NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कश्मीर: घर से दूर हिरासत में लोगों से मिलना एक बड़ा संघर्ष
बीते पांच महीनों के दौरान हिरासत में लिए गए निर्दोष लोगों में से कुछ को आगरा की दूर-दराज जेल में बंद कर दिया गया है, अब उनके परिवारों को उनसे मिलने के लिए इतनी लंबी दूरी को तय करना बेहद मुश्किल हो रहा है।
अनीस ज़रगर
20 Jan 2020
Translated by महेश कुमार
Irfan Hurra

श्रीनगर: दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के अलियालपोरा गाँव के निवासी वसीम शेख ने उस वक़्त अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी जब उसे अपने परिवार की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ी क्योंकि उसके पिता बशीर अहमद ने बीमारी के कारण काम छोड़ दिया था। आज, बशीर अहमद अपने परिवार के साथ असहाय बैठा है, जैसे उसका सब कुछ तबाह हो गया है, और वह अपने भाग्य को कोसते हुए अपने बेटे के वापसी की राह देख रहा है।

image_0.JPG

इरफा एएच हुर्रा के पिता 

19 वर्षीय वसीम ने अपने परिवार का खर्च में हाथ बंटाने के लिए शोपियां शहर में एक स्थानीय केबल नेटवर्क के यहाँ दैनिक-मजदूरी पर काम शुरू किया था। 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्ज़े वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के सरकार के फैसले के बाद 8 अगस्त को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत उन्हें और अन्य सैकड़ों कश्मीरियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

वसीम अलियालपोरा गाँव से गिरफ्तार किए गए चार व्यक्तियों में से एक है। लेकिन, जिस बात से उसका परिवार सबसे ज्यादा दुखी या आहत हुआ है वह कि उसे जम्मू-कश्मीर के बाहर जेल में भेज दिया गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद से, न तो उसके माता-पिता और न ही उसकी तीन बहनें वसीम से मिल पाई हैं।

बशीर ने बताया कि, '' हमने कभी भी घाटी के बाहर सफर नहीं किया है और वैसे भी हम वसीम से मिलने कैसे जाएँ क्योंकि हम लोग तो बहुत ग़रीब हैं। '' उन्होंने आगे बताया कि पूरा परिवार उनके बेटे की कमाई पर गुजर-बसर करता था और वे अपनी छोटी बेटी की शादी के लिए थोड़ा ही पैसा बचा पाए हैं। क्योंकि कमाई का बड़ा हिस्सा या तो भोजन और या फिर दवाओं पर खर्च हो जाता था।

वसीम न सिर्फ बशीर के लिए दवाइयां खरीदता बल्कि अपनी मां और खुद के लिए भी खरीदता था।

बशीर कहते हैं, "मेरे बेटे को दिल की बीमारी का 2015 में पता चला था और तब से उसे कभी कभार जांच करवानी पड़ती है।"

परिवार को इस बात का कोई पता नहीं है कि वसीम को हिरासत में क्यों लिया गया है, लेकिन उन्हें संदेह है कि शायद ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसे सेना ने मार्च 2019 में भी उठाया था। जब "वह सड़क पर लगे एक पोल पर काम कर रहा था तो सैनिकों ने उसे उठाया लिया था। उस वक़्त सेना ने उसे रिहा करने से पहले उसकी पिटाई की थी और साथ ही उसका आईडी कार्ड भी छिन लिया था।"

अगस्त में की गई नजरबंदी के बाद से, उनके बहनोई जो एक कैब/टॅक्सी चालक हैं, उत्तर प्रदेश के आगरा की जेल में बंद वसीम से केवल दो बार मिल सके।

image 2_4.JPG

इरफा एएच हुर्रा की माँ

5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को रद्द करने के बाद वकीलों, व्यापारियों, प्रमुख व्यापारियों, कार्यकर्ताओं और राजनेताओं सहित सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया था। हिरासत में लिए गए लोगों में जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री- महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला भी शामिल हैं। फारूक अब्दुल्लाह को श्रीनगर में उनके अपने घर में पीएसए के तहत नजरबंद किया हुआ है।

इससे पहले दिसंबर में, केंद्रीय मंत्री जीके रेड्डी ने संसद को बताया था कि उत्तर प्रदेश में जम्मू-कश्मीर से संबंधित 234 कैदियों को हिरासत में रखा गया है, जबकि दो दर्जन से अधिक हरियाणा की जेलों में बंद हैं। 10 जनवरी को नागरिक प्रशासन ने 26 व्यक्तियों की पीएसए के तहत गिरफ्तारी को निरस्त कर दिया था, जिनमें से कुछ यूपी और राजस्थान की जेलों में बंद हैं।

पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके के गुलबुग गांव के निवासी मोहम्मद मकबूल हुर्रा के लिए, अपने बेटे इरफान से यूपी की जेल में मिलने जाना मुश्किल भरा था। मकबूल ने न्यूज़क्लिक को बताया, “मैं बिना यह जाने कि कहाँ जाना है, चल दिया था। हमने दिल्ली जाने के लिए एक फ्लाइट की टिकट बुक की और फिर जेल जाने के लिए एक और दिन की यात्रा की। मेरा बेटा इबादत करता है और कुरान पढ़ता है, वह अपराधी नहीं है।”

कश्मीर में अगस्त के बाद के हालात पर जारी अपनी रिपोर्ट में एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने इन प्रतिबंधों को मनमाना करार दिया, जिन्हें किसी भी हालत में लागू नहीं किया जाना चाहिए। इस संगठन ने आगे कहा कि कश्मीर में लोगों को औपचारिक रूप से हिरासत में नहीं लिया गया है बल्कि राजनेताओं, कार्यकर्ताओं, महिलाओं और बच्चों को अपनी अलग राय रखने के जुर्म में 5 अगस्त से पहले और बाद में प्रशासन ने आधिकारिक नज़रबंदी में रखा हुआ है।

श्रीनगर केंद्रीय जेल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने से अब तक केंद्रीय जेलों से जम्मू-कश्मीर के बाहर ले गए 235 व्यक्तियों में से किसी को भी बंदी को वापस नहीं लाया गया है। कश्मीर हाईकोर्ट की बार एसोसिएशन के प्रमुख मियां अब्दुल कयूम सहित 85 बंदियों को आगरा जेल में स्थानांतरित किया गया है।

अगस्त माह से हिरासत में लिए गए लोग जैसे वसीम और इरफान के परिवार के लिए इंतजार करना काफी मुश्किल हो रहा है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Kashmir: Families Struggle to Meet Those Detained Far From Home

Kashmir
Illegal Detentions
Detentions in Kashmir
Jammu and Kashmir
Srinagar Central Jail
PSA
Detentions under PSA in Kashmir
Abrogation of Article 370
Kashmir Lockdown

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?


बाकी खबरें

  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    वाम की पंचायत और नगर निकायों के चुनाव दलीय आधार पर कराने की मांग, झारखंड सरकार ने भी दिया प्रस्ताव
    22 Aug 2021
    वाम दलों का कहना है कि केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा इत्यादि राज्यों की भांति झारखंड में भी पंचायत और नगर निकाय के चुनाव दलीय आधार पर हों क्योंकि जहां भी इस तरह से चुनाव होते हैं, वहां संस्थाबद्ध…
  • Taliban
    सुबोध वर्मा
    अफ़ग़ानिस्तान: गढ़े गये फ़सानों के पीछे की हक़ीक़त
    22 Aug 2021
    विदेशी ताकतों की दखल के चलते तालिबान की वापसी हुई है। अब जनता को इन तालिबान से निपटना होगा।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : "मुझमें गीता का सार भी है, इक उर्दू का अख़बार भी है..."
    22 Aug 2021
    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद जो सवाल भारत के प्रधानमंत्री से पूछे जाने चाहिए, वह भारत के मुसलमानों से पूछे जा रहे हैं। विविधता से भरे हमारे देश में समय समय पर देशभक्ति, वफ़ादारी को लेकर म
  •  modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सरकार जी की सरकार में बहस
    22 Aug 2021
    सरकार जी जानते हैं और समझते हैं कि ये बहस, ये विचार विमर्श, ये चर्चायें, ये सब जी का जंजाल हैं। ये हरगिज़ नहीं होनी चाहियें।
  • बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!
    सोनिया यादव
    बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!
    22 Aug 2021
    कैंपस में आए दिन छात्राओं के साथ हो रहे अभद्र व्यवहार और छेड़खानी के खिलाफ छात्रों ने सेंट्रल ऑफिस पर प्रदर्शन कर प्रशासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस दौरान छात्राओं ने प्रशासन को…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License