NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
कश्मीर: एक और लक्षित हत्या से बढ़ा पलायन, बदतर हुई स्थिति
मई के बाद से कश्मीरी पंडितों को राहत पहुंचाने और उनके पुनर्वास के लिए  प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के तहत घाटी में काम करने वाले कम से कम 165 कर्मचारी अपने परिवारों के साथ जा चुके हैं।
अनीस ज़रगर
03 Jun 2022
jammu and kashmir
कश्मीरी पंडित एक स्कूल शिक्षक की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए।

श्रीनगर: कश्मीर घाटी में चुन-चुनकर हो रही हत्याओं ने एक बार फिर घाटी में व्यापक स्तर की उथल-पुथल पैदा कर दी है। बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक वर्ग के लोग डर के चलते क्षेत्र छोड़ने लगे हैं।

क्षेत्र में अल्पसंख्यक मुद्दों पर काम करने वाले संगठन कश्मीर पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) के मुताबिक, मई के बाद से कश्मीरी पंडितों को राहत पहुंचाने और उनके पुनर्वास के लिए  प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के तहत घाटी में काम करने वाले कम से कम 165 कर्मचारी अपने परिवारों के साथ जा चुके हैं 

संगठन के संजय टिक्कू ने न्यूज़क्लिक को बताया, "हमारी जानकारी के मुताबिक, पीएम पैकेज के तहत काम पर लगे 165 कर्मचारी अपने परिवार के साथ जा चुके हैं। हमने सुना है कि कश्मीर में काम करने वाले हिन्दू परिवार भी हालिया हत्याओं के बाद यह जगह छोड़ चुके हैं।"

टिक्कू के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों ने सरकार को उन्हें सुरक्षा प्रदान करने और क्षेत्र के बाहर उनका पुनर्वास करने के लिए 36 घंटे की समय सीमा दी थी। उन्होंने कहा, "यह वक़्त अब ख़तम हो चुका है। इसलिए यह लोग अब जा रहे हैं।"

कश्मीर घाटी में पंडित समुदाय के 4000 कर्मचारी हैं, जबकि कई पीएम राहत पैकेज से इतर भी काम कर रहे हैं। दक्षिण कश्मीर के इलाकाई देहाती बैंक के मैनेजर की हत्या के बाद पलायन की यह लहर चालू हुई है।

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने बताया कि पीड़ित की पहचान राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी विजय कुमार के तौर पर हुई है, उन्हें गुरुवार सुबह बैंक परिसर के भीतर ही गोली मारी गई थी।

कश्मीर जोन पुलिस ने ट्वीट कर कहा, "कुलगाम जिले के आरे मोहनपोरा में इलाकाई देहाती बैंक में अतांकियों ने एक बैंक कर्मी पर गोलियां चलाईं। इस आतंकी घटना में उन्हें गोलियों से गंभीर चोटें आईं। वे राजस्थान में हनुमानगढ़ के रहने वाले हैं। इलाके की घेराबंदी कर दी गई है।"

लेकिन अधिकारियों ने कहा कि कुमार की गोलीबारी में मौत हो गई। उनकी हत्या से दो दिन पहले ही संभावित उग्रपंथियों ने कुलगाम में एक स्कूल शिक्षक की हत्या कर दी थी।

इस साल, अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों, पंचायत सदस्य, पुलिसकर्मी और सोशल मीडिया पर मत प्रभावित करने वालों समेत कुल 18 लक्षित हत्याएं हो चुकी हैं। उग्रपंथी समूहों के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन और कड़ी सुरक्षा के बावजूद यह घटनाएं हो रही हैं। 

केपीएसएस के मुताबिक, कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों ने   प्रशासन से बनिहाल सुरंग तक सुरक्षा प्रदान करने की अपील की है, क्योंकि वह लोग जम्मू "सामूहिक प्रवास" की योजना बना रहे हैं।

अब जब कश्मीर में हिंसा में इज़ाफ़ा हो रहा है, तब कई लोग भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को कश्मीर के हालात ना संभाल पाने के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। कुमार की हत्या की राजनीतिक दलों ने निंदा की है, उन्होंने इसे "बर्बर" बताया है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक प्रवक्ता ने कहा, "एक और निशाना बनाकर की गई हत्या। एक और निर्दोष जीवन को खत्म कर दिया गया! इलाकाई देहात बैंक के मैनेजर विजय कुमार पर किए गए कायरतापूर्ण हमले की निन्दा। दिवंगत को शांति मिले। उनके परिवार और दोस्तों के साथ हमारी संवेदनाएं।"

सीपीआई (एम) के नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने बैंक मैनेजर की हत्या को "बर्बर" बताते हुए कहा कि यह मामला नागरिकों की हत्या की लंबी सूची में एक और इजाफा है।

उन्होंने आगे कहा, "प्रशासन को इन कर्मचारियों को सुरक्षित जगह नियुक्ति देनी चाहिए और उन्हें सुरक्षित रहवास उपलब्ध करवाना चाहिए। साथ ही हर नागरिक को अपने संबंधों से परे जाकर इस  अपराध की निन्दा करनी चाहिए।“

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें।

Kashmir: Another Targeted Killing Triggers Migration, Situation Worsens

Kashmir Violence
Targeted Killings
Kashmiri Pandits
Kashmir Migration
KP Killings
PM’s Special Package
KPSS
J&K Militancy

Related Stories


बाकी खबरें

  • उत्तर प्रदेश: ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान 14 जिलों में हिंसक घटनाएं, पुलिस और प्रशासन बने रहे मूक दर्शक
    असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश: ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान 14 जिलों में हिंसक घटनाएं, पुलिस और प्रशासन बने रहे मूक दर्शक
    09 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश के कई जिलों से प्रस्तावकों के अपहरण और प्रत्याशियों के बीच गोलियां चलने की खबर है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।
  • वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा
    अयस्कांत दास
    वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा
    09 Jul 2021
    विशिष्ट मार्गदर्शिका का अभाव और केंद्रीय निगरानी की मशीनरी न होने के कारण राज्य दर राज्य वन भूमि पर अधिकारों के दावों के मामले अलग-अलग हैं।
  • डाटा संरक्षण विधेयक जब तक कानून का रूप नहीं लेता, नई निजता नीति लागू नहीं करेंगे: वॉट्सऐप
    भाषा
    डाटा संरक्षण विधेयक जब तक कानून का रूप नहीं लेता, नई निजता नीति लागू नहीं करेंगे: वॉट्सऐप
    09 Jul 2021
    वॉट्सऐप ने मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष यह भी साफ किया कि इस बीच वह नई निजता नीति को नहीं अपनाने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोग के दायरे को सीमित नहीं करेगा।
  • झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
    09 Jul 2021
    सीपीआईएम ने मांग की है कि जब तक प्राधिकरण या सरकार द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई जाती है तब तक इन झुग्गी बस्ती में रह रहे गरीब लोगों को वहीं पर रहने दिया जाए। और यदि किसी कारणवश उन्हें जनहित…
  • उच्चतम न्यायालय
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    उच्चतम न्यायालय का फेसबुक प्रमुख को जारी समन को रद्द करने से इनकार, कहा दिल्ली फरवरी 2020 जैसे दंगे दोबारा नहीं झेल सकती
    09 Jul 2021
    न्यायालय ने फेसबुक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली विधान सभा को समन जारी करने का अधिकार है। हालांकि पीठ ने यह भी साफ किया कि फेसबुक के पास समिति द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देने से इनकार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License