NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
झारखण्ड : शहीद स्मारक धरोहर स्थल पर स्कूल निर्माण के ख़िलाफ़ आदिवासी संगठनों का विरोध
आदिवासी संगठन ने प्रशासन से कहा कि स्मारक स्थल वर्षों से उनकी आस्था उपासना का भी केंद्र रहा है. इससे उनकी धार्मिक आस्थाएं जुडी हुई हैं. विद्यालय निर्माण होने से यह स्थल हमेशा के लिए नष्ट हो जायेगा। इसलिए विद्यालय यहाँ की बजाय दूसरी जगह पर बनाया जाय। क्षेत्र में काफी सरकारी ज़मीनें हैं. 
अनिल अंशुमन
25 Nov 2021
jharkhand

 झारखंड की राजधानी रांची से सटे चान्हों प्रखंड के सिलागांई में आजादी के शहीद नायक और कोल विद्रोह के लड़ाका वीर बुधु भगत स्मारक स्थल भूखंड के एक हिस्से पर केंद्र सरकार स्वीकृत एकलव्य आवासीय विद्यालय निर्माण का विरोध प्रकरण दिनों दिन तीखा होता जा रहा। मिडिया इसमें स्थानीय आदिवासी समुदाय में ही दो भाग हो जाने की बात स्थापित कर रही है कि इसमें एक हिस्सा विद्यालय निर्माण के विरोध में और एक हिस्सा समर्थन में खड़ा हो गया है। 

21 नवम्बर को विद्यालय निर्माण के तहत खड़ी की गयी चाहरदीवारी को विद्यालय निर्माण का विरोध कर रहे दर्जनों स्थानीय आदिवासी संगठनों के लोगों द्वारा ढा दिए जाने के बाद से मामला काफी तनावपूर्ण बनता जा रहा है। पुलिस ने इस घटना के लिए सिलागांई के स्थानीय मुखिया समेत 17 नामजद और 1000 से अधिक अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। 

ज्ञात हो शहीद वीर बुधु भगत शहीद स्मारक भूखंड परिसर में एकलव्य आवासीय विद्यालय बनाए जाने का विरोध उसी समय से शुरू हो गया था, जब चार माह पूर्व केन्द्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा और भाजपा सांसद ने अपनी सरकार की योजना के तहत यहाँ एकलव्य विद्यालय निर्माण के लिए  शिलान्यास किया था. जिसके तत्काल बाद से ही स्थानीय आदिवासी और सामाजिक संगठनों ने शहीद स्थल का जबरन हथियाने का आरोप लगाते हुए विरोध करना शुरू कर दिया. 

अपने आराध्य नायक के शहीद स्मारक परिसर के भूखंड पर विद्यालय निर्माण किये जाने की घोषणा की खबर फैलते ही आस पास के आदिवासी गांवों से इस क़दर तीखा विरोध उभरने लगा कि लोग सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर उतरकर प्रातिवाद प्रदर्शित करने लगे. जिसे हटाने के क्रम में 2 सितम्बर को स्थानीय आदिवासी गांवों की कमिटी और चान्हो के थाना प्रभारी और सीओ की वार्ता में ये समझौता हुआ कि जब तक जिले के डीसी से मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं होता तब तक यहाँ एकलव्य विद्यालय का निर्माण कार्य बंद रहेगा. 

आदिवासी समुदाय और उनके संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से यही कहा कि वीर बुधु  भगत शहीद स्मारक स्थल वर्षों से उनकी आस्था उपासना का भी केंद्र रहा है. यहाँ वे अपनी पारंपरिक आराधना के तौर पर सतबाइनी पूजा, पथलकुदवा पूजा स्थल, टोंगरी आयो पूजा स्थल के रूप में इसे पवित्र मानते हैं. इससे उनकी धार्मिक आस्थाएं जुडी हुई हैं. विद्यालय निर्माण होने से यह स्थल हमेशा के लिए नष्ट हो जायेगा इसलिए विद्यालय यहाँ की बजाय दूसरी जगह पर बनाया जाय. क्षेत्र में काफी सरकारी ज़मीनें हैं. 

बावजूद इसके वहाँ विद्यालय निर्माण प्रक्रिया शुरू किये जाने की कार्रवाई से क्षुब्ध सिलागांई समेत आस पास के सभी आदिवासी गावों के लोग विद्यालय निर्माण के खिलाफ प्रायः हर दिन सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने लगे. 25 सितम्बर को भी  सिलागांई के काठीटांड चौक, बिजुपाड़ा और नगड़ी में सड़क जाम कर विरोध करने लगे. जाम हटाने के लिए पुनः चान्हों थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि अगले 29 सितम्बर को डीसी से उनकी वार्ता कराये जाने तक कोई निर्माण कार्य नहीं होगा. 29 सितम्बर को गाँव वालों  की डीसी से वार्ता हुई तो इस निर्णय पर सहमती बनी कि अगले एक महीने के अन्दर मीटिंग होगी और विद्यालय निर्माण को लेकर आगे का फैसला लिया जाएगा. साथ ही जबतक कोई आम सहमती वाला निर्णय नहीं हो जाता तब तक विद्यालय निर्माण का कोई काम नहीं होगा. लेकिन एक माह से अधिक का समय बीत जाने पर भी कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया. इस बीच सिलागांई के अलावे आस पास के कई अन्य स्थानों पर प्रतिवाद प्रदर्शन होता रहा. 

8 सितम्बर को विधान सभा के समक्ष भी जन घेराव किया गया. जिसमें राजी पड़हा झारखण्ड, केन्द्रीय सरना समिति, आदिवासी अधिकार मंच, आदिवासी महासभा, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद्, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा और आदिवासी छात्र संघ समेत कई आदिवासी सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए. 

जिस पर संज्ञान लेकर मुख्यम्मंत्री हेमंत सोरेन ने भी जन भावना को देखते हुए एकलव्य विद्यालय को शहीद स्मारक स्थल से अलग दूसरे स्थान पर निर्माण करने डीसी को आदेश दिया.

29 नवम्बर को आन्दोलनकारी आदिवासियों के प्रतिनिधि मंडल ने झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भटाचार्य से भी गुहार लगाई तो उन्होंने भी आश्वासन दिया कि फिलहाल निर्माण कार्य बंद रहेगा. 

शहीद स्मारक अतिक्रमण का विरोध कर रहे आदिवासी संगठनों ने साफ़ कहा है कि हम विद्यालय निर्माण के विरोधी नहीं हैं, जैसा कि कतिपय रानजीतिक लोग ये दुष्प्रचारित कर रहें हैं.हमारा कहना है कि आसा पास की ज़मीनों पर कहीं भी विद्यालय ज़रूर बने लेकिन शहीद स्म्मारक स्थल का अतिक्रमण करके नहीं बने. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनितिक दल विशेष के इशारे से शहीद स्मारक कमिटी के नाम पर चंद पार्टी समर्थक आदिवासी सदस्यों और शहीद बुधु भगत के वंशजों को आगे रखकर भ्रम का भ्रम फैलाया जा रहा है. मिडिया को मैनेज कर संगठित दुष्प्रचार चलाया जा रहा है कि स्थानीय लोगों के भारी समर्थन के बावजूद आदिवासी शिक्षा विरोधी चंद आदिवासी संगठनों के लोग निहित स्वार्थ के लिए विद्यालय का निर्माण नहीं होने दे रहें हैं. 

स्थानीय आदिवासियों के विरोध को दरकिनार कर विद्यालय का निर्माण कार्य जारी रखने से क्षुब्ध होकर 21 नवम्बर को सैंकड़ो आन्दोलनकारी आदिवासियों ने सिलागांई पहुंचकर विद्यालय की नवनिर्मित दीवार को गिरा दिया. निर्माण कार्य करने वाली निजी कंपनी ने आरोप लगाया है कि विरोधियों ने वहाँ रखी मिक्सर मशीन और पानी के टैंकरों में आग लगाकर जला दिया और करोड़ों की क्षति पहुंचाई है. 

मिडिया ने भी विरोध कर रहे आदिवासियों का नकारात्मक चित्रण करते हुए खबर बनायी कि- सिलागांई में पुलिस के सामने ही ढाह दी गयी एकलव्य विद्यालय की बाउंडरी. हथौड़ा हथियारों से लैस लोगों ने चाहरदीवारी तोड़ दिया और निर्माण कार्य हेतु रखी गयी मिक्सर मशीन और पानी के टेंकरों को भी आग के हवाले कर दिया. हाँ, छोटे बॉक्स खबर में यह भी सूचना दी गयी कि क्या है मामला?

इस प्रकरण में झारखण्ड टीएसी के पूर्व सदस्य और आदिवासी नेता रतन तिर्की ने कहा है कि जब यहाँ निर्माण को लेकर सरकार व प्रशासन से वार्ता चल ही रही है तब भी यहाँ विद्यालय निर्माण कार्य किया जाना कहीं से भी सही नहीं है. दूसरे, वीर बुधु भगत शहीद स्मारक से इस पुरे क्षेत्र के व्यापक आदिवासी समुदाय की भावनाएं जुड़ी हुई हैं तब भी इसी स्थल पर विद्यालय बनाने की जिद लागू करना कहीं न कहीं से किसी दूसरी राजनीती की ओर इशारा करता है. किसी रजनीतिक दल विशेष का नाम लिए बगैर यह भी कहा कि यह सिलागांई का इलाका आज ऐसा संवेदनशील बनाया जा चुका है कि यहाँ कभी भी कुछ भी हो जा सकता है. पहले यहाँ मुस्लिम बनाम आदिवासी तनाव का वितंडा होता रहा है, इस बार निशाने पर आदिवासी बनाम आदिवासी को ही खड़ा किया जा रहा है. 

फ़िलहाल यह मामला पूरी तरह से सियासी रंग लेता जा रहा है और इसका सहज समाधान होता नहीं दीख रहा है. चंद दिनों पुर्व ही देश के प्रधान मंत्री ने बिरसा मुंडा जयंती के दिन ‘जनजातीय गौराव दिवस’ मनाकर सभी आदिवासी शहीद नायकों को उचित सम्मान दिए जाने की घोषणा की थी, तो क्या वीर बुधु भगत शहीद स्मारक को दरकिनार कर वहां विद्यालय निर्माण करना कहाँ से भी उचित है क्या? 

Jharkhand
Tribal organizations
Tribal organizations protest
Budhu Bhagat

Related Stories

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

'सोहराय' उत्सव के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता का जिक्र करने पर आदिवासी महिला प्रोफ़ेसर बनीं निशाना 

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

झारखंड: बेसराजारा कांड के बहाने मीडिया ने साधा आदिवासी समुदाय के ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर निशाना

झारखंड: ‘स्वामित्व योजना’ लागू होने से आशंकित आदिवासी, गांव-गांव किए जा रहे ड्रोन सर्वे का विरोध

झारखंड : ‘जनजातीय गौरव दिवस’ से सहमत नहीं हुआ आदिवासी समुदाय, संवैधानिक अधिकारों के लिए उठाई आवाज़! 


बाकी खबरें

  • Western media
    नतालिया मार्क्वेस
    यूक्रेन को लेकर पश्चिमी मीडिया के कवरेज में दिखते नस्लवाद, पाखंड और झूठ के रंग
    05 Mar 2022
    क्या दो परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध का ढोल पीटकर अंग्रेज़ी भाषा के समाचार घराने बड़े पैमाने पर युद्ध-विरोधी जनमत को बदल सकते हैं ?
  •  Mirzapur
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: चुनावी एजेंडे से क्यों गायब हैं मिर्ज़ापुर के पारंपरिक बांस उत्पाद निर्माता
    05 Mar 2022
    बेनवंशी धाकर समुदाय सभी विकास सूचकांकों में सबसे नीचे आते हैं, यहाँ तक कि अनुसूचित जातियों के बीच में भी वे सबसे पिछड़े और उपेक्षित हैं।
  • Ukraine return
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे ठाले:  मौत के मुंह से निकल तो गए लेकिन 'मोदी भगवान' की जय ना बोलकर एंटिनेशनल काम कर गए
    05 Mar 2022
    खैर! मोदी जी ने अपनी जय नहीं बोलने वालों को भी माफ कर दिया, यह मोदी जी का बड़प्पन है। पर मोदी जी का दिल बड़ा होने का मतलब यह थोड़े ही है कि इन बच्चों का छोटा दिल दिखाना ठीक हो जाएगा। वैसे भी बच्चे-…
  • Banaras
    विजय विनीत
    बनारस का रण: मोदी का ग्रैंड मेगा शो बनाम अखिलेश की विजय यात्रा, भीड़ के मामले में किसने मारी बाज़ी?
    05 Mar 2022
    काशी की आबो-हवा में दंगल की रंगत है, जो बनारसियों को खूब भाता है। यहां जब कभी मेला-ठेला और रेला लगता है तो यह शहर डौल बांधने लगाता है। चार मार्च को कुछ ऐसा ही मिज़ाज दिखा बनारस का। यह समझ पाना…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में क़रीब 6 हज़ार नए मामले, 289 मरीज़ों की मौत
    05 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 5,921 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 29 लाख 57 हज़ार 477 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License