NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
जॉर्डन : विरोध के बाद शिक्षक यूनियन के नेताओं को ज़मानत पर रिहा किया गया
वेतन वृद्धि के संबंध में एक समझौते को लेकर सरकार ने इनकार कर दिया था। इसको लेकर विरोध प्रदर्शन करने के दौरान यूनियन के नेताओं को पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था।
पीपल्स डिस्पैच
24 Aug 2020
जॉर्डन

कार्यवाहक प्रमुख नासिर नवासरेह सहित जॉर्डनियन टीचर्स सिंडिकेट के तेरह निर्वाचित बोर्ड सदस्य रविवार 23 अगस्त को एक महीने की हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद ज़मानत पर रिहा हो गए। 140,000 से अधिक शिक्षकों वाले देश के सबसे बड़े शिक्षक संघ के शीर्ष नेताओं को पिछले महीने 25 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था।

यूनियन की ओर से पेश होने वाले वकील बासम फ़्रेहत ने इन नेताओं की रिहाई की ख़बर की पुष्टि की। उन्होंने पत्रकारों को यह भी बताया कि यूनियन के नेताओं के साथ अदालत ने कई शिक्षकों को भी रिहा किया जिन्हें जॉर्डन के सुरक्षा बलों ने यूनियन के नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद, दौरान और उसके पहले गिरफ़्तार किया था।

पिछले महीने यूनियन के नेताओं की गिरफ़्तारी और हिरासत जॉर्डन के अधिकारियों द्वारा शिक्षक यूनियन पर एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा था और देश भर के हज़ारों शिक्षक इससे जुड़े थे जो पिछले साल से बेहतर काम करने की स्थिति के साथ शिक्षकों का वेतन बढ़ाने को लेकर वादा पूरा करने में सरकार की विफलता का विरोध कर रहे थे।

शिक्षकों के यूनियन ने पिछले साल सितंबर 2019 में जॉर्डन के सबसे बड़े शिक्षकों के हड़ताल का आयोजन मांगों को मानने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए किया गया था जो एक महीने तक चला था। सरकार द्वारा उनकी मांगों के संबंध में एक समझौते पर तैयार होने के बाद महीने भर चली हड़ताल समाप्त हो गई थी।

इस साल अप्रैल में कोरोनावायरस महामारी के बाद भी सरकार ने महामारी के कारण धन की कमी और संबंधित आर्थिक मंदी का हवाला देते हुए समझौते के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही। इसकी प्रतिक्रिया में यूनियन ने सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ पिछले महीने प्रदर्शन करते हुए अपना विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू करने का फैसला किया।

बाद में सरकार ने कार्रवाई करते हुए दो साल के लिए यूनियन को बंद करने का आदेश दिया। सुरक्षा बलों ने शीर्ष नेताओं को गिरफ़्तार करते हुए देश भर में यूनियन के कई कार्यालयों और शाखाओं पर छापा मारा। छापेमारी और बंद करने के आदेश के बाद नेताओं पर अस्पष्ट आरोपों के साथ आपराधिक आरोप लगाए गए थे। सरकार ने इस मुद्दे पर रिपोर्टिंग से मीडिया पर एक आदेश भी जारी किया था।

शिक्षकों ने यूनियन के बंद होने और उनके नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद विरोध प्रदर्शन तेज़ कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए सरकार ने कड़ी कार्रवाई की और अधिक शक्ति का इस्तेमाल किया जिसमें सुरक्षा बलों ने कथित रूप से प्रदर्शनकारी शिक्षकों पर लोहे के रॉड और आंसू गैस के गोले दागे। इन विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन की निंदा जॉर्डन के नागरिक समाज समूहों और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मानवाधिकार संगठनों ने की।

Jordan
jordan teachers union
teachers granted bail
jordan govt

Related Stories

इज़रायल के साथ प्राकृतिक गैस सौदे के ख़िलाफ़ जॉर्डन में समाजसेवियों ने विरोध शुरू किया

जॉर्डन में तख़्तापलट की कोशिशों ने छोड़े सबूत

जॉर्डनः 2011 के विरोध प्रदर्शन की सालगिरह के मौके पर किए गए प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई

जॉर्डन : लॉकडाउन के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन

जॉर्डन में नए सदन के लिए कल मतदान होगा

अगले महीने होने वाले संसदीय चुनावों से पहले जॉर्डन को नया प्रधानमंत्री मिला

जॉर्डन किंग ने नवंबर में होने वाले चुनावों के मद्देनज़र संसद को भंग किया

जॉर्डन में सैन्य अड्डे के पास विस्फ़ोट में दो लोगों की मौत, तीन अन्य घायल

जॉर्डनः देश का सबसे बड़ा शिक्षक संघ दो साल के लिए बंद, नेता गिरफ़्तार

सऊदी अरामको की रस्साकशी में कौन जीता? कौन हारा?


बाकी खबरें

  • भाषा
    चारा घोटाला: झारखंड उच्च न्यायालय ने लालू यादव को डोरंडा कोषागार मामले में ज़मानत दी
    22 Apr 2022
    लालू प्रसाद के खिलाफ रांची में चारा घोटाले का यह अंतिम मामला था और अब उनके खिलाफ पटना में ही चारा घोटाले के मामले विचाराधीन रह गये हैं। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में…
  • अजय कुमार
    जहांगीरपुरी में चला बुल्डोज़र क़ानून के राज की बर्बादी की निशानी है
    22 Apr 2022
    बिना पक्षकार को सुने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। कानून द्वारा निर्धारित यथोचित प्रक्रिया को अपनाए बिना किसी तरह के डिमोलिशन की करवाई करना अन्याय है। इस तरह के डिमोलिशन संविधान के अनुच्छेद…
  • लाल बहादुर सिंह
    संकट की घड़ी: मुस्लिम-विरोधी नफ़रती हिंसा और संविधान-विरोधी बुलडोज़र न्याय
    22 Apr 2022
    इसका मुकाबला न हिन्दू बनाम हिंदुत्व से हो सकता, न ही जातियों के जोड़ गणित से, न केवल आर्थिक, मुद्दा आधारित अर्थवादी लड़ाइयों से। न ही महज़ चुनावी जोड़ तोड़ और एंटी-इनकंबेंसी के भरोसे इन्हें परास्त किया…
  • अनिल अंशुमन
    झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला
    22 Apr 2022
    कई आदिवासी संगठन पंचायती चुनावों पर रोक लगाने की मांग को लेकर राजभवन पर लगातार धरना दे रहें हैं। 
  • अनिल जैन
    मुद्दा: हमारी न्यायपालिका की सख़्ती और उदारता की कसौटी क्या है?
    22 Apr 2022
    कुछ विशेष और विशिष्ट मामलों में हमारी अदालतें बेहद नरमी दिखा रही हैं, लेकिन कुछ मामलों में बेहद सख़्त नज़र आती हैं। उच्च अदालतों का यह रुख महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल, पंजाब, दिल्ली और दूसरे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License