NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड : मॉब लिंचिंग क़ानून के बारे में क्या सोचते हैं पीड़ितों के परिवार?
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने मॉब लिंचिंग पर लगाम कसने के लिए  'भीड़ हिंसा एवं भीड़ लिंचिंग निवारण विधेयक'क़ानून 21 दिसंबर को सदन से पास करवा लिया है। इस नए क़ानून से मॉब लिंचिंग के पीड़ित व्यक्तियों के परिवारों को कितनी उम्मीद है, यह जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने उनसे बात की।
ज़ाकिर अली त्यागी
31 Dec 2021
tabrej

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने मॉब लिंचिंग पर लगाम कसने के लिए  'भीड़ हिंसा एवं भीड़ लिंचिंग निवारण विधेयक'क़ानून 21 दिसंबर को सदन से पास करवा लिया है। तैयार मसौदे के अनुसार मॉब लिंचिंग के दोषी को सश्रम आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा। इस नये क़ानून से लिंचिंग के पीड़ित परिवारों की क्या है उम्मीदें, क्या उन्हें जल्द से जल्द न्याय मिल पायेगा? वह इस क़ानून को किस नज़र से देखते हैं, इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए न्यूज़क्लिक ने पीड़ित परिवारों से बात की!

18 मई 2017 को सरायकेला खरसांवा जिले के राजनगर (शोभापुर) इलाक़े में शेख हलीम, शेख नईम, सिराज ख़ान और मोहम्मद साजिद को भीड़ ने इसलिए पीटकर मार डाला क्योंकि उन्हें शक था कि इन लोगों ने एक वैवाहिक समारोह के भोज के लिए बीफ की सप्लाई की थी। मृतक हलीम के भाई शेख हलीम ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, "मेरे भाई की मौत के मामले में 22 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, 12 आरोपियों को 4 साल की सज़ा सुनाई गई लेकिन वह कुछ दिनों बाद ही जमानत पर रिहा हो गये, सरकार ने हमें सिर्फ़ 2 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया लेकिन नौकरी का वादा कर नौकरी आज तक नही दी, हलीम की 2 बेटी और 1 बेटे के साथ उसकी पत्नी फ़कीरों जैसा गुज़ारा कर रही है, आरोपी आज़ाद हैं। मेरी सरकार से अपील है कि बनाये गये नये क़ानून के तहत यदि आरोपियों पर कार्रवाई की जाती है तो हमें भी न्याय मिल सकेगा, अभी तक सरकार से जो मदद मिलनी थी नहीं मिली, मेरे भाई के दोषियों पर सरकार कार्रवाई करे वह आज़ाद घूम रहे हैं, मॉब लिंचिंग पर बने क़ानून की हम तारीफ़ करेंगे क्योंकि हम चाहते हैं फिर से किसी की लिंचिंग न हो।"

18 मई 2017 को ही पूर्वी सिंहभूम ज़िले के बागबेड़ा थाना क्षेत्र में भीड़ ने बच्चा चोरी का आरोप लगाकर एक महिला समेत चार लोगों को पीटा। इसमें दो सगे भाइयों, गौरव वर्मा और विकास वर्मा और उनकी दादी रामसखी देवी की मौके पर ही मौत हो गई थी, मृतकों का भाई उत्तम वर्मा की जान बच गई, उत्तम वर्मा ने अपने परिजनों की मौत और लिंचिंग पर लगाम के लिए बने क़ानून का ज़िक्र करते हुए हमसे कहा कि "मेरे 2 भाइयों और मेरी दादी को बच्चा चोरी के आरोप में पीट पीटकर मार डाला गया मैं बच तो गया लेकिन मेरी जान भी मेरे मरने वाले भाइयों ने ही बचाई, पीटने वालों ने पहले मुझसे आधार कार्ड मंगवाए आधार कार्ड देखकर मेरे परिवार के 3 लोगों को मार डाला, इस मामले में प्रशासन भी नतमस्तक होकर देखता रहा था, बाद में 35 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया फ़िलहाल सभी जमानत पर बाहर हैं, 2 व्यक्ति जेल में ही है। मैं हेमंत सोरेन सरकार से कहता हूँ कि हमारे मामले में सीबीआई जांच हो ताकि लिंचिंग करने वालों के साथ लिंचिंग कराने वालों के नाम भी सामने आ सकें। अभी तक तो हमें न्याय मिला नहीं।  नये क़ानून से सरकार किस तरह कार्रवाई करेगी यह देखना बाक़ी है। उम्मीद है कि पुराने केसों में भी सरकार इस क़ानून को लागू कर तमाम आरोपियों पर कार्रवाई करेगी।"

रामगढ़ जिले के मनुआ फुलसराय के रहने वाले अलीमुद्दीन की हत्या 29 जून 2017 को कर दी गई थी, मारूति वैन से बीफ ले जाने के आरोप में भीड़ ने बाजार टांड स्थित गैस एजेंसी के पास अलीमुद्दीन की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इस मामले में कोर्ट ने 11 दोषियों को उम्रकैद की सज़ा भी सुनाई लेकिन बाद में सभी आरोपी जमानत पर रिहा हो गये। आरोपियों को सज़ा के बाद जमानत और सरकार के लिंचिंग रोकथाम क़ानून पर बात करते हुए अलीमनुद्दीन अंसारी की पत्नी मरियम ख़ातून ने न्यूज़क्लिक से बताया कि "मुझे आधा अधूरा इंसाफ़ मिला है तमाम आरोपी बेल पर खुले घूम रहे हैं। सरकार ने नया क़ानून बनाया है सुनकर अच्छा तो लगा लेकिन मेरे पति के आरोपियों पर कब कार्रवाई होगी यह मेरा सवाल है। मेरा पति अकेला कमाने वाला था उनके जाने के बाद मैं कैसे अपना जीवन गुजार रही हूँ बता नही सकती, मेरे बच्चों को रोजगार मिले आरोपियों को सज़ा मिले तभी मैं नये क़ानून को अच्छा मानूंगी।"

17 जून 2019 की रात मृतक तबरेज़ अंसारी जमशेदपुर स्थित अपने फूफा के घर से सरायकेला स्थित अपने गांव कदमडीहा लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में धातकीडीह गांव में ग्रामीणों ने मोटरसाइकिल चोरी के आरोप में उन्हें पकड़ लिया और बांधकर रात भर पीटा। चार दिन बाद सदर अस्पताल में उनकी मौत हो गई। नये क़ानून पर बात करते हुए तबरेज़ अंसारी की पत्नी शाईस्ता परवीन ने न्यूज़क्लिक से कहा, "नया क़ानून बन गया है अच्छी बात लेकिन हमें इंसाफ़ तो मिलना चाहिए, 11 लोगों को पुलिस ने मेरे पति की लिंचिंग के मामले में जेल भेजा था सिर्फ अब 1 ही जेल में है बाकी सभी जेल से बाहर हैं। मुझ अकेली को नही बल्कि मॉब लिंचिंग में अपनी जान गवां चुके सभी मृतकों के परिवार वालों को इंसाफ़ मिलना चाहिए क्योंकि हम सभी ने एक साथ लड़ाई लड़ी है।"

मॉब लिंचिंग पीड़ितों को लगातार न्याय दिलाने के लिए संघर्षरत मुस्लिम यूथ लीग के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष इरफ़ान ख़ान ने नये क़ानून पर बात करते हुए कहा, " इस क़ानून में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को कोई जिक्र नहीं है। मॉब लिंचिंग जब भी होती है पुलिस वहां मौजूद होती है लेकिन बिना फ़ैमिली की जद्दोजहद के एफ़आईआर तक दर्ज नहीं करती है। पुलिस की तरफ़ से एफ़आईआर दर्ज नहीं होती है तो केस कमज़ोर हो जाता है। इस नये क़ानून में पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा देने की भी बात नहीं कही गई है। मेरी सरकार से मांग है कि पीड़ितों को नौकरी मुआवज़ा सहित फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर सही मायने में इंसाफ़ दे।

ज़ाकिर अली त्यागी स्वतंत्र पत्रकार हैं।

Jharkhand
Hemant Soren
mob lynching
Mob lynching law
TABREZ ANSARI

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं


बाकी खबरें

  • covid
    संदीपन तालुकदार
    जानिए ओमिक्रॉन BA.2 सब-वैरिएंट के बारे में
    24 Feb 2022
    IISER, पुणे के प्रख्यात प्रतिरक्षाविज्ञानी सत्यजित रथ से बातचीत में उन्होंने ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BA.2 के ख़तरों पर प्रकाश डाला है।
  • Himachal Pradesh Anganwadi workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी
    24 Feb 2022
    प्रदर्शन के दौरान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला व उन्हें बारह सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने आगामी बजट में कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। यूनियन…
  • Sulaikha Beevi
    अभिवाद
    केरल : वीज़िंजम में 320 मछुआरे परिवारों का पुनर्वास किया गया
    24 Feb 2022
    एलडीएफ़ सरकार ने मठीपुरम में मछुआरा समुदाय के लोगों के लिए 1,032 घर बनाने की योजना तैयार की है।
  • Chandigarh
    सोनिया यादव
    चंडीगढ़ के अभूतपूर्व बिजली संकट का जिम्मेदार कौन है?
    24 Feb 2022
    बिजली बोर्ड के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान लगभग 36 से 42 घंटों तक शहर की बत्ती गुल रही। लोग अलग-अलग माध्यम से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से लाचार…
  • Russia targets Ukraine
    एपी
    रूस ने यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों, सैन्य आधारभूत ढांचे को बनाया निशाना, अमेरिका-नाटो को चेताया
    24 Feb 2022
    रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सेना ने घातक हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों एवं अन्य सैन्य आधारभूत ढांचे को निशाना बनाने के लिये किया है। उसने आगे दावा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License