NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम
कर्मचारियों के संगठन ने एलआईसी के मूल्य को कम करने पर भी चिंता ज़ाहिर की। उनके मुताबिक़ यह एलआईसी के पॉलिसी धारकों और देश के नागरिकों के भरोसे का गंभीर उल्लंघन है।
रौनक छाबड़ा
30 Apr 2022
LIC

नई दिल्ली: भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के कर्मचारियों ने 4 मई को दो घंटे की हड़ताल करने का ऐलान किया है। यह कर्मचारी जीवन बीमा निगम के आईपीओ को लाए जाने का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह कंपनी के निजीकरण की दिशा में पहला कदम है। 4 मई को ही कंपनी का आईपीओ आना था। 

इस हड़ताल में वर्ग 3 और वर्ग 4 के करीब 80 हजार कर्मचारियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। इस हड़ताल का आह्वान ऑल इंडिया इंश्योरेंस एंप्लाइज़ एसोसिएशन (एआईआईईए) और ऑल इंडिया एलआईसी एंप्लाइज़ फेडरेशन (एआईएलसीईएफ) ने किया है। 

एलआईसी संस्थाओं ने हड़ताल पर जाने के फैसले को आईपीओ के खिलाफ प्रदर्शन दर्ज करने के लिए उठाया गया कदम बताया है। यह दोनों ही संगठन मिलकर मैदान पर काम करने वाले एजेंट्स को छोड़कर सारे कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

AIIEA ने इस हफ़्ते की शुरुआत में एक स्टेटमेंट में कहा, "आईपीओ एलआईसी के बुनियादी मूल्यों का उल्लंघन करता है। पिछले 65-70 सालों में एलआईसी देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय विकास का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। अर्थव्यवस्था में कोई भी ऐसा क्षेत्र खोजना मुश्किल है, जहां एलआईसी के पदचिन्ह ना हों।"

बीमा कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठनों में शामिल संगठन ने कहा कि एलआईसी का आईपीओ उन लाखों पॉलिसी धारकों के लिए भी अनैतिक है, जो एलआईसी के असली मालिक हैं। 

एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी के स्थानांतरण का फैसला केंद्र सरकार ने इस हफ्ते की शुरुआत में लिया था। लेकिन यह बाद में बताया गया कि इश्यू के आकार को 5 फ़ीसदी से कम कर 3.5 फ़ीसदी कर दिया गया। इसी तरह इश्यू की कीमत में भी कमी की गई।  ऐसा बाजार की प्रतिकूल स्थितियों के चलते किया गया है। 

इस तरह एलआईसी की कीमत 6 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। जबकि पहले यह अधिकतम 10 लाख करोड़ रुपये तक आंकी गई थी। तब आईपीओ का आकार 21 हजार करोड़ रुपये का था।  ऐसा भी बताया गया था कि एलआईसी के एम्बेडेड वेल्यू (ईवी) का अनुमान तब पहली बार 5.4 लाख करोड़ रुपये लगाया गया था।

कर्मचारी संगठनों ने एलआईसी की कीमत को कम आंके जाने पर भी चिंता जताई, उनके मुताबिक यह पॉलिसी धारकों और देश के नागरिकों के विश्वास का गंभीर उल्लंघन है। बुधवार को जारी किए गए वक्तव्य में एआईआईईए ने आरोप लगाते हुए कहा कि एलआईसी की कीमत में कमी, केंद्र सरकार की सरकारी बीमा कंपनी में शेयरों को बेचने की व्याकुलता को ज़्यादा स्पष्टता से प्रदर्शित करती है। 

एआईआईईए ने शुक्रवार को न्यूज़क्लिक को बताया कि इस हड़ताल को पूरे देश में लागू करवाने के लिए तैयारियां चल रही हैं। 

उन्होंने कहा, "हर ब्रान्च के स्तर पर संगठन के सदस्य अभियान के कार्यक्रमों में रोज हिस्सा ले रहे हैं। वे इस मामले में ना केवल बीमा कर्मचारियों, बल्कि आम जनता में भी जानकारी फैला रहे हैं।" हालांकि उन्होंने माना कि केंद्र द्वारा बनाए गए विमर्श को पूरी तरह बदलना बड़ा मुश्किल है, क्योंकि एलआईसी आईपीओ को लेकर फिलहाल मीडिया में बहुत हो हल्ला है। 

भटनागर ने आगे बताया कि 4 मई को होने वाली हड़ताल में वे तय करना चाहते हैं कि उसमें ज़्यादा से ज़्यादा कर्मचारी हिस्सा लें। वे कहते हैं, "हम भविष्य में एलआईसी के संभावित निजीकरण के खिलाफ़ और कंपनी को बचाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।"

गुरुवार को सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने भी केंद्र को एलआईसी आईपीओ को खोलने के "देश विरोधी" कदम को उठाने पर लताड़ लगाई। 

सीटू ने कहा, “अपने छद्म-राष्ट्रवादी लबादे से इतर, बीजेपी सरकार वैश्विक और घरेलू, तथाकथित निवेशकों की मांग के सामने झुक गई है, जो लंबे वक़्त से सबसे बड़े सार्वजनिक वित्तीय संस्थान को निगलने के लिए आवाज उठा रहे थे।”

इस बीच केंद्र सरकार को विपक्षी दलों की आलोचना भी झेलनी पड़ी है, विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के कदम को एलआईसी के सार्वजनिक चरित्र को खत्म करने की दिशा में पहला कदम बताया है। बता दें जीवन बीमा निगम के पास बीमा बाज़ार का दो तिहाई हिस्सा है।

एक वक्तव्य में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) और सीपीआई ने केंद्र सरकार की आलोचना की है, जबकि द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्विटर पर केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

LIC Employees to Observe Walkout Strike Against LIC IPO on May 4

LIC
LIC IPO
Central Government
Modi government
LIC employees
LIC Employees Unions
Privatisation
CPIM
CPI
CITU
Congress

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?


बाकी खबरें

  • 2021ः कोरोना का तांडव, किसानों ने थमाई मशाल, नफ़रत ने किया लहूलुहान
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    2021ः कोरोना का तांडव, किसानों ने थमाई मशाल, नफ़रत ने किया लहूलुहान
    29 Dec 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने साल 2021 के उन उजले-स्याह पलों का सफ़र तय किया, जिनसे बनती-खुलती है भारतीय लोकतंत्र के भविष्य की राह।
  • जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?
    रवि शंकर दुबे
    जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?
    29 Dec 2021
    यह हड़ताली रेजिडेंट डॉक्टर्स क्या चाहते हैं, क्यों चाहते हैं, अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरना इनके लिए क्यों ज़रूरी है। आइए, क्रमवार जानते हैं-
  • सोनिया यादव
    जेएनयू: ICC का नया फ़रमान पीड़ितों पर ही दोष मढ़ने जैसा क्यों लगता है?
    29 Dec 2021
    नए सर्कुलर में कहा गया कि यौन उत्पीड़न के मामले में महिलाओं को खुद ही अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। महिलाओं को यह पता होना चाहिए किए इस तरह के उत्पीड़न से बचने के लिए उन्हें अपने पुरुष दोस्तों के…
  • कश्मीरी अख़बारों के आर्काइव्ज को नष्ट करने वालों को पटखनी कैसे दें
    एजाज़ अशरफ़
    कश्मीरी अख़बारों के आर्काइव्ज को नष्ट करने वालों को पटखनी कैसे दें
    29 Dec 2021
    सेंसरशिप अतीत की हमारी स्मृतियों को नष्ट कर देता है और जिस भविष्य की हम कामना करते हैं उसके साथ समझौता करने के लिए विवश कर देता है। प्रलयकारी घटनाओं से घिरे हुए कश्मीर में, लुप्त होती जा रही खबरें…
  • Banaras
    विजय विनीत
    EXCLUSIVE: जब बदहाल हैं तो कैसे कह दें कि मोदी वाले 'अच्छे दिन' आ गए!
    29 Dec 2021
    बनारस में गंगा घाटों के किनारे रहने वाले निषाद समाज की कई औरतों से "न्यूज़क्लिक" ने बातचीत की और यह भी जानने का प्रयास किया कि चुनावी जंग में हवा की रुख किधर मुड़ रहा है तो जवाब मिला, "औरतों की ओर।" …
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License