NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
देश में पत्रकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ एकजुट हुए पत्रकार, "बुराड़ी से बलिया तक हो रहे है हमले"
पत्रकार संगठनों ने बुराड़ी मैदान में ‘हिंदू महापंचायत’ के दौरान पत्रकारों पर हुए हमले की निंदा करते हुए दोषियों की ‘तत्काल’ गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 12वीं कक्षा की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में तीन पत्रकारों की गिरफ्तारी की भी निंदा करते हुए कहा कि पुलिस ने इन पत्रकारों को ही आरोपी बना दिया जबकि उन्होंने पेपर लीक को ‘‘उजागर’’ किया था। पीसीआई ने बलिया के तीन पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग की।

मुकुंद झा
06 Apr 2022
Journalists united against the increasing attack on journalists in the country, "attacks are happening from Burari to Ballia

देश की राजधानी में कई पत्रकार संगठन साथ आए और दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इण्डिया में एक प्रेस वार्ता की। जिसमे दिल्ली के बुराड़ी में हुई हिन्दू महपंचायत के दौरान पत्रकारों पर हुए हमले और उत्तर प्रदेश के बलिया में जिस तरह पेपर लीक की खबर चलाने वाले पत्रकार की गिरफ़्तारी हुई उसके खिलाफ पत्रकार संगठनों ने आपत्ति जताई। इस हमले के खिलाफ देश की प्रतिष्ठित संस्था प्रेस क्लब ऑफ़ इण्डिया, दिल्ली जर्नलिस्ट यूनियन,  डिज़ीपब समते कई अन्य वरिष्ठ पत्रकार साथ आए और एक साथ देशभर के पत्रकारों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिंता जताई।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा ने प्रेस वार्ता की शुरुआत की और कहा कि आज  बुराड़ी से बलिया तक पत्रकारों पर हमला हो रहा है । 

उमाकांत ने बताया कि कैसे उत्तर प्रदेश में एक पत्रकार को उसके काम के आधार पर प्रताड़ित किया जा रहा है। पेपर लीक की ख़बर छापने पर उसे जेल में डाल दिया गया है। ये पत्रकारिता पर  सीधा हमला है। पुलिस ने  अपराधी को गिरफ्तार करने के बजाए सूचना सामने लाने  वाले को ही गिरफ्तार कर लिया। और अभी तक उन्हें  जेल में रखा है जबकि यूपी में केरल के एक पत्रकार सिद्धिक कप्पन को भी कई महीनों से  जेल में रखा है।

उमाकांत ने आगे दिल्ली की घटना पर बोलते हुए कहा कि बुराड़ी में हुई घटना बताती है कि पत्रकारों पर उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर हमला किया जा रहा है जबकि पत्रकार केवल पत्रकार होता है। यूपी की तरह यहां भी यही हुआ, यहां भी अपराधी को नही पकड़ा गया। उन्होंने अफ़सोस जताते हुआ कहा कि आज राजधानी में नौजवान पत्रकार पर  हमला हुआ लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है। संसद अभी चल रही है लेकिन कोई सवाल नही कर रहा है।  आगे वो कहते हैं कि पत्रकार की पहचान उसके धर्म से ज्यादा उसके काम से होती है। पत्रकारों को काम से रोकना अनौतिक है।  पत्रकार की  कोई सीमा नहीं होती है। ये हमारा अधिकार है कि हम खबर को लिखे।

 इसे भी पढ़े:बुराड़ी हिन्दू महापंचायत: चार FIR दर्ज लेकिन कोई ग़िरफ़्तारी नहीं, पुलिस पर उठे सवाल

कारवां मैगजीन के एडिटर हरतोश सिंह बल ने कहा हमारे लिए ये कोई पहला मौका नहीं, पिछले कुछ सालों में कई बार हुआ है। जब पत्रकारों पर हमला हुआ हो। सबसे पहले काश्मीर में हुआ था ।

आगे उन्होंने कहा इस सरकार को पत्रकारों से दिक्कत है ख़ासकर निष्पक्ष पत्रकारों से जो इनकी विफलताओं को जनता के सामने लाते है। इसी तरह दक्षिणपंथी हिन्दू संगठनों को महिला पत्रकारों से दिक्कत है। 

हरतोष आगे कहते है ये जो छोटी छोटी घटनाएं होती है ये सब एक सुनियोजित ढंग से की जा रही हैं। कर्नाटक में हिजाब कोई धार्मिक मसला नहीं बल्कि मुसलमानों को शिक्षा से वंचित करने का एक तकीका है। इसी तरह झटका और हलाल मीट का सवाल मुसलमानों के रोजगार छीनने का है। मुसलमान पत्रकारों पर हमला भी इसी रणनीति का हिस्सा है।  ये सब मुसलमानों को काम करने से रोकने का एक प्रयास  है । 

आगे वो कहते हैं- मैं नौजवान पत्रकारों को सलाम करता हूं, जो इस माहौल में निकल रहे हैं और काम कर रहे हैं। मैंने इस तरह का भय का माहौल कभी नही देखा है जो आज हो रहा है।  

डिजीपब के प्रतिनिधि और न्यूज़ लॉन्ड्री के एडिटर अभिनंदन सीकरी ने बताया की वो लोग गृह मंत्रालय को पूरे घटनाक्रम के बारे में  मांग पत्र भेजेंगे।  आगे वो कहते हैं हमे जब सूचना मिलती है कि  हमारी युवा महिला पत्रकार के साथ गलत व्यवहार हुआ है तो हमे चिंता होती क्योंकि उसकी सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है।  लेकिन देश के गृह मंत्री को कोई शर्म नही है। पुलिस के होते हुए इस घटना का होना बेहद  ही शर्म की बात है। 

द क्विंट के एक्जीक्यूटिव एडिटर रोहित ने कहा ये दुर्भगाय पूर्ण है क्योंकी निष्पक्ष पत्रकारिता का दायरा सीमित हो रहा है। 

उन्होंने पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए है। आयोजन की अनुमति नहीं थी तो कैसे पूरा आयोजन हुआ? वो भी पुलिस की मौजूदगी में हुआ। अपराध की पुनरावृति करने वाले को गिरफ्तार क्यों नही किया गया?

डीयूजे की महासचीव सुजाता मधुक ने कहा  मुझे गर्व है जिस तरह से एडिटर इन युवा पत्रकारों को  सपोर्ट कर रहे  है, मैं उनका धन्यवाद करती हूं।

प्रेस काउंसिल के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार  जय शंकर ने कहा  जो बलिया की घटना हुई है, वो आने वाले समय के बारे में बताती है। 

इसे भी पढ़े:बुराड़ी हिंदू महापंचायत: धार्मिक उन्माद के पक्ष में और मुसलमानों के ख़िलाफ़, पत्रकारों पर भी हुआ हमला

वो कहते है  पूर्वी यूपी में ठेके लेकर नकल कराई जाती है। ये काम लगातार हो रहा है लेकिन जब इसको एक्सपोज किया तो पेपर में छापा, उसके बाद डीएम ने उनसे लीक वाला पेपर मांगा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनसे सोर्स पूछा गया जब नही बताया तो जेल भेज दिया गया । 

लेकिन हम साफ करना चाहते है कि हम मरना पसंद करेंगे आपकी जेलों में रहेंगे लेकिन सोर्स नही बताएंगे । 

वो आगे कहते है कि  आने वाले दिन बहुत खराब है। ये देश की धर्म निरपेक्षता को खत्म करना चाहते है लेकिन हम कहना चाहते है हमने गंगा और जमुना का पानी पिया है। ये देश की गंगा जमुनी तहजीब है। अब चुपचाप रहने का समय नहीं है खुलकर मैदान में उतरने का समय है।  

 पीसीआई ने पत्रकारों पर हो रहे हमले और दमन की निंदा की


इससे पहले मंगलवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने यहां बुराड़ी मैदान में ‘हिंदू महापंचायत’ के दौरान पत्रकारों पर हुए  हमले की मंगलवार को निंदा करते हुए दोषियों की ‘तत्काल’ गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 12वीं कक्षा की परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में तीन पत्रकारों की गिरफ्तारी की भी निंदा करते हुए कहा कि पुलिस ने इन पत्रकारों को ही आरोपी बना दिया जबकि उन्होंने पेपर लीक को ‘‘उजागर’’ किया था। पीसीआई ने बलिया के तीन पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग की।  

पीसीआई ने एक बयान में कहा, ‘‘तीन अप्रैल को दिल्ली के बुराड़ी मैदान में आयोजित हिंदू महापंचायत के दौरान जिस तरह से पांच पत्रकारों पर हमला किया गया था, उसकी प्रेस क्लब ऑफ इंडिया निंदा करता है।’’

पीसीआई ने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि दिल्ली पुलिस मूकदर्शक बनी रही और ‘‘बुराड़ी हमले में शामिल दोषियों’’ को गिरफ्तार नहीं किया। बयान में कहा गया, ‘‘हाल के दिनों में मीडियाकर्मियों पर सिलसिलेवार हमलों के मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि ‘‘ये लोग प्रेस को पूरी तरह से बंद करने पर तुले हुए हैं।’’

पिछले हफ्ते पुलिस ने उत्तर प्रदेश स्कूल परीक्षा बोर्ड के कक्षा 12 के अंग्रेजी प्रश्न पत्र के लीक होने में कथित भूमिका के लिए बलिया में तीन पत्रकारों अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह और मनोज गुप्ता को अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया था। मामले में तीन पत्रकारों की गिरफ्तारी से स्थानीय पत्रकारों में रोष पैदा हो गया, जिन्होंने दो अप्रैल को बलिया में पुलिस और जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

पीसीआई ने तीनों पत्रकारों की गिरफ्तारी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की और पुलिस की कार्रवाई को मनमाना बताया।

तीनों पत्रकारों की तुरंत रिहाई की मांग करते हुए पीसीआई ने कहा, ‘‘बलिया जिला प्रशासन की ओर से उन पत्रकारों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार करना अत्यधिक निंदनीय है, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा के अंग्रेजी के प्रश्नपत्र के लीक होने का खुलासा किया था।’
डिजिटल न्यूज़ प्ल्टफॉर्म का संगठन डिजीपब ने घटना वाले दिन ही एक बयान जारी कर कहा कि दिल्ली के बुराड़ी में एक हिंदू 'महापंचायत' में पत्रकारों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर उत्पीड़न किया गया। जिसकी वो कड़ी निंदा करता है।  
ट्वीट

DUJ ने पत्रकारों पर हमले की निंदा
इसी तरह दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) ने भी मंगलवार को उन पत्रकारों पर हमले की निंदा की, जो 3 अप्रैल को दिल्ली के बुराड़ी मैदान में आयोजित गैरकानूनी हिंदू महापंचायत की बैठक को कवर कर रहे थे। जिसमें दो मुस्लिम पत्रकारों को पीटा गया और एक महिला पत्रकार से छेड़छाड़ की गई। पत्रकारों को हेट स्पीच के वीडियो डिलीट करने के लिए मजबूर किया गया।

डीयूजे ने अपने बयान में कहा की दिल्ली पुलिस, जो दावा करती है कि महापंचायत के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी लेकिन उसने इसे रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। पुलिस ने पत्रकारों पर हमला करने वालों को गिरफ्तार नहीं किया, इसके बजाय वे पत्रकारों को मौके से दूर ले गए।

डीयूजे की मांग है कि पत्रकारों को निशाना बनाने और शहर में सांप्रदायिक सद्भाव को ख़राब करने के लिए भड़काऊ भाषण देने के लिए दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। बैठक में उपस्थित हिंसक व्यक्तियों पर नकेल कसने के लिए एक न्यायिक जांच की आवश्यकता है।  

Delhi
Burari Hindu Mahapanchayat
Hindu Mahapanchayat
Narasimhananda
Hate Speech
Religion Politics
minorities
RSS
Hindutva
delhi police
Ballia
Press club of india
DIGIPUB
DUJ

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

अब भी संभलिए!, नफ़रत के सौदागर आपसे आपके राम को छीनना चाहते हैं

मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी

पश्चिम बंगाल: विहिप की रामनवमी रैलियों के उकसावे के बाद हावड़ा और बांकुरा में तनाव

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    लखीमपुर खीरी कांड : एसआईटी ने दाखिल किया 5000 पन्नों का आरोप पत्र
    03 Jan 2022
    आपको बता दें कि 3 अक्टूबर, 2021 को गाड़ियों से कुचलकर चार किसानों की जान लेने के मामले में एसआईटी को 90 दिन के अंदर आरोप पत्र दाखिल करना था। आज आख़िरी ही दिन था। इसका स्वागत किया जाना चाहिए...हालांकि…
  • energy
    प्रबीर पुरकायस्थ
    यूरोप में गैस और बिजली के आसमान छूते दाम और भारत के लिए सबक़
    03 Jan 2022
    सर्दियों में यूरोपीय यूनियन में गैस के दाम आकाश छूने लगते हैं, जैसा कि पिछले साल हुआ था और इस बार फिर से हुआ है।
  • Savitribai Phule
    राज वाल्मीकि
    मौजूदा दौर में क्यों बार बार याद आती हैं सावित्री बाई फुले
    03 Jan 2022
    जयंती पर विशेष: आज सावित्री बाई को इसलिए भी याद किया जाना जरूरी है कि जिस मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़कर सावित्री बाई फुले ने औरतों के लिए जगह बनाई थी, वही आज दोबारा हावी हो रही है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    सावधान : देश में तीन महीने बाद कोरोना के 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए
    03 Jan 2022
    देश में कोरोना के मामलों में बहुत तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 24 घंटों में कोरोना के 33,750 नए मामले दर्ज किये गए हैं। वहीं ओमीक्रॉन के मामलो की संख्या बढ़कर 1,700 हो गयी है।
  • UNEMPLOYMENT
    सुबोध वर्मा
    बिना रोज़गार और आमदनी के ज़िंदा रहने को मजबूर कई परिवार
    03 Jan 2022
    नवीनतम सीएमआईई आंकड़ों से पता चलता है कि काम करने वाले दो सदस्यों वाले परिवारों की हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है। इसका मतलब है कि लोग बहुत कम आय पर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License