NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
लखीमपुर खीरी: सरकार और किसानों के बीच बढ़ रहा है तनाव, आरोपियों की गिरफ़्तारी न होने से ज़्यादा गुस्सा
किसानों का कहना है की सरकार उनको धोखा दे रही है-घटना के तीसरे दिन भी मुख्य अभियुक्त गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी नहीं हुई है। इसके अलावा मृतको की “पोस्ट्मॉर्टम” में गोली के निशान न दिखने से भी किसानों में रोष है।

असद रिज़वी
06 Oct 2021
 लखीमपुर खीरी: सरकार और किसानों के बीच बढ़ रहा है तनाव, आरोपियों की गिरफ़्तारी न होने से ज़्यादा गुस्सा

लखीमपुर की घटना के बाद किसानों और योगी आदित्यनाथ सरकार के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार अभियुक्तों को गिरफ़्तार करने के बदले उनको सुरक्षा दे रही है।

राजधानी लखनऊ का पड़ोसी शहर लखीमपुर किसान आंदोलन का केंद्र बनता देख, प्रदेश सरकार के माथे पर भी पसीना नज़र आ रहा है। सरकार भले ही विपक्षी पार्टियों के नेताओं को लखीमपुर में प्रवेश नहीं करने दे रही है, लेकिन वहाँ बड़ी संख्या में किसान अभी भी डटे हुए हैं।

किसानों का कहना है की सरकार उनको धोखा दे रही है-घटना के तीसरे दिन भी मुख्य अभियुक्त गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी नहीं हुई है। इसके अलावा मृतको की “पोस्ट्मॉर्टम” में गोली के निशान न दिखने से भी किसानों में रोष है। किसानों का आरोप है कि गाड़ी से कुचलने के साथ गोली लगने से भी प्रदर्शनकारी किसनों की मौत हुई है।

“तिकुनियां” में गाड़ी से कुचल के मरने वालों में 19 साल के लवप्रीत सिंह की मौत की बाद उनके गाँव में कल दिन भर ग़म का महौल दिखाई दिया। बड़ी संख्या में किसान उनके गाँव “चौखड़ा फार्म” में उनके पार्थिव शरीर के साथ मौजूद रहे। यहाँ घटना स्थल पर मौजूद एक किसान से कहा कि केवल “तीन मिनट” में चार किसान मार दिये गये।

सिमरनजीत सिंह ने बताया कि कारें इतनी रफ़्तार में थी कि किसान कुछ समझ नहीं सके और गाड़ियों ने उनको रौंद दिया। यह घटना उस वक़्त पर हुई जब प्रदर्शन ख़त्म कर के किसान तिकोनिया से वापस लौटने की तैयारी कर रहे थे। सिमरनजीत ने आगे बताया कि गाड़ियाँ पीछे की तरफ़ से आई इस लिए किसान अपना बचाव भी नहीं कर सके।

उन्होंने सवाल करते हुए कहते हैं कि प्रदर्शनस्थल पर सिंगल रोड थी, और वहाँ काफ़ी संख्या में किसान जमा थे, वहाँ इतनी तेज़ रफ़्तार में गाड़ी क्यूँ चलाई गई? अगर उनको मारने का इरादा नहीं था। गाड़ियों पर किसानों का पत्थर चलाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर पत्थर चले तो उसका वीडियो भी होगा, वह क्यूँ नहीं दिखाते,किसानों पर आरोप लगने वाले?

उन्होंने बताया कि जब गाड़ियों से निकल कर 5-7 लोग भागे तो वह गोलियाँ भी चला रहे थे। मौक़े के मौजूद सिमरनजीत कहते हैं कि घटना के ज़िम्मेदार-(सूत्रधार) स्वयं गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा है, जिन्होंने 25 सितंबर को एक भाषण में किसानों को धमकी दी थी।

चौखड़ा फार्म पहुँचे अधिवक्ता भानु प्रताप सिंह ने योगी सरकार पर आशीष मिश्रा को सरकारी संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम लखीमपुर आ रहे लोगों को रोकना नहीं बल्कि आरोपी को गिरफ़्तार करना होना चाहिए हैं। प्रसिद्ध अधिवक्ता ने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर संदेह होना स्वाभाविक है क्यूँकि जब गोली चलने के “चश्मदीद” गवाह मौजूद है और रिपोर्ट में इसका ज़िक्र तक नहीं है।

भानु प्रताप ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि मंत्री के बेटे को बचाने के लिए घटना के सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर हालत ऐसे ही रहे तो घटना का सच कैसे सामने आयेगा। क़ानूनी पहलू पर रौशनी डालते हुए उन्होंने का कहा कि गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा पर भी 120-बी (अपराध की साज़िश) का मुक़दमा होना चाहिए है, क्यूँकि कुछ दिन पहले ही उन्होंने किसानों को अपने एक भाषण में धमकी दी थी। जिसका वीडियो मौजूद है।

उन्होंने आगे कहा की अगर भाजपा ईमानदारी से जाँच करवाना चाहती है कि तो सबसे पहले अजय मिश्रा को मंत्री पद से बर्खास्त करे। वरना वह पद पर रहते, जाँच को प्रभावित करेंगे और प्रशासन पर दबाव बनायेंगे।

किसान नेता सुखविंदर सिंह का कहना है कि सरकार किसानों को धोखा दे रही है। सरकार सारी “घटना” को “हादसा” बताने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को गोली से मारा गया और सरकार इसको हादसा बताना चाहती है जो किसान मंज़ूर नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह किसानों के आत्मसम्मान का मामला है, और इस लड़ाई में सारा देश उनके साथ है। सुखविंदर सिंह ने आशंका जताई कि अगर इस मामले में ठोस करवाई नहीं हुई तो,आगे भी ऐसी और घटनाओं का ख़तरा रहेगा।

लवप्रीत सिंह के घर आये समाजवादी पार्टी के नेता क्रांति सिंह कहते हैं कि एफ़आईआर दर्ज होने के बाद भी मंत्री का बेटे को अभी तक हिरासत में नहीं लिया गया है। क्रांति सिंह का आरोप है जिस किसान ने मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष को मौक़े पर पकड़ा था, उसके गोली मारी गई थी। जिसकी पुष्टि “एक्स-रे” में भी हुई थी। लेकिन यह बात पोस्ट्मॉर्टम में नहीं होना सरकार की नीयत पर सवालिया निशान लगता है। 

उधर इस घटना में मारे गये पत्रकार रमन कश्यप के पिता ने कहा की उनका बेटा कवरेज करने गया था। जहाँ उसकी गाड़ी से रौंद कर मौत हुई। उन्होंने कहा कि उसके बेटे के हत्यारे वही हैं जिनकी वह गाड़ियाँ थी, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को रौंदा था। इसके अलावा मृतक पत्रकार के पिता ने मीडिया से यह भी कहा कि उनके घायल बेटे को समय से उपचार नहीं मिला। उनका कहना है अगर समय रहते उपचार दिया जाता तो शायद रमन कश्यप को बचाया जा सकता था।

ज़िला लखीमपुर खीरी में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है। लखीमपुर की सीमा में अंदर किसी को आने आने की अनुमति नहीं है। ज़िले में धारा 144 लगा दी गई है। कल थोड़ी देर के लिए लखीमपुर में इंटरनेट सेवाओं को बहाल किया गया था। लेकिन आज स्थिति को संवेदनशीलता को देखते हुए लखीमपुर के साथ सीतापुर की भी इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। 

उधर कांग्रेस ने एक बयान जारी करते हुए कहा है सीतापुर और लखीमपुर जाते समय उनके नेताओं सचिन पायलट, आचार्य प्रमोद कृष्णम को पुलिस ने गाजियाबाद में 

पुलिस में रोक लिया है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेसी नेता अंशु अवस्थी कहा  ने कहा है कि आखिर क्या छुपाना चाहती भाजपा सरकार? हालांकि ताज़ा ख़बर यह भी है कि प्रियंका और राहुल समेत कुछ नेताओं को लखीमपुर जाने की इजाज़त दी गई है।

Lakhimpur Kher
Lakhimpur Kheri Update
farmers protest
UP Government
BJP

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License