NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
कानपुर: गैंगरेप पीड़िता के पिता की मौत ने फिर पुलिस-प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है!
ये कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिस प्रशासन सवालों के घेरे में है। इससे पहले भी कई मामलों में पुलिस द्वारा आरोपियों को बचाने का ट्रेंड देखने को मिला है। जाहिर है यूपी पुलिस सूबे की सरकार को रिपोर्ट करती है। ऐसे में कानून व्यवस्था से जुड़े हर मामले की जिम्मेदारी भी प्रदेश सरकार की बनती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Mar 2021
कानपुर: गैंगरेप पीड़िता के पिता की मौत ने फिर पुलिस-प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है!
Image Courtesy : Times of India

यूं तो उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था अक्सर ही सुर्खियों में रहती है लेकिन कानपुर दुष्कर्म मामले में अब पुलिस आरोपी भी बन गई है। कानपुर में बुधवार, 10 मार्च को गैंगरेप पीड़िता के पिता की संदिग्ध मौत के बाद शुरुआत में पुलिस में इसे हादसा बताने की कोशिश की। लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा तो कन्नौज के दरोगा देवेंद्र यादव के खिलाफ ही हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया।

बता दें कि बुधवार को गैंगरेप पीड़िता के पिता को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। जिसके बाद अस्पताल ले जाते ही उनकी मौत हो गई थी। पुलिस तब दबाव में आई जब आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने हाईवे जाम कर दिया। परिजनों का आरोप था कि यह हादसा नहीं बल्कि हत्या है।

पुलिस का क्या कहना है?

इस संबंध में न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक डीआईजी कानपुर ने कहा कि गैंगरेप के दोनों आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही पिता की मौत मामले में दरोगा देवेंद्र यादव के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच गहनता से की जा रही है। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। हालांकि इससे पहले पुलिस ने इस मामले में हादसा यानी एक्सीडेंट का मामला दर्ज किया था।

बुधवार सुबह एक वीडियो के जरिये बयान में कानपूर पुलिस प्रमुख डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया था, “जब (पीड़िता का) मेडिकल परिक्षण चल रहा था तब उसके पिता चाय पीने के लिए बाहर निकले थे। उस समय हमें मालूम चला कि उनका एक ट्रक से एक्सीडेंट हो गया है। उन्हें कानपुर के एक अस्पताल ले जाया गया लेकिन वे दम तोड़ चुके थे। हमने एक्सीडेंट का मामला दर्ज कर लिया है और जांच चल रही है।”

मालूम हो कि गैंगरेप मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी व दरोगा के बेटे डिप्पु यादव व उसके साथी गोलू को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक शहर के सजेती इलाके की आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक 13 साल की बच्ची के साथ सोमवार, 8 मार्च को सामूहिक बलात्कार की खबर सामने आई थी। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में कन्नौज जिले में बतौर सब इंस्पेक्टर तैनात पुलिसकर्मी देवेंद्र यादव के दो बेटों समेत तीन लोगों पर छात्रा के सामूहिक बलात्कार का आरोप है।

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) ब्रजेश श्रीवास्तव ने बताया कि लड़की सोमवार को मवेशियों के लिए चारा लाने गई थी तब उसे आरोपियों ने अगवा कर लिया और किसी अज्ञात स्थान पर ले गये जहां उन्होंने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। लड़की ने किसी तरह घर पहुंचकर आपबीती परिवार वालों को सुनाई, जिसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

परिजनों ने लगाए पुलिस पर आरोपियों से मिलीभगत के आरोप

ज्ञात हो कि जिस अस्पताल में पीड़िता को मेडिकल के लिए लाया गया था। उसी अस्पताल के बाहर छात्रा के पिता की एक ट्रक दुर्घटना में मौत के बाद परिवार ने हत्या की बात कहते हुए आरोपियों के साथ पुलिस की मिलीभगत होने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जबसे गैंगरेप का मामला दर्ज हुआ है, तबसे उन्हें आरोपियों के परिवार द्वारा धमकाया जा रहा है और पुलिस इसमें उनका साथ दे रही है।

एनडीटीवी के अनुसार पीड़िता के बाबा ने बुधवार सुबह पत्रकारों से कहा कि उनके बेटे की हत्या हुई है और पुलिस भी इसमें शामिल है। इससे पहले पीड़िता के परिवार के एक और सदस्य ने बताया था कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं।

इस परिजन ने बताया था, “जैसे ही हमने शिकायत दर्ज करवाई, मुख्य आरोपी के बड़े भाई ने धमकाना शुरू कर दिया, उसने हमसे कहा कि बचके रहना, मेरे पिता सब इंस्पेक्टर हैं।”

गौरतलब है कि ये कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिस प्रशासन सवालों के घेरे में है। इससे पहले भी कई मामलों में पुलिस द्वारा आरोपियों को बचाने का ट्रेंड देखने को मिला है। जाहिर है यूपी पुलिस सूबे की सरकार को रिपोर्ट करती है। ऐसे में कानून व्यवस्था से जुड़े हर मामले की जिम्मेदारी भी प्रदेश सरकार की बनती है।

उन्नाव का माखी कांड हो या हाथरस का मामला या फिर बदायूं और अब कानपुर। राज्य में सरकार भले ही ‘न्यूनतम अपराध’ और ‘बेहतर कानून व्यवस्था’ का दावा करती हो लेकिन हक़ीक़त में प्रदेश में महिलाओँ के खिलाफ अपराध की सूरत और पीड़िता के प्रति पुलिस के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है।

आरोपियों को बचाने का ट्रेंड

आपको याद होगा उन्नाव मामले में यूपी पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर को सम्मान देकर संबोधित किया था। जब पत्रकारों की ओर से इस पर टोका गया, तो पुलिस का कहना था कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर आरोपी हैं, दोषी नहीं। और इसलिए यूपी पुलिस ने सेंगर की गिरफ्तारी से अपना पल्ला भी झाड़ लिया था।

जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने पूछा था कि पॉक्सो एक्ट में पीड़िता के बयान के बाद आरोपी को गिरफ्तार करने का प्रावधान है तो इस मामले को अलग तरह से क्यों ट्रीट किया जा रहा है। इसके जवाब में तब के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा था, “17 अगस्त को जब पहली बार इस मामले की शिकायत की थी तो उसमें विधायक जी का नाम नहीं था। ऐसे में आप लोग बताएं कि उन्हें किस आधार पर रोका जा सकता है।”

महिला के चरित्र और दुष्कर्म पर सवाल

हाथरस मामले की बात करें तो खुद प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने मीडिया स्टेटमेंट में कहा था कि युवती के साथ रेप नहीं हुआ। उन्होंने रेप की खबरों को भ्रामक बताकर सख्त कार्रवाई की बात कही थी।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा था, “फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट से भी यह साफ जाहिर होता है कि उसके साथ बलात्कार नहीं हुआ। सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने और जातीय हिंसा भड़काने के लिए कुछ लोग तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।”

इतना ही नहीं तमाम बीजेपी के प्रवक्ता और खुद आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने पीड़िता की पहचान तक उज़ागर कर दी थी, ये कहते हुए कि दलित युवती के साथ बलात्कार नहीं हुआ है। जो कानूनन गलत है, लेकिन इसके बावजूद न तो सरकार ने और न ही प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई की।

शिकायत न लिखकर मामले को टरकाने का आरोप

बदायूं मामले में भी पीड़िता के बेटे ने आरोप लगाया था कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने आरोपी महंत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस बलात्कार की घटना को हादसा बताने की कोशिश में लगी रही।

महिला के परिजनों का आरोप था कि पुलिस पहले तो उन्हें टरकाती रही, और कुएं में गिरने को ही मौत की वजह बताती रही। दो दिन तक शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया। जब यह मामला मीडिया में उछला, तब कहीं जाकर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उसके बाद 5 जनवरी को पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें बलात्कार और शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई।

पीड़ित को प्रताड़ित करने का ट्रेंड

गौरतलब है कि बात सिर्फ एक या दो मामले की नहीं है। हर उस मामले की है जिसमें पुलिस और सिस्टम की लापरवाही का कथित तौर पर एक ट्रेंड सेट होता दिखाई देता है। जहां पीड़ित के प्रति संवेदनहीनता और प्रताड़ित करने का नया चलन चल पड़ा है। 

UttarPradesh
gang rape
CRIMES IN UP
women safety
UP police
UP Administration
Yogi Adityanath
BJP

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License