NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कानून
भारत
राजनीति
बिहार : हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक कुंवर सिंह के परिवार को क़िले में किया नज़रबंद
कुंवर सिंह की प्रपौत्र वधु पुष्पा सिंह एक वीडियो में बता रही हैं कि उन्हें पूरे परिवार के साथ सरकार व प्रशासन ने घेरेबंदी में रखा हुआ है।
अनिल अंशुमन
24 Apr 2022
बिहार : हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक कुंवर सिंह के परिवार को क़िले में किया नज़रबंद

क्या ही दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना है कि जिस शहीद महानायक वीर कुंवर सिंह का विजयोत्सव को मनाने देश के माननीय गृह मंत्री अमित शाह जगदीशपुर के दलौर स्थित कुंवर सिंह जी के किले में आयोजित भव्य समारोह में तो पहुँच जाते हैं लेकिन उसी किले के अँधेरे कोने में भयावह गरीबी भरा जीवन गुजार रहे कुंवर सिंह जी के जीवित वंशजों से मिलने की सामान्य औपचारिकता भी नहीं निभाते हैं। इतना ही नहीं कुंवर सिंह की प्रपौत्र वधू  पुष्पा सिंह को जो भाजपा की स्थानीय नेता भी हैं, विजयोत्स्व समारोह में मंच पर बुलाना तो दूर, प्रशासनिक ने घेरेबंदी कर उन्हें अपने परदादा कुंवर सिंह जी की मूर्ति पर आकर फूल तक नहीं चढ़ाने दिया गया। जिसका खुलासा ‘विजयोत्सव समारोह’ के  दौरान ही कुंवर सिंह जी की प्रपौत्र वधू पुष्पा सिंह जी के वायरल वीडियो में होता है। 

जिसमें वे बेहद लाचारी भरे शब्दों में दोनों हाथ जोड़कर देशवासियों से गुहार लगा रहीं हैं कि कैसे उन्हें पूरे परिवार के साथ सरकार व प्रशासन ने घेरेबंदी कर रखी है। उन्हें उनके परदादा कुंवर सिंह जी की मूर्ति पर फूल तक चढ़ाने की अनुमति नहीं दी गयी। किले में की गयी घेरेबंदी का सारा दृश्य दिखलाते हुए बेहद पीड़ा के साथ यह भी बता रहीं हैं कि सरकार, प्रशासन व भाजपा के लोग नहीं चाहता है कि वे किसी भी सूरत में विजयोत्स्व समारोह स्थल तक भी पहुँच सकें। वे बता रहीं हैं कि कल तक उनके पैर छूकर उन्हें इन्साफ दिलाने की कसमें खानेवाले प्रशासनिक अधिकारी और भाजपा के नेतागण, आज उन्हें समारोह में आने भी नहीं देना चाहते। क्योंकि सबों को ये डर है कि गत दिनों इसी किले में सुरक्षा के नाम पर तैनात पुलिसवालों द्वारा उनके जवान बेटे व बाबू कुंवर सिंह जी के वंशज 38 वर्षीय रोहित सिंह उर्फ़ बबलू सिंह को पीट पीटकर मार डालने का मामला सबके सामने न उठा दिया जाय। लगभग दो मिनट के वीडियो में वे भाजपा द्वारा कुंवर सिंह के प्रति प्रेम के ढोंग का पर्दाफाश करते हुए समस्त देशवासियों से अपील करते हुए अपने जवान बेटे और कुंवर सिंह जी के वंशज की मौत का इन्साफ मांगती हुई नज़र आती हैं।

भाकपा माले के राज्य सचिव कुनाल ने मिडिया को जारी बयान में कहा है कि- भाजपा व आरएसएस के नकली राष्ट्रवाद का चेहरा आज फिर से उजागर हुआ है। जिन्होंने राज्य की जनता का पैसा पानी की तरह बहाते हुए ‘बाबू कुंवर सिंह विजयोत्सव’ का नाटक रचाते हैं, तो उसी समय उस किले में रह रहीं कुंवर सिंह जी के पौत्र वधू जी को सपरिवार ‘घेरेबंदी कर’ किले में ही बंद कर देते हैं। देशभक्ति के नाम पर आये दिन उन्मादी फसाद करनेवाली भाजपा का यही असली चरित्र है जो कुंवर सिंह के वंशजों के साथ ऐसा घृणित कृत्य कर सकती है तो वह किसी अन्य शहीद का क्या सम्मान करेगी। यह सिर्फ शहीदों के नाम पर अपनी फासीवादी-सामप्रदायिक राजनीती को भुनाना जानती है।   

ज्ञात हो कि 23 अप्रैल को ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ के तहत भाजपा ने बिहार सरकार के साथ मिलकर भोजपुर जिला के जगदीशपुर स्थित दलौर गाँव में बाबू कुंवर सिंह जी के ऐतिहासिक किला स्थल पर ‘कुंवर सिंह विजयोत्सव’ का आयोजन किया था। जिसके मुख्य अतिथि देस्श के गृहमंत्री थे। जिन्हेंने भाजपा मार्का देशभक्ति का खुला प्रदर्शन करते हुए ‘ बाबू कुंवर सिंह विजयोत्सव’ कार्यक्रम को भी ‘हिन्दुस्तान बनाम पाकिस्तान’ की राजनीती में तब्दील कर दिया। जिसमें दावा किया गया है कि इस कार्यक्रम में 77 हज़ार से भी अधिक संख्या में तिरंगा झंडा लहराकर नया विश्व रिकार्ड बनाते हुए झंडा फहराने के पकिस्तान का रिकार्ड तोड़ दिया गया।       

 

इस प्रकरण में एक विडंबनायह यह भी सामने आई कि आज भी आम जन के चहेते जिन बाबू कुंवर सिंह और उनके परिवार ने जीवनपर्यन्त ‘हिन्दू-मुस्लिम एकता’ की गंगा जमुनी तहज़ीब परम्परा को स्थापित कर व्यापक सामाजिक एकता-समरसता को कायम किया। जिसके बल पर ही नाग्रेजों के खिलाफ बिहार में 1857 के महासंग्राम की बहादुराना लड़ाई लड़ी, आज उन्हीं के नाम पर आयोजित ‘विजयोत्सव’ कार्यक्रम का सांप्रदायीकरण करते हुए ‘हिन्दू-मुसलमान’ की नाफ़रती राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया।

नितीश कुमार सरकार के तत्वाधान में भाजपा द्वारा आयोजित इस ‘विजयोत्सव कार्यक्रम’ के समानांतर भाकपा माले समेत बाबू कुंवर सिंह को अपना आदर्श मानने वालों की एक बड़ी जामत ने भी ‘सरकारी विजयोत्सव कार्यक्रम’ का विरोध करते हुए पुरे शाहाबाद अंचल (भोजपुर) में कार्यक्रम आयोजित किये।

भाकपा माले ने तो पिछले कई दिनों से पुरे क्षेत्र में व्यापक जन अभियान चलाकर 23 अप्रैल को पुरे इलाके के ग्रामीण चट्टी व बाज़ारों में जनता का ‘वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव’ मनाते हुए सरकारी विजयोत्सव के बहिष्कार का आह्वान किया था। साथ ही लोगों से यह भी विशेष अपिल की थी कि- देश की आजादी की लड़ाई के गद्दारों के समर्थक और अंग्रेजों के दलाल दंगाई भाजपा द्वारा महान स्वतंत्रता सेनानी व 1857 के नायक वीर कुंवर सिंह की विरासत हड़प लेने की साजिश हगिज़ नहीं चलने दें ! 

 

23 अप्रैल के दिन ‘वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव कार्यक्रम का भाजपाकरण बंद करो’ तथा ‘अंग्रजों की मुखबिरी करनेवालों, देश के लिए मरनेवाले शहीदों का भगवाकरण बंद करो, अमित शाह वापस जाओ !’जैसे नारों के साथ जिला मुख्यालय आरा और कुंवर सिंह जी के इलाके जगदीशपुर समेत कई स्थानों पर प्रतिवाद मार्च निकाले गये। जगह जगह काफी संख्या में ने लोगों कुंवर सिंह जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर प्रतिवाद सभाएं कीं। कुछ स्थानों पर पुतला दहन कार्यक्रम भी हुए।   

जनता द्वारा आयोजित ‘कुंवर सिंह विजयोत्सव’ अभियान का नेतृत्व भाकपा माले विधायक सुदामा प्रसाद, इनौस के राष्ट्रिय अध्यक्ष विधायक मनोज मंजिल व भोजपुर के लोकप्रिय युवा नेता व माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य राजू यादव समेत कई जन नेताओं ने भी किया।

मिडिया ख़बरों के अनुसार भाजपा नेताओं ने इस विजयोत्सव कार्यक्रम में कई लाख लोगों को जुटाने के दावे किये गए थे। जिसके लिए प्रशासन के आला अधिकारीयों ने सैकड़ों बसों को पुरे इलाकों में भेज रखा था। लेकिन कई जगहों से अधिकाँश बसें खाली ही लौट आयीं।  

जो यही दर्शाता है कि ।।। ‘अस्सी वर्षों की हड्डी में जागा जोश पुराना था, सच कहते हैं कुंवर सिंह भी बड़ा वीर मर्दाना था’ जैसी काव्य पंक्तियाँ यदि आज भी बिहार के लोक मानस में अपना गहरा प्रभाव रखती हैं तो यह किसी सरकार, राजनितिक दल अथवा नेता विशेष के करिश्माई व्यक्तित्व से नहीं, बल्कि समाज में गहरे रूप से कायम एक जागरूक राजनितिक चेतना है जो आज भी अपना ज़मीनी प्रभाव बनाए हुए है। 

जिसके आगे बाबू कुंवर सिंह जैसे आदर्श व्यक्तित्व को यदि कोई ‘राजनीती विशेष’ अपने निहित स्वार्थों के लिए महज जाति विशेष के नेता के तौर पर लाने का जितने भी कुत्सित प्रयास करेगी, तो सर्वविदित है कि- संघर्षों और सामाजिक हलचलों वाली बिहार की धरती पर उक्त ‘राजनीती विशेष’ को करारा जवाब देनेवाली सामाजिक शक्तियां और स्थितियां निरंतर मौजूद रहीं हैं।

Hindu Muslim Unity
Bihar
Amit Shah

Related Stories

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

“भारत के सबसे लोकतांत्रिक नेता” के नेतृत्व में सबसे अलोकतांत्रिक कानून-निर्माण पर एक नज़र

बढ़ते मामलों के बीच राजद्रोह क़ानून को संवैधानिक चुनौतियाँ

बिहार: बंपर फसल के बावजूद गेहूं की कम ख़रीद से किसान मायूस

नीतीश सरकार का सड़क से सोशल मीडिया पर पहरा ‘अलोकतांत्रिक’ क्यों है?

गृह मंत्रालय 2020 की समीक्षा: धूर्तता और सत्तावादी अहंकार की मिसाल?


बाकी खबरें

  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू
    19 Dec 2021
    सरकार जी उतनी गंभीरता, उतना दिमाग सरकार चलाने में नहीं लगाते हैं जितना पूजा-पाठ करने में लगाते हैं। यह पूजा-पाठ चुनाव से पहले तो और भी अधिक बढ़ जाता है। बिल्कुल ठीक उसी तरह, जिस तरह से किसी ऐसे छात्र…
  • teni
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : जयपुर में मौका चूके राहुल, टेनी को कब तक बचाएगी भाजपा और अन्य ख़बरें
    19 Dec 2021
    सवाल है कि अजय मिश्र को कैसे बचाया जाएगा? क्या एसआईटी की रिपोर्ट के बाद भी उनका इस्तीफा नहीं होगा और उन पर मुकदमा नहीं चलेगा?
  • amit shah
    अजय कुमार
    अमित शाह का एक और जुमला: पिछले 7 सालों में नहीं हुआ कोई भ्रष्टाचार!
    19 Dec 2021
    यह भ्रष्टाचार ही भारत के नसों में इतनी गहराई से समा चुका है जिसकी वजह से देश का गृह मंत्री मीडिया के सामने खुल्लम-खुल्ला कह सकता है कि पिछले 7 सालों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
  • A Critique of Capitalism’s Obscene Wealth
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    पूंजीवाद की अश्लील-अमीरी : एक आलोचना
    19 Dec 2021
    पूंजीवादी दुनिया में लगभग हर जगह ग़ैर-अमीर ही सबसे ज़्यादा कर चुकाते हैं और अश्लील-अमीरों की कर चोरी के कारण सार्वजनिक सेवाओं में होने वाली कटौतियों की मार बर्दाश्त करते रहते हैं।
  •  Bihar and UP lagging behind in studies
    एम.ओबैद
    बिहार और यूपी पढ़ाई में फिसड्डी: ईएसी-पीएम
    19 Dec 2021
    रिपोर्ट में बड़े राज्यों में 9 राज्यों को शामिल किया गया है जिसमें बिहार 36.81 अंकों के साथ नौवें तथा उत्तर प्रदेश 38.46 अंकों के साथ आठवें स्थान पर है। दोनों राज्य का स्थान राष्ट्रीय औसत 48.38 से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License