NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन: सरकार से किसानों की एक बार फिर वार्ता परंतु समाधान की उम्मीद कम
आज बुधवार को किसान और सरकार के बीच दसवें दौर की बातचीत निर्धारित है। पहले यह बातचीत मंगलवार को ही होनी थी, लेकिन सरकार ने कोर्ट के द्वारा बनी कमेटी की मीटिंग का हवाला देकर मीटिंग को टाल दिया था।किसान नेताओं को सरकार के मंशा पर विश्वास नहीं है, वो वार्ता के साथ ही अपने आंदोलन की तैयारी भी कर रहे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Jan 2021
किसान आंदोलन: सरकार से किसानों की एक बार फिर वार्ता परंतु समाधान की उम्मीद कम

एक बार फिर आज बुधवार को किसान और सरकार के बीच दसवें दौर की बातचीत निर्धारित है। पहले यह बातचीत मंगलवार को ही होनी थी, लेकिन सरकार ने कोर्ट के द्वारा बनी कमेटी की मीटिंग का हवाला देकर मीटिंग को टाल दिया था। हालांकि किसान नेताओं को सरकार के मंशा पर विश्वास नहीं है, वो वार्ता के साथ ही अपने आंदोलन की तैयारी भी कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में अपनी निर्धारित ट्रैक्टर रैली को लेकर अनिश्चितता की स्थिति के बीच, नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने मंगलवार को कहा कि "शांतिपूर्ण मार्च" की तैयारी पूरे जोरों पर है और वापस हटने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इसे रोकने के बजाय इसकी अनुमति देनी चाहिए।

हालांकि दिल्ली पुलिस और सरकार उन्हें लगाकर अपने इस निर्णय को वापस लेने के लिए कह रहे हैं। इसको लेकर पुलिस की किसान नेताओं से बातचीत लगातार जारी है।

दिल्ली पुलिस द्वारा ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाने की मांग करने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि इस पर निर्णय केंद्र सरकार और पुलिस को लेना है। अभी तक इस रैली को हालांकि आधिकारिक अनुमति नहीं मिली है।

ग़ौरतलब है कि किसान संगठनों ने घोषणा की है कि हजारों किसान 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी की आउटर रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकालेंगे।

विरोध कर रहे संगठनों ने दावा किया है कि बुधवार को गुरु गोबिंद सिंह जयंती के बाद और अधिक किसानों के विरोध स्थलों पर पहुंचने की संभावना है।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहान) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने कहा, “ट्रैक्टर परेड का हिस्सा बनने के लिए पंजाब के लोगों में बहुत उत्साह है। हमारे जत्थे 23 और 24 जनवरी से दिल्ली के लिए निकलना शुरू कर देंगे।

भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह दलेवाल ने कहा कि योजनाबद्ध परेड के लिए 20,000 से 25,000 ट्रैक्टर अकेले पंजाब से दिल्ली आएंगे।

दोआबा किसान समिति के महासचिव अमरजीत सिंह रारा ने सिंघु बॉर्डर पर कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सरकार हमें अपनी रैली के लिए अनुमति दे। यह हमारा देश है और अपनी मांगों को रखना हमारा संवैधानिक अधिकार है।’’ उन्होंने कहा, “हम अपने किसान संघों और राष्ट्रीय ध्वज के साथ मार्च करेंगे। इसलिए अगर वे हमसे लड़ते हैं, तो वे 'तिरंगा' से लड़ रहे होंगे।’’ उन्होंने कहा कि किसानों को मार्च निकालने से रोकने के बजाय, केंद्र और पुलिस को रैली के लिए एक सुरक्षित रास्ता प्रदान करना चाहिए।

अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष (पंजाब) लखबीर सिंह ने कहा, "हमने आज पुलिस से मिलकर उन्हें बताया कि हमारी रैली पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगी और उन्होंने कहा कि वे मार्ग से संबंधित विवरणों की जांच करेंगे और कल हमसे मिलेंगे।" उन्होंने कहा, "हम यह भी देखना चाहते हैं कि सरकार कल वार्ता में क्या कहती है। हम एक-दो दिनों में योजना को अंतिम रूप देंगे।" हालांकि रैली की अंतिम योजना तैयार नहीं की गई है। मार्च के दौरान अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए स्वयंसेवकों को लगाया जाएगा।

पटियाला के एक किसान सुखजीत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘‘रैली के पूर्वाभ्यास हमारे गांव में चल रहे हैं। यहां के स्वयंसेवकों को बताया जा रहा है कि मार्च के दौरान व्यवस्था को कैसे बनाए रखा जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘गुरूपरब (गुरु गोबिंद सिंह की जयंती) के बाद बृहस्पतिवार से लाखों लोग यहां पहुंचेंगे।’’

पंजाब के तरनतारन जिले के कुर्लाल सिंह ने कहा, “हमारे किसान यूनियन नेताओं ने सरकार को परेड की रूपरेखा पहले ही उपलब्ध करा दी है, इसलिए हमें अनुमति नहीं देने का कोई कारण नहीं बनता।’’ उन्होंने कहा, “हम अब तक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करते आ रहे हैं, और हमारी रैली भी अहिंसक होगी। दिल्ली में प्रवेश करना हमारा संवैधानिक अधिकार है।”

पंजाब : गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड को मजबूती देने के लिए गांव के स्तर पर रैलियां शुरू

किसान संगठनों ने पंजाब के गांवों में ट्रैक्टर रैलियों का आयोजन शुरू कर दिया है ताकि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में आयोजित की जाने वाली ट्रैक्टर परेड के लिए लोगों को तैयार किया जा सके।

किसान नेताओं ने कहा कि 26 जनवरी पर प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए नवांशहर और गुरदासपुर जैसे स्थानों पर ट्रैक्टर रैलियों का आयोजन किया गया है। अगले दो दिनों में और रैलियां करने की योजना है।

केंद्र सरकार ने हाल में उच्चतम न्यायालय में अपील की थी कि गणतंत्र दिवस समारोहों को बाधित करने के लिए किसी तरह की रैली या प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए। लेकिन उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मामले से निपटने के लिए पुलिस के पास पूरा अधिकार है।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने मंगलवार को कहा, ‘‘ट्रैक्टर परेड का हिस्सा बनने के लिए पंजाब के लोगों में काफी उत्साह है।’’

उन्होंने दावा किया कि कई गांवों से पांच से दस ट्रैक्टर दिल्ली की तरफ कूच करेंगे और 50 से अधिक ट्रैक्टरों को तैयार रखा गया है।

कोकरीकलां ने कहा, ‘‘ट्रैक्टर परेड के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। हमने 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड को देखते हुए राज्य के सभी गांवों में 20 और 21 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालने का आह्वान किया है।’’

गुरदासपुर में एक रैली में हिस्सा लेने वाले एक किसान ने कहा, ‘‘26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हम ट्रैक्टर मार्च निकाल रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के लिए अधिक से अधिक भागीदारी संभव बनाना है ताकि केंद्र सरकार पर तीन ‘‘काले कानूनों’’ को वापस लेने का दबाव बनाया जा सके।

एक अन्य किसान ने कहा कि वे चाहते हैं कि सरकार ध्यान में रखे कि दिल्ली की सीमाओं पर काफी संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉली के जमा होने के बावजूद पंजाब में अब भी काफी संख्या में ट्रैक्टर हैं।

एक अन्य किसान ने कहा, ‘‘हमारे पास अब भी काफी संख्या में ट्रैक्टर है जो ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए दिल्ली जाएंगे।’’

भारतीय किसान यूनियन (सिधुपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि प्रस्तावित परेड के लिए 20 से 25 हजार ट्रैक्टर पंजाब से दिल्ली आएंगे।

कोकरीकलां ने कहा, ‘‘हमारे ट्रैक्टर 23 और 24 जनवरी को दिल्ली की तरफ रवाना होने लगेंगे।’’

किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि उनका जत्था 20 और 22 जनवरी को दिल्ली की तरफ रवाना होगा।

बीकेयू (एकता उगराहां) की उपाध्यक्ष हरिंदर कौर बिंदु ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर जो महिलाएं मौजूद हैं और बाद में जो पंजाब से आएंगी, वे सभी परेड में हिस्सा लेंगी। उन्होंने कहा, ‘‘26 जनवरी को कई महिलाएं ट्रैक्टर भी चलाएंगी।’’

आपको याद रहे कि ये किसान पिछले 57 दिनों से भीषण ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। उनकी केवल एक प्रमुख मांग है कि सरकार बिना किसी चर्चा के लाए अपने तीन कृषि कानूनों को तत्काल वापस ले ले। किसानों का कहना है ये तीनों कानून कृषि और किसान के लिए मौत का फ़रमान है।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

 

kisan andolan
farmers protest
Agricultural laws
Agricultural Law Reforms
anti farmer
BKU
AIKS

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

महाराष्ट्र: किसानों की एक और जीत, किसान विरोधी बिल वापस लेने को एमवीए सरकार मजबूर


बाकी खबरें

  • tikoniya
    लाल बहादुर सिंह
    मोदी भारी राजनीतिक कीमत चुका कर ही अब अजय मिश्रा टेनी को मंत्री बनाये रख सकते हैं
    12 Oct 2021
    आज अंतिम अरदास के मौके पर पूरा देश लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों को श्रद्धांजलि दे रहा है तथा घटनास्थल तिकोनिया में पूरे देश से आये किसानों का विराट संगम हो रहा है।
  • New Service Rules in Jammu and Kashmir
    डॉ राधा कुमार
    ज़ुल्म के दरवाज़े खोलते जम्मू-कश्मीर के नये सेवा नियम
    12 Oct 2021
    बर्ख़ास्त किये गये ज़्यादातर लोगों के ख़िलाफ़ जो आरोप क़ायम किये गये हैं, वे गंभीर हैं, लेकिन चूंकि आम लोगों के सामने इसे लेकर कोई सबूत नहीं रखा गया है, इसलिए यह साफ़ नहीं है कि इन आरोपों में दम है…
  • facebook
    प्रबीर पुरकायस्थ
    एक व्हिसलब्लोअर की जुबानी: फेसबुक का एल्गोरिद्म कैसे नफ़रती और ज़हरीली सामग्री को बढ़ावा देता है
    12 Oct 2021
    बेशक, यह सवाल पूछा जा सकता है कि जब फेसबुक के सिलसिले में ये सभी सवाल पहले भी उठाए जाते रहे हैं, तो इसमें नया क्या है। इस सब में बड़ी खबर यह है कि अब हमारे पास इसके सबूत हैं कि फेसबुक को इसकी पूरी…
  • Fb
    सोनाली कोल्हटकर
    समझिए कैसे फ़ेसबुक का मुनाफ़ा झूठ और नफ़रत पर आधारित है
    12 Oct 2021
    फ़ेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ़्रांसेस हौगेन द्वारा किए गए खुलासों से पता चलता है कि दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अच्छी तरह जानता है कि उसके प्लेटफॉर्म का समाज पर किस तरह नकारात्मक प्रभाव…
  • attack on dalit
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या, तमिलनाडु में चाकू से हमला कर ली जान
    12 Oct 2021
    दलित समाज के लोगों पर हमलों की घटना लगातार सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां राजस्थान के हुनुमानगढ़ जिले में दलित युवक जगदीश की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वहीं तमिलनाडु के तंजावुर में दलित युवक प्रभाकरण की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License