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कोविड-19
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झारखण्ड सरकार ने महामारी में भी केंद्र सरकार द्वारा भेदभाव किये जाने का किया विरोध 
केंद्र सरकार द्ववारा ही घोषित 1 मई से 18–45 वर्ष की आयु वालों के टीकाकरण अभियान की शुरूआत अभी तक नहीं की जा सकी है।
अनिल अंशुमन
04 May 2021
soren

देश के कई राज्यों की भांति झारखण्ड प्रदेश में भी कोरोना महामारी का नित होता विकराल रूप नहीं थम रहा है। प्रदेश सरकार और स्वस्थ्य विभाग द्वारा संक्रमितों के उपचार , ऑक्सिजन - जीवन रक्षक दवाओं व बेड- अस्पताल की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कोविड जांच व टीकाकरण इत्यादि कार्यों को अंजाम देने का दावा अभी भी नाकाफी नज़र आ रहा है।

हालाँकि गत 1 मई को सरकार की ओर जारी अधिसूचना के तहत प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को 70% बेड कोविड संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया जा चुका है। साथ ही तत्काल राजधानी स्थित बड़े अस्पतालों को 50 तथा अन्य अस्पतालों को 25 अतिरिक्त बेड बढ़ाने को भी कहा गया है।

निजी अस्पतालों के संचालकों से भी कहा गया है कि सरकार द्ववारा जारी किये जा रहे आदेशों का पालन वे सुनिश्चित कराएं।उधर स्वास्थ्य विभाग ने राजधानी स्थित रिम्स के मल्टी स्टोरेज पार्किंग को विशेष कोविड वार्ड में तब्दील कर 400 सीटों वाले ऑक्सिजन युक्त बेड सात दिनों के अन्दर बनाने का दवा किया है।

2 मई की मीडिया ख़बरों के अनुसार हेमंत सोरेन सरकार ने एक बार फिर केंद्र की सरकार पर प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार किये जाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि कोरोना माहामारी आपदा में भी वह ओछी राजनीति कर रही है।जिसका परिणाम है कि केंद्र सरकार द्ववारा ही घोषित 1 मई से 18 – 45 वर्ष की आयु वालों के टीकाकरण अभियान की शुरूआत अभी तक नहीं की जा सकी है।

 झारखण्ड सरकार ने 18 अप्रैल को ही बंगलादेश से रेमेडीसवर इंजेक्शन मंगाने के लिए केंद्र से अनुमति मांगी थी लेकिन इस विपदा की घड़ी में भी उसने अनदेखा कर दिया। अब जबकि खुद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए केंद्र को उक्त इंजेक्शन – वैक्सीन तुरत मंगाने का आदेश दिया है तो आनन् फानन अमेरिका व अन्य देशों से मंगाया जा रहा है। 

हेमंत सोरेन ने अपने ट्वीट में कहा है कि – एक देश – एक विधान और एक संविधान की दुहाई देनेवाली केंद्र की सरकार द्वारा जीवन रक्षक वैक्सन वितरण में भी भेदभाव करर्ते हुए राज्यों को तीन केटेगरी में बाँटने के फैसले ने मुफ्त वैक्सीन देने की घोषणा को जुमला साबित कर दिया है। झारखंड सरकार ने काफी पहले ही वैक्सीन निर्माण कंपनी को 50 शीशी वैक्सीन का आर्डर दे दिया है जो अभी तक नहोएँ पहुँच सका है। 

प्रदेश भाजपा नेता बाबूलाल द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोप के जवाब में सत्ताधारी दल झामुमो ने भी उनसे सवाल किया है कि – क्या इस महामारी में भी जीवन बचानेवाली दवा के आयात की इज़ाज़त देने में 13 दिन लग जाते हैं ? 

सनद हो कि बेलगाम महामारी संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन की पाबंदियों के तहत विगत 29 अप्रैल तक पूरे राज्य में लागू किये गए ‘ स्वास्थय सुरक्षा सप्ताह ‘ की अवधी अगले 6 मई की सुबह तक बढ़ा दी गयी है। जिसके तहत 2 दिन तक ही दुकानें और बाज़ार खोलने की अनुमति होने के कारण शाम से पहेल ही सड़कें वीरान दिखने लगीं हैं। 

बिना वजह बाहर निकलने वालों पर सख्त कारवाई करने के साथ - साथ पुलिस उच्च्चाधिकारियों के नेतृत्व में राजधानी और जिला मुख्यालयों समेत सभी छोटे बड़े शहरों में फ्लैग मार्च निकालकर लोगों से अनुशासन बनाए रखने की अपील भी की जा रही है।

राज्य में महामारी संक्रमण स्थिति की ताज़ा जानकारियों के अनुसार 30 दिनों में पूर्व के रिकवरी रेट 96.42 से घटकर 74.44 % पर चला गया है। पूरे राज्य में अबतक 2,37, 734 लोग संक्रमित हो चुके हैं l से 1,78,468 ठीक हो गये हैं और 2829 की मौत हो गयी है।फिलहाल पुरे राज्य में 58,437 कोरोना एक्टिव केस हैं।इस बाबत विशेषज्ञ डॉक्टरों तथा स्वास्थय विभाग के एक्सपर्टों का कहना है कि हर दिन नए संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण ही रिकवरी रेट में गिरावट आई है।    

अभी तक पूरे राज्य में आधा दर्जन से भी पत्रकारों की मृत्यु कोरोना संक्रमण से हो चुकी है। राजधानी रांची के नागरिक आन्दोलनों के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता पी पी वर्मा , झारखण्ड इप्टा के संगठक संस्कृतिकर्मी उमेश नज़ीर , सीपीएम के महिला संगठन एडवा नेता व महिला अधिकारों की चर्चित कवियत्री रेणु प्रकाश , बिहार – झारखण्ड छात्र युवा संघर्ष वाहिनी की वरिष्ठ महिला सोशल एक्टिविष्ट कनक जी समेत कई महत्वपूर्ण हस्तियाँ कोरोना संक्रमण से अकाल मौत की शिकार हो गयीं हैं। 

साथ ही कई वरिष्ठ झारखण्ड आन्दोलनकारी व आदिवासी नेताओं समेत रांची विश्व विद्यालय के पूर्व उपकुलपति शीन अख्तर व अन्य कई प्रमुख शिक्षाविद , पूर्व नौकरशाह तथा वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ताओं का भी कोरोना संक्रमण ने जान ले ली है। झारखंडी भाषा संस्कृति के जाने माने रचनाकार गिरिधारी राम गौन्झू और नागपुरी कवि नईमुद्दीन मिर्दाहा जी का तो समय पर अस्पताल और उपचार के अभाव में ही मृत्यु हो गयी। 

ये सही है कि झारखण्ड में महामारी संक्रमण की मौजूदा आपदा स्थिति में राजधानी समेत झारखण्ड के कई प्रमुख शहरों के अस्पतालों में हर दिन हो रहे ऑक्सिजन संकट का मुक्क़मिल समाधान अभी तक नहीं हो सका है। बावजूद इसके देश के विभिन्न इलाकों में मचे ऑक्सिजन त्राहिमाम की विपत्ति से उबारने और एक एक साँस के लिए तड़प रहे मरीजों की जीवन रक्षा के लिए प्रदेश की बिकारो स्टील फैक्ट्री के मजदूर – कर्मियों द्वारा रात दिन एक करके ऑक्सिजन तैयार किया जा रहा है। जिसे बड़े बड़े टैंकरों में भरकर रेल मार्गों से देश के विभिन्न इलाकों में युद्ध स्तर पर पहुंचाया जा रहा है। 

 ऐसे में पिछले साल से ही कोरोना आपदा की मार से आर्थिक रूप से खस्ता हाल हो गयी झारखण्ड की सरकार द्वारा केन्द्र से मांगी जा रही विशेष आर्थिक सहायता को पूरा किया जाना बहुत अधिक जरूरी है।

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