NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला
कई आदिवासी संगठन पंचायती चुनावों पर रोक लगाने की मांग को लेकर राजभवन पर लगातार धरना दे रहें हैं। 
अनिल अंशुमन
22 Apr 2022
jharkhand

आखिरकार 2021 से लंबित झारखण्ड पंचायत राज चुनाव 2022 की प्रक्रिया शुरू हो ही गयी है। विधान सभा के पिछले कई सत्रों में चुनाव कराये जाने की मांग को लेकर काफी आरोप प्रत्यारोप होते रहें हैं। हालाँकि इस चुनाव पर अदालती ग्रहण लगने के आसार बने हुए हैं। क्योंकि प्रदेश के विपक्ष भाजपा-आजसू गठबंधन के आजसू सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी द्वारा पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण के सवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है।

उधर प्रदेश के कई आदिवासी संगठन इस चुनाव पर रोक लगाने की मांग को राजभवन पर लगातार धरना दे रहें हैं। इनकी माँगें हैं कि चूँकि प्रदेश के कई क्षेत्र संविधान की पांचवी अनुसूचित क्षेत्र घोषित हैं जहां आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता दी गयी है। साथ ही 1996 से इन इलाकों में पेसा कानून लागू है। ऐसे में अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था को लागू करना आदिवासी समुदायों के संविधान प्रदत्त विशेषाधिकारों का सरासर उल्लंघन है। इसलिए पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत चुनाव नहीं कराये जाने चाहिए।

प्रदेश में अब तक दो बार पंचायत चुनाव हो चुके हैं और आदिवासी समुदाय के लोग शुरू से ही उक्त मांगों को उठा रहें हैं। जिनपर अब तक कि किसी सरकार और राज्यपाल न तो कोई संज्ञान लिया और ना ही इन संवैधानिक मांगों के प्रति कोई गंभीरता दिखाई।

ख़बरों के अनुसार इस बार भी प्रदेश के राज्यपाल द्वारा राज्य सरकार को अनुमति दिए जाने के तत्काल बाद ही 9 अप्रैल को अधिसूचना जारी हुई कि- सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार झारखण्ड में त्रिस्तरीय चुनावों में ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था नहीं लागू। हालाँकि, अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति के अलावा महिलाओं के लिए पदों पर आरक्षण लागू रहेगा।

9 अप्रैल को ही प्रदेश चुनाव आयोग ने प्रेस वार्ता कर झारखण्ड पंचायत चुनाव 2022 के लिए औपचारिक रूप से त्रिस्तरीय चुनावों की तिथि की घोषणा की। कुल चार चरणों में संपन्न होने वाले झारखण्ड पंचायत चुनाव के लिए 14 मई, 19 मई और 27 मई को मतदान होना है। पूरे राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है और प्रथम तथा द्वितीय चरण के नामांकन मतदान के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

इस बार के पंचायत चुनाव के तहत राज्य के 536 (64 एससी व 178 एसटी) जिला परिषद्, पंचायत समिति के लिए कुल 5341( 639 एससी व 1,773 एसटी), मुखिया के 4,345 (412 एससी व 2,272 एसटी) तथा 53,479 ग्राम पंचायत सदस्य (6,101 एससी व 17,060 एसटी) पदों के लिए वोट डाले जायेंगे। 

पिछले पंचायत चुनावों की भांति इस बार भी पंचायत चुनाव गैर दलीय आधार पर होना है। लेकिन चालू लोकतांत्रिक परंपरा के तहत ‘गैर दलीय’ आधार पर घोषित इस बार के पंचायत चुनाव की सियासी बिसात पर भले ही सभी सत्ताधारी दल अपना पूरा दम-ख़म लगाए हुए हैं। लेकिन केंद्र की सत्ता में में काबिज़ और प्रदेश का मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने उत्तर प्रदेश वाला फार्मूला नहीं अपनाकर दूसरी ही चाल चली है।

यूपी में उनकी अपनी सरकार है लेकिन झारखंड में गैर भाजपा सरकार है इसलिए यहाँ तथाकथित ‘सरकारी और विभागीय काम काज की समीक्षा संचालन’ के नाम पर ‘खुद केंद्र की सरकार ने अपने कई दिग्गज़ केन्द्रीय मंत्रियों को सीधे उतार दिया है। ये सभी केन्द्रीय मंत्री घोषित-अघोषित रूप से जगह-जगह जाकर तथाकथित विभागीय बैठकों के नाम पर बड़ी बैठकें व सभाएं आयोजित कर अपनी पार्टी द्वारा जनहित में किये गए विकास कार्यों का ज़ोरदार प्रचार कर मतदाताओं को प्रभावित करने की पुरजोर कवायद चला रहें हैं।

राज्य की गठबंधन सरकार के प्रमुख घटक दल झामुमो तथा कांग्रेस ने पंचायत चुनाव के मद्दे नज़र राज्य में जारी चुनाव आदर्श आचार संहिता लागू रहें के बावजूद केन्द्रीय मंत्रियों के जारी दौरा कार्यक्रमों व बैठकों पर कड़ा ऐतराज़ जताते हुए राज्य चुनाव आयोग से रोक लगाने व हस्तक्षेप करने की मांग की है। झामुमो महासचिव सुप्रिय भट्टाचार्य ने प्रेस वार्ता के माध्यम से मौजूदा केंद्र सरकार पर गैर भाजपा शासित प्रदेशों में संविधान प्रदत्त लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं पर सुनियोजित चोट पहुँचाने का आरोप लगाया है।

साथ ही कहा है कि सभी जानते हैं कि हमारे देश में लोकतान्त्रिक शासन प्रणाली की सबसे ज़मीनी व बुनियादी आधार होती हैं पंचायतें और उसका चुनाव। जो कि झारखण्ड में गैर दलीय आधार पर हो रहा है। लेकिन आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद तथाकथित ‘कार्य समीक्षा’ के नाम पर अपने केन्द्रीय मंत्रियों को सीधे चुनावी क्षेत्रों उतार कर सीधे तौर से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। 

पिछले ही दिनों केंद्र ने देश भर के सभी आईएस व जिला उपायुक्तों (जो स्थानीय चुनाव पदाधिकारी भी होते हैं) इत्यादि अफसरों को सीधे अपने प्रभाव में रखने का काला नियम जारी किया है। जाहिर है कि इसका खुला इस्तेमाल कर चुनाव कार्यों में लगे सभी प्रशासनिक अधिकारियों को केंद्र के प्रभावनुसार कार्य करने को विवश बनाया जाएगा। 

यूपी के पंचायत चुनाव का भी नज़ारा पूरे देश ने देखा कि किस तरीके से पंचायतों में जीते हुए जन प्रतिनिधियों को प्रशासन के सामने ही अगवा कर सभी जिला परिषद अध्यक्ष पदों पर अपने लोगों को बिठाया गया। कोई इनसे पूछे कि अभी झारखण्ड में जो पंचायत चुनाव होने हैं वो मात्र एक महीने में ही समाप्त हो जायेंगे तो फिर ऐसी कौन सी ज़ल्दबाज़ी है कि अभी ही भाजपा अपने केन्द्रीय मंत्रियों को यहाँ लाकर ‘समीक्षा’ के लिए घुमा रही है। आचार संहिता लागू होने की वजह से राज्य की सरकार को कोई घोषणा करने की अनुमति नहीं है तो फिर केंद्र की सरकार अपनी घोषनाएँ कैसे करवा सकती है। जाहिर है यह सब पंचायत चुनाव को अपने पक्ष में प्रभावित करने के लिए ही किया जा रहा है। 

उधर भाजपा और उसके केन्द्रीय मंत्रियों ने भी उनके विभागीय कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल पूरा करने में राज्य सरकार व प्रशासन द्वारा असहयोग किये जाने का का आरोप लगाया है। लेकिन राज्य चुनाव आयोग ने एक बार फिर से से केन्द्र के प्रति अपनी वफादारी दिखलाते हुए दो टूक अन्दाज़ में कह दिया है कि राज्य निर्वाचन आयोग मंत्रियों के दौरे को आचार संहिता का उल्लंघन नहीं मानता है।

फिलहाल पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अपनी जगह पर जारी है और इसके समानांतर भाजपा के केंदीय मंत्रियों का क्षेत्र-दौरा कार्यक्रम व बैठकों का होना भी जारी है।

ये भी पढ़ें: झारखंड: हेमंत सरकार ने आदिवासी समूहों की मानी मांग, केंद्र के ‘ड्रोन सर्वे’ कार्यक्रम पर लगाईं रोक

Jharkhand
Jharkhand Panchayat Raj Election 2022
Tribal organizations
Tribal organizations protest
Dalits
Panchayat election

Related Stories

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

बागपत: भड़ल गांव में दलितों की चमड़ा इकाइयों पर चला बुलडोज़र, मुआवज़ा और कार्रवाई की मांग

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे

गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया


बाकी खबरें

  • modi ravidas mandir
    राज वाल्मीकि
    रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात
    16 Feb 2022
    कई जगह दलितों का वोट प्राप्त करने के लिए भाजपा के नेता भी आज रैदास मंदिर में नमन कर रहे हैं। इसे देखकर एक अम्बेडकरवादी होने के नाते मैं असहज हुआ।
  • Greta Acosta Reyes
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वामपंथ के पास संस्कृति है, लेकिन दुनिया अभी भी बैंकों की है
    16 Feb 2022
    'जब हमारे समय की महान सांस्कृतिक बहसों की बात आती है, इतिहास की सुई लगभग पूरी तरह से वामपंथ की ओर झुक जाती है।लेकिन आर्थिक व्यवस्था के मामले में दुनिया बैंकों की है'।
  • UNEMPLOYMENT
    प्रभात पटनायक
    क्यों पूंजीवादी सरकारें बेरोज़गारी की कम और मुद्रास्फीति की ज़्यादा चिंता करती हैं?
    16 Feb 2022
    सचाई यह है कि पूंजीवादी सरकारों को बेरोजगारी के मुकाबले में मुद्रास्फीति की ही ज्यादा चिंता होना, समकालीन पूंजीवाद में वित्तीय पूंजी के वर्चस्व को ही प्रतिबिंबित करता है।
  • punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमृतसर: व्यापार ठप, नौकरियाँ ख़त्म पर चुनावों में ग़ायब मुद्दा
    16 Feb 2022
    भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार ख़त्म होने के बाद अमृतसर, तरन तारन और गुरदासपुर के हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए. इस व्यापार ने हज़ारों ट्रक ड्राइवरों, कुलियों, ढाबों को आबाद किया लेकिन अब सभी…
  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License