NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोलकाता: नौकरियों की मांग और कृषि कानूनों के विरोध में शामिल  महिला प्रदर्शनकारियों पर हुआ पुलिसिया दमन
इस मामले में 200 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। एआईडीडब्ल्यूए का कहना था कि पुलिस ने उनके धरना स्थल को चारों तरफ से घेर रखा था।उनके उपर लाठियां बरसाई गईं। उनकी गिरफ्तारी के लिए तैनात बसों में उन्हें बाल पकड़कर घसीटते हुए ले जाया गया।
संदीप चक्रवर्ती
11 Feb 2021
कोलकाता

कोलकाता, 10 फरवरी: कोलकाता पुलिस ने मंगलवार के दिन ‘नगर स्वयंसेवकों’ की टीम के साथ मिलकर कृषि कानूनों और महिलाओं के लिए नौकरियों और सुरक्षा की माँग कर रही अधिकार संगठनों की महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की।

जैसे ही पुलिस ने ताबड़तोड़ हमले शुरू किये तमाम बैरिकेड टूट गए। हालाँकि पुलिसिया कार्यवाई के बीच भी महिलाओं ने अपने मार्च को जारी रखा। इस  हाथापाई में 150 से अधिक महिलाओं के उपर पुलिस द्वारा हमला किया गया था और गिरफ्तार महिलाओं को कोलकाता पुलिस के लालबाजार मुख्यालय में ले जाया गया। 

आल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) के नेतृत्वकारी सदस्यों सहित करीब 205 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया था।

इस बीच पश्चिम बंगाल वाम मोर्चे ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठी-डंडों से सजे पुरुष पुलिसकर्मियों और नगर स्वंयसेवकों द्वारा किये गये बल-प्रयोग के खिलाफ राज्य-व्यापी विरोध का आह्वान किया है। एक प्रेस विज्ञप्ति में मोर्चे की ओर से कहा गया है कि महिला कार्यकर्ताओं की उस समय बैरिकेडिंग की गई जब वे अपने धरना  स्थल से मार्च निकालने की कोशिश कर रही थीं और इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई।

बाद में एआईडीडब्ल्यूए सचिव कोनिनिका घोष ने बताया कि उनके साथ भी मारपीट की गई थी। अन्य घायलों में सोमा दास, अत्रेयी गुहा, बिलकिस बेगम, मोनालिसा सिन्हा, समिता हर चौधरी शामिल हैं। पुलिसिया हिंसा के बाद लतिका रहमान और काकली मोइत्रा को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

एआईडीडब्ल्यूए कार्यकर्ताओं का एक अन्य दल अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ धरना स्थल पर जमा रहा और उन्होंने तब तक अपनी नारेबाजी जारी रखी जब तक उन्होंने पुलिस को गिरफ्तार महिला कार्यकर्ताओं की रिहाई को लेकर समझौते पर राजी नहीं कर लिया।

अपने बयान में एआईडीडब्ल्यूए ने कहा है कि पुलिस ने धरना स्थल के चारों तरफ से बैरिकेडिंग कर दी थी जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाएं वहाँ से आगे न बढ़ सकें। इसमें जिक्र है कि इसके बाद 4,000 से अधिक की संख्या में महिलाओं ने कलकत्ता नगर निगम कार्यालय के गेट से मुख्य सड़क की ओर रुख किया। 

एआईडीडब्ल्यूए का आरोप था “...पुलिस ने उनपर लाठियां बरसाईं, पेट पर लातों से मारा, उन्हें गिरफ्तार कर ले जाने के तैनात बसों तक बाल पकड़कर घसीटते हुए ले जाया गया। महिला पुलिस वहां पर मूक दर्शक बन कर खड़ी रही, जबकि पुरुष पुलिसकर्मियों ने बेहद हिंसात्मक रुख अपनाते हुए महिलाओं पर हमला किया।”

बयान में आगे कहा गया है कि “इन सबके बावजूद महिलाओं ने विरोध स्थल को छोड़कर जाने से इंकार कर दिया जबतक कि घायलों का उपचार नहीं किया जाता और गिरफ्तार किये गए लोगों को रिहा नहीं किया जाता है। अंततः पुलिस को ऐसा करने के लिए बाध्य होना पड़ा और इकट्ठा भीड़ द्वारा शर्मनाक पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ नारेबाजी और भोजन, काम और हिंसा से आजादी के लिए संघर्ष को जारी रखने के वादा किया गया।” 

सीपीआई (एम) के राज्य सचिव डॉ. सूर्य कान्त मिश्रा ने राज्य सरकार और पुलिस को उसके “मनमानेपूर्ण आचरण” पर जमकर लताड़ लगाते हुए कहा कि जिस प्रकार से “प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसकी कल्पना करना भी कठिन है।” सीपीआई(एम) विधायक डॉ. सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि जिस प्रकार से पुरुष पुलिसकर्मियों ने स्थिति से निपटने का काम किया वह सभी “शिष्ट आचरण और कानूनों से पूरी तरह से उलट है और पुलिसिया बर्बरता ने महिलाओं के जीने और विरोध के अधिकार को चोट पहुंचाई है।”

इससे पहले दिन में कोलकाता कारपोरेशन बिल्डिंग के पास व्यस्त न्यू मार्केट इलाके में मंच से एआईडीडब्ल्यूए नेतृत्त्व में शामिल मालिनी भट्टाचार्य और कोनिनिका घोष ने नई दिल्ली में चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शनों और केंद्र में मौजूद सरकार के खिलाफ चल रहे जन-आंदोलनों का स्वागत किया।

अपने भाषण में एआईडीडब्ल्यूए की महासचिव कोनिनिका घोष ने कहा कि वे उन कानूनों को नहीं मानतीं जो “आम लोगों के लिए बेहतर जीवन की राह नहीं खोलते और उनकी राह में बाधक हैं।” एआईडीडब्ल्यूए कार्यकर्ताओं ने “भूखा पेटे काज चाई, जात धोरमेर बिभेद नाई” (हमारे भूखे पेट को काम चाहिये जो जाति, पंथ या धर्म के बोझ से नहीं मिलने वाला) जैसे नारे लगाये। महिला कांग्रेस, एआईडब्ल्यूए, एआईआरडब्ल्यूए और अन्य वाम एवं जनवादी महिलाओं के संगठनों की नेताओं ने भी रैली हिस्सा लिया।

एआईडीडब्ल्यूए नेता डॉ. मालिनी भट्टाचार्य ने अपने भाषण में कहा कि भाजपा और टीएमसी दोनों ही द्विआधारी की एक कहानी खड़ाकर लोगों का ध्यान “देश के सभी लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करने की असली लड़ाई” से ध्यान भटकाने के प्रयास में हैं। केंद्र सरकार ने जमाखोरी करने की अनुमति देने की शुरुआत कर दी है और जो लोग कानून और व्यवस्था का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें सुरक्षा मुहैय्या करा रही है।” अपने वक्तव्य में उन्होंने आगे कहा कि केंद्र आम लोगों के भोजन, रोजगार और उनके सिर पर छत की व्यवस्था जैसे मुद्दों के प्रति “पूरी तरह से असंवेदनशील हो चुकी है।”

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Kolkata: Scores of Women Protesters Beaten by Male Police in Protest for Jobs, Against Farm Laws

kolkata
Kolkata Police
West Bengal
AIDWA
CPM
Farm Laws
Jobs
Employment
food security

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

प. बंगाल : अब राज्यपाल नहीं मुख्यमंत्री होंगे विश्वविद्यालयों के कुलपति

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

डीवाईएफ़आई ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया

लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश

मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण


बाकी खबरें

  • nihang
    अजय कुमार
    निहंग कौन हैं? क्या निहंगों को आगे कर षड्यंत्र रचा गया है?
    20 Oct 2021
    निहंग कौन हैं? इनका इतिहास क्या है? हिंसा को ढाल बनाकर क्या भाजपा सरकार ने फिर से कोई चाल तो नहीं चल दी है?
  • flooding
    रवि कौशल
    दिल्ली के गांवों के किसानों को शहरीकरण की कीमत चुकानी पड़ रही है
    20 Oct 2021
    नरेला के गढ़ी बख्तावरपुर गांव में एक उफनते नाले की वजह से खेतों में साल भर में लगभग आठ महीने तक जलभराव की स्थिति बनी रहती है।
  • Uttar Pradesh's soil testing laboratories stalled but publicity completed
    राज कुमार
    उत्तर प्रदेश की मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं ठप लेकिन प्रचार पूरा
    20 Oct 2021
    भाजपा उत्तर प्रदेश ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को लेकर एक वीडियो ट्वीट किया है, आइए जानते हैं इसकी हक़ीक़त।
  • Ajay Mishra Teni cannot be a part of the Council of Ministers of the Government of India: SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    अजय मिश्रा टेनी भारत सरकार के मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं रह सकते : एसकेएम
    20 Oct 2021
    एसकेएम की मांग है कि अजय मिश्रा को तुरंत बर्ख़ास्त और गिरफ़्तार किया जाए, और ऐसा न करने पर लखीमपुर खीरी हत्याकांड में न्याय के लिए आंदोलन तेज़ किया जाएगा
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 14,623 नए मामले, 197 मरीज़ों की मौत
    20 Oct 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 41 लाख 8 हज़ार 996 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License