NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आधी आबादी
महिलाएं
भारत
राजनीति
पत्नी नहीं है पति के अधीन, मैरिटल रेप समानता के अधिकार के ख़िलाफ़
कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 375 के तहत बलात्कार की सज़ा में पतियों को छूट समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के मुताबिक शादी क्रूरता का लाइसेंस नहीं है।
सोनिया यादव
24 Mar 2022
marital rape
Image courtesy : Feminism In India

"संविधान में सबको समानता का अधिकार है। ऐसे में पति शासक नहीं हो सकता है, यह सदियों पुरानी सोच और परंपरा है कि पति उनके शासक हैं। विवाह किसी भी तरह से महिला को पुरुष के अधीन नहीं करता है। संविधान में सबको सुरक्षा का समान अधिकार है।"

ये टिप्पणी कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले के दौरान की। कोर्ट ने अपने फैसले में आरोपी पति की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत अपनी पत्नी द्वारा लगाए बलात्कार के आरोप को हटाने की मांग की थी। अदालत ने पति के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 के चलते बलात्कार के अपराध में वैवाहिक बलात्कार यानी मैरिटल रेप अपवाद की श्रेणी में है और इसलिए उसके खिलाफ आरोप तय नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 375 के तहत बलात्कार की सज़ा में पतियों को छूट समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के मुताबिक शादी क्रूरता का लाइसेंस नहीं है। शादी समाज में किसी भी पुरुष को ऐसा कोई अधिकार नहीं देती है कि वह महिला के साथ जानवरों जैसा व्यवहार करे। अगर कोई भी पुरुष महिला की सहमति के बिना संबंध बनाता है या उसके साथ क्रूर व्‍यवहार करता है, तो यह दंडनीय है। चाहे फिर पुरुष महिला का पति ही क्यों न हो।

क्या है पूरा मामला?

कर्नाटक हाई कोर्ट का ये फैसला ऐसे समय में आया में आया है जब मैरिटल रेप को लेकर देश में बहस तेज़ है। इस मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें धारा 375 के अपवाद 2 की संवैधानिकता को मनमाना, अनुचित और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई है। अदालत ने हाल ही में इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

यहां ध्यान रहे कि कर्नाटक हाईकोर्ट के जज जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 की संवैधानिकता पर फैसला नहीं सुनाया है, बल्कि हाईकोर्ट ने विधायिका को इस मुद्दे पर विचार करने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि हम ये नहीं कह रहे हैं कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए या इस अपवाद को विधायिका हटा ले। लेकिन इस मसले पर विचार करना जरूरी है। यदि बलात्कार के आरोप को कथित अपराधों के खंड से हटा दिया जाता है, तो यह शिकायतकर्ता पत्नी के साथ घोर न्याय नहीं होगा।

अदालत के अनुसार पतियों के पत्नियों पर ऐसे यौन हमलों का महिला पर मनोवैज्ञानिक और शारीरिक दोनों प्रभाव पड़ता है। पतियों की ऐसी हरकतें पत्नियों की आत्माएं झकझोर कर रख देते हैं और अब संसद को इन 'चुप्पियों' को सुनने की जरूरत है। सदियों से माना जाता है कि पत्नी पति की गुलाम होती है। उसके मन, आत्मा और हर चीज पर पति का हक होता है। पति जैसा चाहे वैसा बर्ताव कर सकता है। इस तरह मामले अब देश में बढ़ रहे हैं और इस मान्यता को बदलने की जरूरत है।

मैरिटल रेप' क़ानून की नज़र में नहीं है अपराध

भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में बलात्कार की परिभाषा बताई गई है और उसे अपराध माना गया है। लेकिन इस धारा का अपवाद 2 कहता है कि अगर एक शादी में कोई पुरुष अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, जिसकी उम्र 15 साल या उससे ऊपर है तो वो बलात्कार नहीं कहलाएगा, भले ही उसने वो संबंध पत्नी की सहमति के बगैर बनाए हों।

हालांकि साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने महिला की आयु 18 साल कर दी थी। बीते लंबे समय से इस अपवाद पर आपत्ति जताई जा रही है। हालांकि अब भी भारत में 'वैवाहिक बलात्कार' यानी 'मैरिटल रेप' क़ानून की नज़र में अपराध नहीं है। इसलिए आईपीसी की किसी धारा में न तो इसकी परिभाषा है और न ही इसके लिए किसी तरह की सज़ा का प्रावधान है।

अब तक कैसे रहे हैं अदालतों के फ़ैसले

मैरिटल रेप के मामलों को देखें तो अब तक आए कोर्ट के फैसलों में एक विरोधाभास नज़र आता है। जहां छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जज एन के चंद्रावंशी ने एक आदमी को अपनी ही पत्नी के बलात्कार के आरोप के मामले में बरी करते हुए ये कहा था कि एक पति का अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाना बलात्कार नहीं है चाहे वो दबाव में या उसकी इच्छा के बगैर बनाया गया हो। वहीं केरल हाई कोर्ट ने ऐसे ही मामले में कहा था कि ये मानना कि पत्नी के शरीर पर पति का अधिकार है और उसकी इच्छा के विरुद्ध संबंध बनाना मैरिटल रेप है।

इस मामले में सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी भी खूब सुर्खियों में रही थी, जिसमें अदालत ने इसे अपराध माने जाने को लेकर दाख़िल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा था कि वैवाहिक दुष्कर्म के मामले में प्रथम दृष्टया सजा मिलनी चाहिए और इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: मैरिटल रेप को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, क्या अब ख़त्म होगा महिलाओं का संघर्ष?

अदालत का यह भी कहना था कि महत्वपूर्ण बात यह है कि एक महिला, महिला ही होती है और उसे किसी संबंध में अलग तरीके से नहीं तौला जा सकता, "यह कहना कि, अगर किसी महिला के साथ उसका पति जबरन यौन संबंध बनाता है तो वह महिला भारतीय दंड संहिता की धारा 375 (बलात्कार) का सहारा नहीं ले सकती और उसे अन्य फौजदारी या दीवानी कानून का सहारा लेना पड़ेगा, ठीक नहीं है।"

बाक़ी दुनिया का क्या है हाल?

दुनिया में देखा जाए तो कई ऐसे देश है जहां मैरिटल रेप एक अपराध की श्रेणी में आता है। संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी संस्था यूएन वीमेन के मुताबिक घर महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक जगहों में से एक है। संस्था की रिपोर्ट के अनुसार दस में से चार देश मैरिटल रेप को अपराध मानते हैं। 50 से ज्यादा देशों जिसमें अमेरिका, नेपाल, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं वहां पत्नी के साथ मैरिटल रेप को अपराध माना गया है वहीं एशिया के ज्यादातर देशों में क़ानून में बदलाव को लेकर कोशिशें जारी हैं।

संयुक्त राष्ट्र की Progress of World Women 2019-20 की रिपोर्ट बताती है कि 185 देशों में सिर्फ 77 देश ऐसे हैं जहां मैरिटल रेप को लेकर कानून है। बाकी 108 में से 74 देश ऐसे हैं जहां महिलाओं को अपने पति के खिलाफ रेप की शिकायत करने का अधिकार है। वहीं, भारत समेत 34 देश ऐसे हैं जहां मैरिटल रेप को लेकर लेकर कोई कानून नहीं है।

भारत में मैरिटल रेप को भले ही अपराध नहीं माना जाता, लेकिन अब भी कई सारी भारतीय महिलाएं इसका सामना करती हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) के मुताबिक, देश में अब भी 29 फीसदी से ज्यादा ऐसी महिलाएं हैं जो पति की शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करती हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में अंतर और भी ज्यादा है। गांवों में 32% और शहरों में 24% ऐसी महिलाएं हैं।

शादी का ये मतलब बिल्कुल नहीं की पत्नी सेक्स के लिए हमेशा बैठी है तैयार

गौरतलब है कि मैरिटल रेप पर अब तक कई जनहित याचिकाएं कोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं। कई बार महिलाओं की आपबीती सुनकर खुद कोर्ट ने सख्त टिप्पणियां की हैं, लेकिन अभी तक इस पर कोई अलग से कानून नहीं बन पाया है। शायद आपको याद हो कि दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ़ जस्टिस गीता मित्तल और सी हरि शंकर की बेंच ने कहा था कि शादी का ये मतलब बिल्कुल नहीं की पत्नी सेक्स के लिए हमेशा तैयार बैठी है।

इसके उलट सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में यह दलील दी थी कि पश्चिमी देशों में मैरिटल रेप को अपराध माना जाता है इसका मतलब यह नहीं है कि भारत भी आंख बंद कर वही करे। एक ऐसा देश जहां शादीशुदा संबंध में सेक्स की बात करना टैबू हो, वहां सरकार की ओर से दिए जाने वाले यह तर्क पितृसत्ता की जड़ को और गहरा करते है। मैरिटल रेप सिर्फ घरेलू मसला नहीं है जो इसे घरेलू हिंसा कानून के तहत लपेट दिया जाए, ये एक अपराध है। अपराध करने वाला पति है तो उसको नकारा नहीं जा सकता है। इस मामले में अब केंद्र सरकार के रुख का इंतजार सभी को है लेकिन सरकार की पिछली दलील से तो ऐसा ही लगता है कि ऐसी सोच और समाज से वैवाहिक बलात्कार जैसी कुरीति को हटाने के लिए अदालत ही अब एकमात्र उम्मीद नज़र आती है।

इसे भी पढ़ें: मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं

Karnataka High Court
Fundamental Rights
article 14
Marital Rape
Constitution of India
equal rights for women
Right to equality

Related Stories

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

हिजाब मामले पर कोर्ट का फ़ैसला, मुस्लिम महिलाओं के साथ ज़्यादतियों को देगा बढ़ावा

कर्नाटक हिजाब विवाद : हाईकोर्ट ने बड़ी बेंच को भेजा केस, सियासत हुई और तेज़

विशेष: लड़ेगी आधी आबादी, लड़ेंगे हम भारत के लोग!

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

राष्ट्रीय बालिका दिवस : लड़कियों को अब मिल रहे हैं अधिकार, पर क्या सशक्त हुईं बेटियां?

मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं


बाकी खबरें

  • टुन्नाजी पाण्डेय
    भाषा
    भाजपा ने नीतीश के खिलाफ टिप्पणियां करने वाले विधान पार्षद को किया निलंबित
    04 Jun 2021
    भाजपा एमएलसी टुन्नाजी पाण्डेय ने यह कह कर विवाद खड़ा कर दिया था कि नीतीश कुमार परिस्थितियों के चलते मुख्यमंत्री हैं।
  • छत्तीसगढ़: आदिवासियों के ख़िलाफ़ दर्ज 718 प्रकरणों की वापसी
    भाषा
    छत्तीसगढ़: आदिवासियों के ख़िलाफ़ दर्ज 718 प्रकरणों की वापसी
    04 Jun 2021
    राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निर्दोष आदिवासियों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों की वापसी के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए के पटनायक की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है।
  • किसान
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    देशभर में शनिवार को भाजपा सांसदों के आवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे किसान
    04 Jun 2021
    पिछले साल 5 जून को ही केंद्र की मोदी सरकार ने कृषि संबंधी तीन विवादित कानूनों को अध्यादेशों के रूप में देश के किसानों पर थोपा था।
  • मोदी
    अनिल जैन
    प्रधानमंत्री के छवि-प्रबंधन से वैक्सीन का संकट गहराया
    04 Jun 2021
    जिस तरह नोटबंदी और जीएसटी को लेकर केंद्र सरकार के फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था तबाह हुई है, उसी तरह सरकार ने अपनी वैक्सीन नीति में भी बार-बार बदलाव करते हुए न सिर्फ देश की जनता के स्वास्थ्य को बल्कि…
  • सूडान में प्रदर्शनकारियों ने सैन्य नरसंहार की दूसरी बरसी मनाई, न्याय की मांग की
    पीपल्स डिस्पैच
    सूडान में प्रदर्शनकारियों ने सैन्य नरसंहार की दूसरी बरसी मनाई, न्याय की मांग की
    04 Jun 2021
    इस मौके पर खार्तूम में सैकड़ों प्रदर्शनकारी धमकियों के बावजूद सड़क पर उतर आए।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License