NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
12 करोड़ नौकरियों का नुक़सान लेकिन मोदी सरकार अंधेरे में तीर चला रही है 
अकेले अप्रैल माह में ही, 12 करोड़ से अधिक नौकरियां जाने का अनुमान है, और इसी के साथ मई की शुरूआत में बेरोज़गारी की दर बढ़कर 27 प्रतिशत के पार हो गई है।
सुबोध वर्मा
11 May 2020
Translated by महेश कुमार
Migrants Return to Hometowns
Courtesy: The Telegraph

मार्च महीने में लगभग 80 लाख नौकरियों के नुक़सान के बाद, जिसे देशव्यापी तालाबंदी होने के बाद मार्च अंतिम सप्ताह में तब दर्ज किया गया था जब 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक से देश भर में तालाबंदी घोषित कर दी थी, हाल ही में सीएमआईई या सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकॉनमी द्वारा जारी आवधिक नमूना सर्वेक्षण के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल के पूरे महीने में 12.12 करोड़ नौकरियों का चौंका देने वाला नुकसान हुआ है। यह पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में नियोजित व्यक्तियों की औसत संख्या का लगभग 30 प्रतिशत बैठता है।

ये आंकड़े, और इनके अनुमान बताते हैं कि देश में अभूतपूर्व आर्थिक संकट पैदा हो गया है, जिसका बड़ा बोझ सीधे आम आदमी के काँधों पर पड़ा गया हैं। हालांकि शक्तिशाली औद्योगिक लॉबी द्वारा औद्योगिक गतिविधि को दोबारा से शुरू करने के लिए प्रोत्साहन और सहायक पैकेज की मांग बड़े ज़ोर-शोर से की जा रही हैं, लेकिन मज़दूरों की दुर्दशा, जिनकी महीने भर से कोई कमाई नहीं हुई है, को दोनों मोदी सरकार और मुख्य धारा के मीडिया ने काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया है। 

सीएमआईई का अप्रैल माह का अनुमान आर्थिक गतिविधि के हिसाब से नौकरी के नुकसान को दर्ज़ करता है, जो भीतरी कहानी की झलक भी प्रदान करता है। ‘छोटे व्यापारियों और मज़दूरों’ की श्रेणी में सबसे बड़ी तबाही दिखाई देती है क्योंकि इस श्रेणी में नौ करोड़ से अधिक नौकरियां कथित रूप से नष्ट हो गई हैं। ध्यान दें कि यह एक विस्तृत और व्यापक श्रेणी है, जिसमें श्रमिकों पूरी की पूरी श्रृंखला शामिल है और अपने जीवन यापन के लिए काम करती है, जिसमें अनौपचारिक क्षेत्र के दिहाड़ी मज़दूरों से लेकर छोटी दुकान और कार्यालय कर्मचारी, छोटे व्यापारी और माल बेचने वाले मज़दूर शामिल हैं, जिनमें फेरीवाले और अन्य किस्म के विक्रेता भी शामिल हैं - संक्षेप में कहा जाए तो यह भारत के कामकाजी श्रमिकों के पिरामिड का विशाल आधार है।

image 1_24.JPG

आश्चर्यजनक रूप से ही सही लेकिन वेतनभोगी कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग को भी भारी नुकसान हुआ है, हालांकि यह नुकसान मज़दूरों के समान नहीं है। लगभग 1.8 करोड़ ऐसे ’नियमित’ कर्मचारी हैं, जिन्हे मासिक वेतन मिलता था वे अप्रैल में अपनी नौकरी खो चुके हैं।

यहाँ यह बात याद रखें कि सरकार ने नियोक्ताओं/मालिकों से चल रहे लॉकडाउन में उनके कर्मचारियों को नौकरी से बाहर नहीं निकलने का आग्रह किया था। गृह सचिव और श्रम सचिव, दोनों ने ही राज्य सरकारों को इस बाबत आधिकारिक पत्र भेजे थे, जिसमें यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया था कि ऐसा न हो। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने एक भाषण में इसे दोहराया था।

फिर भी, न तो मालिकों या नियोक्ताओं ने इस तरह के परामर्शों की परवाह की है, और न ही किसी सरकार ने कोई सार्थक उपाय ही किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि श्रमिकों को रोज़गार से बाहर न होना पड़े। जाने-माने मीडिया हाउस सहित कई नियोक्ताओं ने विभिन्न रचनात्मक तरीकों को अपनाकर कर्मचारियों और पत्रकारों को बाहर निकाल दिया है, और उनसे बिना वेतन के छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया है।

अनुमान के अनुसार उद्यमियों की कमाई और रोज़गार का भी काफी बड़ा नुकसान हुआ है – जिनकी संख्या कुछ 1.78 करोड़ है। ये कौन हैं?  ज्यादातर वे छोटे या मामूली स्तर के उद्यमी हैं जो सेवा क्षेत्र को चलाते रहे हैं, हालांकि कुछ उच्च स्तर वाले व्यवसाय भी डूब गए हैं, जैसा कि नासकॉम (NASSCOM) जैसे संगठनों के अनुमान से भी स्पष्ट है, और उसने आईटी क्षेत्र में नुकसान की शिकायत की है।

एक ऐसा भी क्षेत्र है जहां नौकरियों में वृद्धि हुई है वह है खेती का क्षेत्र। सीएमआईई सर्वेक्षण का अनुमान है कि अप्रैल 2020 में खेती में लगभग 58 लाख नौकरियां पैदा हुई या जोड़ी गईं। अन्य क्षेत्रों में नुकसान की तुलना में यह संख्या बहुत ही कम है, लेकिन यह भारत की एक प्रसिद्ध वास्तविकता को भी दर्शाता है – वह यह कि ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि व्यवसायों में अतिरिक्त श्रम को अवशोषित करना अभी जारी है, हालांकि इसका स्पष्ट मतलब यह है कि एक ही कमाई को बड़ी संख्या में लोगों के बीच साझा किया जाता है।

तकनीकी रूप से, ये रोज़गार को जोड़ना हैं, लेकिन वास्तव में हरेक रोज़गार पहले से कम हो रहा है। क्योंकि प्रवासी मज़दूरों को इस तरह के रोज़गार में अवशोषित किया जा रहा है। यह याद रखना चाहिए कि अप्रैल फसल की कटाई का मौसम है और इस वक़्त खेतिहर मज़दूरों की आवश्यकता होती है। मई में पड़ने वाली भयंकर गर्मियों में क्या होगा कल्पना करना भी भयानक है।

इसलिए, जहां तक नौकरी छूटने का सवाल है, उसकी सीमा क्या है? चूंकि सीएमआईई सर्वेक्षण के अनुसार, लॉकडाउन शुरू हुआ (24 मार्च की आधी रात को), तब से 13 करोड़ से अधिक नौकरियों का नुकसान हुआ, यह ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 8.45 करोड़ है और शहरी क्षेत्रों में 4.5 करोड़ है।

image 2_21.JPG

अप्रैल महीन में खेती में छोटा से लाभ को ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरी के हुए नुकसान, मुख्य रूप से खुदरा और थोक व्यापार, परिवहन, निर्माण, आदि की हानी से पूरा नहीं किया जा सकता हैं, शहरी क्षेत्रों में भी, जो लाभकारी रोज़गार हासिल करने के स्रोत थे, नाटकीय रूप से उनमें भी भारी नुकसान हुआ हुआ है। घर जाने के लिए संघर्षरत प्रवासी मज़दूरों की यह त्रासदी जारी है और यहां तक कि उन्हे वापस जाते वक़्त मौत का भी सामना करना पड़ रहा है।

यह सब लोगों को सुरक्षा प्रदान करने में सरकार की भयावह विफलता को भी उजागर करता है। यदि कारखानों और दुकानों और कार्यालयों को बंद रहना था, तो सरकार को सभी परिवारों को आवश्यक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने चाहिए थे, और जीवनयापन या निर्वाह के लिए उन्हे न्यूनतम धन उपलब्ध कराना चाहिए था। कई ट्रेड यूनियनों और अन्य आंदोलनों ने मांग की थी कि अन्य घोषित लाभों के अलावा, सभी परिवारों को कम से कम 7,500 रुपये हर महीने दिए जाएं। लेकिन सरकार ने अब तक प्रत्येक जन धन खाता धारक को केवल 500 रुपए ही दिए हैं।

इससे देश भर के करोड़ों लोगों का जीवन तबाह हो गया। और लॉकडाउन अभी भी जारी है, जबकि कोविड-19 के मामलों का लगातार बढ़ना भी जारी हैं। यह गर्मी भारत के लिए अत्यंत भयंकर और कठिन होने जा रही है, ख़ासकर तब जब देश का राजनीतिक नेतृत्व अभी भी अंधेरे में तीर चला रहा है।

अंग्रेज़ी में लिखा मूल आलेख आप नीचे लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Job Losses Soar as Modi Govt Continues to Grope in the Dark

indian economy
Lockdown Impact
Job Losses
CMIE
Migrant Labour
COVID-19
Wage Cuts
Modi Govt

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

सरकारी एजेंसियाँ सिर्फ विपक्ष पर हमलावर क्यों, मोदी जी?

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • Haldwani medical college students
    सत्यम कुमार
    मेडिकल छात्रों की फीस को लेकर उत्तराखंड सरकार की अनदेखी
    24 Sep 2021
    इससे पहले नॉनबॉन्ड वाले छात्रों को सालाना 4 लाख रुपए फीस देनी होती थी। बॉन्ड के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों, जिन्हें पांच साल के लिए दुर्गम इलाकों में अपनी सेवाएं देनी होती थी, की यही फीस मात्र 50,…
  • Pishach Mochan
    विजय विनीत
    अंधविश्वास: बनारस के पिशाचमोचन में सजी भूतों की मंडी, परेशान लोगों को लूटने-खसोटने में जुटे दलाल और ठग
    24 Sep 2021
    वाराणसी स्थित पिशाचमोचन मोहल्ले में हर साल पितृ पक्ष में बकायदा भूतों की मंडी लगती है। यह अनोखी मंडी इन दिनों सज गई है। भूतों को बैठाने के नाम पर मोल-भाव शुरू हो गया है। भूतों से मुक्ति दिलाने के नाम…
  • Rajasthan
    रोसम्मा थॉमस
    राजस्थानः चरवाहे बोले ‘अनचाहे’ ऊंटों के लिए ऊंटशाला एक बुरा विचार  
    24 Sep 2021
    राज्य की नीतियां प्रायः ऊंट के चरवाहों से बिना उनकी राय लिए ही बना ली जाती हैं और ये ऐसे समय में नफा से ज्यादा नुकसान कर रही हैं, जब राज्य में ऊंटों की तादाद घट रही है। 
  • Bharat Bandh
    रवि कौशल
    भारत बंद: ‘उड़ीसा में न्यूनतम समर्थन मूल्य ही अब अधिकतम मूल्य है, जो हमें मंज़ूर नहीं’
    24 Sep 2021
    किसानों के आन्दोलन से उत्साहित उड़ीसा के किसान भी अब राज्य के ‘सबसे बड़े’ बंद की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पश्चिम उड़ीसा कृषक समन्वय समिति के नेता लिंगाराज प्रधान कहते हैं, यहाँ के किसान भी अब एक…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 31,382 नए मामले, 318 मरीज़ों की मौत
    24 Sep 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.89 फ़ीसदी यानी 3 लाख 162 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License