएगी।

image (1)_0.png

गत 3 जून को रांची के मोरहाबादी स्थित गांधी स्मारक परिसर में झारखंड की सभी आदिवासी (जनजातीय) व क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षाविद, लेखक,शोधार्थी व प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधियों की हुई बैठक में इसका निर्णय लिया गया।

बैठक झारखंड पब्लिक कमीशन (जेपीएससी) की परीक्षाओं में प्रदेश की सभी जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाओं को उचित स्थान नहीं दिये जाने के सवाल को लेकर बुलाई गयी थी। अपने ही राज्य की परीक्षाओं में यहाँ की मातृभाषाओं की हो रही उपेक्षा पर क्षोभ प्रकट करते हुए चर्चा की गयी कि किस तरह से पूर्व में प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं में झारखंडी भाषाओं के लिए 400 अंक निर्धारित हुआ था। जिससे झारखंडी भाषाओं के विकास को एक स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा था। लेकिन पिछली (भाजपा) सरकार ने सीसैट के नाम पर झारखंडी भाषाओं के महत्व को कम आँकते हुए इन विषयों के अंकों को घटाकर 150 कर दिया। जो यहाँ की मातृभाषाओं के अपमान के साथ साथ इसके विकास को अवरुद्ध करने वाला है । चूंकि अब प्रदेश की सत्ता में झारखंडी आकांक्षाओं को सुनने समझने वाली हेमंत सोरेन की सरकार आई है तो वह अविलंब संज्ञान लेकर इस विसंगति को दूर कर फिर से झारखंडी भाषाओं के लिए 400 अंक के पूर्व की निर्धारण को बहाल करे ।

सनद हो कि झारखंड प्रदेश में संताली, मुंडारी, हो, कुड़ुख (उरांव) तथा खड़िया को जनजातीय भाषा तथा नागपुरी (सादरी), खोरठा, कुरमाली व पाँचपरगनिया को क्षेत्रीय ( सदानी ) भाषा की मान्यता मिली हुई है। झारखंड राज्य गठन के बाद इन सभी भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का भी दर्जा दिया गया। इन सभी भाषाओं का अपना विशेष सामाजिक आधार और प्रभाव क्षेत्र है । 

इस संदर्भ में प्रदेश के वरिष्ठ मातृभाषा आंदोलनकारी व खोरठा भाषा के शिक्षाविद डॉ. बी एन ओहदार के अनुसार 70 वर्षों से भी अधिक समय तक चले झारखंड राज्य गठन आंदोलन के केंद्रीय मुद्दों में यहाँ की भाषा–संस्कृति के विकास का सवाल एक प्रमुख मुद्दा रहा है। लेकिन दुर्भाग्य है कि तमाम संवैधानिक प्रावधानों के रहते देश के विभिन्न राज्यों की भाषाओं कि भांति झारखंड राज्य की भाषाओं को अभीतक उनके ही प्रदेश में समुचित सम्मान–अधिकार नहीं मिल सका है। राज्य गठन के 19 बरस बीत जाने के बावजूद इन भाषाओं के पठन–पाठन और विकास–विस्तार का व्यवस्थित कार्य योजना जमीनी धरातल पर नहीं उतारी जा सकी है। परिणामतः आज इनमें से कई तो अस्तित्व संकट का भी सामना कर रहीं हैं।

डॉ. ओहदार ने बताया कि पिछली सरकारों द्वारा प्रदेश में होनेवाली जेपीएससी की परीक्षाओं के विषयों में ‘ ऑपशन ’ विषय के रूप में 400 अंक देकर शामिल किए जाने से थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन रघुवर सरकार द्वारा उसमें भी कटौती कर मात्र 150 करने के फैसले ने हमें काफी आहत और अपमानित कर दिया। डॉ. ओहदार ने हेमंत सोरेन सरकार से अपील कि है कि झारखंडी भाषाओं के नंबर बढ़ाए जाने से बेहतर होगा कि इन्हें अनिवार्य विषय के रूप में मान्यता दी जाये।

वैसे उक्त पहलू के अलावा भी झारखंड के लोगों की नज़र में झारखंड लोक सेवा आयोग अपनी काफी विश्वसनीयता खो बैठा है। संभवतः झारखंड ही एकमात्र ऐसा प्रदेश है जहां लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित शायद ही कोई ऐसी परीक्षा अथवा उसके रिजल्ट प्रकाशन प्रक्रिया हुई हो तो उसके खिलाफ सड़कों पर हंगामे से लेकर हाई कोर्ट में केस दायर न हुआ हो। जिसमें व्याप्त समुचित पारदर्शिता के अभाव के साथ साथ पैसा–पैरवी व अन्य अनियमितताओं की घटनाओं के आए दिन उजागर होने से पूरा प्रदेश वाकिफ है। आयोग में जड़ जमाए संस्थाबद्ध धांधलीबाजों के करतूतों का ही परिणाम है कि राज्य गठन के इन 18 वर्षों में आयोग संचालित सभी नियुक्ति परीक्षाओं पर सीबीआई जांच चल रही है।

इसी लॉकडाउन में जब छठी जेपीएससी परीक्षा का रिजल्ट प्रकाशन के बाद आयोग पर आरक्षण अनियमितता व हाईकोर्ट के दिये आदेश मानकों का खुला उल्लंघन का आरोप लगाते हुए व्यापक अभ्यर्थियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। लॉकडाउन प्रतिबंधों के बीच विरोध आंदोलनों के तहत ताली–थाली पीटो अभियान तथा धरना–आमरण अनशन जैसे कार्यक्रमों का तांता सा लग गया।

झारखंड लोक सेवा आयोग की लचर कार्यप्रणाली तथा वहाँ व्याप्त अनियमिताओं के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष के रूप में हेमंत सोरेन व भाकपा माले विधायक विनोद सिंह समेत कई प्रमुख गैर भाजपा विधायकों द्वारा पूर्व में भी विधानसभा में उठाए गए सवालों पर तत्कालीन भाजपा– एनडीए सरकारों के नेता – मंत्रियों की हठधर्मिता से कई बार सदन हंगामे के कारण स्थगति होता रहा है।

लॉकडाउन के कारण गत मार्च में स्थगित हुई झारखंड विधान सभा बजट सत्र के दौरान भी जेपीएससी को लेकर उठे सवालों पर खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सदन में गंभीरता से कहना पड़ गया कि – मैं तो हर रोज़ भगवान से ये प्रार्थना करता हूँ कि मेरे परिवार से कोई जेपीएससी पास न करे।

बहरहाल, यूं तो अनलॉक–1 की जारी डगमग प्रक्रिया और प्रदेश में महामारी संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बीच भी प्रदेश के अधिकांश प्रतियोगी अभ्यर्थी झारखंड लोक सेवा के अविश्वासपूर्ण क्रिया कलापों के खिलाफ आर-पार के मूड में हैं। उनका खुला आरोप है कि लॉकडाउन की बंदी का सहारा लेकर आयोग ने जो छठी मुख्य परीक्षा का विवादास्पद रिजल्ट घोषित करने का कुचक्र रचा है , हम नहीं सफल होने देंगे। आयोग में काबिज निहित झारखंड विरोधी ताकतों द्वारा यहाँ के छात्र–छात्राओं के भविष्य के साथ जो षड्यंत्र किया जा रहा है , हम नहीं चलने देंगे।

जेपीएससी के खिलाफ आंदोलनरत अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि इसमें जारी मनमानी को संरक्षण देनेवाले रघुवर दास और उनकी सरकार को सत्ता से बेदखल कर हेमंत सोरेन को सत्ता में पहुंचाने में हमारी भी अहम भूमिका रही है। अब हेमंत जी पर भी हम दबाव बनाएँगे कि वे जल्द से जल्द झारखंड लोक सेवा आयोग कि बिगड़ी दशा–दिशा में सुधार लाकर प्रदेश के युवाओं का भविष्य बर्बाद नहीं होने दें ।

उक्त संदर्भ में पूर्व में झारखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े रहे तथा हाल ही में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के उपकुलपति पद से अवकाश ग्रहण करने वाले वरिष्ठ शिक्षाविद व अर्थशास्त्री प्रो. रमेश शरण का कहना है कि-ज़रूरत है प्रदेश हाईकोर्ट के जज के नेतृत्व में आयोग के अबतक के सभी कार्यों की स्वतंत्र–निष्पक्ष जांच कराई जाय। साथ ही नए सिरे से एक पारदर्शी व सुसंगत कार्य योजना पर जवाबदेही पूर्वक अमल कर आयोग प्रदेश के लोगों और युवाओं में फिर से अपना विश्वास कायम करे।

इंकलाबी नौजवान सभा झारखंड प्रदेश के सचिव अमल घोषाल ने भी अपने संगठन की ओर से हेमंत सरकार से मांग है कि उनकी सरकार झारखंड प्रदेश के युवाओं की उम्मीदों सम्मान करे और जल्द से जल्द झारखंड लोक सेवा आयोग में काबिज और भाजपा संरक्षित गिरोह को निकाल बाहर करे । साथ ही आयोग की नियुक्ति – परीक्षाओं में प्रदेश की मातृभाषाओं को सम्मानजनक स्थान देने की गारंटी करे ।

Jharkhand
JPSC
Improvement in JPSC
Hemant Soren
Protest

Related Stories

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

बिजली संकट को लेकर आंदोलनों का दौर शुरू

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 


बाकी खबरें

  • नई दिल्ली ने आख़िरकार कश्मीर के राजनीतिक दलों के लिए खोले बातचीत के दरवाज़े
    अनीस ज़रगर
    नई दिल्ली ने आख़िरकार कश्मीर के राजनीतिक दलों के लिए खोले बातचीत के दरवाज़े
    21 Jun 2021
    इस पहलकदमी का स्वागत करते हुए राजनीतिक दलों का मानना है कि "बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय दबाव" और ज़मीन पर लक्ष्यों को "हासिल नहीं कर पाने में नाकामी" के कारण ही  केन्द्र सरकार उन्हीं पार्टियों, जिनको वे…
  • टीका
    प्रबीर पुरकायस्थ
    टीका रंगभेद के बाद अब टीका नवउपनिवेशवाद?
    21 Jun 2021
    कोविड-19 के ख़िलाफ़ दुनिया के टीकाकरण का तक़ाज़ा है कि टीकों के उत्पादन को दुनिया भर में फैला दिया जाए। मिसाल के तौर पर अफ्रीका, जिसकी आबादी 130 करोड़ की है, अपनी ज़रूरत के 99 फीसद टीकों का आयात करता…
  • सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट
    कृष्णन अग्रवाल
    सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट: क्या मौजूदा हुकूमत दिल्ली के क्रूर इतिहास से बच पाएगी?
    21 Jun 2021
    पहले भी कई महान राजधानी शहर बनाए गए हैं, मगर स्मारकीय वास्तुकला के माध्यम से किसी भी  हुकूमत द्वारा सत्ता का प्रदर्शन शहर के इतिहास में लंबे समय तक नहीं टिक पाया है।
  • UAPA क्या अपनी तरह का पहला कानून है?
    न्यूज़क्लिक टीम
    UAPA क्या अपनी तरह का पहला कानून है?
    20 Jun 2021
    क्या Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) नज़रबंदी या preventive detention से जुड़ा पहला कानून है? इतिहास के पन्ने के इस अंक में लेखक और वरिष्ठ पत्रकार निलांजन मुखोपाध्याय UAPA कानून और उससे…
  • शिफ्टिंग हालो, चित्रकार-अनुपम सूद,  रंगीन अम्लांकन, 1980 , 52 × 67 सेमी., साभार: समकालीन कला, ललित कला अकादमी की पत्रिका, नवम्बर 1985 अंक
    डॉ. मंजु प्रसाद
    आर्ट गैलरी : देश की प्रमुख महिला छापा चित्रकार अनुपम सूद
    20 Jun 2021
    अनुपम सूद के चित्र आकृति मूलक हैं। उनके चित्रों में कुछ उदासी और बेचैनी लिए हुए मानवाकृतियां खामोशी और मौन प्रतिक्रिया से ही अव्यक्त को व्यक्त कर देती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License