NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन: 14 नवंबर को पूरनपुर में लखीमपुर न्याय महापंचायत
एसकेएम ने दावा किया है कि लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में घायलों को वायदा किए गए मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है। 4 अक्टूबर 2021 को यूपी सरकार ने प्रत्येक घायल किसान को दस लाख रुपये के मुआवजे को देने पर सहमति जताई थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 Nov 2021
Mahapanchayat
फ़ोटो साभार: आजतक

किसान आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर अपने एक साल पूरे करने की ओर बढ़ रहा है। किसान आंदोलन अपने 352वें दिन में प्रवेश कर गया है। अब वो एक साथ कई मोर्चो पर लड़ रहा है। एक तरफ जहाँ उसका शुरुआती संघर्ष केंद्र सरकार के तीन विवादित कानूनों की वापसी को लेकर जारी है। वहीं इस आंदोलन के दौरान बीजेपी शासित राज्यों में आंदोलन के दौरान किसानों पर हुई क्रूरता के खिलाफ भी जारी है। किसान अपने आंदोलन के एक वर्ष पूरे होने पर अपने आंदोलन को पुनः एकजुट और तेज़ करने की तैयारी कर रहे हैं। 

यूपी सरकार की कानूनी टीम द्वारा और समय मांगे जाने के बाद लखीमपुर खीरी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई कल 12 नवंबर को स्थगित कर दी गई। अगली सुनवाई 15 नवंबर को निर्धारित की गई है। इस बीच, एसकेएम नेता तजिंदर विर्क, जो इस हत्याकांड में आशीष मिश्रा की गाड़ी से कुचले जाने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए थे, और इस मामले के मुख्य गवाहों में से एक हैं उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि एसआईटी ने गवाही के लिए बुलाया था। हालांकि, 225 किमी की यात्रा करने के बाद, उन्हें पूरे दिन बैठने के लिए कहा गया, और कोई बयान दर्ज नहीं किया गया। उन्हें सुरक्षा से भी वंचित कर दिया गया है, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाई थी। 

इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि सरकार जांच को खींचने और मामले में न्याय से मुकरने की कोशिश कर रही है, जो अस्वीकार्य है। एसकेएम अपने एक प्रमुख नेता और लखीमपुर खीरी किसानों के विरोध में शामिल प्रमुख व्यक्ति के प्रति उत्तर प्रदेश सरकार और एसआईटी के इस व्यवहार की निंदा करता है।

एसकेएम ने दावा किया है कि लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में घायलों को वायदा किए गए मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है। 4 अक्टूबर 2021 को यूपी सरकार ने प्रत्येक घायल किसान को दस लाख रुपये के मुआवजे को देने पर सहमति जताई थी। एसकेएम की मांग है कि बिना किसी और देरी के तुरंत मुआवजे का भुगतान किया जाए।

14 नवंबर को लखीमपुर न्याय महापंचायत

इन्ही सबको लेकर 14 नवंबर को पूरनपुर में लखीमपुर न्याय महापंचायत का आयोजन किया जायेगा। महापंचायत में शामिल होने वाले एसकेएम नेताओं में तजिंदर सिंह विर्क भी होंगे। इस महापंचायत के लिए अभी लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और आसपास के अन्य इलाकों में किसानों की लामबंदी चल रही है। किसान आंदोलन की प्रमुख मांगों के अलावा यह महापंचायत अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी पर केंद्रित होगी।

हांसी एसपी कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने का छठा दिन 

नारनौंद में हांसी एसपी कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना अपने छठे दिन में प्रवेश कर गया है, लेकिन प्रशासन किसानों की मांगों को मानने को तैयार नहीं है। हांसी में एसकेएम की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। आगे की कार्रवाई तय करने के लिए 16 नवंबर को जींद में किसान संगठनों की एक राज्यव्यापी सम्मेलन बुलाई गई है। जींद सम्मेलन 26 नवंबर को इस ऐतिहासिक किसान आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर होने वाले विरोध प्रदर्शन के लिए भी किसानों को लामबंद करेगा।

पंजाब सरकार ने मोदी सरकार को एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है कि किसान-विरोधी कानूनों को निरस्त करना वास्तव में कैसे संभव है

10 नवंबर 2021 को, श्री चरणजीत चन्नी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने राज्य विधानसभा में दो विधेयक पेश किए- राज्य एपीएमसी अधिनियम 1961 में संशोधन करने के लिए बिल नंबर 35 और पंजाब अनुबंध खेती अधिनियम 2013 को निरस्त करने के लिए बिल नंबर 36, राज्य सरकार ने विधेयक संख्या 35 के माध्यम से सार्वजनिक निजी भागीदारी के अलावा, राज्य में निजी बाजार यार्डों को बंद करने का प्रयास किया है। अपने उद्देश्यों और कारणों के बयान में सरकार ने कहा कि कृषि बाजारों में किसानों के हितों की रक्षा करना आवश्यक है, और पंजाब कृषि उपज बाजार अधिनियम 1961 में वर्षों से लाए गए कुछ संशोधनों के माध्यम से कमजोरियों और विकृतियों को खत्म करना आवश्यक है। सरकार ने पंजाब अनुबंध खेती अधिनियम 2013 को निरस्त करने के लिए एक विधेयक भी पेश किया, जो कृषि/किसानों की उपज के कॉर्पोरेट/निजी क्षेत्र के खरीदारों के पक्ष में और किसानों के हित के खिलाफ है। निरसन विधेयक 2021 के उद्देश्यों और कारणों के बयान में कहा गया है कि यह आशंका है कि इस अधिनियम के लागू होने से किसानों का पूर्ण शोषण होगा क्योंकि चूक के मामले में कारावास और भारी जुर्माना जैसे सख्त प्रावधान हैं"। 

राज्य सरकार ने इन दो विधेयकों द्वारा, सरकार के हाथों में रखी नियामक शक्तियों द्वारा किसानों के हितों की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अनुबंध खेती अधिनियम 2013 और इसके निरसन के मामले में,पंजाब सरकार ने कहा कि "जब तक किसानों के डर को खत्म नहीं किया जाता, तब तक इस अधिनियम को अपने वर्तमान स्वरूप में चालू रखना व्यर्थ है और इसलिए, अधिनियम को निरस्त करना उचित होगा, जिससे मोदी सरकार को 3 केंद्रीय कानूनों को भी निरस्त करने की आवश्यकता के बारे में एक स्पष्ट संदेश भेजा जा सके।

ऐतिहासिक किसान आंदोलन अपने पहले वर्षगांठ के नजदीक 

इस बीच 26 नवंबर को अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन की तैयारियां जोरों पर हैं। कई राज्यों में, किसानों को लामबंद करने और उस दिन विरोध कार्यक्रमों के सटीक विवरण पर निर्णय लेने के लिए तैयारी बैठकें की जा रही हैं।  22 नवंबर को होने वाली लखनऊ महापंचायत की तैयारियां भी जोरों पर हैं और किसान विरोधी भाजपा को कड़ा संदेश देते हुए इसमें किसानों की भारी जमावड़ा देखने को मिलने कि उम्मीद है।

किसान आंदोलनों के मोर्चा स्थल लाखों विरोध कर रहे नागरिकों द्वारा आंदोलन में लाए गए मूल्यों और भावना को दर्शाते हैं। इन स्थलों में हजारों किसानों और उनके समर्थकों के लिए मजबूत भावनात्मक बंधन हैं और जुड़ाव है। जहां इस अभूतपूर्व आंदोलन की पहली वर्षगांठ नजदीक आ रही है, सिंघू मोर्चा पर एक शादी आयोजित हुई, जो एक बार फिर युवाओं के आंदोलन के प्रति लगाव और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, और मोर्चा स्थलों पर आने वाले लोगों को निश्चित रूप से याद होगा कि शादियों और बारातों को मोर्चों से गुजरते हुए, और नवविवाहितों को मोर्चा पर आते हुए देखा जाता रहा है, जैसे कि वे अपनी तीर्थ यात्रा पर हों। कांवड़ यात्रा के मौसम में भी, युवाओं ने अपना सम्मान व्यक्त करने और आंदोलन से जुड़ने के लिए मोर्चा स्थलों पर जाने का विकल्प चुना।

एसकेएम ने अपने बयाना में कहा- एक और भाजपा मंत्री, इस बार उत्तर प्रदेश राज्य मंत्रिमंडल से, को भाजपा द्वारा संचालित केंद्र सरकार को प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने और आंदोलन को हल करने के लिए कहते हुए सुना गया है। यह उल्लेखनीय है कि भाजपा और श्री नरेंद्र मोदी अपनी ही पार्टी की आवाजों को नजरअंदाज कर रहे हैं, यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि समस्या कहां है।

kisan andolan
Lakhimpur Kheri
Lakhimpur massacre
Mahapanchayat
Lakhimpur Nyay Mahapanchayat

Related Stories

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’

किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

किसान आंदोलन ने देश को संघर्ष ही नहीं, बल्कि सेवा का भाव भी सिखाया

किसान आंदोलन की जीत का जश्न कैसे मना रहे हैं प्रवासी भारतीय?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर
    30 Apr 2022
    मुज़फ़्फ़रपुर में सरकारी केंद्रों पर गेहूं ख़रीद शुरू हुए दस दिन होने को हैं लेकिन अब तक सिर्फ़ चार किसानों से ही उपज की ख़रीद हुई है। ऐसे में बिचौलिये किसानों की मजबूरी का फ़ायदा उठा रहे है।
  • श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: ग्राम सभाओं को अब साल में 6 बार करनी होंगी बैठकें, कार्यकर्ताओं ने की जागरूकता की मांग 
    30 Apr 2022
    प्रदेश के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 22 अप्रैल 2022 को विधानसभा में घोषणा की कि ग्रामसभाओं की बैठक गणतंत्र दिवस, श्रम दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती के अलावा, विश्व जल दिवस और स्थानीय शासन…
  • समीना खान
    लखनऊ: महंगाई और बेरोज़गारी से ईद का रंग फीका, बाज़ार में भीड़ लेकिन ख़रीदारी कम
    30 Apr 2022
    बेरोज़गारी से लोगों की आर्थिक स्थिति काफी कमज़ोर हुई है। ऐसे में ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि ईद के मौक़े से कम से कम वे अपने बच्चों को कम कीमत का ही सही नया कपड़ा दिला सकें और खाने पीने की चीज़ ख़रीद…
  • अजय कुमार
    पाम ऑयल पर प्रतिबंध की वजह से महंगाई का बवंडर आने वाला है
    30 Apr 2022
    पाम ऑयल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं। मार्च 2021 में ब्रांडेड पाम ऑयल की क़ीमत 14 हजार इंडोनेशियन रुपये प्रति लीटर पाम ऑयल से क़ीमतें बढ़कर मार्च 2022 में 22 हजार रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं।
  • रौनक छाबड़ा
    LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम
    30 Apr 2022
    कर्मचारियों के संगठन ने एलआईसी के मूल्य को कम करने पर भी चिंता ज़ाहिर की। उनके मुताबिक़ यह एलआईसी के पॉलिसी धारकों और देश के नागरिकों के भरोसे का गंभीर उल्लंघन है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License