NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लखीमपुर खीरी हत्याकांड: आशीष मिश्रा के साथियों की ज़मानत ख़ारिज, मंत्री टेनी के आचरण पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के आचरण पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि वे इस घटना से पहले भड़काऊ भाषण न देते तो यह घटना नहीं होती और यह जघन्य हत्याकांड टल सकता था।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 May 2022
teni

लखीमपुर खीरी कांड के आरोपी और मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा के दोस्तों की जमानत अर्जी को अदालत ने खारिज कर दिया है। तीन अक्टूबर 2021 को उपद्रव के बाद हिंसा में चार किसान सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी। इसमें सभी आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद अब अदालती कार्यवाही जारी है। मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ मोनू की जमानत सुप्रीम कोर्ट से निरस्त हो चुकी है। अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार को इस केस के चार आरोपितों की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा लखीमपुर खीरी हत्याकांड के प्रमुख आरोपी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा के सहयोगियों की जमानत की अर्जी को खारिज करने का स्वागत करते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश में गृह राज्य मंत्री के आचरण पर की गई टिप्पणी के बाद अब अजय मिश्रा टेनी के मंत्री पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहा है।

सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में जस्टिस दिनेश कुमार सिंह के द्वारा अंकित दास, शिशुपाल, सुमित जायसवाल तथा लवकुश की जमानत की अर्जी को खारिज कर दिया गया है। अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने इन अभियुक्तों द्वारा दी गई तमाम दलीलों को खारिज करते हुए आरोपियों के राजनैतिक रसूख को रेखांकित किया है और कहा है कि ऐसे में इन्हें जमानत मिलने पर साक्ष्य नष्ट होने तथा गवाहों पर असर पड़ने की आशंका है।

यही नहीं, न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने अपने आदेश में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के आचरण पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि वे इस घटना से पहले भड़काऊ भाषण न देते तो यह घटना न होती और यह जघन्य हत्याकांड टल सकता था। यहां गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी एसआईटी ने भी इस मामले में व्यापक षड्यंत्र की बात मानते हुए इसी दिशा में इशारा किया था। संयुक्त किसान मोर्चा पहले दिन से इस नरसंहार के सूत्रधार के रूप में अजय मिश्रा टेनी को नामजद करता रहा है। अब माननीय उच्च न्यायालय की इन टिप्पणियों के बाद तो मंत्री टेनी के मंत्रिमंडल में बने रहने का कोई बहाना नहीं बचा है।

इसे भी पढ़े : लखीमपुर खीरी कांड में एक और अहम गवाह पर हमले की खबर  

संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी लीगल टीम के अधिवक्ता शशांक सिंह और अमान ख्वाजा को धन्यवाद देते हुए यह उम्मीद जताया की आशीष मिश्रा की जमानत की याचिका पर पुनर्विचार करते वक्त भी कोर्ट इन सब तथ्यों का संज्ञान लेगा। उस केस की सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय ने 25 मई की तारीख तय की है।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मिश्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत 18 अप्रैल को रद्द कर दी थी और उसे एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा था।

इसे भी पढ़े ; प्रभात हत्याकांड: बढ़ सकती हैं अजय मिश्र टेनी की मुश्किलें

पिछले वर्ष तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में हुई हिंसा में चार किसान और एक पत्रकार सहित कुल आठ लोग मारे गए थे। यह हिंसा तब हुई थी जब किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके के दौरे का विरोध कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश पुलिस की प्राथमिकी के अनुसार, एक वाहन जिसमें आशीष मिश्रा बैठा था, उसने चार किसानों को कुचल दिया था। घटना के बाद गुस्साए किसानों ने वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर पीट-पीट कर मार डाला था।

इस दौरान हुई हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। केंद्र के अब निरस्त किए जा चुके कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे विपक्षी दलों और किसान समूहों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश था।

LakhimpurKheri
Ashish Mishra
Ajay Mishra Teni
lakhimpur kheri violence
farmers protest
Attack on Farmers
Union Minister Ashish Mishra
kisan andolan
Indian Farmers Union
Samyukt Kisan Morcha

Related Stories

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

केवल विरोध करना ही काफ़ी नहीं, हमें निर्माण भी करना होगा: कोर्बिन

युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण

प्रभात हत्याकांड: बढ़ सकती हैं अजय मिश्र टेनी की मुश्किलें

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

लखीमपुर खीरी हिंसा के आरोपी के आत्मसमर्पण पर पीड़ित परिवार ने खुशी जताई

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

लखीमपुर मामला : आशीष मिश्रा को ज़मानत देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले को उच्चतम न्यायालय ने किया खारिज


बाकी खबरें

  • Bhagat Singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    शहीद भगत सिंह के इतिहास पर एस. इरफ़ान हबीब
    27 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन ने बात की है इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब से भगत सिंह के इतिहास पर।
  • Raghav Chadha
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..
    27 Mar 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर एकबार फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • jaunpur violence against dalits
    विजय विनीत
    उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप
    27 Mar 2022
    आरोप है कि बदलापुर थाने में औरतों और बच्चियों को पीटने से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पहले उनके कपड़े उतरवाए गए और फिर बेरहमी से पीटा गया। औरतों और लड़कियों ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि वे…
  • सोनिया यादव
    अपने ही देश में नस्लभेद अपनों को पराया बना देता है!
    27 Mar 2022
    भारत का संविधान सभी को धर्म, जाति, भाषा, वेशभूषा से परे बिना किसी भेदभाव के एक समान होने की बात करता है, लेकिन नस्लीय भेद इस अनेकता में एकता की भावना को कलंकित करता है।
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License