NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
सोशल मीडिया
भारत
राजनीति
बीमार पिता को साइकिल से लाने वाली ज्योति का सम्मान - बन रहा चुनावी अभियान!  
मज़दूरों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। ज़रूरत थी कि सरकारें मज़दूरों के साथ की गयी अपनी ऐतिहासिक गलतियों पर शर्म महसूस करें लेकिन इसका उल्टा हो रहा है। मज़दूरों की मजबूरी को अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।  
अनिल अंशुमन
26 May 2020
बीमार पिता को साइकिल से लाने वाली ज्योति

“यदि यह चुनाव का समय होता तो सियासी दलों में पैदल चल रहे प्रवासी मज़दूरों को घर तक पहुँचाने की मारामारी मच जाती।” ऐसी टिप्पणियाँ सोशल मीडिया में खूब वायरल हुई। जिनमें लॉकडाउन से रोजी रोजगार गँवा बैठे देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे परेशान हाल प्रवासी मज़दूरों की अमानवीय यातना पर मौन बैठे सरकार व उनके महामहिम मंत्री और नेताओं की संवेदनहीनता पर तीखे व्यंग्य किए गए थे।

अब जबकि बिहार में विधान सभा चुनाव होने हैं तो बिलकुल उक्त कथन का ही नज़ारा प्रदेश में साफ दीखने लगा है। अपने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर हरियाणा से दरभंगा स्थित अपने गाँव पहुँचनेवाली किशोरी ज्योति कुमारी का भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों व विधायकों द्वारा सम्मानित कर भरपूर मदद देने की घोषणा को चुनावी राजनीति से ही जोड़कर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया में जहां इसपर काफी तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है, वहीं प्रदेश के विपक्षी नेतागण भी आड़े हाथों ले रहें हैं।

 खबरों के अनुसार लॉकडाउन से अपने बीमार पिता के ऑटो चलाने का पेशा छूट जाने और कमरे का किराया नहीं चुकाने के कारण बेआसरा होनेवाली 15 वर्षीय ज्योति की भी लगभग वहीं कहानी है जो घर वापसी के लिए पैदल चलनेवाले लाखों लाख प्रवासी मज़दूरों की है। जिनके पास कंक्रीट के जंगलनुमा महानगरों के मालिकों द्वारा लॉकडाउन के संकट में तंगहाल - बेआसरा कर निकाल दिये जाने के बाद अपने गाँव लौटने के सिवाय और कोई चारा नहीं था।  
           
 गत 7 मई को ज्योति ने हरियाणा के गुरुग्राम से अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठाकर 1200 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हुए 15 मई को बिहार के दरभंगा ज़िला स्थित सिंघवारा प्रखण्ड के अपने गाँव सिरहुल्ली पहुँच गयी। पटना की युवा पत्रकार ने ज्योति की अकथनीय पीड़ा को बीबीसी  से प्रसारित कर केंद्र और बिहार की सुशासनी सरकार के गरीब मज़दूर विरोधी रवैये पर सबका ध्यान दिलाने की कोशिश की। लेकिन गोदी मीडिया ने इसे भी अपनी टीआरपी बढ़ानेवाली खबर बना ली ।
           
अमेरिकन राष्ट्रपति की सलाहकार व उनकी बेटी द्वारा इसपर ट्वीट कर ज्योति की दर्दगाथा को अदम्य साहस बताकर अभिनन्दन किए जाने के बाद तो खबर को दूसरा ही रंग दे दिया गया। जिसमें ज्योति की साहस गाथा सुना, दिखाकर सरकार के माननीय मंत्री, नेताओं के स्वागत बयानों की झड़ी लगा दी गयी ।  

twit_5.JPG
स्थानीय भाजपा विधायक महोदय आनन फानन अपने लाव लश्कर के साथ ‘ होम क्वोरेनटाइन ’ में रह रही ज्योति के घर पहुँच गए । उसे अदम्य साहसी बताकर अपनी पार्टी का भगवा गमछा ओढ़ाकर सम्मानित किया। जिसका फोटू खिंचवाते हुए महंगी स्पोर्ट साइकिल भी दी और अपनी पार्टी की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दे आए।
           
दूसरी ओर , बिहार से वर्तमान सरकार में केंद्रीय मंत्री महोदय ने भी इस ‘ बहादुर लड़की ’ को छात्रवृति और प्रशिक्षण दिलाने के लिए अपने सहयोगी केंद्रीय खेल मंत्री को विशेष पत्र लिखने संबंधी ट्वीट जारी कर दिया । सरकार के मंत्री – विधायक – नेताओं द्वारा ज्योति को सम्मानित किए जाने को प्रदेश के विपक्षी नेताओं ने मजबूर बेटी का मज़ाक बताया। बिहार विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष तथा उनकी माता व पूर्व मुख्यमंत्री जी ने ज्योति से ऑनलाईन वीडियो बातचीत कर उसके परिवार के भरण पोषण समेत उसकी पढ़ाई का पूरा खर्चा उठाने का आश्वाशन दिया। बिहार जनाधिकार पार्टी के सांसद महोदय ने भी अपने कार्यकर्त्ता के हाथ 20 हज़ार नगद रुपये भिजवाये।

एक खबर यह भी है कि नेशनल साइकिलिंग फ़ेडेरेशन ने ‘ अचानक संज्ञान ’ लेकर ज्योति को 1200 किलोमीटर साइकिल चलाने को  ‘ अदम्य साहस ’ बताकर अभिननंदन किया। फ़ेडेरेशन के प्रवक्ता ने अगले माह दिल्ली में होनेवाले साइकिलिंग ट्रायल के लिए उसके चयन की घोषणा करते हुए ज्योति को दिल्ली बुलाने की सूचना जारी कर दी। साथ ही चयन उपरांत फ़ेडेरेशन के खर्चे पर उसे एकेडमी में ट्रेनिंग देने की भी घोषणा की।

 सोशल मीडिया में ज्योति के इस अदम्य हौसले का तो पूरी गर्मजोशी से स्वागत किया गया। लेकिन केंद्र व हरियाणा, बिहार की सत्ता में बैठी भाजपा के मंत्री, विधायक, नेताओं तथा बिहार सरकार प्रशासन द्वारा ज्योति को सम्मानित किए जाने पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएँ दी जा रहीं हैं । जिनमें मासूम ज्योति को 1200 किलोमीटर साइकिल चलाने के लिए मजबूर बनाने वाली सरकार द्वारा सम्मानित किए जाने की भर्तस्ना कर कहा जा रहा है कि सरकार को तो शर्म आनी चाहिए  क्योंकि उन्हीं के गलत फैसले के कारण ही एक गरीब मज़दूर की बेटी को ऐसा करना पड़ा। मजबूरी और बेबसी में जान जोखिम में डालकर सैकड़ों किलोमीटर साइकिल चलाने का रिस्क उठानेवाली वाली ज्योति को समय पर कोई मदद नहीं देकर अब प्रशंसा करने का नाटक,हद दर्जे की बेहयाई है ।
           
कई पोस्टों में मीडिया की भी लानत मलामत करते हुए कहा गया कि एक छोटी सी लड़की को सैकड़ों मिल साइकिल चलाने को मजबूर करने वाली सरकार पर उंगली उठाने की बजाय उसके गर्व करने का बयान छपना , बेहद अमानवीय और शर्मनाक है। एक पोस्ट में तो ज्योति को भी आगाह करते हुए कहा गया कि तुम्हारी दिलेरी, साहस की चर्चा अब सब जगह है। बेहद मुश्किल हालत में असंभव से लगने वाले काम को भी संभव कर दिखलाया। कविगण तुमपर कवितायें लिख रहें हैं और बुद्धिजीवी प्रशंसा शब्दों की बारिश कर रहें हैं।

प्रिंट,इलेक्ट्रोनिक मीडिया के भी कलम और कैमरे तुम पर लगे हुए हैं। जब सभी तुम्हें नायिका बनाने पर जी जान से लगे हुए हैं तो क्या यह उनसे पूछा जाना चाहिए कि आखिर क्यों तुम्हें ऐसा करना पड़ा ? तुम भी तो उन्हीं में से थी जिन्हें अचानक से लॉकडाउन की जलती भट्ठी में झोंक दिया गया । ज्योति , तुम कभी मत भूलना कि जो लोग आज तुम्हारा स्वागत,सम्मान करने आ रहें हैं , उन्हीं के कारण आज कितनी मताओं कों पैदल चलते हुए ही बच्चे जन्म देने  पड़े और तुम्हारे पिता जैसे अनेकों को तो अपनी जानें भी गंवानी पड़ी।  यह सम्मान नहीं तुम्हारी बेबसी का मज़ाक है !
           
निस्संदेह,यदि सामान्य दिनों में किसी मज़दूर की 15 वर्षीय बेटी अपने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर 1200 किलोमीटर सफर तय कर अपने गाँव पहुँचती तो यह उसका अदम्य साहस और प्रतिभा का परिचायक ही माना जाता। लेकिन यदि कलॉकडाउन का भयावह हालात खड़ा कर भूख, तंगहाली - बेआसरा होने पर कहीं से भी कोई मदद नहीं मिलने की मजबूरी में एक छोटी लड़की को साइकिल चलाने का दुस्साहसिक कदम उठाना पड़े और संकट पैदा करनेवाले ही पीड़ित के सम्मान प्रदर्शन का नाटक करने लगें तो  कोई भी मानवीय और संवेदनशील व्यक्ति उसे सकारात्मक अंदाज़ में नहीं ही लेगा ! वह भी तब जब वहाँ चुनाव होने वाला हो !

Lockdown
Migrant workers
Politics on Migrants
Ivanka Trump
modi sarkar
BJP
Ivanka Trump Tweet
Social Media
poverty
Poor People's

Related Stories

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

मनरेगा: ग्रामीण विकास मंत्रालय की उदासीनता का दंश झेलते मज़दूर, रुकी 4060 करोड़ की मज़दूरी

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

हैदराबाद: कबाड़ गोदाम में आग लगने से बिहार के 11 प्रवासी मज़दूरों की दर्दनाक मौत


बाकी खबरें

  • एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    मुकुंद झा
    एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    16 Jan 2022
    संयुक्त किसान मोर्चा के फ़ैसले- 31 जनवरी को देशभर में किसान मनाएंगे "विश्वासघात दिवस"। लखीमपुर खीरी मामले में लगाया जाएगा पक्का मोर्चा। मज़दूर आंदोलन के साथ एकजुटता। 23-24 फरवरी की हड़ताल का समर्थन।
  • cm yogi dalit
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव और दलित: फिर पकाई और खाई जाने लगी सियासी खिचड़ी
    16 Jan 2022
    चुनाव आते ही दलित समुदाय राजनीतिक दलों के लिए अहम हो जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उनके साथ बैठकर खाना खाने की राजनीति भी शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि दलित वोटर अपनी पसंद किसे बनाते हैं…
  • modi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : झुकती है सरकार, बस चुनाव आना चाहिए
    16 Jan 2022
    बीते एक-दो सप्ताह में हो सकता है आपसे कुछ ज़रूरी ख़बरें छूट गई हों जो आपको जाननी चाहिए और सिर्फ़ ख़बरें ही नहीं उनका आगा-पीछा भी मतलब ख़बर के भीतर की असल ख़बर। वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन आपको वही बता  …
  • Tribute to Kamal Khan
    असद रिज़वी
    कमाल ख़ान : हमीं सो गए दास्तां कहते कहते
    16 Jan 2022
    पत्रकार कमाल ख़ान का जाना पत्रकारिता के लिए एक बड़ा नुक़सान है। हालांकि वे जाते जाते भी अपनी आंखें दान कर गए हैं, ताकि कोई और उनकी तरह इस दुनिया को देख सके, समझ सके और हो सके तो सलीके से समझा सके।…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    योगी गोरखपुर में, आजाद-अखिलेश अलगाव और चन्नी-सिद्धू का दुराव
    15 Jan 2022
    मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अयोध्या से विधानसभा चुनाव लडने की बात पार्टी में पक्की हो गयी थी. लेकिन अब वह गोरखपुर से चुनाव लडेंगे. पार्टी ने राय पलट क्यों दी? दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी अब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License